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अंतराअणुक बल

अंतराअणुक बल अणुओं के बीच के कमज़ोर आकर्षण हैं। समान आकार के अणुओं में कमज़ोर से मज़बूत: लंदन परिक्षेपण < द्विध्रुव–द्विध्रुव < हाइड्रोजन आबंध। बल जितना मज़बूत, गलनांक और क्वथनांक, श्यानता और पृष्ठ तनाव उतने ज़्यादा; यही तय करते हैं कि क्या किसमें घुलेगा।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अणु के अंदर परमाणुओं को बंध जोड़ते हैं। अणुओं के बीच इससे बहुत कमज़ोर खिंचाव होता है। इसे अंतराअणुक बल कहते हैं।
  2. लंदन बल: पल भर को इलेक्ट्रॉन एक तरफ़ चले जाते हैं। एक सिरा थोड़ा ऋणात्मक बनता है और पड़ोसी अणु को खींचता है। यह हर अणु में होता है।
  3. द्विध्रुव–द्विध्रुव बल: HCl में क्लोरीन हमेशा इलेक्ट्रॉन खींचता है। इसलिए H हमेशा थोड़ा धनात्मक रहता है। अणु घूमकर + को − की ओर करते हैं।
  4. हाइड्रोजन आबंध: N, O या F से जुड़ा H बहुत धनात्मक होता है। यह दूसरे N, O या F के एकाकी युग्म से चिपकता है। पानी ऐसे बहुत आबंध बनाता है।
  5. अणुओं के बीच बल ज़्यादा हो तो उन्हें अलग करने में ज़्यादा ऊष्मा लगती है। इसलिए क्वथनांक ऊँचा होता है। पट्टियाँ देखिए।
  6. अब खुद खेलिए: कोई पदार्थ चुनिए और ताप बढ़ाइए। क्वथनांक से ऊपर अणु छूटकर दूर उड़ जाते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

पानी उबलने पर क्या H और O अलग हो जाते हैं?

नहीं। केवल अणुओं के बीच का खिंचाव टूटता है। हर अणु H₂O ही रहता है।

अध्रुवीय अणु एक-दूसरे को कैसे खींचते हैं?

इलेक्ट्रॉन हमेशा चलते हैं। पल भर को एक तरफ़ ज़्यादा होते हैं, छोटा द्विध्रुव बनता है जो पड़ोसी को खींचता है। यही लंदन बल है।

HCl हाइड्रोजन आबंध क्यों नहीं बनाता?

Cl बड़ा है और उसका खिंचाव फैला हुआ है। हाइड्रोजन आबंध के लिए H का छोटे, बहुत विद्युतऋणात्मक N, O या F पर होना ज़रूरी है।

क्या हाइड्रोजन आबंध असली रासायनिक बंध है?

नहीं। यह अणुओं के बीच का मज़बूत आकर्षण है, O–H बंध से लगभग 10–20 गुना कमज़ोर।

आयोडीन अध्रुवीय होकर भी ठोस क्यों है?

I₂ में बहुत इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए उसके लंदन बल इतने मज़बूत हैं कि कमरे के ताप पर वह ठोस रहता है।

क्वथनांक पर क्या होता है?

अणुओं को इतनी ऊर्जा मिल जाती है कि वे पड़ोसियों का खिंचाव तोड़कर गैस बनकर दूर चले जाते हैं।

अंदर बनाम बीच में: बंध और अंतराअणुक बल

रासायनिक बंध (सहसंयोजी, आयनिक, धात्विक) परमाणुओं को कण के अंदर जोड़ता है। अंतराअणुक बल अलग-अलग अणुओं के बीच का आकर्षण है।

बंध मज़बूत होते हैं (सैकड़ों kJ प्रति मोल)। अंतराअणुक बल कमज़ोर (आमतौर पर 1–40 kJ प्रति मोल)। पानी उबलने पर H–O बंध नहीं टूटते; सिर्फ़ अणुओं के बीच का खिंचाव टूटता है। भाप भी H₂O ही है।

ये सारे बल विद्युत आवेशों से आते हैं: थोड़ा ऋणात्मक भाग (δ−) थोड़े धनात्मक भाग (δ+) को खींचता है।

ध्रुवता: δ+ और δ− कहाँ से आते हैं?

विद्युतऋणात्मकता बताती है कि परमाणु साझा इलेक्ट्रॉनों को कितनी ज़ोर से खींचता है। दो अलग परमाणु इलेक्ट्रॉन बाँटें तो ज़्यादा खींचने वाला δ− और दूसरा δ+ बनता है। ऐसा बंध ध्रुवीय है।

पूरा अणु तभी ध्रुवीय है जब उसकी आकृति खिंचावों को रद्द न करे। CO₂ सीधा है, दोनों खिंचाव रद्द: अध्रुवीय। H₂O मुड़ा है, रद्द नहीं: ध्रुवीय। CCl₄ सममित (अध्रुवीय), CHCl₃ नहीं (ध्रुवीय)।

क्रियात्मक समूह भी असर डालते हैं: –OH, –NH₂, –COOH हाइड्रोजन आबंध बनवाते हैं; लंबी C–H शृंखलाएँ अध्रुवीय होती हैं।

तीन मुख्य प्रकार

लंदन परिक्षेपण बल

इलेक्ट्रॉन हमेशा चलते रहते हैं। पल भर को एक तरफ़ ज़्यादा हो जाते हैं और क्षणिक द्विध्रुव बनता है। यह पड़ोसी में भी प्रेरित द्विध्रुव बना देता है और दोनों खिंचते हैं। यह हर अणु में है। इलेक्ट्रॉन ज़्यादा (बड़ा अणु) हों और आकृति लंबी हो (ज़्यादा सतह छूए) तो बल बढ़ता है।

द्विध्रुव–द्विध्रुव बल

ध्रुवीय अणुओं में स्थायी δ+ और δ− सिरे होते हैं। वे + को − की ओर करके जमते हैं (HCl, ऐसीटोन)। समान आकार के अणुओं में ये लंदन बल में जुड़ जाते हैं, इसलिए ध्रुवीय पदार्थ ऊँचे ताप पर उबलते हैं।

हाइड्रोजन आबंध

एक विशेष, मज़बूत द्विध्रुव आकर्षण। शर्त: H किसी N, O या F से जुड़ा हो और दूसरे N, O या F पर एकाकी युग्म हो। उदाहरण: पानी, अमोनिया, HF, ऐल्कोहॉल, DNA के क्षार युग्म। इसी से बर्फ़ तैरती है: हाइड्रोजन आबंध बर्फ़ के अणुओं को खुले जाल में रखते हैं, इसलिए बर्फ़ का घनत्व पानी से कम है।

आयन–द्विध्रुव बल (पानी से घिरा Na⁺) और भी मज़बूत है; इसी से नमक पानी में घुलता है।

'वान्डरवाल्स बल' लंदन और द्विध्रुव–द्विध्रुव बलों का साझा नाम है।

बल गुणों को कैसे तय करते हैं

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. F₂ और Cl₂ में किसका क्वथनांक ज़्यादा है? क्यों?

Cl₂ का। दोनों अध्रुवीय हैं, केवल लंदन बल हैं। Cl₂ में इलेक्ट्रॉन ज़्यादा हैं, इसलिए उसके लंदन बल ज़्यादा हैं।

2. सबसे मज़बूत अंतराअणुक बल बताइए: (a) CH₄ (b) HCl (c) NH₃।

(a) केवल लंदन (अध्रुवीय)। (b) द्विध्रुव–द्विध्रुव (ध्रुवीय, पर H क्लोरीन पर है)। (c) हाइड्रोजन आबंध (H नाइट्रोजन पर)।

3. एथेनॉल (78 °C) डाइमेथिल ईथर (−24 °C) से इतने ऊँचे ताप पर क्यों उबलता है? दोनों का सूत्र C₂H₆O है।

एथेनॉल में O–H है, इसलिए हाइड्रोजन आबंध बनते हैं। ईथर में O पर H नहीं है, केवल कमज़ोर द्विध्रुव और लंदन बल हैं।

4. CO₂ भारी होकर भी गैस क्यों है, जबकि H₂O द्रव?

CO₂ रैखिक है, बंध द्विध्रुव रद्द हो जाते हैं: केवल लंदन बल। H₂O मुड़ा और ध्रुवीय है और हाइड्रोजन आबंध बनाता है, जो बहुत मज़बूत हैं।

5. आयोडीन पानी में ज़्यादा घुलेगी या हेक्सेन में?

हेक्सेन में। I₂ अध्रुवीय है और अध्रुवीय विलायक में घुलती है (समान समान को घोलता है)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन-सा बल सभी अणुओं में होता है?
2. कौन-सा अणु आपस में हाइड्रोजन आबंध बना सकता है?
3. पानी उबलने पर क्या टूटता है?
4. हैलोजनों का क्वथनांक समूह में नीचे क्यों बढ़ता है?
5. कौन अध्रुवीय है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतराअणुक बल कितने प्रकार के होते हैं?

लंदन परिक्षेपण बल, द्विध्रुव–द्विध्रुव बल और हाइड्रोजन आबंध (विलयन में आयन–द्विध्रुव बल भी)। लंदन और द्विध्रुव बल मिलकर वान्डरवाल्स बल कहलाते हैं।

सबसे मज़बूत अंतराअणुक बल कौन-सा है?

उदासीन अणुओं के बीच हाइड्रोजन आबंध सबसे मज़बूत है। पर बहुत बड़े अध्रुवीय अणु का कुल लंदन बल छोटे हाइड्रोजन-आबंधी अणु से ज़्यादा हो सकता है।

अंतराअणुक और अंतःअणुक बल में क्या अंतर है?

अंतःअणुक बल अणु के अंदर के बंध हैं (मज़बूत)। अंतराअणुक बल अणुओं के बीच के आकर्षण हैं (कमज़ोर)।

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