पदार्थों का वर्गीकरण और परिक्षिप्त तंत्र
रसायनज्ञ पदार्थों को क्रम से बाँटते हैं। शुद्ध पदार्थ या तो तत्व हैं (एक ही तरह के परमाणु, जैसे ताँबा) या यौगिक (निश्चित अनुपात, जैसे पानी)। यौगिकों को फिर ऑक्साइड, अम्ल, क्षार और लवण में बाँटा जाता है, और एक वर्ग दूसरे में बदल सकता है: धातु → ऑक्साइड → क्षार → लवण; अधातु → ऑक्साइड → अम्ल → लवण।
मिश्रणों को इस आधार पर बाँटते हैं कि एक हिस्सा दूसरे में कितना बारीक फैला है। यह है परिक्षिप्त तंत्र:
- परिक्षिप्त प्रावस्था: जो पदार्थ छोटे कणों में टूटा है।
- परिक्षेपण माध्यम: जिसमें वह फैला है।
| वास्तविक विलयन | कोलॉइड | निलंबन | |
|---|---|---|---|
| कण का आकार | < 1 nm | 1–100 nm | > 100 nm |
| आँख/सूक्ष्मदर्शी से दिखे? | नहीं | नहीं (केवल अतिसूक्ष्मदर्शी) | अक्सर हाँ |
| रखने पर बैठे? | नहीं | नहीं | हाँ |
| फ़िल्टर पेपर से निकले? | हाँ | हाँ | नहीं |
| टिंडल प्रभाव? | नहीं | हाँ | हाँ (धुँधला) |
| उदाहरण | नमक का पानी, चीनी का घोल | दूध, स्टार्च का घोल, कोहरा | मटमैला पानी, चॉक का पानी |
1 nm (नैनोमीटर) = 10−9 m। चीनी का एक अणु लगभग 1 nm का है; बाल की मोटाई लगभग 80 000 nm।
टिंडल प्रभाव
वास्तविक विलयन के कण रोशनी की तरंगदैर्ध्य (400–700 nm) से बहुत छोटे हैं, इसलिए रोशनी सीधी निकल जाती है। कोलॉइड के कण इतने बड़े हैं कि रोशनी को किनारों की ओर बिखेर देते हैं, इसलिए बगल से किरण का रास्ता दिखता है। यही टिंडल प्रभाव है – कोलॉइड और विलयन को पहचानने का सबसे आसान परीक्षण: अँधेरे कमरे में दोनों गिलासों से टॉर्च या लेज़र की रोशनी गुज़ारो।
रोज़ के उदाहरण: जंगल या धूल भरे कमरे में धूप की किरणें, सिनेमा के प्रोजेक्टर की किरण, कोहरे में सर्चलाइट।
कोलॉइड के प्रकार
कोलॉइड का नाम परिक्षिप्त प्रावस्था और माध्यम की अवस्था से रखते हैं:
| परिक्षिप्त प्रावस्था | माध्यम | नाम | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| द्रव | गैस | एरोसॉल | कोहरा, बादल, डियो स्प्रे |
| ठोस | गैस | एरोसॉल | धुआँ, हवा में धूल |
| गैस | द्रव | फ़ोम (झाग) | शेविंग क्रीम, साबुन का झाग |
| द्रव | द्रव | इमल्शन (पायस) | दूध, मेयोनीज़, फ़ेस क्रीम |
| ठोस | द्रव | सॉल | पेंट, स्याही, अंडे की सफ़ेदी का घोल |
| द्रव | ठोस | जेल | जेली, पनीर, मक्खन, हेयर जेल |
| गैस | ठोस | ठोस फ़ोम | स्पंज, झाँवा पत्थर |
| ठोस | ठोस | ठोस सॉल | रंगीन (रूबी) काँच, कुछ रत्न |
गैस में गैस कभी कोलॉइड नहीं बनती: गैसें पूरी तरह घुल-मिल जाती हैं।
इमल्सीकारक (साबुन, अंडे की ज़र्दी) तेल और पानी जैसे न मिलने वाले द्रवों को स्थायी इमल्शन बनाए रखता है।
कोलॉइड स्थायी क्यों रहते हैं: ब्राउनी गति और आवेश
अतिसूक्ष्मदर्शी में कोलॉइड कण लगातार टेढ़ी-मेढ़ी चाल चलते दिखते हैं। पानी के अणु उन्हें हर ओर से असमान धक्के देते हैं – यह ब्राउनी गति है। इससे कण बैठ नहीं पाते।
ज़्यादातर कोलॉइड कणों पर एक जैसा आवेश भी होता है (सतह पर आयन चिपक जाते हैं)। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, इसलिए कण पास आकर जुड़ नहीं पाते।
स्कंदन और उसके उपयोग
स्कंदन (coagulation) = कोलॉइड कणों का जुड़कर नीचे बैठ जाना। इसके तरीके:
- विद्युत अपघट्य (नमक) डालना: उलटे आवेश वाले आयन कणों का आवेश ख़त्म कर देते हैं। ज़्यादा आवेश वाले आयन (Al³⁺, SO₄²⁻) Na⁺ या Cl⁻ से बहुत ज़्यादा असरदार हैं।
- गर्म करना: अंडा उबालने पर द्रव सफ़ेदी ठोस बन जाती है।
- उलटे आवेश वाले दो कोलॉइड मिलाना।
- वैद्युत कण संचलन: विद्युत क्षेत्र कणों को एक इलेक्ट्रोड पर खींच लेता है।
उपयोग: फिटकरी से पीने का पानी साफ़ होता है; नदी की मिट्टी समुद्र के खारे पानी से मिलकर स्कंदित होती है और डेल्टा बनता है; कॉट्रेल अवक्षेपक ऊँचे वोल्टेज से चिमनी के धुएँ के कण हटाता है; छोटे कट पर फिटकरी लगाने से ख़ून जम जाता है; दूध के प्रोटीन जमने से दही और पनीर बनते हैं।
घर पर करके देखो
- पानी से भरे तीन साफ़ गिलास लो। पहले में नमक, दूसरे में थोड़ा दूध, तीसरे में एक चम्मच मिट्टी घोलो।
- अँधेरे कमरे में फ़ोन की टॉर्च से बगल से रोशनी डालो। किरण कहाँ दिखती है?
- 20 मिनट रख दो। किसमें नीचे परत जमी?
- हर एक को कॉफ़ी फ़िल्टर या टिश्यू से छानो। कौन-से निकल गए?
पहले अनुमान लगाओ, फिर 3D फ़्री-प्ले से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1 nm = 10⁻⁹ m
- विलयन < 1 nm · कोलॉइड 1–100 nm · निलंबन > 100 nm
- कोलॉइड = परिक्षिप्त प्रावस्था + परिक्षेपण माध्यम
- स्कंदन क्षमता आयन के आवेश के साथ बढ़ती है: Al³⁺ > Mg²⁺ > Na⁺ (हार्डी–शुल्ज़ नियम)
हल किए गए उदाहरण
1. एक मिश्रण में कण 50 nm के हैं। प्रकार बताओ और क्या इसमें टिंडल प्रभाव दिखेगा?
50 nm, 1 और 100 nm के बीच है → कोलॉइड। इसके कण रोशनी बिखेरते हैं → हाँ, टिंडल प्रभाव दिखेगा।
2. (a) कोहरा (b) शेविंग क्रीम (c) मक्खन में परिक्षिप्त प्रावस्था और माध्यम बताओ।
(a) पानी की बूँदें (द्रव) हवा (गैस) में – एरोसॉल। (b) हवा (गैस) द्रव में – फ़ोम। (c) पानी (द्रव) ठोस वसा में – जेल।
3. स्टार्च को पानी में हिलाकर छाना गया। छनित साफ़ दिखता है। कैसे दिखाओगे कि यह वास्तविक विलयन नहीं है?
अँधेरे में इसमें से टॉर्च की रोशनी गुज़ारो। किरण का रास्ता दिखेगा (टिंडल प्रभाव), इसलिए यह कोलॉइड है, भले ही फ़िल्टर पेपर से निकल गया।
4. थोड़ी-सी फिटकरी मटमैले पानी को साफ़ क्यों कर देती है?
मिट्टी के कण ऋण आवेशित हैं और एक-दूसरे को धकेलते हैं। फिटकरी से Al³⁺ आयन मिलते हैं जो आवेश ख़त्म कर देते हैं; कण जुड़ते (स्कंदित होते) हैं और बैठ जाते हैं।
5. ऋण आवेशित सॉल को सबसे तेज़ कौन स्कंदित करेगा: NaCl, MgCl₂ या AlCl₃?
धन आयन काम करता है। Al³⁺ पर सबसे ज़्यादा आवेश है, इसलिए AlCl₃ सबसे तेज़।
6. 0.25 µm को nm में बदलो और इस आकार के कणों वाला मिश्रण पहचानो।
1 µm = 1000 nm, तो 0.25 µm = 250 nm > 100 nm → निलंबन; रखने पर बैठ जाएगा।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कोलॉइड हमेशा धुँधला दिखता है। पतला स्टार्च या जिलेटिन साफ़ दिखते हैं; किरण से जाँचो।
- कहना कि कोलॉइड निलंबन की तरह बैठ जाते हैं। ब्राउनी गति और आवेश उन्हें फैलाए रखते हैं।
- गैस में गैस को कोलॉइड गिनना। गैसें हमेशा वास्तविक विलयन बनाती हैं।
- सोचना कि फ़िल्टर पेपर कोलॉइड को अलग कर देगा। कोलॉइड कण उसके छेदों से छोटे हैं।