France Première STD2A (design and applied arts) — 1re specialties
अध्याय: 8
1. Design and crafts — tools and methods
Resources and information · Analysis, investigation, synthesis · Communication and self-assessment
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
2. Design and crafts — creative process
Setting the context · Creating and designing · Giving form and presenting
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
3. Design and crafts — visual arts
Tools · Ways of representing · Ways of researching · Presenting work
- कला और चित्रों में दृश्य निरूपण – निरूपण का मतलब है ऐसा चित्र बनाना जो किसी चीज़ का प्रतिनिधित्व करे। चित्र में सिर्फ़ दो आयाम होते हैं, इसलिए कलाकार गहराई के संकेतों (आकार, ऊँचाई, ओवरलैप, प्रकाश, परिप्रेक्ष्य) से स्थान का एहसास कराते हैं। क्रम से रखे फ़्रेम गति और समय दिखाते हैं। कलाकृति को असलियत की नक़ल होना ज़रूरी नहीं: वह यथार्थवादी, सरल या अमूर्त हो सकती है। एक ही चित्र दस्तावेज़, कलाकृति या विज्ञापन का काम कर सकता है, और उसका अर्थ फ़्रेम, शब्दों और दिखाई जाने की जगह पर निर्भर है। कृति बनाने में शोध, औज़ार, निर्माण और साझा करना शामिल हैं।
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
4. Design and crafts — arts, techniques and civilisations
Representations and forms · Timeline landmarks · Means of production · Contemporary landmarks
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- डिज़ाइन इतिहास: आंदोलनों और डिज़ाइनरों ने रोज़ की चीज़ें कैसे बदलीं – डिज़ाइन समय के साथ बदलते हैं, क्योंकि नई सामग्री, नई तकनीक और समाज के बारे में नए विचार आते हैं। आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स ने सस्ते कारखाना सामान को नकारा और हाथ के काम को महत्त्व दिया। आर नूवो ने प्रकृति की बहती रेखाएँ अपनाईं। बाउहाउस और आधुनिकतावाद ने कहा, रूप कार्य के पीछे चलता है, और बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया। मध्य-शताब्दी डिज़ाइनरों ने ढली प्लाईवुड और प्लास्टिक से सस्ता फ़र्नीचर बनाया। उत्तर-आधुनिकता और मेम्फ़िस ने रंग और मज़े से नियम तोड़े। आज टिकाऊपन और डिजिटल निर्माण पर ध्यान है। दूसरों का काम पढ़ने से हम विश्लेषण करना, प्रेरणा लेना और बेहतर डिज़ाइन करना सीखते हैं।
5. Design and crafts — technologies
Materials · Making and processing · Innovation and foresight
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- विनिर्माण प्रौद्योगिकी: कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक – विनिर्माण कच्चे माल को काम की चीज़ों में बदलता है। प्राथमिक उद्योग मानक सामग्री बनाता है; द्वितीयक उद्योग तैयार माल। सामग्री को आकार देकर, काटकर, जोड़कर और गुण बदलकर रूपांतरित करते हैं। अच्छे भाग के लिए सही सामग्री, साफ़ तकनीकी ड्रॉइंग और प्रक्रिया योजना, टॉलरेंस के साथ सावधान माप, और नियंत्रण प्रणाली से चलने वाली मशीनें चाहिए, सब कुछ सुरक्षित ढंग से।
6. Digital tools and languages
Digital literacy and culture · Programming logic and languages · Digital publishing · 3D modelling · Interactivity · Methods: tools, formats and teamwork
- डिजिटल साक्षरता: डिजिटल औज़ारों का समझदारी से उपयोग – डिजिटल साक्षरता (digital literacy) का मतलब है कंप्यूटर और इंटरनेट का अच्छे से उपयोग करना। हर काम के लिए सही सॉफ़्टवेयर चुनें। काम ऐसे फ़ाइल फ़ॉर्मेट में सेव करें जो दूसरे भी खोल सकें। टीम के साथ फ़ाइल साझा करें और वर्ज़न रखें ताकि कुछ खोए नहीं। समझें कि सर्च इंजन पेज कैसे ढूँढता है, और जाँचें कि स्रोत भरोसेमंद है या नहीं। किसी का काम दोबारा उपयोग करने से पहले लाइसेंस पढ़ें और श्रेय दें।
- क्रिएटिव कोडिंग: प्रोग्राम से कला बनाना – क्रिएटिव कोडिंग का मतलब है प्रोग्राम लिखकर चित्र, एनिमेशन, ध्वनि या इंटरैक्टिव कला बनाना। आप कैनवस पर x और y निर्देशांक से बनाते हो, जहाँ (0, 0) ऊपर-बाएँ कोना है और y नीचे की ओर बढ़ता है। रंग तीन संख्याएँ हैं (लाल, हरा, नीला)। लूप आकृतियों को दोहराकर पैटर्न बनाते हैं, रैंडम संख्याएँ हर बार नया चित्र देती हैं (जनरेटिव आर्ट), रिकर्शन फ्रैक्टल बनाता है, और माउस क्लिक या सेंसर जैसे इवेंट दर्शक को कला बदलने देते हैं। p5.js, Processing, Scratch और Python turtle इसके लिए बने हैं।
- वेब डेवलपमेंट: HTML, CSS और JavaScript से वेब पेज कैसे बनता है – वेब पेज कुछ टेक्स्ट फ़ाइलों से बनता है। ब्राउज़र (क्लाइंट) URL और HTTP से सर्वर से ये फ़ाइलें माँगता है। HTML पेज का ढाँचा बनाता है: हेडिंग, पैराग्राफ़, लिंक, चित्र, सूची, टेबल और फ़ॉर्म। CSS सजावट देता है: रंग, फ़ॉन्ट, दूरी और लेआउट। JavaScript व्यवहार देता है: क्लिक पर पेज बदलता है। रिस्पॉन्सिव डिज़ाइन से एक ही पेज फ़ोन और कंप्यूटर दोनों पर ठीक दिखता है।
- 3D मॉडलिंग: घन से छपी हुई वस्तु तक – 3D मॉडल कंप्यूटर में रखी एक आकृति है: बिंदु (शीर्ष, vertices) किनारों (edges) से जुड़कर सपाट फलक (faces) बनाते हैं – इसे मेश कहते हैं। हम सरल आकृतियों (primitives) से शुरू करते हैं, उन्हें खिसकाते, घुमाते और बड़ा-छोटा करते हैं, और फलक बाहर खींचते (extrude) हैं। फिर पदार्थ और रोशनी देकर कंप्यूटर तस्वीर रेंडर करता है। वही मॉडल पतली परतों में काटकर 3D प्रिंटर से बनाया जा सकता है।
- फ़िज़िकल कंप्यूटिंग: कोड से महसूस करना और हिलाना – फ़िज़िकल कंप्यूटिंग कोड को असली दुनिया से जोड़ती है। सेंसर कुछ मापते हैं (रोशनी, तापमान, दूरी, बटन) और उसे संख्या बनाते हैं। माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि उस संख्या का क्या करना है। एक्चुएटर (LED, बज़र, मोटर, स्क्रीन) दुनिया में कुछ करते हैं। यह इनपुट–प्रोसेस–आउटपुट चक्र लूप में बार-बार चलता है।
7. Physics-chemistry — knowing and transforming materials
Materials in general · Organic materials · Metals and their transformations · Mineral materials · Innovative materials
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
- उपचयन और अपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता – ऑक्सीजन पाना (या हाइड्रोजन खोना) उपचयन है; ऑक्सीजन खोना (या हाइड्रोजन पाना) अपचयन है। दोनों साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। ऑक्सीजन देने वाला उपचायक, लेने वाला अपचायक। रोज़मर्रा में उपचयन से संक्षारण (जैसे लोहे पर जंग) और विकृतगंधिता (तेल-घी वाले खाने का बासी होना) होते हैं।
- स्मार्ट और आधुनिक पदार्थ – स्मार्ट पदार्थ वह है जो आसपास कुछ बदलने पर (जैसे ताप, प्रकाश, बल या वोल्टेज) अपना कोई गुण बदल लेता है, जैसे आकार, रंग, पारदर्शिता या बिजली देना। यह बदलाव उत्क्रमणीय होता है, यानी उद्दीपक हटाने पर पदार्थ वापस पहले जैसा हो जाता है। मुख्य उदाहरण: निटिनॉल जैसी आकार-स्मृति मिश्रधातु गर्म होने पर याद रखा आकार ले लेती है; थर्मोक्रोमिक रंग ताप से बदलते हैं; फ़ोटोक्रोमिक पदार्थ UV में काले होते हैं; पीज़ोइलेक्ट्रिक क्रिस्टल दबाने पर वोल्टेज देते हैं। आधुनिक पदार्थ, जो ज़रूरी नहीं कि स्मार्ट हों, उनमें कार्बन-फ़ाइबर और काँच-फ़ाइबर कंपोज़िट, ग्राफ़ीन जैसे नैनो पदार्थ, तकनीकी और स्मार्ट वस्त्र, द्रव क्रिस्टल और पौधों से बने प्लास्टिक आते हैं। इंजीनियर गुण, कीमत और पर्यावरण पर असर देखकर पदार्थ चुनते हैं।
8. Physics-chemistry — seeing and showing objects
Light in general · Using light sources · Making and analysing colours · Making photographic images · Seeing the invisible
- विद्युत चुंबकीय तरंगें – बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र धारा जैसा काम करता है। इसे विस्थापन धारा कहते हैं और यह चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। बदलता चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र बनाता है। दोनों मिलकर विद्युत चुंबकीय तरंग बनकर c = 3 × 10⁸ m/s से चलते हैं, खाली जगह में भी। E और B एक-दूसरे से और चलने की दिशा से 90° पर होते हैं, इसलिए ये तरंगें अनुप्रस्थ हैं। तरंगदैर्घ्य के क्रम में: रेडियो, सूक्ष्म तरंग, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, एक्स-किरणें, गामा किरणें।
- प्रकाश के स्रोत: सूर्य, बल्ब, प्रकाशीय तंतु और लेज़र – प्रकाश का स्रोत अपना प्रकाश खुद बनाता है। प्राकृतिक स्रोत हैं सूर्य, तारे, बिजली और जुगनू। कृत्रिम स्रोत हैं बल्ब: तंतु बल्ब ज़्यादातर ऊर्जा ऊष्मा बनाकर गँवाता है, फ्लोरोसेंट बेहतर है, LED सबसे अच्छा। रंग-प्रदर्शन सूचकांक (CRI, 0 से 100) बताता है कि लैंप रंग कितने सच्चे दिखाता है। प्रकाशीय तंतु पूर्ण आंतरिक परावर्तन से प्रकाश को ले जाता है। लेज़र पतली, सीधी, एक रंग की किरण देता है।
- प्रकाश और रंग: रंग मिलाना, देखना और प्रकाश की ऊर्जा – सफ़ेद प्रकाश कई रंगों का मेल है (लाल से बैंगनी)। प्रकाश जुड़ता है: लाल + हरा + नीला = सफ़ेद (योगात्मक मिश्रण, स्क्रीन में)। रंग घटाते हैं: सियान + मैजेंटा + पीला = लगभग काला (व्यवकलनात्मक मिश्रण)। वस्तु का रंग वही है जो वह लौटाती है; बाक़ी सोख लेती है। आँख में तीन तरह की शंकु कोशिकाएँ हैं। प्रकाश का रंग उसकी ऊर्जा बताता है: E = hf, नीला फ़ोटॉन लाल से ज़्यादा ऊर्जा ले जाता है।
- गोलीय लेंस: प्रतिबिंब, लेंस सूत्र और क्षमता – उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और समांतर प्रकाश को अपने फोकस पर मिलाता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और प्रकाश को ऐसे फैलाता है मानो फोकस से आ रहा हो। दो आसान किरणों (एक अक्ष के समांतर, एक प्रकाशिक केंद्र से होकर) से किसी भी स्थिति का प्रतिबिंब मिल जाता है। वस्तु F₁ से परे हो तो उत्तल लेंस वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है और F₁ के अंदर हो तो आभासी, सीधा, बड़ा; अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u और क्षमता P = 1/f (मीटर में, मात्रक डायोप्टर) से आंकिक प्रश्न हल होते हैं।