कार्बोहाइड्रेट क्या हैं?
कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनते हैं। बहुतों का सूत्र Cx(H2O)y जैसा होता है, इसलिए पहले इन्हें "कार्बन के हाइड्रेट" कहा गया। पर यह नाम पूरा सही नहीं: रैम्नोज़ (C6H12O5) कार्बोहाइड्रेट है पर सूत्र में फिट नहीं होता, और ऐसीटिक अम्ल (C2H4O2) फिट होता है पर कार्बोहाइड्रेट नहीं है।
सही परिभाषा: कार्बोहाइड्रेट प्रकाशिक रूप से सक्रिय पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन हैं, या वे यौगिक जो जल-अपघटन पर इन्हें देते हैं। "पॉलीहाइड्रॉक्सी" = कई –OH समूह। "जल-अपघटन" = पानी से बंध तोड़ना।
कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण
इकाइयों की संख्या से
- मोनोसैकेराइड: एक इकाई, और सरल शर्करा में नहीं टूटती। ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, राइबोज़, गैलेक्टोज़।
- ऑलिगोसैकेराइड: 2 से 10 इकाइयाँ। सबसे आम डाइसैकेराइड (2 इकाई): सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़।
- पॉलीसैकेराइड: बहुत सारी इकाइयाँ। स्टार्च, सेलुलोज़, ग्लाइकोजन। मीठे नहीं, पानी में ज़्यादातर नहीं घुलते।
स्वाद से
मीठे और पानी में घुलने वाले (मोनो और डाइसैकेराइड) = शर्करा। पॉलीसैकेराइड = अशर्करा।
अपचायी और अनपचायी शर्करा
अपचायी शर्करा में मुक्त ऐल्डिहाइड या कीटो समूह होता है (या ऐसा छल्ला जो खुलकर यह दे सके)। यह टॉलेन अभिकर्मक (चाँदी का दर्पण) और फेलिंग विलयन (लाल अवक्षेप) को अपचयित करती है। सभी मोनोसैकेराइड अपचायी हैं; माल्टोज़ और लैक्टोज़ भी। सुक्रोज़ अनपचायी है, क्योंकि उसके दोनों अपचायी सिरे बंध बनाने में लग चुके हैं।
ऐल्डोज़ और कीटोज़
–CHO वाला मोनोसैकेराइड ऐल्डोज़, और शृंखला के बीच C=O वाला कीटोज़। कार्बन की गिनती भी जोड़ो: ग्लूकोज़ = ऐल्डोहेक्सोज़ (6 C), फ्रक्टोज़ = कीटोहेक्सोज़, राइबोज़ = ऐल्डोपेंटोज़ (5 C)।
ग्लूकोज़: बनाना और खुली शृंखला संरचना
बनाने की विधियाँ
- सुक्रोज़ से: सुक्रोज़ को ऐल्कोहॉल में तनु HCl या H2SO4 के साथ उबालो; ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ बनते हैं।
- स्टार्च से (कारखाने में): स्टार्च को तनु H2SO4 के साथ लगभग 393 K और 2–3 atm दाब पर उबालो। (C6H10O5)n + nH2O → nC6H12O6।
खुली शृंखला के सबूत
- अणुसूत्र C6H12O6।
- HI के साथ देर तक गरम करने पर n-हेक्सेन: 6 कार्बन एक सीधी शृंखला में।
- हाइड्रॉक्सिलऐमीन से ऑक्सिम और HCN से सायनोहाइड्रिन: C=O समूह है।
- ब्रोमीन जल से ग्लूकोनिक अम्ल (6 C): C=O ऐल्डिहाइड (–CHO) है।
- ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से पेंटाऐसीटेट: 5 –OH समूह, अलग-अलग कार्बन पर।
- नाइट्रिक अम्ल दोनों सिरों को ऑक्सीकृत कर सैकेरिक अम्ल देता है: एक सिरे पर –CHO, दूसरे पर प्राथमिक –CH2OH।
यानी ग्लूकोज़ = CHO–(CHOH)4–CH2OH। इसे D-(+)-ग्लूकोज़ कहते हैं: "D" = सबसे नीचे वाले काइरल कार्बन (C5) पर –OH दाईं ओर; "(+)" = यह ध्रुवित प्रकाश को दाईं ओर घुमाता है। D और + दो अलग बातें हैं।
ग्लूकोज़: चक्रीय संरचना, ऐनोमर और हॉवर्थ रूप
खुली शृंखला कुछ बातें नहीं समझा पाती:
- ग्लूकोज़ शिफ़ परीक्षण नहीं देता और NaHSO3 योगज नहीं बनाता, जबकि ऐल्डिहाइड को बनाना चाहिए।
- इसका पेंटाऐसीटेट हाइड्रॉक्सिलऐमीन से क्रिया नहीं करता, यानी उसमें मुक्त –CHO नहीं।
- ग्लूकोज़ के दो क्रिस्टलीय रूप हैं, α और β।
हल: C5 का –OH, C1 के –CHO से जुड़कर छह सदस्यीय छल्ला (5 C + 1 O) बनाता है, जिसे पाइरेनोज़ छल्ला कहते हैं। C1 एक नया काइरल केंद्र बन जाता है। इसका नया –OH एक ओर हो तो α-D-ग्लूकोज़, दूसरी ओर हो तो β-D-ग्लूकोज़। केवल C1 पर अलग ऐसे जोड़े को ऐनोमर कहते हैं, और C1 को ऐनोमरी कार्बन। पानी में दोनों रूप खुली शृंखला से होकर धीरे-धीरे एक-दूसरे में बदलते रहते हैं (म्यूटारोटेशन)।
हॉवर्थ चित्र में छल्ला एक चपटे षट्भुज जैसा दिखता है, समूह ऊपर या नीचे।
फ्रक्टोज़
फ्रक्टोज़ (C6H12O6) सबसे मीठी प्राकृतिक शर्करा है, फलों और शहद में मिलती है। इसका कीटो समूह C2 पर है, इसलिए यह कीटोहेक्सोज़ है। यह वामावर्ती है: D-(–)-फ्रक्टोज़। C5 का –OH, C2 से जुड़कर पाँच सदस्यीय छल्ला (4 C + 1 O) बनाता है, जिसे फ्यूरेनोज़ कहते हैं। इसके भी α और β ऐनोमर होते हैं।
डाइसैकेराइड: सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़
दो मोनोसैकेराइड पानी निकालकर जुड़ते हैं। यह C–O–C जोड़ ग्लाइकोसाइडी बंध है। अम्ल या एंज़ाइम इसे फिर तोड़ सकते हैं।
| डाइसैकेराइड | किससे बना | जोड़ | अपचायी? | कहाँ |
|---|---|---|---|---|
| सुक्रोज़ | α-D-ग्लूकोज़ + β-D-फ्रक्टोज़ | C1 (ग्लूकोज़) – C2 (फ्रक्टोज़) | नहीं | गन्ना, चुकंदर |
| माल्टोज़ | α-D-ग्लूकोज़ + α-D-ग्लूकोज़ | C1 – C4 | हाँ | माल्ट, स्टार्च का पाचन |
| लैक्टोज़ | β-D-गैलेक्टोज़ + β-D-ग्लूकोज़ | C1 – C4 | हाँ | दूध |
अपवृत शर्करा (इनवर्ट शुगर)
सुक्रोज़ प्रकाश को दाईं ओर (+66.5°) घुमाता है। जल-अपघटन पर बराबर मात्रा में ग्लूकोज़ (+52.5°) और फ्रक्टोज़ (–92.4°) बनते हैं। फ्रक्टोज़ ज़्यादा ज़ोर से घुमाता है, इसलिए मिश्रण बाईं ओर घुमाता है। चिह्न उलट गया, इसलिए इसे अपवृत शर्करा कहते हैं।
पॉलीसैकेराइड: स्टार्च, सेलुलोज़, ग्लाइकोजन
- स्टार्च: पौधों का भोजन-भंडार (चावल, गेहूँ, आलू)। इसमें दो भाग हैं: ऐमाइलोज़ (लगभग 15–20%, α-D-ग्लूकोज़ की बिना शाखा वाली लंबी शृंखला, C1–C4 जोड़, पानी में घुलनशील, स्प्रिंग जैसी कुंडली) और ऐमाइलोपेक्टिन (लगभग 80–85%, शाखित: शृंखला में C1–C4 और शाखाओं पर C1–C6 जोड़, पानी में अघुलनशील)। स्टार्च आयोडीन से नीला-काला हो जाता है।
- सेलुलोज़: पौधों में सबसे ज़्यादा मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट, कोशिका भित्ति का मुख्य भाग। β-D-ग्लूकोज़ की सीधी शृंखला, C1–C4 जोड़। शृंखलाएँ पास-पास लेटकर H-बंध से एक-दूसरे को पकड़ती हैं, इसलिए मज़बूत। हमारे पास β-जोड़ तोड़ने वाला एंज़ाइम नहीं, इसलिए हम इसे नहीं पचा पाते; गाय अपनी आँत के सूक्ष्मजीवों की मदद से पचा लेती है।
- ग्लाइकोजन: जंतुओं का ग्लूकोज़-भंडार, यकृत, पेशियों और मस्तिष्क में। ऐमाइलोपेक्टिन जैसा, पर और ज़्यादा शाखित। इसे जंतु स्टार्च भी कहते हैं। यीस्ट और कवक में भी मिलता है।
कार्बोहाइड्रेट क्यों ज़रूरी हैं
- ईंधन: कोशिकाओं में ग्लूकोज़ जलकर ऊर्जा देता है।
- भंडार: पौधों में स्टार्च, जंतुओं में ग्लाइकोजन।
- ढाँचा: पौधों की भित्ति में सेलुलोज़; लकड़ी, सूत, कागज़।
- निर्माण-इकाई: राइबोज़ और डीऑक्सीराइबोज़ RNA और DNA के भाग हैं।
- उद्योग: शहद (अपवृत शर्करा), वस्त्र, कागज़, लाख, किण्वन।
घर पर करके देखो
- कच्चे आलू की फाँक, ब्रेड के टुकड़े और चीनी के घोल पर टिंक्चर आयोडीन (फर्स्ट-एड बॉक्स वाला) की एक बूँद डालो।
- पहले अनुमान लगाओ: कौन नीला-काला होगा?
- जाँचो: आलू और ब्रेड नीले-काले (स्टार्च)। चीनी का घोल भूरा ही रहा (स्टार्च नहीं)।
- अब ब्रेड का छोटा टुकड़ा 2 मिनट चबाओ। मीठा लगने लगेगा: लार स्टार्च को माल्टोज़ में बदल रही है। 3D के चरण 6 में प्रकार "ऐमाइलोज़" चुनो और आयोडीन को थामने वाली कुंडली देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़: C₆H₁₂O₆ · सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़: C₁₂H₂₂O₁₁ · स्टार्च, सेलुलोज़: (C₆H₁₀O₅)ₙ
- मोनोसैकेराइड + मोनोसैकेराइड → डाइसैकेराइड + H₂O
- C₁₂H₂₂O₁₁ + H₂O → C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज़) + C₆H₁₂O₆ (फ्रक्टोज़)
- ग्लूकोज़ + ब्रोमीन जल → ग्लूकोनिक अम्ल (–CHO का सबूत) · ग्लूकोज़ + HNO₃ → सैकेरिक अम्ल
- ग्लूकोज़ + HI (गरम) → n-हेक्सेन (सीधी 6-C शृंखला)
- n इकाइयों की शृंखला → (n − 1) ग्लाइकोसाइडी बंध, (n − 1) H₂O निकले
- मोलर द्रव्यमान: ग्लूकोज़ 180, सुक्रोज़ 342, शृंखला में एक इकाई C₆H₁₀O₅ = 162 g/mol
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकृत करो: ग्लूकोज़, सुक्रोज़, स्टार्च, राइबोज़, लैक्टोज़, सेलुलोज़।
चरण 1: एक इकाई → मोनोसैकेराइड: ग्लूकोज़, राइबोज़। चरण 2: दो इकाई → डाइसैकेराइड: सुक्रोज़, लैक्टोज़। चरण 3: बहुत इकाई → पॉलीसैकेराइड: स्टार्च, सेलुलोज़।
2. 5 ग्लूकोज़ इकाइयाँ एक शृंखला में जुड़ें तो कितने पानी के अणु निकलेंगे? उत्पाद का मोलर द्रव्यमान?
चरण 1: 5 इकाइयों को 4 जोड़ चाहिए, हर जोड़ पर 1 H₂O निकलता है। यानी 4 H₂O। चरण 2: द्रव्यमान = 5 × 180 − 4 × 18 = 900 − 72 = 828 g/mol। उत्तर: 4 अणु, 828 g/mol।
3. स्टार्च के नमूने का मोलर द्रव्यमान 162 000 g/mol है। लगभग कितनी ग्लूकोज़ इकाइयाँ?
चरण 1: शृंखला में हर इकाई C₆H₁₀O₅ = 162 g/mol (ग्लूकोज़ − एक पानी)। चरण 2: n ≈ 162 000 ÷ 162 = 1000। उत्तर: लगभग 1000 इकाइयाँ।
4. 34.2 g सुक्रोज़ के पूरे जल-अपघटन से कितना ग्लूकोज़ बनेगा?
चरण 1: सुक्रोज़ के मोल = 34.2 ÷ 342 = 0.1 mol। चरण 2: 1 सुक्रोज़ → 1 ग्लूकोज़ + 1 फ्रक्टोज़, तो 0.1 mol ग्लूकोज़। चरण 3: द्रव्यमान = 0.1 × 180 = 18 g। उत्तर: 18 g ग्लूकोज़ (और 18 g फ्रक्टोज़)।
5. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से ग्लूकोज़ पेंटाऐसीटेट बनता है। इससे क्या पता चलता है, और प्रति मोल द्रव्यमान कितना बढ़ा?
चरण 1: पेंटा = 5 ऐसीटिल समूह, यानी 5 –OH। चरण 2: हर –OH → –OCOCH₃ में H (1) की जगह COCH₃ (43) आया: हर समूह पर 42 बढ़ा। चरण 3: 5 × 42 = 210। उत्तर: 5 –OH; 180 → 390 g/mol।
6. सुक्रोज़ अनपचायी और माल्टोज़ अपचायी क्यों है?
चरण 1: शर्करा टॉलेन/फेलिंग को तभी अपचयित करती है जब एक ऐनोमरी कार्बन मुक्त हो। चरण 2: सुक्रोज़ में ग्लूकोज़ का C1, फ्रक्टोज़ के C2 से जुड़ा: दोनों ऐनोमरी कार्बन बंद। चरण 3: माल्टोज़ में एक का C1 दूसरे के C4 से जुड़ा; दूसरे का C1 मुक्त। उत्तर: सुक्रोज़ में मुक्त ऐनोमरी कार्बन नहीं, माल्टोज़ में एक है।
7. सुक्रोज़ (+66.5°) का जल-अपघटन हुआ। ग्लूकोज़ +52.5°, फ्रक्टोज़ −92.4°। मिश्रण का चिह्न?
चरण 1: दोनों बराबर मोल बनते हैं। औसत घूर्णन ≈ (52.5 − 92.4) ÷ 2 ≈ −20°। चरण 2: ऋणात्मक, यानी वामावर्ती। उत्तर: + से − हो गया, इसीलिए इसे अपवृत शर्करा कहते हैं।
आम गलतियाँ
- Cx(H₂O)y सूत्र वाले हर यौगिक को कार्बोहाइड्रेट मानना। ऐसीटिक अम्ल फिट होता है पर कार्बोहाइड्रेट नहीं।
- D/L और +/− को एक समझना। D = C5 पर –OH की स्थिति; + = प्रकाश घूमने की दिशा। दोनों अलग हैं।
- मीठा है तो सुक्रोज़ को अपचायी मान लेना। दोनों ऐनोमरी कार्बन बंधे हैं, इसलिए यह अनपचायी है।
- स्टार्च और सेलुलोज़ की इकाइयाँ अलग मानना। दोनों ग्लूकोज़ हैं; स्टार्च में α-जोड़, सेलुलोज़ में β-जोड़।