डिज़ाइन इतिहास और दूसरों का काम क्यों पढ़ें?
डिज़ाइनर अपने से पहले वालों से सीखते हैं। पुराने और आज के डिज़ाइनरों को देखने से तुम:
- उत्पादों का विश्लेषण करते हो: किसने, कब, क्यों, किससे, किसके लिए बनाया?
- नकल किए बिना प्रेरणा लेते हो: एक सिद्धांत (सरल रूप, सामग्री, जोड़ने का तरीका) लेकर नए ढंग से इस्तेमाल करो।
- बदलाव समझते हो: नई सामग्री, नई मशीनें और समाज के नए विचार डिज़ाइन बदलते हैं।
किसी भी डिज़ाइन के विश्लेषण का आसान तरीका: ACCESS FM (सौंदर्य, लागत, ग्राहक, पर्यावरण, आकार, सुरक्षा, कार्य, सामग्री)।
आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स और आर नूवो (लगभग 1860–1910)
आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स
औद्योगिक क्रांति से कारखानों में सामान सस्ता तो बना, पर अक्सर घटिया। ब्रिटेन के विलियम मॉरिस और साथियों ने सच्ची, अच्छी बनी, हाथ की वस्तुएँ चाहीं। विशेषताएँ: प्राकृतिक सामग्री (ओक लकड़ी, ऊन), दिखते जोड़, सरल आकार, पौधों-पक्षियों के पैटर्न। कमी: हाथ का सामान महँगा था, इसलिए ज़्यादातर अमीर ही खरीद पाते थे।
आर नूवो ("नई कला")
तनों, पत्तियों और फूलों से ली गई बहती, लहराती रेखाएँ। फ़र्नीचर, पोस्टर, गहने, काँच और इमारतों में: चार्ल्स रेनी मैकिंटॉश (ग्लासगो, ऊँची पीठ वाली कुर्सियाँ), हेक्टर गिमार (पेरिस मेट्रो के द्वार), अंतोनी गाउदी (बार्सिलोना)। नए लोहे और काँच से सामग्री को प्राकृतिक आकारों में मोड़ना संभव हुआ।
बाउहाउस, आधुनिकतावाद और मध्य-शताब्दी डिज़ाइन (1919–1965)
बाउहाउस और आधुनिकतावाद
जर्मनी का बाउहाउस स्कूल (1919–1933) कला, शिल्प और उद्योग को जोड़ता था। विचार: "रूप कार्य के पीछे चलता है" (form follows function, उपयोग आकार तय करता है), फ़ालतू सजावट नहीं, ज्यामितीय आकार, प्राथमिक रंग, और बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए डिज़ाइन। मार्सेल ब्रॉयर ने साइकिल जैसी स्टील नली मोड़कर हल्की कुर्सियाँ बनाईं। ले कॉर्बूज़िए (जिन्होंने चंडीगढ़ भी डिज़ाइन किया) और मीस वान डेर रोहे ने साफ़-सुथरी आधुनिक इमारतें और फ़र्नीचर बनाए।
आर्ट डेको (1920–1930 का दशक)
साथ-साथ चली एक चमकदार शैली: मोटी ज्यामिति, ज़िगज़ैग, सूर्य-किरण आकार और चमकती सामग्री (क्रोम, बेकेलाइट प्लास्टिक)। मुंबई के मरीन ड्राइव पर दुनिया की सबसे बड़ी आर्ट डेको इमारतों की कतारों में से एक है।
मध्य-शताब्दी आधुनिक (1945–1965)
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद युद्ध-शोध से आई नई सामग्री (ढली प्लाईवुड, फ़ाइबरग्लास, प्लास्टिक) से हल्का, सस्ता, आरामदायक फ़र्नीचर बहुत घरों तक पहुँचा। चार्ल्स और रे ईम्स (अमेरिका), आर्ने जैकबसन (डेनमार्क) और डीटर राम्स (जर्मनी, "कम पर बेहतर", ब्राउन के उत्पाद) मुख्य नाम हैं।
उत्तर-आधुनिकता, मेम्फ़िस और आज का डिज़ाइन
उत्तर-आधुनिकता और मेम्फ़िस (1980 का दशक)
कुछ डिज़ाइनरों को लगा कि आधुनिकतावाद उबाऊ हो गया है। मिलान का मेम्फ़िस समूह, एत्तोरे सोत्सास के नेतृत्व में (1981), तेज़ रंग, प्लास्टिक लैमिनेट, टकराते पैटर्न और खेल जैसे आकार लाया। उत्तर-आधुनिक डिज़ाइन कहता है कि वस्तुएँ मज़ेदार हो सकती हैं और अर्थ रख सकती हैं, सिर्फ़ काम नहीं। फ़िलिप स्टार्क ने जूसर जैसी रोज़ की चीज़ों को चर्चा का विषय बना दिया।
आज का डिज़ाइन
- टिकाऊपन: पुनर्चक्रित और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री, मरम्मत योग्य उत्पाद, कम कचरा (चक्रीय अर्थव्यवस्था)।
- डिजिटल डिज़ाइन और निर्माण: CAD, 3D प्रिंटिंग, लेज़र कटिंग, और जनरेटिव डिज़ाइन जहाँ कंप्यूटर कई रूप सुझाता है।
- समावेशी डिज़ाइन: हर उम्र और क्षमता के लोगों के लिए काम करने वाले उत्पाद।
डिज़ाइन क्यों बदलते हैं
तीन बड़े कारण: तकनीक और सामग्री (स्टील नली, प्लास्टिक, 3D प्रिंटिंग), समाज और संस्कृति (ज़्यादा लोगों को सस्ता सामान चाहिए, पर्यावरण जैसे नए मूल्य), और पिछली शैली की प्रतिक्रिया (उत्तर-आधुनिकता का आधुनिकतावाद पर जवाब)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स (≈1860–1910) = हाथ का काम, प्राकृतिक सामग्री, सस्ते कारखाना सामान का विरोध
- आर नूवो (≈1890–1910) = प्रकृति की बहती रेखाएँ
- बाउहाउस / आधुनिकतावाद (1919 →) = रूप कार्य के पीछे, बड़े पैमाने पर उत्पादन, फ़ालतू सजावट नहीं
- आर्ट डेको (1920–30 का दशक) = मोटी ज्यामिति, चमक, क्रोम
- मध्य-शताब्दी आधुनिक (≈1945–1965) = ढली प्लाईवुड और प्लास्टिक, सस्ता
- उत्तर-आधुनिकता / मेम्फ़िस (1980 का दशक) = रंग, मज़ा, नियम तोड़ना
- डिज़ाइन बदलने के कारण: तकनीक और सामग्री + समाज और संस्कृति + पिछली शैली की प्रतिक्रिया
हल किए गए उदाहरण
1. एक कुर्सी में ठोस ओक का ढाँचा, दिखते जोड़ और पत्तियों की नक्काशी है। यह किस आंदोलन की ओर इशारा करती है और क्यों?
आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स: प्राकृतिक लकड़ी, ईमानदार दिखता निर्माण और पौधों के पैटर्न, हाथ से बनी।
2. एक लैंप स्टील नली और सादे सफ़ेद काँच के गोले से बना है, कोई सजावट नहीं। यह कौन-सा डिज़ाइन विचार दिखाता है?
आधुनिकतावाद / बाउहाउस, "रूप कार्य के पीछे चलता है": हर हिस्से का काम है, फ़ालतू सजावट नहीं, और यह बड़े पैमाने पर बन सकता है।
3. 1940 के दशक में ईम्स हल्की ढली प्लाईवुड कुर्सियाँ बना सके, पर 1860 में मॉरिस नहीं। क्यों?
नई तकनीक: पतली प्लाईवुड परतों को गर्मी और दबाव में मोड़ने-चिपकाने के तरीके युद्ध-शोध से आए। सामग्री और मशीनें तय करती हैं कि डिज़ाइनर क्या बना सकते हैं।
4. एक किताबों की अलमारी में चटक टकराते रंग, टेढ़ी अलमारियाँ हैं और वह खिलौने जैसी दिखती है। आंदोलन और मुख्य विचार बताओ।
मेम्फ़िस / उत्तर-आधुनिकता (1980 का दशक): आधुनिकतावादी नियम तोड़ना, डिज़ाइन मज़ेदार और अर्थपूर्ण हो सकता है, सिर्फ़ काम का नहीं।
आम गलतियाँ
- आर नूवो (घुमावदार, प्रकृति से, ~1900) और आर्ट डेको (ज्यामितीय, चमकदार, ~1925) को मिला देना।
- यह सोचना कि 'रूप कार्य के पीछे' का मतलब बदसूरत है। इसका मतलब है आकार उपयोग से आता है; कई आधुनिक डिज़ाइन बहुत सुंदर हैं।
- डिज़ाइनर के सिद्धांत को अपनाने के बजाय उसके उत्पाद की नकल करना।
- सिर्फ़ तारीख़ें याद करना। परीक्षक कारण चाहते हैं: क्या बदला (सामग्री, तकनीक, समाज) और क्यों।