समूह 2 के गुणों की प्रवृत्तियाँ
समूह 2 के सभी परमाणु ns² पर ख़त्म होते हैं और दो इलेक्ट्रॉन खोकर M²⁺ आयन बनाते हैं। समूह में नीचे (Mg → Ba):
- परमाणु त्रिज्या बढ़ती है: हर आवर्त में एक नया कोश।
- प्रथम आयनन ऊर्जा घटती है: बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर और भीतरी कोशों से ज़्यादा परिरक्षित, इसलिए आकर्षण कमज़ोर। यह बढ़े हुए नाभिकीय आवेश पर भारी पड़ता है।
- गलनांक सामान्यतः घटता है: धात्विक बंध M²⁺ आयनों और विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों का आकर्षण है। बड़े आयन में वही आवेश बड़े आकार पर फैला है, इसलिए आकर्षण कमज़ोर। Mg की क्रिस्टल संरचना अलग है, इसलिए वह अपवाद है।
- अभिक्रियाशीलता बढ़ती है, क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन आसानी से निकलते हैं।
पानी से अभिक्रिया
ठंडे पानी से: M(s) + 2H₂O(l) → M(OH)₂ + H₂(g)। नीचे जाने पर अभिक्रिया तेज़ होती है। हाइड्रॉक्साइड आयन बनने से घोल क्षारीय (pH लगभग 10–12) हो जाता है।
- मैग्नीशियम ठंडे पानी से बहुत धीरे अभिक्रिया करता है; Mg(OH)₂ मुश्किल से घुलता है।
- भाप में गर्म मैग्नीशियम तेज़ सफ़ेद लौ से जलता है: Mg(s) + H₂O(g) → MgO(s) + H₂(g)।
- कैल्शियम लगातार बुलबुले देता है; स्ट्रॉन्शियम और बेरियम और तेज़।
ऑक्सीकरण अवस्था: धातु 0 से +2 (ऑक्सीकृत); हाइड्रोजन +1 से 0 (अपचयित)।
हाइड्रॉक्साइड और सल्फ़ेट की घुलनशीलता
- हाइड्रॉक्साइड: घुलनशीलता नीचे बढ़ती है। Mg(OH)₂ लगभग अघुलनशील; Ba(OH)₂ अच्छी तरह घुलकर प्रबल क्षारीय घोल देता है।
- सल्फ़ेट: घुलनशीलता नीचे घटती है। MgSO₄ अच्छी तरह घुलता है; BaSO₄ अघुलनशील।
सल्फ़ेट आयन की जाँच
अम्लीकृत बेरियम क्लोराइड घोल डालिए। BaSO₄ का सफ़ेद अवक्षेप सल्फ़ेट बताता है: Ba²⁺(aq) + SO₄²⁻(aq) → BaSO₄(s)। पहले अम्ल (HCl या HNO₃) डालते हैं ताकि कार्बोनेट आयन हट जाएँ, क्योंकि BaCO₃ भी सफ़ेद अवक्षेप देता है। सल्फ़्यूरिक अम्ल कभी नहीं, क्योंकि उसमें ख़ुद सल्फ़ेट है।
समूह 2 के यौगिकों के उपयोग
- Mg(OH)₂: एंटासिड, पेट का अतिरिक्त अम्ल उदासीन करता है। Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O।
- Ca(OH)₂ (बुझा चूना): अम्लीय मिट्टी का pH बढ़ाता है।
- CaO और CaCO₃: धुएँ की गैसों से SO₂ हटाते हैं: CaO + SO₂ → CaSO₃; CaCO₃ + SO₂ → CaSO₃ + CO₂।
- BaSO₄: आंत के एक्स-रे के लिए 'बेरियम मील'। Ba²⁺ विषैला है, पर BaSO₄ अघुलनशील है, इसलिए शरीर में अवशोषित नहीं होता।
- BaCl₂: सल्फ़ेट आयन की जाँच।
- Mg धातु: टाइटेनियम निकालना: TiCl₄ + 2Mg → Ti + 2MgCl₂।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- M(s) + 2H₂O(l) → M(OH)₂ + H₂(g)
- Mg(s) + H₂O(g) → MgO(s) + H₂(g)
- Ba²⁺(aq) + SO₄²⁻(aq) → BaSO₄(s) (सफ़ेद अवक्षेप)
- Mg(OH)₂ + 2HCl → MgCl₂ + 2H₂O
- CaO + SO₂ → CaSO₃; CaCO₃ + SO₂ → CaSO₃ + CO₂
- TiCl₄ + 2Mg → Ti + 2MgCl₂
हल किए गए उदाहरण
1. समझाइए कि बेरियम की प्रथम आयनन ऊर्जा मैग्नीशियम से कम क्यों है।
बेरियम का बाहरी इलेक्ट्रॉन 6s कोश में है, जो Mg के 3s से बहुत दूर है, और ज़्यादा भीतरी कोश उसे परिरक्षित करते हैं। इसलिए नाभिक का आकर्षण कम है और उसे हटाने में कम ऊर्जा लगती है, भले ही प्रोटॉन ज़्यादा हों।
2. कैल्शियम और पानी की अभिक्रिया का समीकरण अवस्था-चिह्नों सहित लिखिए और ऑक्सीकरण अवस्था का बदलाव बताइए।
Ca(s) + 2H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + H₂(g)। Ca: 0 → +2 (ऑक्सीकृत)। H: +1 → 0 (अपचयित)।
3. 0.48 g Mg भाप से पूरी अभिक्रिया करे तो कितने मोल H₂ बनेंगे? (Mg = 24.3)
n(Mg) = 0.48 ÷ 24.3 ≈ 0.0198 mol। Mg : H₂ = 1 : 1, इसलिए n(H₂) ≈ 0.0198 mol।
4. सल्फ़ेट जाँच में बेरियम क्लोराइड को अम्लीकृत क्यों करते हैं?
कार्बोनेट आयन भी सफ़ेद अवक्षेप (BaCO₃) देते हैं। पहले HCl डालने से कार्बोनेट CO₂ बनकर निकल जाता है, फिर सिर्फ़ सल्फ़ेट सफ़ेद अवक्षेप देता है।
5. Ba²⁺ विषैला है, फिर भी BaSO₄ एक्स-रे मील में सुरक्षित क्यों?
BaSO₄ अघुलनशील है, इसलिए लगभग कोई Ba²⁺ घुलकर रक्त में नहीं जाता। यह आंत से गुज़रते हुए एक्स-रे रोकता है और आंत का आकार दिखाता है।
6. 6.4 kg SO₂ हटाने के लिए कितना CaO चाहिए? (CaO = 56.1, SO₂ = 64.1)
n(SO₂) = 6400 ÷ 64.1 ≈ 99.8 mol। 1 : 1 अनुपात, इसलिए CaO = 99.8 × 56.1 ≈ 5600 g = 5.6 kg।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि आयनन ऊर्जा नाभिकीय आवेश घटने से घटती है। आवेश बढ़ता है; दूरी और परिरक्षण भारी पड़ते हैं।
- Mg और ठंडे पानी के लिए MgO लिखना। ठंडे पानी से Mg(OH)₂; MgO भाप से बनता है।
- घुलनशीलता की प्रवृत्तियाँ उलट देना। हाइड्रॉक्साइड नीचे ज़्यादा, सल्फ़ेट नीचे कम।
- बेरियम क्लोराइड जाँच में सल्फ़्यूरिक अम्ल से अम्लीकरण। उससे सल्फ़ेट जुड़ जाता है; HCl या HNO₃ लीजिए।