Russia 9 класс Chemistry (advanced)
अध्याय: 5
1. Substance and chemical reaction
Atom properties · Structure of substance · Chemical thermodynamics · Kinetics · Chemical equilibrium · Redox reactions · Electrolytic dissociation · Ion exchange and hydrolysis
- परमाणु की संरचना – परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा, भारी और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर तय कोशों K, L, M, N में घूमते हैं। प्रोटॉन की संख्या (Z) से तत्व तय होता है; प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या (A)। बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजकता तय करते हैं।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।
- अभिक्रिया की दर – अभिक्रिया की दर बताती है कि अभिकारक कितनी जल्दी ख़र्च होते हैं या उत्पाद कितनी जल्दी बनते हैं। दर = मात्रा में परिवर्तन ÷ समय। कण तभी अभिक्रिया करते हैं जब वे कम से कम सक्रियण ऊर्जा से टकराएँ। ज़्यादा बार और ज़्यादा ऊर्जा वाली टक्करें = तेज़ दर। सांद्रता (या गैस का दाब), ताप, पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ाने या उत्प्रेरक डालने से अभिक्रिया तेज़ होती है। उत्प्रेरक कम सक्रियण ऊर्जा वाला रास्ता देता है और ख़ुद ख़र्च नहीं होता।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- उपचयन और अपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता – ऑक्सीजन पाना (या हाइड्रोजन खोना) उपचयन है; ऑक्सीजन खोना (या हाइड्रोजन पाना) अपचयन है। दोनों साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। ऑक्सीजन देने वाला उपचायक, लेने वाला अपचायक। रोज़मर्रा में उपचयन से संक्षारण (जैसे लोहे पर जंग) और विकृतगंधिता (तेल-घी वाले खाने का बासी होना) होते हैं।
- विद्युत अपघट्य और वैद्युत अपघटनी वियोजन – विद्युत अपघट्य (electrolyte) वह पदार्थ है जो पानी में घुलने (या पिघलने) पर आज़ाद घूमने वाले आयनों में टूट जाता है, इसलिए उसका विलयन बिजली बहाता है। चीनी जैसे अनपघट्य (non-electrolyte) बिना आवेश वाले अणु ही रहते हैं और बिजली नहीं बहाते। प्रबल अपघट्य लगभग पूरे टूटते हैं, दुर्बल थोड़े ही। वियोजन की मात्रा α = टूटी इकाइयाँ ÷ कुल इकाइयाँ।
- आयनिक समीकरण और आयन-विनिमय अभिक्रियाएँ – लवण, प्रबल अम्ल और क्षार पानी में आयनों में टूट जाते हैं: ये विद्युत अपघट्य हैं। दो ऐसे विलयन मिलाने पर अभिक्रिया तभी होती है जब कुछ आयन अवक्षेप, गैस या जल बनकर विलयन से निकल जाएँ। पूर्ण आयनिक समीकरण हर आयन दिखाता है; न बदलने वाले (दर्शक) आयन काटने पर नेट आयनिक समीकरण मिलता है, जैसे Ag⁺ + Cl⁻ → AgCl↓। दोनों ओर परमाणु और आवेश बराबर होने चाहिए।
2. Non-metals and their compounds
General properties of non-metals · Halogens · Oxygen and sulfur · Nitrogen and phosphorus · Carbon, silicon, boron · First organic substances
- हैलोजन: समूह 17 के तत्व – फ़्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन और एस्टेटीन आवर्त सारणी के समूह 17 में हैं, इन्हें हैलोजन कहते हैं। हर परमाणु के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह 1 इलेक्ट्रॉन लेकर हैलाइड आयन (X⁻) बनाता है। समूह में नीचे जाने पर परमाणु बड़े होते हैं, रंग गहरा होता है, गलनांक-क्वथनांक बढ़ते हैं और अभिक्रियाशीलता घटती है। अधिक अभिक्रियाशील हैलोजन कम अभिक्रियाशील हैलोजन को उसके लवण से हटा देता है।
- सल्फर (गंधक) और उसके यौगिक – सल्फर (S, परमाणु संख्या 16, इलेक्ट्रॉन 2, 8, 6) एक पीली अधातु है जो ऑक्सीजन के साथ समूह 16 में है। ठोस सल्फर S₈ छल्लों से बना है और इसके विषमलंबाक्ष तथा एकनताक्ष अपररूप हैं। यह जलकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) बनाता है, जो विरंजन करती है और अम्ल वर्षा का कारण है। संपर्क विधि में SO₂ को V₂O₅ उत्प्रेरक पर SO₃ बनाया जाता है और फिर सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)। यह प्रबल अम्ल है, निर्जलीकारक और ऑक्सीकारक भी। H₂S की गंध सड़े अंडे जैसी होती है। सल्फेट आयन की पहचान: BaCl₂ डालने पर सफ़ेद BaSO₄ अवक्षेप, जो तनु HCl में नहीं घुलता।
- नाइट्रोजन: तत्व, उसके यौगिक और नाइट्रोजन चक्र – हवा का 78% हिस्सा नाइट्रोजन (N₂) है, पर इसका तिहरा बंधन इतना मज़बूत है कि ज़्यादातर जीव इसे सीधे इस्तेमाल नहीं कर पाते। जड़ की गाँठों के जीवाणु, बिजली और हेबर प्रक्रम इसे अमोनिया में बदलते हैं (स्थिरीकरण)। अमोनिया से नाइट्रिक अम्ल और उर्वरक बनते हैं। प्रकृति में नाइट्रोजन एक चक्र में घूमती है: स्थिरीकरण → नाइट्रीकरण → पौधे → जानवर → अपघटन (अमोनीकरण) → विनाइट्रीकरण से वापस हवा में।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
3. Metals and their compounds
General properties of metals · Metals of A-groups · Metals of B-groups
- संक्षारण, उसका बचाव और मिश्रातु – संक्षारण धातु का हवा, नमी या रसायनों से धीरे-धीरे खराब होना है। लोहे पर जंग तभी लगती है जब हवा (ऑक्सीजन) और पानी दोनों हों; जंग जलयुक्त आयरन ऑक्साइड है। इसे पेंट, तेल, यशदलेपन, क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाकर रोका जाता है। मिश्रातु किसी धातु का दूसरी धातुओं या अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; यह शुद्ध धातु से प्रायः अधिक कठोर, मज़बूत और संक्षारण-रोधी होता है।
- धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण – धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।
- आयनिक यौगिक: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं – धातु का परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन अधातु के परमाणु को दे देता है ताकि दोनों का बाहरी कोश पूरा (अष्टक) हो जाए। धातु धनायन बनती है, अधातु ऋणायन, और दोनों के बीच का प्रबल आकर्षण आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध है। आयनिक यौगिक कठोर क्रिस्टलीय ठोस होते हैं, उच्च गलनांक वाले, पानी में घुलनशील, और केवल पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालक।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- संक्रमण धातुएँ: मूल गुण – संक्रमण धातुएँ आवर्त सारणी के बीच वाले भाग (d-ब्लॉक) के तत्व हैं, जैसे लोहा, ताँबा, निकेल, क्रोमियम, मैंगनीज़, कोबाल्ट, टाइटेनियम, चाँदी और सोना। सोडियम जैसी समूह 1 की धातुओं की तुलना में इनका गलनांक बहुत ऊँचा, घनत्व ज़्यादा होता है, और ये कठोर व मज़बूत होती हैं; पानी और ऑक्सीजन से बहुत धीरे क्रिया करती हैं। ये अलग-अलग आवेश वाले आयन बनाती हैं (Fe²⁺ और Fe³⁺, Cu⁺ और Cu²⁺), रंगीन यौगिक बनाती हैं और अच्छे उत्प्रेरक हैं। इनके परमाणु अंदर का d उपकोश भरते हैं; क्रोमियम और ताँबा 4s से एक इलेक्ट्रॉन 3d में ले लेते हैं ताकि 3d आधा भरा या पूरा भरा हो। इनके कई आयन पानी या अमोनिया के साथ संकुल आयन भी बनाते हैं।
4. Chemistry and the environment
Materials and green chemistry
- हरित रसायन (Green Chemistry) – हरित रसायन का अर्थ है ऐसे रासायनिक उत्पाद और प्रक्रियाएँ बनाना जो कम अपशिष्ट दें, सुरक्षित पदार्थ लें, ऊर्जा बचाएँ और नवीकरणीय कच्चा माल इस्तेमाल करें। मुख्य उपाय: ऊँची परमाणु अर्थव्यवस्था, उत्प्रेरक, पानी जैसे सुरक्षित विलायक, नवीकरणीय कच्चा माल, और सुरक्षित रूप से टूटने वाले उत्पाद। जीवन-चक्र मूल्यांकन कच्चे माल से निपटान तक उत्पाद का असर जाँचता है।
5. Review of grades 8–9
Systematisation
जल्द आ रहा है