धातुओं की प्राप्ति: खनिज और अयस्क
भू-पर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है; समुद्र के पानी में भी NaCl, MgCl2 जैसे लवण हैं। प्रकृति में मिलने वाले धातु यौगिक खनिज हैं। जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। अयस्क में मिली रेत-मिट्टी गैंग (आधात्री) है।
- कम सक्रिय धातुएँ (सोना, चाँदी, प्लैटिनम, कुछ कॉपर) मुक्त अवस्था में मिलती हैं।
- मध्यम धातुएँ (Zn, Fe, Pb) ज़्यादातर ऑक्साइड, सल्फ़ाइड या कार्बोनेट के रूप में।
- ऊपर की धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al) इतनी सक्रिय हैं कि कभी मुक्त नहीं मिलतीं; लवण के रूप में मिलती हैं।
अयस्कों का सांद्रण (समृद्धीकरण)
अयस्क से गैंग हटाना सांद्रण है। तरीका इस पर निर्भर है कि अयस्क और गैंग में क्या अंतर है: पानी से धुलाई (भारी अयस्क नीचे बैठता है), चुंबकीय पृथक्करण (चुंबकीय लौह अयस्क), और झाग प्लवन (सल्फ़ाइड अयस्क तेल के झाग से चिपकता है)।
सक्रियता श्रेणी में नीचे, बीच और ऊपर की धातुओं का निष्कर्षण
कम सक्रिय: केवल गरम करके
2HgS + 3O2 → 2HgO + 2SO2; 2HgO → 2Hg + O2। कॉपर: 2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2; 2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2।
मध्यम सक्रिय: भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन
ऑक्साइड से धातु निकालना आसान है, इसलिए पहले अयस्क को ऑक्साइड बनाते हैं।
- भर्जन — सल्फ़ाइड अयस्क को अधिक वायु में तेज़ गरम करना: 2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2।
- निस्तापन — कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में तेज़ गरम करना: ZnCO3 → ZnO + CO2।
- कार्बन (कोक) से अपचयन: ZnO + C → Zn + CO।
- अधिक सक्रिय धातु भी अपचायक बन सकती है। थर्मिट अभिक्रिया Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 इतनी गर्मी देती है कि लोहा पिघला हुआ निकलता है; रेल की पटरियाँ जोड़ने में काम आती है।
अधिक सक्रिय: विद्युत अपघटन
K, Na, Ca, Mg, Al ऑक्सीजन को कार्बन से ज़्यादा मज़बूती से पकड़ते हैं, इसलिए कार्बन इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। इन्हें गलित क्लोराइड/ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त करते हैं। गलित NaCl में सोडियम कैथोड पर (Na+ + e− → Na) और क्लोरीन ऐनोड पर (2Cl− → Cl2 + 2e−) मिलती है।
धातुओं का परिष्करण: विद्युत अपघटनी परिष्करण
अपचयन से मिली धातु अभी अशुद्ध है। विद्युत अपघटनी परिष्करण (जैसे कॉपर) में अशुद्ध धातु ऐनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी कैथोड, और उसी धातु के लवण का विलयन (अम्लीय CuSO4) विद्युत अपघट्य होता है। धारा चलाने पर ऐनोड से धातु घुलती है और उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर जमती है। घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में रहती हैं; अघुलनशील ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक बनकर बैठती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भर्जन (सल्फ़ाइड, अधिक वायु): 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂
- निस्तापन (कार्बोनेट, सीमित वायु): ZnCO₃ → ZnO + CO₂
- कार्बन से अपचयन: ZnO + C → Zn + CO
- थर्मिट: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ + ऊष्मा
- गलित NaCl का विद्युत अपघटन: कैथोड Na⁺ + e⁻ → Na; ऐनोड 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻
- परिष्करण: अशुद्ध धातु = ऐनोड, शुद्ध धातु = कैथोड, उसी धातु का लवण विलयन = विद्युत अपघट्य
हल किए गए उदाहरण
1. गैलेना (PbS) सल्फ़ाइड अयस्क है। इसे ऑक्साइड में बदलने का चरण और अभिक्रिया लिखो।
भर्जन: PbS को अधिक वायु में तेज़ गरम करना। 2PbS + 3O₂ → 2PbO + 2SO₂। फिर ऑक्साइड को कार्बन से अपचयित करते हैं।
2. एल्युमिनियम को उसके ऑक्साइड को कार्बन के साथ गरम करके क्यों नहीं पाया जा सकता?
एल्युमिनियम कार्बन से अधिक सक्रिय है और ऑक्सीजन को ज़्यादा मज़बूती से पकड़ता है। कार्बन Al₂O₃ से ऑक्सीजन नहीं छीन सकता, इसलिए गलित Al₂O₃ का विद्युत अपघटन करते हैं।
3. कॉपर के परिष्करण में ऐनोड, कैथोड और विद्युत अपघट्य क्या हैं?
ऐनोड: अशुद्ध कॉपर। कैथोड: शुद्ध कॉपर की पतली पट्टी। विद्युत अपघट्य: अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन।
4. सिनेबार से केवल गरम करके पारा कैसे मिलता है?
HgS का भर्जन: 2HgS + 3O₂ → 2HgO + 2SO₂। और गरम करने पर HgO टूटता है: 2HgO → 2Hg + O₂। पारा श्रेणी में नीचे है, इसलिए गर्मी काफ़ी है।
आम गलतियाँ
- भर्जन और निस्तापन मिला देना: भर्जन = सल्फ़ाइड, अधिक वायु; निस्तापन = कार्बोनेट, सीमित वायु।
- कहना कि सोडियम Na₂O को कार्बन से अपचयित करके मिलता है: बहुत सक्रिय धातुओं के लिए विद्युत अपघटन चाहिए।
- परिष्करण में शुद्ध धातु को ऐनोड बनाना: शुद्ध धातु हमेशा कैथोड है।
- हर खनिज को अयस्क कहना: केवल वही खनिज अयस्क हैं जिनसे धातु लाभ के साथ निकले।