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जैव अणु

कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कोशिका के अंदर क्या है? स्तंभ एक आम कोशिका का भार दिखाते हैं: लगभग 70% पानी, फिर प्रोटीन। अम्ल में पीसने से छोटे और बड़े अणु अलग होते हैं।
  2. प्रोटीन: अमीनो अम्ल के मनकों की माला। बटन दबाइए: माला कुंडली बनती है (द्वितीयक), गेंद बनती है (तृतीयक) और दूसरी शृंखलाओं से जुड़ती है (चतुर्थक)।
  3. कार्बोहाइड्रेट: एक शर्करा वलय, फिर दो, फिर लंबी शृंखलाएँ – कुंडली वाला मंड, सीधा सेलुलोज़, शाखाओं वाला ग्लाइकोजन। वलय गिनिए।
  4. लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल: वसा = ग्लिसरॉल + 3 वसा अम्ल; न्यूक्लियोटाइड = क्षार + शर्करा + फ़ॉस्फ़ेट; DNA = दो लिपटे सूत्र।
  5. एंज़ाइम काम पर: क्रियाधार सक्रिय स्थल में फ़िट होता है, उत्पाद बनते हैं, एंज़ाइम फिर मुक्त। संदमक डालो तो रास्ता बंद।
  6. खुला खेल: तापमान और pH बदलिए और अभिक्रिया दर का स्तंभ देखिए। ज़्यादा गर्मी में एंज़ाइम का आकार बिगड़ जाता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

लिपिड छोटे अणु हैं, तो अम्ल-अविलेय भाग में क्यों?

पीसने पर कोशिका झिल्लियाँ टूटकर छोटी लिपिड पुटिकाएँ बनाती हैं। ये बड़े गुच्छे छन्नी से नहीं निकलते, इसलिए हर लिपिड अणु छोटा होने पर भी रुक जाता है।

अगर अमीनो अम्लों का क्रम सही है, तो आकार क्यों मायने रखता है?

क्रम तय करता है कि शृंखला कैसे लिपटेगी और मुड़ेगी। सिर्फ़ अंतिम मुड़े आकार में ही काम के लिए सही जेब या सतह बनती है। ग़लत मोड़ = कोई काम नहीं।

मंड और सेलुलोज़ दोनों ग्लूकोज़ से बने हैं – हम सिर्फ़ मंड क्यों पचा पाते हैं?

ग्लूकोज़ इकाइयाँ अलग तरह से जुड़ी हैं। मंड कुंडली बनाता है और हमारा एमाइलेज़ उसे काट सकता है। सेलुलोज़ शृंखलाएँ सीधी मज़बूत गठ्ठरों में होती हैं, और मनुष्यों के पास उन कड़ियों को काटने वाला एंज़ाइम नहीं।

न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड में क्या अंतर है?

न्यूक्लियोसाइड = क्षार + शर्करा। न्यूक्लियोटाइड = क्षार + शर्करा + फ़ॉस्फ़ेट। न्यूक्लियोसाइड में फ़ॉस्फ़ेट जोड़ो तो न्यूक्लियोटाइड।

एंज़ाइम अभिक्रिया तेज़ करता है पर ख़र्च क्यों नहीं होता?

यह क्रियाधार को सिर्फ़ बेहतर जगह और रास्ता देता है (कम सक्रियण ऊर्जा)। उत्पाद निकलने के बाद एंज़ाइम वैसा ही रहता है और अगला क्रियाधार ले सकता है।

क्या ठंड एंज़ाइम को मार देती है?

नहीं। ठंड उसे धीमा या कुछ देर निष्क्रिय करती है; गर्म करो तो फिर काम करता है। ज़्यादा गर्मी अलग है – वह आकार हमेशा के लिए नष्ट करती है (विकृतीकरण)।

कोशिका की रासायनिक बनावट

जीवित ऊतक और मिट्टी में एक जैसे तत्व होते हैं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन…), पर जीवित ऊतक में कार्बन और हाइड्रोजन बहुत ज़्यादा। कार्बन यौगिक जानने के लिए एक सरल विश्लेषण:

  1. जीवित ऊतक को ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल (Cl₃CCOOH) के साथ पीसकर घोल बनाइए।
  2. कपड़े या रुई से छानिए।
  3. जो द्रव निकल जाए = अम्ल-विलेय भाग (निस्यंद): अमीनो अम्ल, शर्करा, न्यूक्लियोटाइड जैसे छोटे अणु।
  4. जो रुक जाए = अम्ल-अविलेय भाग (अवधारित): प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, पॉलीसैकेराइड और लिपिड।

ऊतक को जलाने (भस्म) पर सारे कार्बन यौगिक उड़ जाते हैं; राख में अकार्बनिक तत्व (Ca, Mg) और सल्फ़ेट, फ़ॉस्फ़ेट जैसे यौगिक बचते हैं।

सूक्ष्म अणुओं का आणविक भार 18–800 Da, ये विलेय भाग में। वृहत् अणु 10,000 Da से ऊपर: प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, पॉलीसैकेराइड। लिपिड 800 Da से कम हैं, फिर भी अविलेय भाग में आते हैं, क्योंकि पीसने पर टूटी झिल्लियाँ अघुलनशील पुटिकाएँ बना लेती हैं।

आम कोशिका का भार: पानी 70–90%, प्रोटीन 10–15%, न्यूक्लिक अम्ल 5–7%, कार्बोहाइड्रेट 3%, लिपिड 2%, आयन 1%।

प्रोटीन: अमीनो अम्लों की शृंखला

अमीनो अम्ल में एक केंद्रीय कार्बन (α-कार्बन) चार समूह पकड़े रहता है: हाइड्रोजन, अमीनो समूह (–NH₂), कार्बॉक्सिल समूह (–COOH) और बदलता R समूह। R से अमीनो अम्ल तय होता है: R = H ग्लाइसीन, R = CH₃ ऐलानीन, R = CH₂OH सेरीन। अमीनो और कार्बॉक्सिल समूहों के आधार पर ये अम्लीय (ग्लूटैमिक अम्ल), क्षारीय (लाइसीन) या उदासीन (वैलीन); कुछ ऐरोमैटिक (टाइरोसीन, फ़ेनिलऐलानीन, ट्रिप्टोफ़ैन)। घोल में एक ख़ास pH पर अमीनो अम्ल पर + और – दोनों आवेश: ज़्विटर आयन।

अमीनो अम्ल पानी निकालकर पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) से जुड़ते हैं और पॉलीपेप्टाइड बनाते हैं। प्रोटीन 20 तरह तक के अमीनो अम्लों का विषम-बहुलक है। आवश्यक अमीनो अम्ल भोजन से लेने पड़ते हैं; अनावश्यक शरीर ख़ुद बनाता है।

संरचना के चार स्तर

काम: कोलेजन (जंतुओं में सबसे ज़्यादा प्रोटीन) और RuBisCO (पूरे जीवमंडल में सबसे ज़्यादा प्रोटीन); ट्रिप्सिन (एंज़ाइम), इंसुलिन (हॉर्मोन), प्रतिरक्षी (रक्षा), GLUT-4 (ग्लूकोज़ को कोशिका में ले जाता है), ग्राही (गंध, स्वाद, हॉर्मोन पहचानना)।

कार्बोहाइड्रेट (पॉलीसैकेराइड)

शर्करा C, H और O से बनी है। ग्लूकोज़ और राइबोज़ मोनोसैकेराइड हैं। दो ग्लाइकोसिडिक बंध से जुड़कर डाइसैकेराइड (सुक्रोज़, लैक्टोज़, माल्टोज़) बनाते हैं। लंबी शृंखलाएँ पॉलीसैकेराइड, जो अम्ल-अविलेय भाग में मिलती हैं।

पॉलीसैकेराइड शृंखला का दायाँ सिरा अपचायक सिरा और बायाँ अनपचायक सिरा कहलाता है।

लिपिड

लिपिड पानी में नहीं घुलते। वसा अम्ल = कार्बॉक्सिल समूह + कार्बन शृंखला (R समूह); पामिटिक अम्ल में कार्बॉक्सिल कार्बन मिलाकर 16 कार्बन, ऐरेकिडोनिक अम्ल में 20। कोई द्विबंध नहीं = संतृप्त; एक या ज़्यादा = असंतृप्त। ग्लिसरॉल (ट्राइहाइड्रॉक्सी प्रोपेन) पर तीन तक वसा अम्ल: मोनो-, डाई- और ट्राइग्लिसराइड (वसा और तेल – तेल कम तापमान पर पिघलते हैं, जैसे तिल का तेल)। लेसिथिन जैसे फ़ॉस्फ़ोलिपिड में फ़ॉस्फ़ेट समूह होता है और ये कोशिका झिल्ली बनाते हैं। तंत्रिका ऊतक में ज़्यादा जटिल लिपिड। लिपिड सख़्ती से वृहत् अणु या बहुलक नहीं हैं।

न्यूक्लिक अम्ल

न्यूक्लियोटाइड के तीन भाग: नाइट्रोजन क्षार, पेंटोज़ शर्करा और फ़ॉस्फ़ेट। सिर्फ़ क्षार + शर्करा = न्यूक्लियोसाइड (एडीनोसिन, ग्वानोसिन, थाइमिडीन, यूरिडीन, साइटिडीन)।

न्यूक्लिक अम्ल में फ़ॉस्फ़ेट एक शर्करा के 3′ कार्बन को अगली के 5′ कार्बन से जोड़ता है: फ़ॉस्फ़ोडाइएस्टर बंध। वॉटसन–क्रिक (B-DNA) मॉडल: दोनों सूत्र प्रतिसमानांतर, एक पूरे चक्कर में 10 क्षार-जोड़े, हर जोड़े पर उठान 0.34 nm, एक चक्कर 3.4 nm लंबा।

एंज़ाइम: प्रकार, गुण और क्रिया

एंज़ाइम जैव उत्प्रेरक हैं – लगभग सभी प्रोटीन; कुछ न्यूक्लिक अम्ल भी एंज़ाइम जैसे काम करते हैं, इन्हें राइबोज़ाइम कहते हैं। ये अभिक्रिया तेज़ करते हैं और बिना बदले बाहर आते हैं।

ये कैसे काम करते हैं

हर एंज़ाइम में एक सक्रिय स्थल होता है, एक जेब जिसमें क्रियाधार फ़िट होता है। E + S → ES (एंज़ाइम–क्रियाधार संकुल) → EP → E + P। किसी भी अभिक्रिया को शुरू करने के लिए ऊर्जा चाहिए – सक्रियण ऊर्जा। एंज़ाइम इसे घटाता है, इसलिए अभिक्रिया बहुत तेज़ होती है। उदाहरण: कार्बोनिक एनहाइड्रेज़ CO₂ + H₂O → H₂CO₃ को लगभग 1 करोड़ गुना तेज़ करता है (घंटे में लगभग 200 की जगह हर सेकंड लगभग 6 लाख अणु)।

एंज़ाइम क्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

छह वर्ग

  1. ऑक्सीडोरिडक्टेज़/डीहाइड्रोजिनेज़ – दो क्रियाधारों के बीच H या इलेक्ट्रॉन ले जाते हैं।
  2. ट्रांसफ़रेज़ – कोई समूह (H नहीं) एक क्रियाधार से दूसरे में ले जाते हैं।
  3. हाइड्रोलेज़ – पानी से एस्टर, ईथर, पेप्टाइड, ग्लाइकोसिडिक, C–C या P–N बंध तोड़ते हैं।
  4. लायेज़ – बिना पानी के समूह हटाते हैं, द्विबंध छोड़ते हैं।
  5. आइसोमरेज़ – एक समावयवी को दूसरे में बदलते हैं।
  6. लाइगेज़ – दो यौगिकों को जोड़ते हैं (जैसे C–O, C–S, C–N, P–O बंध)।

सहकारक

प्रोटीन भाग = एपोएंज़ाइम। कई को ग़ैर-प्रोटीन सहायक चाहिए: प्रोस्थेटिक समूह (कसकर जुड़ा, जैसे पेरॉक्सीडेज़ और कैटेलेज़ में हीम), सह-एंज़ाइम (ढीला जुड़ा, अक्सर विटामिन से, जैसे NAD और NADP में नियासिन) या धातु आयन (जैसे कार्बोक्सीपेप्टिडेज़ के लिए ज़िंक)। सहकारक हटाओ तो एंज़ाइम काम बंद।

करके देखिए: एंज़ाइम काम करते हुए

सादी रोटी या उबले चावल का छोटा टुकड़ा दो मिनट तक बिना निगले चबाइए – मीठा लगने लगेगा, क्योंकि लार का एमाइलेज़ मंड को शर्करा में तोड़ता है। अब गर्मी का असर: कच्चे आलू के टुकड़े पर आयोडीन की बूँद डालिए (नीला-काला = मंड)। फिर एक कच्चा और एक उबला आलू काटकर दोनों पर हाइड्रोजन परऑक्साइड (केमिस्ट से) की बूँद डालिए – कच्चे में झाग बनता है क्योंकि उसका कैटेलेज़ एंज़ाइम काम करता है; उबले में लगभग नहीं, क्योंकि गर्मी ने एंज़ाइम को विकृत कर दिया। इसे 3D के चरण 6 से मिलाइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. यकृत ऊतक को ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल में पीसकर छाना गया। (a) ग्लूकोज़, (b) DNA, (c) फ़ॉस्फ़ोलिपिड किस भाग में मिलेंगे?

(a) ग्लूकोज़ छोटा → निस्यंद (अम्ल-विलेय)। (b) DNA वृहत् अणु → अवधारित (अम्ल-अविलेय)। (c) फ़ॉस्फ़ोलिपिड छोटे हैं, पर टूटी झिल्लियाँ पुटिकाएँ बनाती हैं, इसलिए ये भी अम्ल-अविलेय भाग में।

2. एक DNA खंड में 20 क्षार-जोड़े हैं। यह द्विकुंडली के कितने पूरे चक्कर बनाता है और कितना लंबा है?

एक चक्कर = 10 bp, इसलिए 20 ÷ 10 = 2 चक्कर। लंबाई = 20 × 0.34 nm = 6.8 nm।

3. एक DNA में 30% एडेनीन है। ग्वानीन कितने प्रतिशत?

A = T, इसलिए T = 30%। A + T = 60%, तो G + C = 40%। G = C, इसलिए G = 20%।

4. प्रोटीन संरचना का स्तर बताइए: (a) अमीनो अम्लों का क्रम, (b) हीमोग्लोबिन की 4 शृंखलाएँ, (c) कुंडली।

(a) प्राथमिक, (b) चतुर्थक, (c) द्वितीयक।

5. एक एंज़ाइम P–O बंध बनाकर DNA के दो टुकड़े जोड़ता है। यह किस वर्ग का है?

नया बंध बनाकर दो अणु जोड़ता है → लाइगेज़ (DNA लाइगेज़)।

6. एक एंज़ाइम का Vmax = 100 इकाई है। जब क्रियाधार सांद्रता Km के बराबर हो, तो दर कितनी?

Km वह सांद्रता है जिस पर दर Vmax की आधी होती है: 100 ÷ 2 = 50 इकाई।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. इनमें से कौन अम्ल-विलेय भाग में मिलता है?
2. पूरे जीवमंडल में सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला प्रोटीन:
3. आयोडीन से नीला-काला रंग कौन देता है?
4. जो एंज़ाइम पानी से बंध तोड़ता है, वह है:
5. कैटेलेज़ में हीम किसका उदाहरण है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैव अणु क्या हैं?

सजीवों में मिलने वाले कार्बन यौगिक – मुख्य रूप से प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल, साथ में अमीनो अम्ल और शर्करा जैसे छोटे अणु।

एंज़ाइम क्रिया को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

तापमान, pH, क्रियाधार सांद्रता और संदमक या सक्रियक की मौजूदगी।

सह-एंज़ाइम और प्रोस्थेटिक समूह में क्या अंतर है?

दोनों ग़ैर-प्रोटीन सहायक हैं। प्रोस्थेटिक समूह कसकर जुड़ा होता है (जैसे हीम); सह-एंज़ाइम ढीला जुड़ा और अक्सर विटामिन से बना (जैसे NAD)।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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