संक्षारण क्या है?
संक्षारण धातु की सतह का आसपास की हवा, नमी, अम्ल या गैसों से अभिक्रिया करके धीरे-धीरे खराब होना है। उदाहरण: चाँदी की चीज़ें काली पड़ती हैं (हवा के H2S से सिल्वर सल्फ़ाइड की परत), कॉपर पर हरी परत (नम CO2 से क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट), और लोहे पर लाल-भूरी परतदार जंग (जलयुक्त आयरन(III) ऑक्साइड, Fe2O3·xH2O)। पुल, जहाज़ और पाइपलाइन की मरम्मत में हर साल बहुत पैसा संक्षारण के कारण लगता है।
लोहे पर जंग लगना: तीन परखनली वाला प्रयोग
तीन परखनलियों में साफ़ कीलें रखो। A: साधारण नल का पानी (हवा + पानी)। B: उबला आसुत जल और ऊपर तेल की परत (उबालने से घुली हवा निकलती है; तेल नई हवा रोकता है)। C: सूखी हवा और निर्जल कैल्शियम क्लोराइड, जो नमी सोख लेता है। कुछ दिन बाद केवल A की कील पर जंग लगती है। निष्कर्ष: जंग के लिए हवा और पानी दोनों ज़रूरी हैं। नमकीन पानी जंग को तेज़ करता है, इसलिए समुद्र किनारे गाड़ियाँ-जहाज़ जल्दी जंग खाते हैं।
संक्षारण से बचाव
- पेंट, तेल, ग्रीस लगाना: सतह से हवा-पानी दूर रखते हैं।
- यशदलेपन (जस्तीकरण): लोहे या स्टील पर ज़िंक की पतली परत। ज़िंक अधिक सक्रिय है, इसलिए खरोंच लगने पर भी पहले वही संक्षारित होकर लोहे को बचाता है।
- क्रोमियम लेपन / विद्युत लेपन: क्रोमियम या टिन की पतली चमकदार परत (खाने के डिब्बों पर टिन)।
- ऐनोडीकरण: विद्युत अपघटन से एल्युमिनियम की प्राकृतिक ऑक्साइड परत को मोटा करना, जिससे वह और संक्षारण-रोधी हो (और रंगा भी जा सके)।
- मिश्रातु बनाना: लोहे में निकेल और क्रोमियम मिलाकर स्टेनलेस स्टील, जिस पर जंग नहीं लगती।
मिश्रातु
मिश्रातु दो या अधिक धातुओं, या धातु और अधातु का समांगी मिश्रण है। मुख्य धातु को पिघलाकर उसमें दूसरे तत्व घोले जाते हैं, फिर ठंडा किया जाता है। यदि एक धातु पारा हो तो मिश्रातु अमलगम कहलाता है।
- स्टील: लोहा + थोड़ा कार्बन (लगभग 0.05%) — कठोर और मज़बूत।
- स्टेनलेस स्टील: लोहा + निकेल + क्रोमियम — जंग नहीं लगती।
- पीतल: कॉपर + ज़िंक। काँसा: कॉपर + टिन।
- सोल्डर (टाँका): लेड + टिन — कम गलनांक, बिजली के तार जोड़ने में।
- सोने के गहने: 24 कैरेट शुद्ध सोना बहुत नरम है, इसलिए 22 कैरेट (22 भाग सोना, 2 भाग कॉपर या चाँदी) इस्तेमाल होता है।
मिश्रातु अलग व्यवहार क्यों करते हैं
शुद्ध धातु में एक जैसे परमाणुओं की सीधी पंक्तियाँ एक-दूसरे पर फिसलती हैं, इसलिए वह नरम है। मिश्रातु में अलग आकार के परमाणु फिसलन रोकते हैं, इसलिए वह कठोर है। मिश्रातु प्रायः शुद्ध धातु से कम विद्युत चालक और कम गलनांक वाले होते हैं (जैसे सोल्डर, और हीटर की कुंडली में नाइक्रोम)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जंग: लोहा + ऑक्सीजन + पानी → Fe₂O₃·xH₂O
- जंग के लिए हवा (O₂) और पानी दोनों ज़रूरी
- यशदलेपन = लोहे पर ज़िंक की परत; ऐनोडीकरण = एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड परत
- पीतल = Cu + Zn; काँसा = Cu + Sn; सोल्डर = Pb + Sn; स्टेनलेस स्टील = Fe + Ni + Cr
- अमलगम = पारे वाला मिश्रातु; 22 कैरेट = 24 में से 22 भाग सोना
हल किए गए उदाहरण
1. उबले पानी और तेल वाली परखनली B की कील पर जंग क्यों नहीं लगती?
उबालने से घुली हवा निकल जाती है और तेल की परत नई हवा घुलने नहीं देती। पानी है पर ऑक्सीजन नहीं, इसलिए जंग नहीं।
2. जस्तीकृत बाल्टी पर खरोंच लगी। क्या वहाँ जंग लगेगी? क्यों?
जल्दी नहीं। ज़िंक लोहे से अधिक सक्रिय है, इसलिए खरोंच के आसपास का ज़िंक पहले अभिक्रिया करके लोहे को बचाता है।
3. 22 कैरेट सोने में कितने प्रतिशत शुद्ध सोना है?
22/24 × 100 = 91.67% सोना। बाकी लगभग 8.33% कॉपर या चाँदी, जो इसे कठोर बनाते हैं।
4. बिजली के तार जोड़ने में सोल्डर क्यों इस्तेमाल होता है?
सोल्डर (लेड + टिन) कम ताप पर पिघलता है, इसलिए सोल्डरिंग आयरन से आसानी से पिघलकर तारों को नुकसान पहुँचाए बिना मज़बूत, चालक जोड़ बनाता है।
आम गलतियाँ
- कहना कि जंग सिर्फ़ पानी से लगती है: हवा (ऑक्सीजन) भी ज़रूरी है।
- हर संक्षारण को 'जंग' कहना: जंग केवल लोहे पर; कॉपर-चाँदी पर परत चढ़ती है।
- मिश्रातु को यौगिक मानना: यह मिश्रण है, इसकी संरचना बदल सकती है।
- पीतल (Cu + Zn) और काँसा (Cu + Sn) को मिला देना।