CBSE कक्षा 11 डिज़ाइन थिंकिंग और नवाचार
अध्याय: 7
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. प्रकाशन और संचार डिज़ाइन
संचार डिज़ाइन
- डिज़ाइन थिंकिंग: लोगों से शुरू करके समस्या हल करना – डिज़ाइन थिंकिंग समस्या हल करने का तरीका है जो पहले उन लोगों को समझता है जिनकी वह समस्या है। इसके पाँच चरण हैं: सहानुभूति (उपयोगकर्ता को देखना-सुनना, सहानुभूति मानचित्र से), परिभाषा ("हम कैसे…?" सवाल के रूप में साफ़ समस्या), विचार (बहुत सारे विचार, प्रकृति से भी: जैव-अनुकरण), प्रोटोटाइप (जल्दी, सस्ते मॉडल) और परीक्षण (उपयोगकर्ता से आज़माना और सुधारना)। यह पुनरावृत्त और उपयोगकर्ता-केंद्रित है, और दो बार फैलता-सिमटता है, जैसे दोहरा हीरा।
3. चलचित्र
चलचित्र
- एनिमेशन: स्थिर तस्वीरें चलने कैसे लगती हैं – एनिमेशन बहुत-सी स्थिर तस्वीरों (फ़्रेम) की कतार है जो तेज़ी से एक के बाद एक दिखाई जाती हैं। आँख और दिमाग़ उन्हें जोड़ देते हैं, इसलिए हमें गति दिखती है। फ़्रेम दर (fps) बताती है कि एक सेकंड में कितने फ़्रेम दिखे: ज़्यादा fps = ज़्यादा चिकनी गति। की-फ़्रेम मुख्य मुद्राएँ रखते हैं; बीच के फ़्रेम ट्वीनिंग से भरते हैं। मुख्य प्रकार: हाथ से बना (फ़्रेम-दर-फ़्रेम), स्टॉप मोशन (कागज़, मिट्टी), 2D और 3D कंप्यूटर एनिमेशन। रास्टर पिक्सेल रखता है; वेक्टर आकृतियों को गणित से रखता है, इसलिए बड़ा करने पर धुँधला नहीं होता।
4. सूचना डिज़ाइन
सूचना डिज़ाइन
- आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण: तालिका, दंड और वृत्त आरेख, आयतचित्र, बहुभुज, तोरण और रेखाचित्र – आँकड़े शब्दों में (शाब्दिक), तालिका में (सारणीबद्ध) या चित्रों में (आरेख और ग्राफ़) दिखाए जाते हैं। तालिका में शीर्षक, स्तंभ शीर्षक, पंक्ति शीर्षक, मुख्य भाग और स्रोत होते हैं। दंड आरेख मानों की तुलना करते हैं; वृत्त आरेख पूरे के हिस्से दिखाता है, कोण = मान ÷ कुल × 360°। बारंबारता वितरण के लिए आयतचित्र, बारंबारता बहुभुज, वक्र और तोरण बनाते हैं। समय के साथ बदलते आँकड़े अंकगणितीय रेखाचित्र से दिखाते हैं।
5. उत्पाद डिज़ाइन
उत्पाद डिज़ाइन
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
6. इंटरफ़ेस डिज़ाइन
इंटरफ़ेस डिज़ाइन
- UI और UX डिज़ाइन: स्क्रीन को आसान और सुखद बनाना – इंटरफ़ेस डिज़ाइन यानी फ़ोन, कंप्यूटर, ATM और मशीनों की स्क्रीन की योजना बनाना। UI (यूज़र इंटरफ़ेस) वह है जो दिखता और छुआ जाता है: बटन, आइकन, शब्द, रंग, लेआउट। UX (यूज़र एक्सपीरियंस) यह कि पूरा काम करते हुए कैसा लगता है: जल्दी या धीमा, साफ़ या उलझन भरा। अच्छे इंटरफ़ेस में ज़रूरी चीज़ पहले दिखती है (क्रम), बटन इतने बड़े कि उँगली से दबें (लगभग 9 mm या 48 px), रंगों में ऊँचा कंट्रास्ट, हर जगह एक-सा व्यवहार, हर क्रिया पर जवाब (feedback) और कम कदम। डिज़ाइनर यूज़र को समझते हैं, वायरफ़्रेम बनाते हैं, क्लिक होने वाला प्रोटोटाइप बनाते हैं और असली लोगों से परखकर सुधारते हैं।
7. खेल और खिलौना डिज़ाइन
खेल और खिलौना डिज़ाइन
- खेल और खिलौना डिज़ाइन: खेल की योजना, परख और सुधार – खेल और खिलौना डिज़ाइन यानी खेलने की चीज़ों की ऐसी योजना कि खेल मज़ेदार, निष्पक्ष और सुरक्षित हो। खेल कई तरह का होता है: शारीरिक, बनाने वाला, नाटक वाला, पहेली वाला और मिलकर खेलने वाला। खेल (game) में खिलाड़ी, लक्ष्य, नियम, चुनौती और जीत या अंत होता है; खिलौने (toy) में तय नियम नहीं, खुला खेल होता है। अच्छा डिज़ाइन चुनौती और कौशल में संतुलन रखता है, ताकि खेल न उबाऊ हो न झुंझलाहट भरा, और चुनाव व जवाब (feedback) देता है। डिज़ाइनर कागज़, गत्ते या मिट्टी से जल्दी सस्ता प्रोटोटाइप बनाते हैं, असली खिलाड़ियों से प्लेटेस्ट करवाते हैं, देखते हैं, एक चीज़ बदलते हैं और फिर परखते हैं। खिलौने उम्र के हिसाब से और सुरक्षित हों: छोटे बच्चों के लिए छोटे पुर्ज़े नहीं, चिकने किनारे, सुरक्षित सामग्री।