सल्फर: तत्व
सल्फर (गंधक) एक अधातु है। संकेत S, परमाणु संख्या 16, इसलिए इलेक्ट्रॉन विन्यास 2, 8, 6। यह समूह 16 (ऑक्सीजन परिवार या कैल्कोजन: O, S, Se, Te, Po) और आवर्त 3 में है।
- यह पीला, भंगुर ठोस है। पानी में नहीं घुलता, पर कार्बन डाइसल्फाइड में घुल जाता है।
- ज्वालामुखियों के पास मुक्त रूप में और धातु सल्फाइड तथा जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) में मिलता है। आज ज़्यादातर सल्फर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से निकाला जाता है।
- आम ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: −2 (H₂S), +4 (SO₂), +6 (SO₃, H₂SO₄)।
अपररूप (Allotropes)
एक ही तत्व के अलग-अलग रूप अपररूप कहलाते हैं। ठोस सल्फर S₈ छल्लों (मुकुट आकार) से बना है। विषमलंबाक्ष (rhombic) सल्फर कमरे के ताप पर स्थायी है। लगभग 96 °C से ऊपर छल्ले अलग ढंग से जमते हैं और सुई जैसा एकनताक्ष (monoclinic) सल्फर बनता है। उबलते गंधक को ठंडे पानी में डालने पर रबड़ जैसा सुघट्य (plastic) सल्फर बनता है।
सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड
सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) तब बनती है जब सल्फर या सल्फाइड अयस्क जलते हैं: S + O₂ → SO₂। यह रंगहीन, दम घोंटने वाली गंध की गैस है, और इसका अणु मुड़ा हुआ है।
- अम्लीय ऑक्साइड: SO₂ + H₂O ⇌ H₂SO₃ (सल्फ्यूरस अम्ल)। नीला लिटमस लाल करती है।
- विरंजन: नमी में SO₂ रंग से ऑक्सीजन छीनकर (अपचयन से) रंग उड़ाती है। हवा में रंग धीरे-धीरे लौट सकता है।
- अपचायक: बैंगनी अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट को रंगहीन कर देती है। यह SO₂ की पहचान है।
- उपयोग: सल्फ्यूरिक अम्ल बनाना, सूखे मेवे और जूस को सुरक्षित रखना, ऊन और कागज़ का विरंजन।
- नुकसान: कोयला और तेल जलने से निकली SO₂ अम्ल वर्षा बनाती है, जो फेफड़ों, पौधों, झीलों और संगमरमर को नुकसान पहुँचाती है।
हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) ज़हरीली गैस है जिसकी गंध सड़े अंडे जैसी है। सल्फाइड पर अम्ल डालने से बनती है: FeS + 2HCl → FeCl₂ + H₂S। यह लेड ऐसीटेट कागज़ को काला (PbS) कर देती है और अपचायक है।
सल्फ्यूरिक अम्ल और संपर्क विधि
सल्फ्यूरिक अम्ल संपर्क विधि से बनता है:
- सल्फर जलाओ: S + O₂ → SO₂।
- ऑक्सीकरण: 2SO₂ + O₂ ⇌ 2SO₃। इसके लिए V₂O₅ उत्प्रेरक, लगभग 450 °C और 1–2 atm दाब चाहिए। अभिक्रिया उत्क्रमणीय है, इसलिए ताप ऐसा चुना जाता है कि गति भी ठीक रहे और उत्पाद भी अच्छा मिले।
- SO₃ को सांद्र अम्ल में सोखकर ओलियम बनाओ: SO₃ + H₂SO₄ → H₂S₂O₇। (SO₃ सीधे पानी में नहीं डालते, क्योंकि अम्ल की धुंध बन जाती है।)
- पानी मिलाओ: H₂S₂O₇ + H₂O → 2H₂SO₄।
सल्फ्यूरिक अम्ल के गुण
- तनु होने पर प्रबल अम्ल: धातुओं (Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂), क्षारकों और कार्बोनेट से अभिक्रिया।
- सांद्र होने पर निर्जलीकारक: चीनी से पानी खींच लेता है और काला कार्बन बचता है (C₁₂H₂₂O₁₁ → 12C + 11H₂O)। गैसों को सुखाने में भी काम आता है।
- गर्म और सांद्र होने पर ऑक्सीकारक: ताँबे से अभिक्रिया करके SO₂ देता है।
- सावधानी: पानी में मिलाने पर बहुत गर्मी निकलती है। हमेशा अम्ल को पानी में धीरे-धीरे डालो, पानी को अम्ल में कभी नहीं।
उपयोग: खाद, डिटर्जेंट, रंग, बैटरी, धातु साफ़ करना।
सल्फेट आयन का परीक्षण
घोल में सल्फेट (SO₄²⁻) जाँचने के लिए:
- तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालो (इससे कार्बोनेट और सल्फाइट हट जाते हैं, जो भी सफ़ेद ठोस दे सकते थे)।
- बेरियम क्लोराइड (या बेरियम नाइट्रेट) घोल डालो।
- सफ़ेद अवक्षेप बेरियम सल्फेट का बने तो सल्फेट है: Ba²⁺ + SO₄²⁻ → BaSO₄↓।
BaSO₄ अम्ल में नहीं घुलता। डॉक्टर एक्स-रे के लिए इसे 'बेरियम मील' के रूप में देते हैं, क्योंकि यह इतना अघुलनशील है कि शरीर में सोखा नहीं जाता।
सल्फर के यौगिक एक-दूसरे में कैसे बदलते हैं
सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या पर नज़र रखो:
H₂S (−2) → S (0) → SO₂ (+4) → SO₃ (+6) → H₂SO₄ (+6) → सल्फेट लवण (+6)
- दाईं ओर जाना = ऑक्सीकरण (ऑक्सीजन जुड़ना या हाइड्रोजन हटना)।
- 2H₂S + SO₂ → 3S + 2H₂O: यहाँ H₂S का ऑक्सीकरण और SO₂ का अपचयन होता है, दोनों सल्फर बनते हैं।
- धातु सल्फाइड को हवा में भूनने से SO₂ मिलती है: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂।
करके देखो: घर पर अम्ल बिलकुल मत छूना! 3D का चरण 4 और यह तालिका देखकर अंदाज़ा लगाओ: चीनी से सारा पानी निकल जाए तो क्या बचेगा? (उत्तर: काला कार्बन।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- S + O₂ → SO₂
- 2SO₂ + O₂ ⇌ 2SO₃ (V₂O₅, 450 °C)
- SO₃ + H₂SO₄ → H₂S₂O₇; H₂S₂O₇ + H₂O → 2H₂SO₄
- SO₂ + H₂O ⇌ H₂SO₃
- BaCl₂ + Na₂SO₄ → BaSO₄↓ (सफ़ेद) + 2NaCl
- FeS + 2HCl → FeCl₂ + H₂S
- C₁₂H₂₂O₁₁ → 12C + 11H₂O (सांद्र H₂SO₄)
हल किए गए उदाहरण
1. सल्फर का इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखो और बताओ यह समूह 16 में क्यों है।
Z = 16, इसलिए 2, 8, 6। बाहरी कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन, ऑक्सीजन (2, 6) जैसे, इसलिए दोनों समूह 16 में।
2. H₂SO₄ में S की ऑक्सीकरण संख्या क्या है?
H = +1, O = −2। 2(+1) + S + 4(−2) = 0 → S − 6 = 0 → S = +6।
3. 64 g सल्फर पूरा जलने पर कितने मोल SO₂ बनेगी? (S = 32 g/mol)
S के मोल = 64 ÷ 32 = 2 mol। S + O₂ → SO₂ में अनुपात 1 : 1, तो 2 mol SO₂ (= 2 × 64 = 128 g)।
4. घोल में बेरियम क्लोराइड डालने पर सफ़ेद ठोस बना। क्या यह पक्का सल्फेट है?
अभी नहीं। कार्बोनेट भी सफ़ेद BaCO₃ देता है। तनु HCl डालो: BaCO₃ बुलबुलों के साथ घुल जाता है, BaSO₄ बना रहता है। बना रहे तो सल्फेट है।
5. संपर्क विधि में SO₃ को पानी की जगह सल्फ्यूरिक अम्ल में क्यों घोलते हैं?
SO₃ पानी से बहुत तेज़ी से क्रिया कर अम्ल की धुंध बनाती है जो उड़ जाती है। H₂SO₄ में घोलकर ओलियम बनाना आसान है, फिर उसे सुरक्षित रूप से पतला करते हैं।
6. 1.6 टन सल्फर से कितना सल्फ्यूरिक अम्ल बन सकता है? (S = 32, H₂SO₄ = 98)
हर S परमाणु एक H₂SO₄ में जाता है। 32 t S → 98 t अम्ल, तो 1.6 t → 1.6 × 98 ÷ 32 = 4.9 टन H₂SO₄।
आम गलतियाँ
- सांद्र अम्ल में पानी डालना। वह उबलकर छींटे मारता है। हमेशा अम्ल को पानी में डालो।
- SO₂ और क्लोरीन के विरंजन को एक समझना। SO₂ अपचयन से रंग उड़ाती है और रंग लौट सकता है; क्लोरीन ऑक्सीकरण से, जो स्थायी है।
- सल्फेट परीक्षण में BaCl₂ से पहले HCl न डालना, जिससे कार्बोनेट को सल्फेट समझ लिया जाता है।
- ठोस सल्फर को सिर्फ़ S लिखकर भूल जाना कि अपररूपों में वह S₈ छल्ले हैं।