China 高三 Chemistry
अध्याय: 9
1. Selective 3 Ch.1 Organic structure and methods
Bonding, isomerism, functional groups · Separation, purification, structure determination
- कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नामपद्धति और समावयवता – कार्बनिक यौगिक लाखों हैं, इसलिए हर एक का साफ़ और अलग नाम चाहिए। IUPAC पद्धति में नाम के तीन भाग हैं: मूल शब्द (मुख्य शृंखला में कार्बनों की संख्या), अनुलग्न (आबंध का प्रकार और मुख्य क्रियात्मक समूह) और पूर्वलग्न (शाखाएँ)। मुख्य समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो, ऐसे अंक दो कि मुख्य समूह और शाखाओं को सबसे छोटे अंक मिलें, और शाखाओं को वर्णक्रम में लिखो। समावयवी वे यौगिक हैं जिनका अणुसूत्र एक है पर बनावट अलग। संरचनात्मक समावयवियों में परमाणु अलग ढंग से जुड़े होते हैं (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता)। त्रिविम समावयवियों में जुड़ाव एक जैसा पर 3D व्यवस्था अलग होती है (ज्यामितीय सिस/ट्रांस और प्रकाशिक)।
- कार्बनिक यौगिकों का शोधन और विश्लेषण – प्रयोगशाला में बना या पौधे से निकाला यौगिक शुरू में शुद्ध नहीं होता। हम किसी गुण के अंतर से उसे शुद्ध करते हैं: विलेयता (क्रिस्टलन), क्वथनांक (आसवन और उसके प्रकार), ऊर्ध्वपातन, दो द्रवों में विलेयता (विभेदी निष्कर्षण) या किसी सतह पर चिपकने की ताकत (वर्णलेखन)। शुद्ध ठोस का गलनांक तीक्ष्ण होता है। फिर हम पता करते हैं कौन-से तत्व हैं (गुणात्मक विश्लेषण): कॉपर(II) ऑक्साइड से C और H, और लैसें सोडियम संगलन परीक्षण से N, S, हैलोजन और P। अंत में हम हर तत्व की मात्रा निकालते हैं (मात्रात्मक विश्लेषण): C और H के लिए लीबिग विधि, N के लिए ड्यूमा और कैल्डाल विधि, हैलोजन और S के लिए कैरिअस विधि, और ऑक्सीजन अंतर से। प्रतिशतों से मूलानुपाती सूत्र मिलता है।
2. Selective 3 Ch.2 Hydrocarbons
Alkanes · Alkenes and alkynes · Aromatic hydrocarbons
- ऐल्केन – ऐल्केन ऐसे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें केवल एकल C–C आबंध होते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। इन्हें ऐल्कीन में हाइड्रोजन जोड़कर, वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से, ऐल्किल हैलाइड के अपचयन से और विकार्बोक्सिलन से बनाते हैं। ये अध्रुवीय होते हैं, जलने पर बहुत ऊष्मा देते हैं और प्रकाश में H की जगह Cl ले लेते हैं। C–C आबंध के चारों ओर घूमने से सांतरित और ग्रहणित आकार बनते हैं, जिन्हें संरूपण कहते हैं।
- ऐल्कीन – ऐल्कीन वे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें एक C=C द्वि-आबंध होता है; सूत्र CₙH₂ₙ। द्वि-आबंध = एक σ + एक π आबंध, इसलिए उसके आसपास अणु चपटा है और घूम नहीं सकता। इसी से समपक्ष (cis) और विपक्ष (trans) समावयवी बनते हैं। ऐल्कीन छोटे अणु (H₂O, HX, X₂) हटाकर या ऐल्काइन में आंशिक H₂ जोड़कर बनते हैं। ये मुख्य रूप से योगज अभिक्रियाएँ करते हैं: H₂, X₂, HX (मारकोनीकॉफ़ नियम, या परॉक्साइड के साथ उल्टा), पानी, ओज़ोन, KMnO₄ और बहुलकीकरण।
- बेंज़ीन और ऐरोमैटिकता – बेंज़ीन (C₆H₆) छह sp² कार्बनों का चपटा वलय है। इसके छह π इलेक्ट्रॉन पूरे वलय में फैले हैं, इसलिए सभी C–C आबंध बराबर हैं और वलय बहुत स्थायी है। ऐसा वलय ऐरोमैटिक कहलाता है जब वह चक्रीय, समतलीय, पूर्ण संयुग्मित हो और उसमें 4n + 2 π इलेक्ट्रॉन हों (हकेल नियम)। बेंज़ीन योग की जगह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन (नाइट्रीकरण, हैलोजनीकरण, सल्फ़ोनीकरण, फ़्रीडेल–क्राफ़्ट्स) पसंद करती है, क्योंकि इससे स्थायी वलय बचा रहता है। वलय पर पहले से लगा समूह तय करता है कि अगला समूह ऑर्थो/पैरा जाएगा या मेटा। बेंज़ीन और संगलित-वलय हाइड्रोकार्बन विषैले हैं और कैंसर कर सकते हैं।
3. Selective 3 Ch.3 Hydrocarbon derivatives
Haloalkanes · Alcohols and phenols · Aldehydes and ketones · Carboxylic acids and derivatives · Organic synthesis
- हैलोऐल्केन – हैलोऐल्केन वह ऐल्केन है जिसमें एक हाइड्रोजन की जगह हैलोजन (X) लगा हो (R–X)। C–X आबंध ध्रुवीय है: कार्बन पर हल्का धन आवेश होता है, इसलिए नाभिकस्नेही उस पर हमला करते हैं। अभिक्रियाएँ तीन तरह की: SN2 (एक चरण, पीछे से हमला, प्रतीपन; 1° के लिए अच्छी), SN1 (दो चरण, चपटा कार्बोधनायन, रेसेमिक उत्पाद; 3° के लिए अच्छी) और विलोपन (ऐल्कोहॉली KOH से ऐल्कीन)।
- ऐल्कोहॉल – ऐल्कोहॉल वह कार्बनिक यौगिक है जिसमें –OH समूह एक sp³ कार्बन पर लगा हो (R–OH)। –OH वाले कार्बन पर जुड़े कार्बन गिनकर इसे प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) या तृतीयक (3°) कहते हैं। नाम: ऐल्केन का 'e' हटाकर 'ऑल' (ol), –OH को सबसे छोटा नंबर। बनाने के तरीके: ऐल्कीन का जलयोजन या हाइड्रोबोरॉनन–ऑक्सीकरण, ऐल्डिहाइड/कीटोन/अम्ल का अपचयन, ग्रीन्यार अभिकर्मक। हाइड्रोजन बंध के कारण क्वथनांक ऊँचा और पानी में घुलनशील। अभिक्रियाओं में या तो O–H टूटता है (Na, एस्टरीकरण) या C–O (HX, निर्जलीकरण); 1° और 2° का ऑक्सीकरण होता है। मेथेनॉल और एथेनॉल मुख्य व्यापारिक ऐल्कोहॉल हैं।
- ऐल्डिहाइड और कीटोन: संरचना, बनाना और अभिक्रियाएँ – ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों में कार्बोनिल समूह C=O होता है। ऐल्डिहाइड में C=O वाले कार्बन पर कम से कम एक H होता है (−CHO)। कीटोन में उस कार्बन पर दो कार्बन समूह होते हैं (−CO−)। C=O बंध ध्रुवीय है: C थोड़ा धनात्मक, O थोड़ा ऋणात्मक। इसलिए इलेक्ट्रॉन से भरे कण (नाभिकस्नेही) कार्बन पर हमला करते हैं। यही एक बात ज़्यादातर अभिक्रियाएँ समझा देती है: HCN, NaHSO₃, ऐल्कोहॉल और अमोनिया व्युत्पन्नों का योग। ऐल्डिहाइड आसानी से ऑक्सीकृत होते हैं (टॉलेन्स, फेलिंग परीक्षण), कीटोन नहीं। C=O के बगल वाले कार्बन का H (α-H) थोड़ा अम्लीय होता है, इसी से ऐल्डोल संघनन होता है। जिन ऐल्डिहाइड में α-H नहीं, वे कैनिज़ारो अभिक्रिया देते हैं।
- कार्बोक्सिलिक अम्ल: कार्बोक्सिल समूह, अम्लता और अभिक्रियाएँ – कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोक्सिल समूह −COOH होता है: एक ही कार्बन पर C=O और O−H। यह H⁺ दे सकता है, और बचा हुआ आयन (कार्बोक्सिलेट, −COO⁻) स्थिर होता है क्योंकि उसका ऋण आवेश दोनों ऑक्सीजन में बराबर बँटा होता है। इसी कारण ये फ़ीनॉल और ऐल्कोहॉल से ज़्यादा अम्लीय हैं (पर HCl जैसे खनिज अम्लों से कमज़ोर)। इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (Cl, F, NO₂) अम्ल को प्रबल बनाते हैं, इलेक्ट्रॉन धकेलने वाले (ऐल्किल) दुर्बल। इन्हें ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड या ऐल्किलबेंज़ीन के ऑक्सीकरण से, नाइट्राइल, एस्टर और ऐमाइड के जल-अपघटन से, या ग्रिन्यार अभिकर्मक और CO₂ से बनाते हैं। मुख्य अभिक्रियाएँ: NaHCO₃ से लवण (CO₂ के बुलबुले), एस्टरीकरण, ऐसिल क्लोराइड और ऐनहाइड्राइड बनना, ऐल्कोहॉल में अपचयन, विकार्बोक्सिलन और HVZ अभिक्रिया।
- कार्बनिक संश्लेषण – कार्बनिक संश्लेषण का मतलब है सरल प्रारंभिक पदार्थों से योजनाबद्ध अभिक्रियाओं की शृंखला द्वारा लक्ष्य अणु बनाना। हर चरण एक क्रियात्मक समूह बदलता है और उसके लिए सही अभिकर्मक और परिस्थितियाँ (ताप, उत्प्रेरक, विलायक, रिफ्लक्स या आसवन) चाहिए। यौगिकों के परिवार आपस में जुड़े हैं (ऐल्केन ↔ ऐल्कीन → हैलोऐल्केन → ऐल्कोहॉल → ऐल्डिहाइड/कीटोन → कार्बोक्सिलिक अम्ल → एस्टर; हैलोऐल्केन → ऐमीन या नाइट्राइल), इसलिए हम नक्शे के स्टेशनों की तरह इनके बीच चल सकते हैं। रसायनज्ञ लक्ष्य से उल्टा योजना बनाते हैं (रेट्रोसंश्लेषण), कम चरण, अधिक लब्धि और परमाणु दक्षता वाले मार्ग चुनते हैं, फिर अभिक्रिया करके उत्पाद को अलग, शुद्ध और जाँचते हैं।
4. Selective 3 Ch.4 Biological macromolecules
Sugars · Proteins · Nucleic acids
- कार्बोहाइड्रेट: वर्गीकरण, ग्लूकोज़, डाइसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड – कार्बोहाइड्रेट यानी शर्कराएँ और शर्करा से बने बड़े अणु। रसायन की भाषा में ये पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन हैं (बहुत सारे –OH और एक C=O), या वे पदार्थ जो जल-अपघटन पर ऐसे अणु देते हैं। इकाइयों की गिनती से इन्हें बाँटते हैं: एक (मोनोसैकेराइड), दो से दस (ऑलिगोसैकेराइड), बहुत सारी (पॉलीसैकेराइड)। ग्लूकोज़ छह कार्बन वाला ऐल्डोज़ है, फ्रक्टोज़ कीटोज़। दो इकाइयाँ –O– पुल (ग्लाइकोसाइडी बंध) से जुड़कर सुक्रोज़, माल्टोज़, लैक्टोज़ बनाती हैं; सैकड़ों जुड़कर स्टार्च, सेलुलोज़, ग्लाइकोजन।
- प्रोटीन और एंज़ाइम: ऐमीनो अम्ल, पेप्टाइड बंध, संरचना और विकृतीकरण – प्रोटीन ऐमीनो अम्लों की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर ऐमीनो अम्ल के एक कार्बन पर ऐमीनो समूह (–NH₂), अम्ल समूह (–COOH), एक हाइड्रोजन और एक पार्श्व समूह R होता है। एक का –COOH अगले के –NH₂ से पानी निकालकर जुड़ता है: यह पेप्टाइड बंध (–CO–NH–) है। ऐमीनो अम्लों का क्रम प्राथमिक संरचना; कुंडली और परत द्वितीयक; पूरा 3D मोड़ तृतीयक; कई शृंखलाएँ साथ में चतुर्धातुक संरचना। गर्मी, अम्ल या ऐल्कोहॉल मोड़ खोल देते हैं (विकृतीकरण)। एंज़ाइम ज़्यादातर प्रोटीन हैं जो शरीर की अभिक्रियाएँ तेज़ करते हैं।
- विटामिन, न्यूक्लिक अम्ल और हॉर्मोन: प्रकार, कार्य, DNA और RNA – विटामिन छोटे कार्बनिक यौगिक हैं जो भोजन से बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए; A, D, E, K वसा में और B, C पानी में घुलते हैं, और हर एक की कमी से एक खास रोग होता है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लियोटाइड की लंबी शृंखलाएँ हैं। हर न्यूक्लियोटाइड = पेंटोज़ शर्करा + फॉस्फेट + नाइट्रोजनी क्षार। DNA में डीऑक्सीराइबोज़, क्षार A, G, C, T और द्विकुंडली में दो लड़ियाँ, जहाँ A–T और G–C जोड़े बनते हैं। RNA में राइबोज़, T की जगह U, और प्रायः एक लड़ी। हॉर्मोन ग्रंथियों के बनाए रासायनिक संदेशवाहक हैं: स्टेरॉयड, प्रोटीन/पेप्टाइड या ऐमीनो अम्ल व्युत्पन्न।
5. Selective 3 Ch.5 Synthetic polymers
Addition and condensation polymerisation · Polymer materials
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।
6. Elective series 1: Experimental chemistry
Basic experiments; principle inquiries; industrial-process simulation; STSE experiments
- रसायन प्रयोग: बनाना, अलग करना, जाँचना और मापना – हर रसायन प्रयोगशाला में चार कौशल चलते हैं: पदार्थ बनाना, उसे मिश्रण से अलग करना, पहचान के लिए जाँचना, और सटीक मात्राएँ मापना (जैसे अनुमापन में)। यही विचार फ़ैक्टरी के पुनर्चक्रण वाले मॉडल और पानी के pH व नाइट्रेट की जाँच में काम आते हैं।
7. Elective series 2: Chemistry and society
Chemistry and life; chemistry and technology; STSE practice
- स्वास्थ्य, पदार्थ, उद्योग और समाज में रसायन – रसायन बताता है कि भोजन में ऊर्जा कैसे है, दवा की मात्रा क्यों मायने रखती है, हम इस्पात, प्लास्टिक, काँच या चीनी मिट्टी क्यों चुनते हैं, और फ़ैक्टरियाँ कच्चे माल से खाद कैसे बनाती हैं। हर काम की चीज़ की कुछ क़ीमत भी होती है, इसलिए हम लाभ और हानि तौलते हैं और जोखिम सँभालते हैं।
8. Elective series 3: Developing chemical science
Research advances; chemistry as interdisciplinary science; chemical engineering
- रसायन विज्ञान की नई दिशाएँ: उत्प्रेरक, नए पदार्थ और रासायनिक संयंत्र – आज का रसायन भौतिकी, जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर के साथ मिलकर काम करता है। यह नए अणु (अक्सर उत्प्रेरक से) बनाता है, नए पदार्थ और बैटरी बनाता है, और बड़े संयंत्रों में बचे हुए माल को दोबारा काम में लाता है।
9. 高考 review
Comprehensive review
जल्द आ रहा है