एकलक और बहुलक
एकलक (मोनोमर): छोटा अणु जो अपने जैसे दूसरों से जुड़ सकता है। बहुलक (पॉलीमर): हज़ारों एकलक इकाइयों के सहसंयोजी बंधों से जुड़ने पर बना बहुत बड़ा अणु (वृहदणु)।
जो हिस्सा दोहराता है वह पुनरावर्ती इकाई है। इसे कोष्ठक में n के साथ लिखते हैं: पॉलीएथीन के लिए –(CH₂–CH₂)ₙ–। n 1,000 से 1,00,000 या ज़्यादा हो सकता है।
नाम: एकलक के नाम से पहले "पॉली" लगाओ: एथीन → पॉलीएथीन, प्रोपीन → पॉलीप्रोपीन, क्लोरोएथीन → पॉलीक्लोरोएथीन = PVC, टेट्राफ़्लोरोएथीन → PTFE (नॉन-स्टिक परत)।
योगात्मक बहुलकीकरण
एकलक में C=C द्विबंध होना चाहिए (ऐल्कीन)। ताप, ऊँचे दाब और उत्प्रेरक से द्विबंध का एक बंध टूटता है। अब हर कार्बन के पास एक खाली बंध है, जो अगले एकलक से जुड़ता है। यह हज़ारों बार दोहराता है।
n CH₂=CH₂ → –(CH₂–CH₂)ₙ–
- उत्पाद सिर्फ़ एक: बहुलक। कोई छोटा अणु नहीं निकलता।
- बहुलक का द्रव्यमान = n × एकलक का द्रव्यमान।
- पुनरावर्ती इकाई बनाना: एकलक लो, C=C को C–C करो, और दोनों तरफ़ बाहर निकलता बंध जोड़ो।
उदाहरण: पॉलीएथीन (थैलियाँ, बोतलें), पॉलीप्रोपीन (रस्सी, क्रेट), PVC (पाइप, तारों का आवरण), पॉलीस्टाइरीन (पैकिंग), PTFE (नॉन-स्टिक कड़ाही)।
संघनन बहुलकीकरण
यहाँ हर एकलक के दो क्रियाशील समूह होते हैं, दोनों सिरों पर (जैसे –OH, –COOH या –NH₂)। दो समूह अभिक्रिया करें तो एकलक जुड़ते हैं और एक छोटा अणु (अक्सर पानी H₂O, कभी HCl) निकलता है।
- पॉलिएस्टर: डाइऑल (दो –OH) + डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल (दो –COOH) → एस्टर बंध (–COO–) + पानी। उदाहरण: PET, बोतलें और कपड़ों के रेशे।
- पॉलीऐमाइड: डाइऐमीन (दो –NH₂) + डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल → ऐमाइड बंध (–CONH–) + पानी। उदाहरण: नायलॉन, रस्सी, टूथब्रश के बाल, पैराशूट।
| योगात्मक | संघनन | |
|---|---|---|
| एकलक | C=C वाला | 2 क्रियाशील समूह |
| उप-उत्पाद | कोई नहीं | छोटा अणु (H₂O) |
| उदाहरण | पॉलीएथीन, PVC | नायलॉन, पॉलिएस्टर, प्रोटीन |
प्राकृतिक बहुलक
- स्टार्च (चावल, गेहूँ, आलू में ऊर्जा भंडार) और सेलुलोज़ (पादप कोशिका भित्ति, कपास, कागज़): ग्लूकोज़ की श्रृंखलाएँ। ये संघनन से बनते हैं, पानी निकलता है।
- प्रोटीन (मांसपेशी, बाल, एंज़ाइम, रेशम, ऊन): लगभग 20 तरह के अमीनो अम्लों की श्रृंखलाएँ, पेप्टाइड (ऐमाइड) बंधों से जुड़ी।
- DNA: चार तरह के न्यूक्लियोटाइड की श्रृंखलाएँ, जो आनुवंशिक जानकारी रखती हैं।
- प्राकृतिक रबर: रबर के पेड़ के लेटेक्स से आइसोप्रीन का योगात्मक बहुलक (केरल में बहुत उगता है)। रबर को सल्फ़र के साथ गर्म करने (वल्कनीकरण) से अनुप्रस्थ-बंध बनते हैं और वह टायर जैसा मज़बूत होता है।
अर्ध-संश्लेषित बहुलक रसायन से बदले प्राकृतिक बहुलक हैं, जैसे रेयॉन (सेलुलोज़ से)।
संरचना, गुण और उपयोग
श्रृंखलाएँ कैसे जमी हैं, इससे बहुलक का व्यवहार तय होता है:
- थर्मोप्लास्टिक: अलग श्रृंखलाएँ, बीच में कमज़ोर बल। गर्मी से नरम होकर बार-बार ढल सकते हैं, इसलिए पुनः चक्रित हो सकते हैं। उदाहरण: पॉलीएथीन, PVC, PET, पॉलीस्टाइरीन।
- थर्मोसेट: मज़बूत अनुप्रस्थ-बंधों से जुड़ी श्रृंखलाएँ। एक बार जमने पर पिघलते नहीं; तेज़ गर्मी में जल जाते हैं। उदाहरण: बेकेलाइट (स्विच, कड़ाही के हत्थे), मेलामाइन (प्लेटें), एपॉक्सी गोंद।
- प्रत्यास्थ बहुलक (इलास्टोमर): कुछ अनुप्रस्थ-बंध श्रृंखलाओं को खिंचकर वापस आने देते हैं (रबर)।
- रेशे: साथ-साथ सीधी जमी श्रृंखलाएँ एक दिशा में बहुत ताकत देती हैं (नायलॉन, पॉलिएस्टर)।
लंबी श्रृंखलाएँ ज़्यादा उलझती हैं, तो पदार्थ मज़बूत होता है और ज़्यादा ताप पर पिघलता है। कम घनत्व पॉलीएथीन (LDPE) की शाखित श्रृंखलाएँ (नरम थैलियाँ); उच्च घनत्व पॉलीएथीन (HDPE) की सीधी, पास-पास जमी श्रृंखलाएँ (सख़्त बोतलें, क्रेट)।
नए पदार्थ: केवलर (बुलेट-प्रूफ़ जैकेट), चालक बहुलक और हाइड्रोजेल, एकलक और श्रृंखला संरचना बदलकर बनाए जाते हैं।
प्लास्टिक और पर्यावरण
ज़्यादातर संश्लेषित बहुलक अजैव-निम्नीकरणीय हैं: सूक्ष्मजीव इन्हें तोड़ नहीं पाते, तो ये सैकड़ों साल रहते हैं। प्लास्टिक कचरा नालियाँ रोकता है, गायों और समुद्री जीवों को नुकसान पहुँचाता है, और सूक्ष्म-प्लास्टिक में टूटता है। कुछ प्लास्टिक (जैसे PVC) जलाने पर ज़हरीली गैसें निकलती हैं।
उपाय:
- कम करो और दोबारा इस्तेमाल करो: कपड़े के थैले, स्टील की बोतलें।
- थर्मोप्लास्टिक का पुनः चक्रण: रेज़िन कोड से छाँटो (1 = PET, 2 = HDPE, 3 = PVC, 4 = LDPE, 5 = PP, 6 = PS)।
- जैव-निम्नीकरणीय बहुलक, जैसे PLA (मक्के के स्टार्च से) और PHBV, जिन्हें सूक्ष्मजीव तोड़ सकते हैं।
- ऊर्जा प्राप्ति और रासायनिक पुनः चक्रण से वापस एकलक।
ज़्यादातर एकलक कच्चे तेल से आते हैं, जो सीमित है; यह भी बहुलक सोच-समझकर इस्तेमाल करने का कारण है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n CH₂=CH₂ → –(CH₂–CH₂)ₙ– (योगात्मक)
- डाइऑल + डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल → पॉलिएस्टर + पानी (संघनन)
- डाइऐमीन + डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल → पॉलीऐमाइड (नायलॉन) + पानी
- बहुलक का मोलर द्रव्यमान ≈ n × पुनरावर्ती इकाई का मोलर द्रव्यमान
- एकलक: एथीन C₂H₄ (28 g/mol); प्रोपीन C₃H₆ (42); क्लोरोएथीन C₂H₃Cl (62.5)
हल किए गए उदाहरण
1. प्रोपीन CH₂=CH–CH₃ से पॉलीप्रोपीन की पुनरावर्ती इकाई बनाओ।
द्विबंध खोलो: –(CH₂–CH(CH₃))ₙ–। CH₃ समूह श्रृंखला से लटकता है।
2. एक पॉलीएथीन अणु में n = 5000 है। मोलर द्रव्यमान निकालो।
5000 × 28 g/mol = 1,40,000 g/mol।
3. नायलॉन संघनन बहुलक क्यों है?
इसके एकलक (डाइऐमीन और डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल) ऐमाइड बंधों से जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी निकलता है।
4. PET बोतल पुनः चक्रित हो सकती है पर बेकेलाइट स्विच क्यों नहीं?
PET थर्मोप्लास्टिक है (अलग श्रृंखलाएँ, पिघलकर फिर ढलता है)। बेकेलाइट थर्मोसेट है (अनुप्रस्थ-बंधित, पिघलता नहीं)।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कोई भी एकलक योगात्मक बहुलकीकरण कर सकता है। C=C द्विबंध ज़रूरी है।
- संघनन बहुलकीकरण के समीकरण में छोटा अणु (पानी) भूल जाना।
- पुनरावर्ती इकाई में द्विबंध बनाए रखना। बहुलक में यह एकल बंध हो जाता है।
- सोचना कि सारे बहुलक मानव-निर्मित प्लास्टिक हैं। स्टार्च, प्रोटीन, DNA और कपास भी बहुलक हैं।