कार्बोनिल समूह की संरचना
कार्बोनिल समूह में कार्बन और ऑक्सीजन द्विबंध से जुड़े होते हैं: C=O।
- कार्बन sp² संकरित है। उसके तीन सिग्मा बंध एक समतल में लगभग 120° पर हैं। चौथा (पाई) बंध इस समतल के ऊपर-नीचे होता है।
- ऑक्सीजन कार्बन से ज़्यादा विद्युतऋणी है (इलेक्ट्रॉन ज़ोर से खींचता है)। इसलिए बंध ध्रुवीय है: C पर δ+ और O पर δ−। अनुनाद रूप C⁺–O⁻ भी लिखा जाता है।
- ऐल्डिहाइड: C=O कार्बन पर कम से कम एक H: R–CHO (जैसे HCHO, CH₃CHO, C₆H₅CHO)।
- कीटोन: C=O कार्बन पर दो कार्बन समूह: R–CO–R′ (जैसे CH₃COCH₃)।
नामकरण
IUPAC नाम: ऐल्केन के अंतिम 'e' की जगह ऐल्डिहाइड में -al (ऐल) और कीटोन में -one (ओन): एथेनैल, प्रोपेनोन, ब्यूटेन-2-ओन। सामान्य नाम: फ़ॉर्मैल्डिहाइड, ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, बेन्ज़ैल्डिहाइड, ऐसीटोफ़ीनोन।
ऐल्डिहाइड और कीटोन बनाने की विधियाँ
दोनों के लिए
- ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण: प्राथमिक ऐल्कोहॉल → ऐल्डिहाइड; द्वितीयक ऐल्कोहॉल → कीटोन। PCC जैसा हल्का ऑक्सीकारक ऐल्डिहाइड पर रुक जाता है, तेज़ KMnO₄ अम्ल तक ले जाता है।
- विहाइड्रोजनन: ऐल्कोहॉल की वाष्प गरम Cu (573 K) पर H₂ खोती है।
- ऐल्कीन का ओज़ोनी-अपघटन: O₃ फिर Zn/H₂O, C=C को काटकर दो C=O बनाता है।
- ऐल्काइन का जलयोजन: एथाइन + पानी (HgSO₄, तनु H₂SO₄) → एथेनैल; बाकी ऐल्काइन कीटोन देते हैं।
केवल ऐल्डिहाइड
- रोज़ेनमुंड अपचयन: ऐसिल क्लोराइड + H₂, Pd/BaSO₄ (विषाक्त उत्प्रेरक) → ऐल्डिहाइड।
- नाइट्राइल और एस्टर से: स्टीफ़न अभिक्रिया (SnCl₂ + HCl, फिर पानी) या DIBAL-H।
- टॉलूईन से: इटार्ड अभिक्रिया (CrO₂Cl₂) या ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड में CrO₃ → बेन्ज़ैल्डिहाइड; पार्श्व-श्रृंखला क्लोरीनन फिर जल-अपघटन भी।
- गाटरमान–कोख: बेंज़ीन + CO + HCl (AlCl₃/CuCl) → बेन्ज़ैल्डिहाइड।
केवल कीटोन
- ऐसिल क्लोराइड से डाइऐल्किलकैडमियम (R₂Cd) द्वारा।
- नाइट्राइल से ग्रिन्यार अभिकर्मक, फिर जल-अपघटन।
- फ्रीडेल–क्राफ़्ट्स ऐसिलन: बेंज़ीन + CH₃COCl (AlCl₃) → ऐसीटोफ़ीनोन।
भौतिक गुण
- मेथेनैल गैस है, एथेनैल बहुत वाष्पशील द्रव है, बाकी द्रव या ठोस हैं।
- क्वथनांक समान द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बन और ईथर से ज़्यादा (द्विध्रुव–द्विध्रुव आकर्षण के कारण), पर ऐल्कोहॉल से कम (आपस में H-बंध नहीं बना सकते, O–H नहीं है)।
- छोटे यौगिक (मेथेनैल, एथेनैल, प्रोपेनोन) पानी से H-बंध बनाकर घुल जाते हैं। श्रृंखला लंबी होने पर घुलनशीलता घटती है।
- छोटे ऐल्डिहाइड की गंध तीखी होती है; बड़े ऐल्डिहाइड और कई कीटोन की गंध अच्छी (फल, फूल)।
नाभिकस्नेही योगज अभिक्रियाएँ
नाभिकस्नेही वह कण है जिसके पास फालतू इलेक्ट्रॉन-युग्म है (वह धन केंद्र को पसंद करता है)। वह समतल के ऊपर से δ+ कार्बन पर हमला करता है। कार्बन sp² (समतल) से sp³ (चतुष्फलकीय) बन जाता है, फिर O⁻ एक H⁺ ले लेता है।
ऐल्डिहाइड कीटोन से ज़्यादा क्रियाशील क्यों?
- आकार (त्रिविम बाधा): कीटोन के दो बड़े समूह कार्बन को घेर लेते हैं। ऐल्डिहाइड में एक छोटा H है।
- इलेक्ट्रॉनिक कारण: ऐल्किल समूह कार्बन की ओर इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं, जिससे δ+ घटता है। दो समूह ज़्यादा धकेलते हैं।
- क्रम: HCHO > CH₃CHO > CH₃COCH₃। ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड (C₆H₅CHO) कम क्रियाशील, क्योंकि वलय C=O से इलेक्ट्रॉन बाँटता है।
मुख्य योगज
- HCN (क्षार उत्प्रेरक) → सायनोहाइड्रिन।
- NaHSO₃ → क्रिस्टलीय बाइसल्फ़ाइट योगज (ऐल्डिहाइड अलग करने में उपयोगी)।
- ऐल्कोहॉल (शुष्क HCl) → हेमीऐसीटैल, फिर ऐसीटैल। कीटोन + एथिलीन ग्लाइकॉल → कीटैल।
- ग्रिन्यार अभिकर्मक फिर पानी → ऐल्कोहॉल (HCHO से 1°, अन्य ऐल्डिहाइड से 2°, कीटोन से 3°)।
- अमोनिया व्युत्पन्न (H₂N–Z): योग फिर पानी निकलना, C=N–Z बनता है: हाइड्रॉक्सिलऐमीन → ऑक्सिम, हाइड्रेज़ीन → हाइड्रेज़ोन, फ़ेनिलहाइड्रेज़ीन → फ़ेनिलहाइड्रेज़ोन, 2,4-DNP → नारंगी व्युत्पन्न, सेमीकार्बेज़ाइड → सेमीकार्बेज़ोन।
अपचयन और ऑक्सीकरण
अपचयन
- NaBH₄ या LiAlH₄ (या H₂/Ni): ऐल्डिहाइड → प्राथमिक ऐल्कोहॉल; कीटोन → द्वितीयक ऐल्कोहॉल।
- क्लेमेन्सन (Zn–Hg + सांद्र HCl) और वोल्फ़–किश्नर (NH₂NH₂, फिर एथिलीन ग्लाइकॉल में KOH, गरम): C=O → CH₂ (हाइड्रोकार्बन बनता है)।
ऑक्सीकरण
- ऐल्डिहाइड हल्के ऑक्सीकारक से भी कार्बोक्सिलिक अम्ल बन जाते हैं, क्योंकि C=O कार्बन का H आसानी से हटता है।
- टॉलेन्स परीक्षण (अमोनियामय AgNO₃): ऐल्डिहाइड चाँदी का दर्पण देता है।
- फेलिंग परीक्षण (क्षारीय टार्टरेट में Cu²⁺): ऐलिफ़ैटिक ऐल्डिहाइड लाल-भूरा Cu₂O अवक्षेप देता है। ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड नहीं देते।
- कीटोन को तेज़ ऑक्सीकारक और गरम स्थिति चाहिए; कार्बन श्रृंखला टूटती है।
- हैलोफ़ॉर्म (आयडोफ़ॉर्म) अभिक्रिया: CH₃CO– वाले यौगिक (और एथेनैल) I₂ + NaOH से पीला CHI₃ अवक्षेप देते हैं।
α-हाइड्रोजन के कारण अभिक्रियाएँ
C=O के बगल वाला कार्बन α-कार्बन है। उस पर लगे H α-हाइड्रोजन हैं। ये थोड़े अम्लीय हैं, क्योंकि H⁺ जाने के बाद बचा आयन (इनोलेट) अपना ऋण आवेश अनुनाद से ऑक्सीजन पर फैला देता है।
- ऐल्डोल अभिक्रिया: तनु NaOH में α-H वाले दो अणु जुड़ते हैं। 2 CH₃CHO → CH₃CH(OH)CH₂CHO (3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल)। गरम करने पर पानी निकलता है → CH₃CH=CHCHO (ब्यूट-2-ईनैल)। पूरा बदलाव ऐल्डोल संघनन है।
- क्रॉस ऐल्डोल: दो अलग कार्बोनिल यौगिक चार उत्पादों का मिश्रण देते हैं (एक में α-H न हो तो कम)।
- कैनिज़ारो अभिक्रिया: बिना α-H वाले ऐल्डिहाइड (HCHO, C₆H₅CHO) सांद्र NaOH के साथ: एक अणु ऑक्सीकृत (अम्ल का लवण), दूसरा अपचयित (ऐल्कोहॉल)।
दूसरी अभिक्रियाएँ
ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड/कीटोन में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (नाइट्रीकरण) मेटा स्थान पर होता है, क्योंकि C=O वलय से इलेक्ट्रॉन खींचता है।
ऐल्डिहाइड और कीटोन के उपयोग
- फ़ॉर्मेलिन (40% मेथेनैल): जैव नमूनों को सुरक्षित रखना; बैकेलाइट और रेज़िन बनाना।
- एथेनैल: ऐसीटिक अम्ल, एथिल ऐसीटेट और कुछ प्लास्टिक बनाना।
- ऐसीटोन और ब्यूटेनोन: विलायक (नेल-पॉलिश रिमूवर, पेंट)।
- बेन्ज़ैल्डिहाइड (बादाम जैसी गंध), वैनिलिन, सिनेमैल्डिहाइड: स्वाद और इत्र।
- कई शर्कराओं (ग्लूकोस) और हॉर्मोनों (टेस्टोस्टेरॉन, प्रोजेस्टेरॉन) में C=O होता है।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
3D के आख़िरी (खेल) चरण में हर यौगिक चुनने से पहले अनुमान लगाओ: ऐल्डिहाइड या कीटोन? कितने α-H? टॉलेन्स हाँ या नहीं? आयडोफ़ॉर्म हाँ या नहीं? फिर चुनकर जाँचो। 5 यौगिक × 4 = 20 में से अपने अंक गिनो।
घर पर (किसी बड़े के साथ): रुई पर नेल-पॉलिश रिमूवर (ऐसीटोन) की एक बूँद लो और देखो वह कितनी जल्दी सूखती है: छोटे कीटोन वाष्पशील होते हैं, क्योंकि उनमें अणुओं को पकड़ने वाला O–H नहीं।
परीक्षा कोना
CBSE में यह इकाई लगभग 8 अंक की है। अक्सर पूछा जाता है: नाम वाली अभिक्रियाएँ (रोज़ेनमुंड, स्टीफ़न, इटार्ड, क्लेमेन्सन, वोल्फ़–किश्नर, ऐल्डोल, कैनिज़ारो), दो यौगिकों में अंतर करने के रासायनिक परीक्षण, नाभिकस्नेही योगज की क्रियाशीलता का क्रम, 2–3 चरण के रूपांतरण और अभिक्रियाओं से यौगिक पहचानना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्डिहाइड: R–CHO; कीटोन: R–CO–R′
- R–CHO + HCN → R–CH(OH)CN (सायनोहाइड्रिन)
- R–CHO + [O] → R–COOH (टॉलेन्स: Ag दर्पण; फेलिंग: लाल Cu₂O)
- >C=O + Zn–Hg/HCl → >CH₂ (क्लेमेन्सन)
- 2 CH₃CHO → CH₃CH(OH)CH₂CHO (ऐल्डोल, तनु NaOH)
- 2 HCHO + सांद्र NaOH → CH₃OH + HCOONa (कैनिज़ारो)
- क्रियाशीलता: HCHO > CH₃CHO > CH₃COCH₃
हल किए गए उदाहरण
1. ब्यूटेन-2-ओन, CH₃COCH₂CH₃ में कितने α-हाइड्रोजन हैं?
चरण 1: C=O कार्बन C-2 है। चरण 2: इसके पड़ोसी C-1 (CH₃, 3 H) और C-3 (CH₂, 2 H) हैं। चरण 3: 3 + 2 = 5। उत्तर: 5 α-हाइड्रोजन।
2. HCN के प्रति बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में लिखो: CH₃COCH₃, HCHO, CH₃CHO।
चरण 1: जितने ज़्यादा ऐल्किल समूह, उतनी भीड़ और उतना कम δ+ = उतनी धीमी अभिक्रिया। चरण 2: HCHO में 0, CH₃CHO में 1, CH₃COCH₃ में 2 ऐल्किल। उत्तर: CH₃COCH₃ < CH₃CHO < HCHO।
3. प्रोपेनैल और प्रोपेनोन में अंतर का एक रासायनिक परीक्षण बताओ।
चरण 1: प्रोपेनैल ऐल्डिहाइड है (C=O पर H), प्रोपेनोन कीटोन। चरण 2: दोनों को टॉलेन्स अभिकर्मक के साथ गरम करो। चरण 3: प्रोपेनैल चाँदी का दर्पण देता है, प्रोपेनोन नहीं। (प्रोपेनोन पीला आयडोफ़ॉर्म भी देता है, प्रोपेनैल नहीं।)
4. प्रोपेनैल का ऐल्डोल उत्पाद और गरम करने के बाद का उत्पाद लिखो।
चरण 1: CH₃CH₂CHO का α-कार्बन CH₂ है। क्षार उससे H हटाता है: CH₃CH⁻CHO। चरण 2: यह दूसरे प्रोपेनैल के C=O पर हमला करता है। चरण 3: ऐल्डोल: CH₃CH₂CH(OH)CH(CH₃)CHO (3-हाइड्रॉक्सी-2-मेथिलपेन्टेनैल)। चरण 4: गरम करने पर पानी निकलता है: CH₃CH₂CH=C(CH₃)CHO (2-मेथिलपेन्ट-2-ईनैल)।
5. बेन्ज़ैल्डिहाइड को सांद्र NaOH के साथ गरम करने पर क्या होता है? ऐल्डोल क्यों नहीं?
चरण 1: C₆H₅CHO में α-H नहीं है (C=O कार्बन वलय के उस कार्बन से जुड़ा है जिस पर H नहीं)। चरण 2: इसलिए ऐल्डोल नहीं, कैनिज़ारो होगा। चरण 3: 2 C₆H₅CHO + NaOH → C₆H₅CH₂OH + C₆H₅COONa। उत्तर: बेन्ज़िल ऐल्कोहॉल और सोडियम बेन्ज़ोएट।
6. एक यौगिक C₃H₆O, 2,4-DNP से नारंगी अवक्षेप और I₂/NaOH से पीला अवक्षेप देता है, पर चाँदी का दर्पण नहीं। पहचानो।
चरण 1: 2,4-DNP धनात्मक → C=O है। चरण 2: टॉलेन्स नहीं → ऐल्डिहाइड नहीं, कीटोन है। चरण 3: आयडोफ़ॉर्म धनात्मक → CH₃CO– है। चरण 4: तीन कार्बन वाला एक ही कीटोन: CH₃COCH₃। उत्तर: प्रोपेनोन (ऐसीटोन)।
7. एथेनैल को प्रोपेन-2-ऑल में बदलो।
चरण 1: C=O कार्बन पर एक CH₃ जोड़ना है: CH₃MgBr लो। चरण 2: CH₃CHO + CH₃MgBr → CH₃CH(OMgBr)CH₃। चरण 3: पानी (H⁺) डालो: CH₃CH(OH)CH₃। उत्तर: प्रोपेन-2-ऑल, एक द्वितीयक ऐल्कोहॉल।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कीटोन टॉलेन्स परीक्षण देते हैं। चाँदी का दर्पण सिर्फ़ ऐल्डिहाइड (और कुछ खास यौगिक) देते हैं।
- ऐल्डिहाइड के C=O कार्बन वाले H को α-H गिनना। α-H अगले कार्बन पर होता है; HCHO और C₆H₅CHO में α-H नहीं।
- कहना कि ऐल्डिहाइड का क्वथनांक ऐल्कोहॉल से ज़्यादा है। ऐल्कोहॉल आपस में H-बंध बनाते हैं, इसलिए उनका ज़्यादा है।
- क्लेमेन्सन (C=O → CH₂) को NaBH₄ अपचयन (C=O → CH–OH) से मिला देना।