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आबंध प्राचल, अनुनाद और ध्रुवता

सहसंयोजी आबंध को चार संख्याएँ बताती हैं: आबंध लंबाई (नाभिकों के बीच दूरी), आबंध कोण (किसी परमाणु पर दो आबंधों के बीच कोण), आबंध एन्थैल्पी (1 मोल आबंध तोड़ने की ऊर्जा) और आबंध कोटि (साझा युग्मों की संख्या)। ज़्यादा आबंध कोटि = छोटा और मज़बूत आबंध। जब एक लुईस संरचना काफ़ी न हो, तो असली अणु कई संरचनाओं का अनुनाद संकर होता है। असमान बँटवारा आबंध को ध्रुवीय बनाता है; द्विध्रुव आघूर्ण μ = q × d इसे मापता है, और अणु की आकृति तय करती है कि द्विध्रुव कटेंगे या जुड़ेंगे।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो H परमाणु जुड़े हैं। नीला पैमाना एक नाभिक के केंद्र से दूसरे के केंद्र तक नापता है। यह आबंध लंबाई 74 pm है।
  2. पानी के अणु में दो O–H आबंध O पर एक कोण बनाते हैं। चाप दिखाता है: 104.5°। यही आबंध कोण है।
  3. अब दोनों H को खींचकर अलग करते हैं। आबंध खिंचकर टूटता है और ऊर्जा की पट्टी ऊपर चढ़ती है। 1 मोल H–H आबंध तोड़ने में 435 kJ लगते हैं।
  4. ये हैं C–C, C=C और C≡C। आबंध कोटि 1, 2, 3 होती गई, तो आबंध छोटा हुआ और तोड़ने की ऊर्जा बढ़ी।
  5. कार्बोनेट आयन तीन लुईस संरचनाओं के बीच दिखाया गया है। अकेली कोई सही नहीं। असली आयन इनका औसत है: हर C–O आबंध बराबर, लगभग 1⅓ आबंध।
  6. अब तुम्हारी बारी: कोई अणु चुनो। नारंगी तीर हर आबंध का द्विध्रुव हैं, लाल तीर कुल द्विध्रुव। CO₂ और BF₃ में तीर एक-दूसरे को काट देते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या आबंध लंबाई परमाणुओं के किनारे से नापते हैं?

नहीं। एक नाभिक के केंद्र से दूसरे नाभिक के केंद्र तक, जैसा कदम 1 का पैमाना दिखाता है।

पानी में कोण 104.5° क्यों है, 109.5° क्यों नहीं?

O पर दो एकाकी युग्म O–H आबंधों को पास धकेलते हैं। VSEPR पाठ में यह 3D में दिखता है।

क्या आबंध टूटने पर ऊर्जा निकलती है?

नहीं। तोड़ने में हमेशा ऊर्जा लगती है (ΔH धनात्मक)। बनने पर उतनी ही निकलती है।

त्रिआबंध छोटा क्यों होता है?

नाभिकों के बीच तीन साझा युग्म उन्हें एक युग्म से ज़्यादा ज़ोर से पास खींचते हैं।

क्या CO₃²⁻ अपनी संरचनाओं के बीच बदलता रहता है?

नहीं। तीनों चित्र सिर्फ़ ड्रॉइंग हैं। असली आयन हमेशा औसत है, तीनों C–O बराबर।

ध्रुवीय आबंध वाला अणु क्या हमेशा ध्रुवीय होता है?

नहीं। CO₂ और BF₃ जैसी सममित आकृति में द्विध्रुव कट जाते हैं। खेल वाले कदम में चुनकर देखो।

आबंध लंबाई और आबंध कोण

आबंध लंबाई: दो आबंधित परमाणुओं के नाभिकों के बीच की औसत दूरी। इसे X-किरण या इलेक्ट्रॉन विवर्तन से मापते हैं, पिकोमीटर में (1 pm = 10⁻¹² m)। यह लगभग दोनों परमाणुओं की सहसंयोजी त्रिज्याओं का जोड़ है। उदाहरण: H–H 74 pm, O–H 96 pm, C–C 154 pm, Cl–Cl 199 pm।

आबंध कोण: एक ही परमाणु पर मिलने वाले दो आबंधों के बीच का कोण। इससे अणु की आकृति पता चलती है। उदाहरण: CO₂ 180°, BF₃ 120°, CH₄ 109.5°, NH₃ 107°, H₂O 104.5°।

आबंध एन्थैल्पी और आबंध कोटि

आबंध एन्थैल्पी (आबंध वियोजन एन्थैल्पी): गैसीय अणुओं में किसी आबंध के 1 मोल को तोड़ने की ऊर्जा, kJ mol⁻¹ में। H–H 435, O=O 498, N≡N 946। बड़ी आबंध एन्थैल्पी = मज़बूत आबंध।

CH₄ जैसे अणुओं में चारों C–H अलग-अलग ऊर्जा पर टूटते हैं, इसलिए औसत आबंध एन्थैल्पी लेते हैं (C–H ≈ 414 kJ mol⁻¹)।

आबंध कोटि (लुईस के अनुसार) = दो परमाणुओं के बीच आबंधों की संख्या: H₂ 1, O₂ 2, N₂ 3। समइलेक्ट्रॉनिक अणुओं (N₂, CO, NO⁺) की आबंध कोटि समान (3) होती है।

संबंध

आबंध कोटि ↑ → आबंध एन्थैल्पी ↑ → आबंध लंबाई ↓। C–C: 154 pm, 348 kJ; C=C: 134 pm, 614 kJ; C≡C: 120 pm, 839 kJ mol⁻¹।

अनुनाद

कई बार एक लुईस संरचना प्रयोग से मेल नहीं खाती। O₃ की लुईस संरचना में एक O=O (121 pm) और एक O–O (148 pm) है, पर प्रयोग में दोनों आबंध बराबर (128 pm) मिलते हैं।

तब हम दो या ज़्यादा अनुनादी (विहित) संरचनाएँ लिखते हैं, जिन्हें ↔ से जोड़ते हैं। असली अणु अनुनाद संकर है, सबका मिश्रण। यह उनके बीच पलटता नहीं, हमेशा मिश्रण ही रहता है।

संकर में आबंध कोटि = कुल आबंध ÷ स्थानों की संख्या। CO₃²⁻: 4 ÷ 3 = 1.33।

आबंध की ध्रुवता और द्विध्रुव आघूर्ण

H₂ या Cl₂ में दोनों परमाणु साझा युग्म को बराबर खींचते हैं: अध्रुवीय सहसंयोजी आबंध। HCl में Cl ज़्यादा विद्युतऋणी है, युग्म Cl के पास रहता है। Cl पर थोड़ा ऋण (δ−), H पर थोड़ा धन (δ+): ध्रुवीय सहसंयोजी आबंध।

ध्रुवता को द्विध्रुव आघूर्ण से मापते हैं: μ = q × d (आवेश × दूरी)। मात्रक डिबाई (D); 1 D = 3.336 × 10⁻³⁰ C m। यह सदिश है; रसायन में तीर + से − की ओर बनाते हैं।

आकृति कुल मान तय करती है

आयनिक आबंध में सहसंयोजी लक्षण (फ़ायान्स नियम)

छोटा और ज़्यादा आवेश वाला धनायन बड़े ऋणायन के इलेक्ट्रॉन-बादल को अपनी ओर खींच लेता है (ध्रुवण)। इससे आयनिक आबंध में कुछ सहसंयोजी लक्षण आ जाता है। इसलिए LiI, NaCl से ज़्यादा सहसंयोजी है, और AlCl₃ भी।

प्रतिशत आयनिक लक्षण = (प्रेक्षित μ ÷ पूर्ण आयनिक μ) × 100।

करके देखो: कंघी और पानी

सूखे बालों में कंघी फेरो। नल खोलकर बहुत पतली धार बहाओ। कंघी पास लाओ, छुओ मत। धार मुड़ जाती है! पानी के अणु ध्रुवीय हैं और अपने आवेशित सिरे कंघी की ओर घुमा लेते हैं। पहले अनुमान लगाओ: क्या अध्रुवीय द्रव की धार मुड़ेगी? फिर खेल वाले कदम में H₂O और CO₂ की तुलना करो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. लुईस संरचना से N₂, O₂ और F₂ की आबंध कोटि निकालो।

कदम 1: N≡N में 3 साझा युग्म → कोटि 3। कदम 2: O=O में 2 → 2। कदम 3: F–F में 1 → 1। उत्तर: N₂ 3, O₂ 2, F₂ 1। N₂ का आबंध सबसे मज़बूत और छोटा।

2. कार्बोनेट आयन CO₃²⁻ में C–O की आबंध कोटि निकालो।

कदम 1: एक अनुनादी संरचना में एक C=O और दो C–O: कुल 4 आबंध। कदम 2: ये 3 बराबर स्थानों पर बँटे हैं। कदम 3: आबंध कोटि = 4 ÷ 3। उत्तर: 1.33।

3. NO₃⁻ और NO₂⁻ में N–O की आबंध कोटि निकालो।

कदम 1: NO₃⁻: एक N=O + दो N–O = 4 आबंध, 3 स्थान → 1.33। कदम 2: NO₂⁻: एक N=O + एक N–O = 3 आबंध, 2 स्थान → 1.5। उत्तर: 1.33 और 1.5। NO₂⁻ का N–O आबंध छोटा है।

4. एथेन, एथीन और एथाइन के C–C आबंधों को लंबाई और एन्थैल्पी के क्रम में लगाओ।

कदम 1: आबंध कोटि: एथेन 1, एथीन 2, एथाइन 3। कदम 2: ज़्यादा कोटि → छोटा: एथाइन (120 pm) < एथीन (134) < एथेन (154)। कदम 3: ज़्यादा कोटि → मज़बूत: एथेन (348) < एथीन (614) < एथाइन (839 kJ mol⁻¹)।

5. HCl की आबंध लंबाई 127 pm और द्विध्रुव आघूर्ण 1.03 D है। प्रतिशत आयनिक लक्षण निकालो। (e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C)

कदम 1: पूर्ण आयनिक हो तो μ = e × d = 1.602 × 10⁻¹⁹ × 127 × 10⁻¹² = 2.03 × 10⁻²⁹ C m। कदम 2: डिबाई में: 2.03 × 10⁻²⁹ ÷ 3.336 × 10⁻³⁰ = 6.10 D। कदम 3: % आयनिक = 1.03 ÷ 6.10 × 100 ≈ 16.9 %। उत्तर: लगभग 17 %।

6. CO₂, H₂O, BF₃, NH₃ में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण है? कारण दो।

कदम 1: CO₂ रैखिक: दो बराबर द्विध्रुव उलटी दिशा में, कट जाते हैं → μ = 0। कदम 2: BF₃ समतल त्रिभुज: 120° पर तीन बराबर द्विध्रुव कटते हैं → μ = 0। कदम 3: H₂O मुड़ा और NH₃ पिरामिडी: द्विध्रुव जुड़ते हैं। उत्तर: H₂O (1.85 D) और NH₃ (1.47 D) ध्रुवीय; CO₂, BF₃ नहीं।

7. 1 मोल CH₄ के सारे आबंध तोड़ने में 1656 kJ लगते हैं। औसत C–H आबंध एन्थैल्पी निकालो।

कदम 1: CH₄ में 4 C–H आबंध। कदम 2: औसत = 1656 ÷ 4। उत्तर: 414 kJ mol⁻¹।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. आबंध लंबाई किनके बीच की दूरी है?
2. सबसे छोटा आबंध कौन-सा है?
3. CO₃²⁻ में C–O की आबंध कोटि:
4. किस अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है?
5. द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आबंध प्राचल कौन-से हैं?

आबंध लंबाई, आबंध कोण, आबंध एन्थैल्पी और आबंध कोटि। अनुनाद और ध्रुवता के साथ ये बताते हैं कि आबंध कितना मज़बूत है और अणु की आकृति क्या है।

अनुनाद आसान शब्दों में क्या है?

जब कोई एक लुईस संरचना सही न बैठे, तो कई बनाते हैं। असली अणु इन सबका एक मिश्रण (संकर) है, जो किसी भी एक से ज़्यादा स्थायी है।

CO₂ का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य क्यों है?

CO₂ सीधा (O=C=O) है। दोनों C=O द्विध्रुव बराबर और उलटी दिशा में हैं, इसलिए कट जाते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

रोमानियाClasa a IX-aChemical bonds
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना
अमेरिकाGrade 11Compound Structure and Properties
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Structure and properties of matter
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Bonding and molecules

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