South 고등학교 2학년 Chemistry
अध्याय: 4
1. The language of chemistry
Chemistry and society · The mole · Chemical equations and stoichiometry
- रसायन और समाज – रसायन विज्ञान यह पढ़ता है कि परमाणु कैसे जुड़ते और बदलते हैं। कौन से परमाणु कैसे जोड़ें, यह चुनकर रसायनज्ञ नए पदार्थ, दवाएँ, खाद और ईंधन बनाते हैं। अभिक्रिया में परमाणु नष्ट नहीं होते, इसलिए हर उत्पाद का एक मूल्य और कचरा भी होता है।
- मोल संकल्पना, मोलर द्रव्यमान और रासायनिक सूत्र – परमाणु इतने छोटे हैं कि एक-एक गिनना नामुमकिन है, इसलिए रसायनज्ञ उन्हें तौलकर गिनते हैं। परमाणु द्रव्यमान u में होता है; 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12। एक मोल = 6.022 × 10²³ कण, और उसका ग्राम में द्रव्यमान u वाले सूत्र द्रव्यमान के बराबर। मोल से हम यौगिक में हर तत्व का प्रतिशत निकालते हैं, और प्रतिशत से उल्टा चलकर मूलानुपाती और आण्विक सूत्र।
- रससमीकरणमिति, सीमांत अभिकर्मक और सांद्रता के पद – रससमीकरणमिति का मतलब है अभिक्रिया में पदार्थों की मात्रा मापना। संतुलित समीकरण एक नुस्खे जैसा है: उसकी संख्याएँ अभिकारकों और उत्पादों का मोल अनुपात बताती हैं। इससे किसी भी द्रव्यमान को मोल में बदलकर, अनुपात लगाकर, किसी दूसरे पदार्थ का द्रव्यमान निकाल सकते हैं। जो अभिकारक पहले खत्म हो वह सीमांत अभिकर्मक है; वही तय करता है कितना उत्पाद बनेगा। विलयन की सांद्रता द्रव्यमान %, मोल अंश, मोलरता या मोललता से बताते हैं।
2. Structure and properties of matter
Electrical nature of bonding · Electronegativity and polarity · Lewis structures and molecular shape · Properties from structure
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
- आबंध प्राचल, अनुनाद और ध्रुवता – सहसंयोजी आबंध को चार संख्याएँ बताती हैं: आबंध लंबाई (नाभिकों के बीच दूरी), आबंध कोण (किसी परमाणु पर दो आबंधों के बीच कोण), आबंध एन्थैल्पी (1 मोल आबंध तोड़ने की ऊर्जा) और आबंध कोटि (साझा युग्मों की संख्या)। ज़्यादा आबंध कोटि = छोटा और मज़बूत आबंध। जब एक लुईस संरचना काफ़ी न हो, तो असली अणु कई संरचनाओं का अनुनाद संकर होता है। असमान बँटवारा आबंध को ध्रुवीय बनाता है; द्विध्रुव आघूर्ण μ = q × d इसे मापता है, और अणु की आकृति तय करती है कि द्विध्रुव कटेंगे या जुड़ेंगे।
- वीएसईपीआर सिद्धांत: अणुओं की आकृतियाँ – VSEPR का अर्थ है संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण। केंद्रीय परमाणु के चारों ओर के इलेक्ट्रॉन युग्म एक-दूसरे को धकेलते हैं और जितना हो सके दूर चले जाते हैं। युग्मों की संख्या मूल व्यवस्था तय करती है: 2 रैखिक, 3 त्रिकोणीय समतलीय, 4 चतुष्फलकीय, 5 त्रिकोणीय द्विपिरामिडी, 6 अष्टफलकीय। एकाकी युग्म आबंध युग्म से ज़्यादा जगह घेरते हैं (lp–lp > lp–bp > bp–bp), इसलिए आबंध कोण घटाते और दिखने वाली आकृति बदलते हैं, जैसे NH₃ (पिरामिडी, 107°) और H₂O (बंकित, 104.5°)।
- अंतराअणुक बल – अंतराअणुक बल अणुओं के बीच के कमज़ोर आकर्षण हैं। समान आकार के अणुओं में कमज़ोर से मज़बूत: लंदन परिक्षेपण < द्विध्रुव–द्विध्रुव < हाइड्रोजन आबंध। बल जितना मज़बूत, गलनांक और क्वथनांक, श्यानता और पृष्ठ तनाव उतने ज़्यादा; यही तय करते हैं कि क्या किसमें घुलेगा।
3. Chemical equilibrium
Dynamic equilibrium · Equilibrium constant · Reaction quotient · Le Chatelier's principle
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- ला-शातेलिए सिद्धांत: साम्य को प्रभावित करने वाले कारक – ला-शातेलिए सिद्धांत कहता है: साम्य पर किसी निकाय को छेड़ो, तो वह उस दिशा में खिसकता है जिससे वह छेड़छाड़ कम हो। अभिकारक डालो या उत्पाद निकालो → आगे। दाब बढ़ाओ (आयतन घटाओ) → कम गैस मोल वाली ओर। ताप बढ़ाओ → ऊष्माशोषी दिशा में, और K बदलता है। उत्प्रेरक सिर्फ़ जल्दी साम्य लाता है, उसे खिसकाता नहीं। स्थिर आयतन पर अक्रिय गैस से कुछ नहीं बदलता; स्थिर दाब पर यह दाब घटाने जैसा है। K सिर्फ़ ताप से बदलता है।
4. Dynamic chemical reactions
Autoionisation of water and pH · Molarity · Neutralisation · Titration
- आयनिक साम्य: अम्ल, क्षारक, आयनन और pH – अम्ल और क्षारक की तीन परिभाषाएँ हैं: आरेनियस (पानी में H⁺ या OH⁻ देना), ब्रॉन्स्टेड–लोरी (प्रोटॉन दाता या ग्राही) और लुइस (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही या दाता)। प्रबल अम्ल-क्षारक पूरे आयनित होते हैं; दुर्बल थोड़े, और उनका साम्य Ka या Kb से लिखा जाता है। पानी भी थोड़ा आयनित होता है: 25 °C पर Kw = [H⁺][OH⁻] = 1.0 × 10⁻¹⁴। pH = −log[H⁺], pH + pOH = 14। दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए α ≈ √(K/C), यानी तनु करने पर α बढ़ता है (ओस्टवाल्ड तनुता नियम)। संयुग्मी युग्म के लिए Ka × Kb = Kw। दुर्बल अम्ल या क्षारक से बने लवण पानी से क्रिया करते हैं (जल-अपघटन)।
- विलयन: प्रकार, सांद्रता और हेनरी का नियम – विलयन दो या ज़्यादा पदार्थों का एकसमान मिश्रण है। जो ज़्यादा मात्रा में हो वह विलायक, जो कम हो वह विलेय। विलयन कितना 'गाढ़ा' है, यह सांद्रता के पदों से बताते हैं: द्रव्यमान %, आयतन %, ppm, मोल अंश, मोलरता (1 लीटर विलयन में) और मोललता (1 kg विलायक में)। ठोस अक्सर गर्म करने पर ज़्यादा घुलते हैं। गैस दाब बढ़ाने पर ज़्यादा घुलती है (हेनरी का नियम, p = KH·x) और गर्म करने पर कम।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- अनुमापन (Titration): अनजान सांद्रता कैसे पता करें – अनुमापन से किसी विलयन की अनजान सांद्रता निकाली जाती है। ज्ञात सांद्रता वाला विलयन (अनुमापक, titrant) ब्यूरेट से धीरे-धीरे अनजान विलयन (analyte) में डाला जाता है, जब तक अभिक्रिया ठीक पूरी न हो जाए। सूचक या मीटर यह पल दिखाता है। तुल्यता बिंदु पर मोल समीकरण के अनुपात में होते हैं; 1 : 1 अभिक्रिया के लिए C₁V₁ = C₂V₂।