विलयन क्या है? विलयन के प्रकार
विलयन एक समांगी (homogeneous) मिश्रण है: हर जगह एक जैसा दिखता है। जो घटक ज़्यादा मात्रा में है वह विलायक (solvent), बाकी विलेय (solute)। सिर्फ़ दो घटक हों तो द्विअंगी विलयन (binary solution) कहते हैं।
विलयन की अवस्था विलायक तय करता है। विलेय और विलायक, दोनों तीन अवस्थाओं में हो सकते हैं, तो नौ प्रकार बनते हैं:
| विलायक | विलेय | उदाहरण |
|---|---|---|
| गैस | गैस | हवा (नाइट्रोजन में ऑक्सीजन) |
| गैस | द्रव | नम हवा (हवा में जलवाष्प) |
| गैस | ठोस | नाइट्रोजन में कपूर की वाष्प |
| द्रव | गैस | सोडा वाटर (पानी में CO₂) |
| द्रव | द्रव | पानी में एथेनॉल |
| द्रव | ठोस | पानी में चीनी या नमक |
| ठोस | गैस | पैलेडियम में हाइड्रोजन |
| ठोस | द्रव | सोने में पारा (अमलगम) |
| ठोस | ठोस | पीतल (तांबे में जस्ता) |
सांद्रता के पद (विलयन कितना गाढ़ा है)
सांद्रता बताती है कि तय मात्रा के विलयन (या विलायक) में कितना विलेय है:
- द्रव्यमान प्रतिशत (w/w) = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
- आयतन प्रतिशत (V/V) = (विलेय का आयतन ÷ विलयन का आयतन) × 100
- द्रव्यमान-आयतन (w/V) = 100 mL विलयन में विलेय के ग्राम। दवाइयों में आम।
- प्रति दस लाख भाग (ppm) = (विलेय के भाग ÷ कुल भाग) × 10⁶। बहुत कम मात्रा के लिए, जैसे पानी में फ्लोराइड।
- मोल अंश (x) = उस घटक के मोल ÷ कुल मोल। x₁ + x₂ = 1। इसकी कोई इकाई नहीं।
- मोलरता (M) = विलेय के मोल ÷ विलयन का आयतन (लीटर)। इकाई mol L⁻¹।
- मोललता (m) = विलेय के मोल ÷ विलायक का द्रव्यमान (kg)। इकाई mol kg⁻¹।
कौन-से पद ताप से बदलते हैं?
गर्म करने पर द्रव फैलता है, यानी आयतन बदलता है। जिन पदों में आयतन है (मोलरता, आयतन %, w/V) वे बदलते हैं। जिनमें सिर्फ़ द्रव्यमान या मोल हैं (द्रव्यमान %, मोल अंश, मोललता) वे नहीं बदलते।
बोर्ड टिप
मोलरता, मोललता, द्रव्यमान % और मोल अंश को एक-दूसरे में बदलने वाले सवाल अक्सर आते हैं (2–3 अंक)। हमेशा लिखो: मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान, और mL को L, g को kg में बदलो।
द्रवों में ठोसों की विलेयता
विलेयता: किसी ताप पर तय मात्रा के विलायक में किसी पदार्थ की घुल सकने वाली सबसे ज़्यादा मात्रा। जब और न घुले तो विलयन संतृप्त है, कम हो तो असंतृप्त।
- समान समान को घोलता है: ध्रुवीय और आयनिक ठोस (नमक, चीनी) पानी जैसे ध्रुवीय विलायक में घुलते हैं; अध्रुवीय (नेफ़्थलीन) बेंज़ीन जैसे अध्रुवीय विलायक में।
- ताप: संतृप्त विलयन में घुलना और क्रिस्टल बनना साथ-साथ चलते हैं (गतिक साम्य)। घुलने में ऊष्मा ली जाती हो (ऊष्माशोषी) तो गर्म करने पर ज़्यादा घुलता है; ऊष्मा निकलती हो (ऊष्माक्षेपी) तो कम। ज़्यादातर ठोसों की विलेयता ताप से बढ़ती है।
- दाब: ठोस और द्रव मुश्किल से दबते हैं, इसलिए दाब का असर लगभग नहीं।
गैसों की विलेयता और हेनरी का नियम
गैस की विलेयता दाब और ताप पर बहुत निर्भर करती है।
हेनरी का नियम (अपने शब्दों में): स्थिर ताप पर, किसी द्रव में घुली गैस की मात्रा उस गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है:
p = KH · x
p = गैस का आंशिक दाब, x = विलयन में गैस का मोल अंश, KH = हेनरी स्थिरांक (इकाई दाब की, जैसे kbar)। KH जितना बड़ा, गैस उतनी कम विलेय।
दाब क्यों मदद करता है
ज़्यादा दाब = द्रव के ऊपर ज़्यादा गैस अणु। वे सतह से ज़्यादा टकराते हैं और ज़्यादा अंदर फँसते हैं।
गर्मी क्यों उल्टा असर करती है
गैस घुलने में आमतौर पर ऊष्मा निकलती है, इसलिए गर्म करने पर गैस बाहर आती है। इसीलिए मछलियाँ ठंडे पानी में ज़्यादा आराम से रहती हैं (ज़्यादा ऑक्सीजन)।
उपयोग
- कोल्ड ड्रिंक ऊँचे दाब पर CO₂ भरकर बोतलबंद होती है।
- गोताखोरों के सिलेंडर में हवा को हीलियम से पतला करते हैं ताकि खून में नाइट्रोजन कम घुले।
- ऊँचे पहाड़ों पर ऑक्सीजन का दाब कम, इसलिए खून में ऑक्सीजन कम (एनॉक्सिया): कमज़ोरी लगती है।
सीमाएँ
यह नियम कम दाब पर और उन गैसों के लिए ठीक है जो विलायक से क्रिया नहीं करतीं (NH₃, CO₂ पानी से क्रिया करती हैं)।
करके देखो (घर पर)
एक जैसी दो बंद सोडा बोतलें लो: एक फ्रिज में, एक धूप में एक घंटा रखो। पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर सिंक पर खोलो: गर्म वाली ज़्यादा झाग देगी, क्योंकि गर्म पानी कम गैस पकड़ता है। 3D में दाब वाला स्लाइडर बदलकर यही बात देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
- ppm = (विलेय के भाग ÷ कुल भाग) × 10⁶
- मोल अंश xA = nA ÷ (nA + nB); xA + xB = 1
- मोलरता M = विलेय के मोल ÷ विलयन का आयतन (L)
- मोललता m = विलेय के मोल ÷ विलायक का द्रव्यमान (kg)
- हेनरी का नियम: p = KH · x
- तनुकरण: M₁V₁ = M₂V₂
हल किए गए उदाहरण
1. 45 g पानी में 5 g नमक घोला। नमक का द्रव्यमान प्रतिशत?
विलयन = 5 + 45 = 50 g। द्रव्यमान % = (5 ÷ 50) × 100 = 10%।
2. 4 g NaOH (M = 40) घोलकर 250 mL विलयन बनाया। मोलरता?
मोल = 4 ÷ 40 = 0.1। आयतन = 0.25 L। M = 0.1 ÷ 0.25 = 0.4 mol L⁻¹।
3. 500 g पानी में 18 g ग्लूकोस (M = 180) घोला। मोललता?
मोल = 18 ÷ 180 = 0.1। विलायक = 0.5 kg। m = 0.1 ÷ 0.5 = 0.2 mol kg⁻¹।
4. 1 mol एथेनॉल और 9 mol पानी। दोनों के मोल अंश?
कुल = 10 mol। x(एथेनॉल) = 0.1, x(पानी) = 0.9। जाँच: 0.1 + 0.9 = 1।
5. 1 L पानी (1000 g) में 2 mg फ्लोराइड है। ppm में बताओ।
फ्लोराइड = 0.002 g। ppm = (0.002 ÷ 1000) × 10⁶ = 2 ppm।
6. 298 K पर एक गैस का KH = 50 kbar है। 0.5 bar आंशिक दाब पर पानी में उसका मोल अंश?
x = p ÷ KH = 0.5 ÷ 50 000 = 1 × 10⁻⁵।
7. H₂SO₄ का 20% (द्रव्यमान से) विलयन, घनत्व 1.2 g/mL (M = 98)। मोलरता?
100 g विलयन लो: 20 g अम्ल = 0.204 mol। आयतन = 100 ÷ 1.2 = 83.3 mL = 0.0833 L। M ≈ 2.45 mol L⁻¹।
8. 2 M NaCl विलयन, घनत्व 1.1 g/mL (M = 58.5)। मोललता?
1 L विलयन = 1100 g। NaCl = 2 × 58.5 = 117 g। पानी = 983 g = 0.983 kg। m = 2 ÷ 0.983 ≈ 2.03 mol kg⁻¹।
आम गलतियाँ
- मोललता में विलयन का द्रव्यमान ले लेना। सिर्फ़ विलायक का द्रव्यमान (kg में) लेना है।
- mL को L या g को kg में बदलना भूल जाना। 250 mL = 0.25 L, 500 g = 0.5 kg।
- सोचना कि बड़ा KH = ज़्यादा विलेय गैस। उल्टा है: बड़ा KH, कम विलेय।
- कहना कि गर्म करने से हमेशा विलेयता बढ़ती है। ज़्यादातर ठोसों में हाँ, पर गैस हमेशा गर्मी में कम घुलती है।