पहले ये शब्द समझ लो
क्रियात्मक समूह (functional group) अणु का वह हिस्सा है जो तय करता है कि वह कैसे अभिक्रिया करेगा। जैसे C=C (ऐल्कीन), –OH (ऐल्कोहॉल), –CHO (ऐल्डिहाइड), श्रृंखला के बीच C=O (कीटोन) और –COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल)।
धनात्मक परीक्षण यानी आँख से दिखने वाला साफ़ बदलाव: रंग बदलना, अवक्षेप बनना, दर्पण, या गैस के बुलबुले। अभिकर्मक (reagent) वह रसायन है जो जाँच के लिए डाला जाता है।
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल में –OH वाले कार्बन से क्रमशः एक, दो या तीन कार्बन जुड़े होते हैं।
क्रियात्मक समूहों के परखनली परीक्षण
ऐल्कीन (C=C): ब्रोमीन जल
नारंगी ब्रोमीन जल के साथ हिलाओ। ब्रोमीन द्विबंध पर जुड़ जाती है, तो रंग नारंगी से रंगहीन हो जाता है। ऐल्केन UV प्रकाश के बिना अभिक्रिया नहीं करते।
ऐल्कोहॉल: अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट(VI)
K₂Cr₂O₇ और तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करो। प्राथमिक और द्वितीयक ऐल्कोहॉल ऑक्सीकृत होते हैं और रंग नारंगी से हरा होता है (Cr₂O₇²⁻ → Cr³⁺)। तृतीयक ऐल्कोहॉल ऑक्सीकृत नहीं होता, रंग नारंगी रहता है।
ऐल्डिहाइड बनाम कीटोन: टॉलेन और फ़ेलिंग
टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिया में सिल्वर आयन) को जल-ऊष्मक में गर्म करो: ऐल्डिहाइड से काँच पर चाँदी का दर्पण बनता है क्योंकि Ag⁺ अपचयित होकर Ag बनता है। फ़ेलिंग विलयन (नीला कॉपर(II)) ऐल्डिहाइड के साथ कॉपर(I) ऑक्साइड का ईंट-लाल अवक्षेप देता है। कीटोन दोनों में कोई बदलाव नहीं देते। ऐल्डिहाइड डाइक्रोमेट को भी हरा करते हैं।
कार्बोक्सिलिक अम्ल: सोडियम कार्बोनेट या हाइड्रोजनकार्बोनेट
अम्ल कार्बन डाइऑक्साइड देते हैं, तो बुलबुले दिखते हैं। यह गैस चूने के पानी को दूधिया करती है।
हैलोऐल्केन (अतिरिक्त)
जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करो, तनु नाइट्रिक अम्ल डालो, फिर सिल्वर नाइट्रेट: सफ़ेद (Cl), हल्का पीला-क्रीम (Br) या पीला (I) अवक्षेप।
सावधानी: लौ की जगह जल-ऊष्मक लो, क्योंकि कई कार्बनिक द्रव जल्दी आग पकड़ते हैं। डाइक्रोमेट विषैला है; दस्ताने और चश्मा पहनो।
द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमिति (mass spectrometry)
द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमीटर अणुओं को धनायन बनाता है, उन्हें द्रव्यमान/आवेश अनुपात (m/z) के हिसाब से अलग करता है और गिनता है। नतीजा शिखरों वाला ग्राफ़ है।
- आणविक आयन शिखर M⁺ सबसे ज़्यादा m/z वाला मुख्य शिखर है (कार्बन-13 के छोटे M+1 शिखर को छोड़कर)। इसका m/z = आपेक्षिक आणविक द्रव्यमान Mr।
- छोटे शिखर अणु टूटने से बने खंडों (fragments) के हैं। सबसे ऊँचा शिखर आधार शिखर (base peak) कहलाता है।
- उच्च-विभेदन (high-resolution) स्पेक्ट्रोमिति Mr को 4 दशमलव तक देती है। सटीक द्रव्यमान H = 1.0078, C = 12.0000, O = 15.9949 लेकर एक जैसे पूर्णांक Mr वाले अणु अलग पहचाने जाते हैं: C₃H₈ = 44.0624, C₂H₄O = 44.0261, CO₂ = 43.9898।
अवरक्त (IR) स्पेक्ट्रोस्कोपी
बंध कंपन करते हैं (खिंचते और मुड़ते हैं)। हर तरह का बंध अपनी तरंग-संख्या (cm⁻¹) पर अवरक्त विकिरण सोखता है। IR स्पेक्ट्रम में जहाँ अवशोषण होता है वहाँ गड्ढा (या शिखर) दिखता है।
- ऐल्कोहॉल का O–H: चौड़ा, 3230–3550 cm⁻¹।
- अम्ल का O–H: बहुत चौड़ा, 2500–3000 cm⁻¹।
- N–H: 3300–3500 cm⁻¹।
- C–H: 2850–3300 cm⁻¹ (लगभग हर कार्बनिक यौगिक में)।
- C=O: तीखा और तेज़, 1680–1750 cm⁻¹।
- C=C: 1620–1680 cm⁻¹।
- C–O: 1000–1300 cm⁻¹।
लगभग 1500 cm⁻¹ से नीचे का हिस्सा फ़िंगरप्रिंट क्षेत्र है। इसका पैटर्न हर यौगिक का अलग होता है, इसलिए इसे डेटाबेस से मिलाया जाता है। ग्रीनहाउस प्रभाव भी यही है: CO₂, H₂O और CH₄ धरती से निकली अवरक्त किरणें सोखते हैं।
पदार्थों को जाँचने की अन्य विधियाँ
- UV–दृश्य स्पेक्ट्रोस्कोपी: पदार्थ कितनी पराबैंगनी या दृश्य रोशनी सोखता है, यह नापती है। रंगीन यौगिक ज़्यादा सोखते हैं। सांद्रता निकालने में काम आती है।
- NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी: नमूने को तेज़ चुंबक में रखकर रेडियो तरंगें डाली जाती हैं। अलग-अलग माहौल वाले हाइड्रोजन और कार्बन-13 नाभिक अलग संकेत देते हैं, जिससे पता चलता है कि परमाणु कैसे जुड़े हैं।
- MRI (चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) शरीर पर इस्तेमाल होने वाला NMR है। यह पानी और वसा के हाइड्रोजन से बिना एक्स-रे के मुलायम ऊतकों की तस्वीर बनाता है।
- वर्णलेखन (chromatography) मिश्रण को अलग करता है ताकि हर हिस्सा पहचाना जा सके, जैसे हल्दी, चुकंदर या पालक के रंग में छिपे कई प्राकृतिक रंजक। देखो वर्णलेखन पाठ।
- रासायनिक उत्परिवर्तन (chemical mutagenesis): कुछ रसायन (जैसे कुछ रंजक, नाइट्राइट से बने नाइट्रोसेमीन, तंबाकू के धुएँ के रसायन) DNA बदल सकते हैं। ऐसी विश्लेषण विधियाँ भोजन और पर्यावरण में इन रसायनों को पकड़ने और कम करने में मदद करती हैं।
करके देखो: जासूस बनो
3D के आखिरी चरण में नमूना A से F चुनो। देखने से पहले अंदाज़ा लगाओ कि कौन-सी नली बदलेगी। फिर तीनों सुराग मिलाओ: परखनली नतीजा क्रियात्मक समूह बताता है, M⁺ Mr बताता है, और IR शिखर बंध पक्का करता है। घर पर सुरक्षित अम्ल-कार्बोनेट परीक्षण: सिरके (एथेनोइक अम्ल) में एक चम्मच बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) डालो और बुलबुले देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्कीन + ब्रोमीन जल: नारंगी → रंगहीन
- 1° / 2° ऐल्कोहॉल या ऐल्डिहाइड + अम्लीय K₂Cr₂O₇: नारंगी → हरा; 3° ऐल्कोहॉल: कोई बदलाव नहीं
- ऐल्डिहाइड + टॉलेन: चाँदी दर्पण; + फ़ेलिंग: नीला → ईंट-लाल; कीटोन: कोई बदलाव नहीं
- कार्बोक्सिलिक अम्ल + Na₂CO₃ या NaHCO₃: बुलबुले (CO₂)
- द्रव्यमान स्पेक्ट्रम: आणविक आयन M⁺ का m/z = Mr
- IR: ऐल्कोहॉल O–H 3230–3550 (चौड़ा); अम्ल O–H 2500–3000 (बहुत चौड़ा); C=O 1680–1750; C=C 1620–1680; C–O 1000–1300 cm⁻¹
- फ़िंगरप्रिंट क्षेत्र: 1500 cm⁻¹ से नीचे
हल किए गए उदाहरण
1. द्रव X ब्रोमीन जल का रंग उड़ा देता है। इससे क्या पता चलता है?
X में C=C द्विबंध है, यानी वह ऐल्कीन है (या उसमें ऐल्कीन समूह है)।
2. तीन ऐल्कोहॉल अम्लीय डाइक्रोमेट के साथ गर्म किए। A और B हरे हुए, C नारंगी रहा। C के बारे में क्या कह सकते हो?
C ऑक्सीकृत नहीं हुआ, तो वह तृतीयक ऐल्कोहॉल है। A और B प्राथमिक या द्वितीयक हैं।
3. दो यौगिकों का सूत्र C₃H₆O है। एक टॉलेन से चाँदी दर्पण देता है। दोनों के नाम बताओ।
दर्पण वाला ऐल्डिहाइड है: प्रोपेनैल (CH₃CH₂CHO)। दूसरा कीटोन है: प्रोपेनोन (CH₃COCH₃)।
4. एक यौगिक का M⁺ शिखर m/z = 60 पर है। IR में 2500–3000 cm⁻¹ पर बहुत चौड़ा और 1715 cm⁻¹ पर तीखा शिखर है। पहचानो।
Mr = 60। बहुत चौड़ा O–H और C=O मतलब कार्बोक्सिलिक अम्ल। CH₃COOH का Mr = 2×12 + 4×1 + 2×16 = 60, तो यह एथेनोइक अम्ल है। जाँच: यह सोडियम कार्बोनेट से बुलबुले देगा।
5. उच्च-विभेदन स्पेक्ट्रोमिति से M⁺ = 44.0262 मिला। यह C₃H₈, CO₂ या C₂H₄O में से कौन है? (H = 1.0078, C = 12.0000, O = 15.9949)
C₃H₈ = 44.0624, CO₂ = 43.9898, C₂H₄O = 24 + 4.0312 + 15.9949 = 44.0261। सबसे पास C₂H₄O (एथेनैल) है।
6. IR में 1720 cm⁻¹ पर तेज़ तीखा शिखर है और 2500 cm⁻¹ से ऊपर कोई चौड़ा शिखर नहीं। टॉलेन से कोई बदलाव नहीं। यौगिक किस प्रकार का है?
C=O है पर O–H नहीं, तो अम्ल या ऐल्कोहॉल नहीं। चाँदी दर्पण नहीं, तो ऐल्डिहाइड नहीं। इसलिए कीटोन (या एस्टर; और जानकारी से तय होगा)।
आम गलतियाँ
- ब्रोमीन जल के लिए "साफ़ हो गया" ऐसे लिखना जैसे कोई बदलाव न हुआ हो। लिखो "रंगहीन हो गया" या "नारंगी से रंगहीन"।
- यह मानना कि तृतीयक ऐल्कोहॉल डाइक्रोमेट को हरा करता है। वह ऑक्सीकृत नहीं होता, रंग नारंगी रहता है।
- द्रव्यमान स्पेक्ट्रम के सबसे ऊँचे शिखर को Mr मान लेना। वह आधार शिखर है; Mr आणविक आयन से मिलता है, जो दाईं ओर का आखिरी मुख्य शिखर है।
- IR में दोनों O–H सीमाएँ मिला देना: ऐल्कोहॉल 3230–3550 cm⁻¹, अम्ल बहुत चौड़ा 2500–3000 cm⁻¹।