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धातुओं की प्राप्ति और निष्कर्षण

धातुएँ ज़्यादातर भू-पर्पटी में यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं; जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। निष्कर्षण के तीन चरण: सांद्रण (गैंग हटाना), कच्ची धातु पाना (भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन या विद्युत अपघटन, जो सक्रियता श्रेणी से तय होता है), और परिष्करण (आम तौर पर विद्युत अपघटनी)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ज़मीन से निकला यह टुकड़ा अयस्क है: काम का धातु यौगिक, जिसमें गैंग यानी रेत, मिट्टी, पत्थर मिले हैं।
  2. पहला कदम सांद्रण। टुकड़ा पीसा जाता है और गैंग को धोकर, झाग में तैराकर या चुंबक से हटाया जाता है। भूरे कण गिर जाते हैं।
  3. अब गरम करो। सल्फ़ाइड अयस्क को खूब हवा में (भर्जन), कार्बोनेट अयस्क को कम हवा में (निस्तापन) गरम करते हैं। दोनों से धातु ऑक्साइड बनता है।
  4. ऑक्साइड का अपचयन: कार्बन के साथ गरम करने पर ऑक्सीजन निकल जाती है और चमकदार धातु बचती है, जैसे ZnO + C → Zn + CO।
  5. आखिर में परिष्करण। अशुद्ध धातु ऐनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी कैथोड। कैथोड पर शुद्ध धातु जमती है; कचरा ऐनोड पंक बनकर नीचे बैठता है।
  6. अब तुम्हारी बारी: कोई धातु चुनो। कारखाने में केवल ज़रूरी स्टेशन जलेंगे। बहुत सक्रिय धातुएँ कार्बन छोड़कर सीधे विद्युत अपघटन में जाती हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अयस्क को सीधे गरम क्यों नहीं कर लेते?

गैंग (रेत, पत्थर) ईंधन बर्बाद करेगा और धातु में मिल जाएगा। पहले हटाने से आगे के सब चरण सस्ते होते हैं।

भर्जन में ज़्यादा हवा और निस्तापन में कम क्यों?

भर्जन में सल्फ़ाइड को ऑक्साइड बनाने के लिए ऑक्सीजन चाहिए। निस्तापन में सिर्फ़ गर्मी से कार्बोनेट टूटता है और CO₂ निकलती है; अतिरिक्त हवा की ज़रूरत नहीं।

कार्बन ज़िंक ऑक्साइड को 'अपचयित' कैसे करता है?

कार्बन ZnO से ऑक्सीजन खींचकर CO बन जाता है और ज़िंक धातु बच जाती है। ऑक्सीजन हटाना ही अपचयन है।

शुद्ध धातु कैथोड पर ही क्यों जमती है?

धातु आयन धनावेशित हैं, वे ऋण इलेक्ट्रोड (कैथोड) की ओर जाते हैं, इलेक्ट्रॉन लेकर वहीं धातु बन जाते हैं।

हर धातु के लिए विद्युत अपघटन क्यों नहीं?

बिजली महँगी है। यह वहीं इस्तेमाल होती है जहाँ कार्बन काम नहीं करता: K, Na, Ca, Mg, Al। फ़्री-प्ले में Zn और फिर Na चुनकर रास्ते की तुलना करो।

धातुओं की प्राप्ति: खनिज और अयस्क

भू-पर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है; समुद्र के पानी में भी NaCl, MgCl2 जैसे लवण हैं। प्रकृति में मिलने वाले धातु यौगिक खनिज हैं। जिस खनिज से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके वह अयस्क है। अयस्क में मिली रेत-मिट्टी गैंग (आधात्री) है।

अयस्कों का सांद्रण (समृद्धीकरण)

अयस्क से गैंग हटाना सांद्रण है। तरीका इस पर निर्भर है कि अयस्क और गैंग में क्या अंतर है: पानी से धुलाई (भारी अयस्क नीचे बैठता है), चुंबकीय पृथक्करण (चुंबकीय लौह अयस्क), और झाग प्लवन (सल्फ़ाइड अयस्क तेल के झाग से चिपकता है)।

सक्रियता श्रेणी में नीचे, बीच और ऊपर की धातुओं का निष्कर्षण

कम सक्रिय: केवल गरम करके

2HgS + 3O2 → 2HgO + 2SO2; 2HgO → 2Hg + O2। कॉपर: 2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2; 2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2।

मध्यम सक्रिय: भर्जन या निस्तापन, फिर अपचयन

ऑक्साइड से धातु निकालना आसान है, इसलिए पहले अयस्क को ऑक्साइड बनाते हैं।

अधिक सक्रिय: विद्युत अपघटन

K, Na, Ca, Mg, Al ऑक्सीजन को कार्बन से ज़्यादा मज़बूती से पकड़ते हैं, इसलिए कार्बन इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। इन्हें गलित क्लोराइड/ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त करते हैं। गलित NaCl में सोडियम कैथोड पर (Na+ + e− → Na) और क्लोरीन ऐनोड पर (2Cl− → Cl2 + 2e−) मिलती है।

धातुओं का परिष्करण: विद्युत अपघटनी परिष्करण

अपचयन से मिली धातु अभी अशुद्ध है। विद्युत अपघटनी परिष्करण (जैसे कॉपर) में अशुद्ध धातु ऐनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी कैथोड, और उसी धातु के लवण का विलयन (अम्लीय CuSO4) विद्युत अपघट्य होता है। धारा चलाने पर ऐनोड से धातु घुलती है और उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर जमती है। घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में रहती हैं; अघुलनशील ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक बनकर बैठती हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. गैलेना (PbS) सल्फ़ाइड अयस्क है। इसे ऑक्साइड में बदलने का चरण और अभिक्रिया लिखो।

भर्जन: PbS को अधिक वायु में तेज़ गरम करना। 2PbS + 3O₂ → 2PbO + 2SO₂। फिर ऑक्साइड को कार्बन से अपचयित करते हैं।

2. एल्युमिनियम को उसके ऑक्साइड को कार्बन के साथ गरम करके क्यों नहीं पाया जा सकता?

एल्युमिनियम कार्बन से अधिक सक्रिय है और ऑक्सीजन को ज़्यादा मज़बूती से पकड़ता है। कार्बन Al₂O₃ से ऑक्सीजन नहीं छीन सकता, इसलिए गलित Al₂O₃ का विद्युत अपघटन करते हैं।

3. कॉपर के परिष्करण में ऐनोड, कैथोड और विद्युत अपघट्य क्या हैं?

ऐनोड: अशुद्ध कॉपर। कैथोड: शुद्ध कॉपर की पतली पट्टी। विद्युत अपघट्य: अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन।

4. सिनेबार से केवल गरम करके पारा कैसे मिलता है?

HgS का भर्जन: 2HgS + 3O₂ → 2HgO + 2SO₂। और गरम करने पर HgO टूटता है: 2HgO → 2Hg + O₂। पारा श्रेणी में नीचे है, इसलिए गर्मी काफ़ी है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सल्फ़ाइड अयस्क को अधिक वायु में गरम करना कहलाता है:
2. कौन-सी धातु गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन से मिलती है?
3. कॉपर के विद्युत अपघटनी परिष्करण में कैथोड होता है:
4. थर्मिट अभिक्रिया में प्रयुक्त होते हैं:
5. अयस्क में मिली अनचाही रेत-मिट्टी कहलाती है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खनिज और अयस्क में क्या अंतर है?

प्रकृति में मिलने वाले सभी धातु यौगिक खनिज हैं। जिनसे धातु सस्ते में और पर्याप्त मात्रा में निकले, वे अयस्क हैं। सभी अयस्क खनिज हैं, पर सभी खनिज अयस्क नहीं।

अपचयन से पहले अयस्क को ऑक्साइड क्यों बनाते हैं?

सल्फ़ाइड या कार्बोनेट की तुलना में ऑक्साइड से धातु निकालना आसान है, और कार्बन ऑक्साइड को अच्छी तरह अपचयित करता है।

बोर्ड परीक्षा में निष्कर्षण से क्या पूछा जाता है?

भर्जन-निस्तापन में अंतर, ज़िंक या पारे के निष्कर्षण के समीकरण, थर्मिट अभिक्रिया और विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र (3–5 अंक)।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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