कच्चे नमक में क्या है, और योजना
समुद्री पानी सुखाकर या सेंधा नमक से बना नमक कच्चा नमक कहलाता है। NaCl के अलावा इसमें Ca²⁺, Mg²⁺ और SO₄²⁻ और कुछ रेत-मिट्टी होती है।
योजना रासायनिक अवक्षेपण है: ऐसा अभिकर्मक डालो जिसका आयन अनचाहे आयन से मिलकर न घुलने वाला ठोस (अवक्षेप) बना दे। फिर उसे छान दो।
- पहले कच्चे नमक को पानी में घोलो और रेत-मिट्टी छान दो।
- फिर सही क्रम में अभिकर्मक डालकर हर अनचाहा आयन हटाओ।
- छानो, उदासीन करो और वाष्पित करो।
सल्फ़ेट, मैग्नीशियम और कैल्शियम हटाना
| डालो | हटाता है | बना ठोस (सफ़ेद) |
|---|---|---|
| BaCl₂ (ज़रूरत से थोड़ा ज़्यादा) | SO₄²⁻ | BaSO₄ |
| NaOH | Mg²⁺ | Mg(OH)₂ |
| Na₂CO₃ | Ca²⁺ और बचा Ba²⁺ | CaCO₃ और BaCO₃ |
आयनिक समीकरण: Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄, Mg²⁺ + 2OH⁻ → Mg(OH)₂, Ca²⁺ + CO₃²⁻ → CaCO₃।
यह क्रम क्यों? Na₂CO₃ को BaCl₂ के बाद आना है। अगर Ba²⁺ आख़िर में डाला तो बचे हुए Ba²⁺ को हटाने वाला कुछ नहीं बचता और वह नमक में रह जाता है। बेरियम आयन ज़हरीले होते हैं, इसलिए यह ज़रूरी है।
छानना, उदासीन करना और रवे बनाना
सारे ठोस बन जाने पर एक बार छानो। छना द्रव (निस्यंद) में हमारे अभिकर्मकों का थोड़ा OH⁻ और CO₃²⁻ बचा है। तनु HCl बूँद-बूँद डालो जब तक द्रव ठीक उदासीन न हो जाए: OH⁻ + H⁺ → H₂O और CO₃²⁻ + 2H⁺ → H₂O + CO₂ (छोटे बुलबुले दिखते हैं)। HCl सिर्फ़ Cl⁻ और H⁺ जोड़ता है, जो नुक़सान नहीं करते।
अंत में द्रव को वाष्पन-प्याली में तब तक गरम करो जब तक रवे बनने न लगें, फिर ठंडा होने दो। पूरा सुखाओ मत, नहीं तो छींटे उड़ते हैं। सफ़ेद रवे शुद्ध NaCl हैं।
जाँच: थोड़ा उत्पाद घोलकर BaCl₂ और Na₂CO₃ डालो। सफ़ेद धुँधलापन न आए तो आयन हट चुके हैं।
भाग दो: सल्फ़र की ऑक्सीकरण संख्या बदलना
ऑक्सीकरण संख्या बताती है कि यौगिक में परमाणु ने कितने इलेक्ट्रॉन खोए (धन) या पाए (ऋण) हैं। सल्फ़र की रेंज बहुत चौड़ी है:
| पदार्थ | S की ऑक्सीकरण संख्या |
|---|---|
| H₂S, हाइड्रोजन सल्फ़ाइड | −2 |
| S, सल्फ़र | 0 |
| SO₂, सल्फ़र डाइऑक्साइड | +4 |
| H₂SO₄, सल्फ़्यूरिक अम्ल | +6 |
ऊपर जाना = उपचयन (इलेक्ट्रॉन खोना), नीचे जाना = अपचयन।
सल्फ़र के रूपांतरण जो आप चला सकते हैं
- 0 → +4: S + O₂ → SO₂ (सल्फ़र नीली लौ से जलता है)। ऑक्सीजन सल्फ़र को उपचयित करती है।
- +4 → +6: 2SO₂ + O₂ → 2SO₃ (कारख़ाने में V₂O₅ उत्प्रेरक से); SO₃ + H₂O → H₂SO₄।
- +6 → +4: Cu + 2H₂SO₄ (गरम, सांद्र) → CuSO₄ + SO₂ + 2H₂O। यहाँ अम्ल अपचयित होता है।
- −2 और +4 → 0: 2H₂S + SO₂ → 3S + 2H₂O। गैसों के मिश्रण से पीला ठोस सल्फ़र बनता है।
- SO₂ की जाँच: वह अम्लीय बैंगनी KMnO₄ को रंगहीन कर देती है, क्योंकि SO₂ अपचायक है।
सुरक्षा: SO₂ और H₂S गैसें हानिकारक हैं। ये प्रयोग धूम-कक्ष में, शिक्षक के प्रदर्शन के रूप में या सूक्ष्म-मात्रा में करो।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
चरण 6 से पहले अनुमान लगाओ: अगर Na₂CO₃ पहले और BaCl₂ आख़िर में डालूँ तो कौन-सा आयन बचेगा? फिर करके देखो। घर पर: एक गिलास पानी में 2 चम्मच मोटा नमक घोलो और बैठने दो। साफ़ हिस्सा साफ़ कपड़े से छानकर निकालो। थोड़ा द्रव स्टील के ढक्कन पर (बड़े की मदद से) गरम करो और रवों को खाने के नमक से मिलाओ। देखो कितनी मिट्टी पीछे रह गई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄ (सफ़ेद ठोस)
- Mg²⁺ + 2OH⁻ → Mg(OH)₂ (सफ़ेद ठोस)
- Ca²⁺ + CO₃²⁻ → CaCO₃ और Ba²⁺ + CO₃²⁻ → BaCO₃
- OH⁻ + H⁺ → H₂O और CO₃²⁻ + 2H⁺ → H₂O + CO₂
- S की ऑक्सीकरण संख्या: H₂S −2, S 0, SO₂ +4, H₂SO₄ +6; ऊपर = उपचयन, नीचे = अपचयन
हल किए गए उदाहरण
1. कच्चे नमक के एक घोल में 0.96 g सल्फ़ेट आयन (SO₄²⁻, 96 g/mol) हैं। अधिक BaCl₂ से कितना BaSO₄ (233 g/mol) बनेगा?
सल्फ़ेट के मोल = 0.96 ÷ 96 = 0.01 mol। Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄ में अनुपात 1 : 1 है, इसलिए 0.01 mol BaSO₄। द्रव्यमान = 0.01 × 233 = 2.33 g।
2. Mg²⁺ को कौन-सा अभिकर्मक हटाता है और ठोस क्या है? आयनिक समीकरण लिखो।
NaOH, Mg²⁺ को हटाता है। ठोस Mg(OH)₂ है। Mg²⁺ + 2OH⁻ → Mg(OH)₂।
3. एक विद्यार्थी ने BaCl₂ से पहले Na₂CO₃ डाल दिया। नमक में कौन-सी अशुद्धि बचेगी और क्यों?
बचा हुआ Ba²⁺ रह जाएगा। बेरियम डालने से पहले कार्बोनेट Ca²⁺ पर ख़र्च हो चुका था, इसलिए अतिरिक्त Ba²⁺ हटाने को कुछ नहीं बचा।
4. SO₂ और H₂SO₄ में सल्फ़र की ऑक्सीकरण संख्या निकालो।
SO₂: S + 2(−2) = 0, इसलिए S = +4। H₂SO₄: 2(+1) + S + 4(−2) = 0, इसलिए S = +6।
आम गलतियाँ
- BaCl₂ से पहले Na₂CO₃ डालना, जिससे नमक में बेरियम आयन बच जाते हैं।
- हर अभिकर्मक के बाद छानना। सारे ठोस बनने के बाद एक बार छानना काफ़ी है।
- तनु HCl छोड़ देना, तब नमक में OH⁻ और CO₃²⁻ रह जाते हैं और स्वाद कड़वा होता है।
- उपचयन और अपचयन उलझाना: ऑक्सीकरण संख्या की सीढ़ी पर ऊपर जाना (−2 से +6) उपचयन है।