आबंध लंबाई और आबंध कोण
आबंध लंबाई: दो आबंधित परमाणुओं के नाभिकों के बीच की औसत दूरी। इसे X-किरण या इलेक्ट्रॉन विवर्तन से मापते हैं, पिकोमीटर में (1 pm = 10⁻¹² m)। यह लगभग दोनों परमाणुओं की सहसंयोजी त्रिज्याओं का जोड़ है। उदाहरण: H–H 74 pm, O–H 96 pm, C–C 154 pm, Cl–Cl 199 pm।
आबंध कोण: एक ही परमाणु पर मिलने वाले दो आबंधों के बीच का कोण। इससे अणु की आकृति पता चलती है। उदाहरण: CO₂ 180°, BF₃ 120°, CH₄ 109.5°, NH₃ 107°, H₂O 104.5°।
आबंध एन्थैल्पी और आबंध कोटि
आबंध एन्थैल्पी (आबंध वियोजन एन्थैल्पी): गैसीय अणुओं में किसी आबंध के 1 मोल को तोड़ने की ऊर्जा, kJ mol⁻¹ में। H–H 435, O=O 498, N≡N 946। बड़ी आबंध एन्थैल्पी = मज़बूत आबंध।
CH₄ जैसे अणुओं में चारों C–H अलग-अलग ऊर्जा पर टूटते हैं, इसलिए औसत आबंध एन्थैल्पी लेते हैं (C–H ≈ 414 kJ mol⁻¹)।
आबंध कोटि (लुईस के अनुसार) = दो परमाणुओं के बीच आबंधों की संख्या: H₂ 1, O₂ 2, N₂ 3। समइलेक्ट्रॉनिक अणुओं (N₂, CO, NO⁺) की आबंध कोटि समान (3) होती है।
संबंध
आबंध कोटि ↑ → आबंध एन्थैल्पी ↑ → आबंध लंबाई ↓। C–C: 154 pm, 348 kJ; C=C: 134 pm, 614 kJ; C≡C: 120 pm, 839 kJ mol⁻¹।
अनुनाद
कई बार एक लुईस संरचना प्रयोग से मेल नहीं खाती। O₃ की लुईस संरचना में एक O=O (121 pm) और एक O–O (148 pm) है, पर प्रयोग में दोनों आबंध बराबर (128 pm) मिलते हैं।
तब हम दो या ज़्यादा अनुनादी (विहित) संरचनाएँ लिखते हैं, जिन्हें ↔ से जोड़ते हैं। असली अणु अनुनाद संकर है, सबका मिश्रण। यह उनके बीच पलटता नहीं, हमेशा मिश्रण ही रहता है।
- अनुनादी संरचनाओं में परमाणुओं की जगह वही रहती है, सिर्फ़ इलेक्ट्रॉन बदलते हैं।
- संकर किसी भी एक संरचना से ज़्यादा स्थायी है; यह अतिरिक्त स्थायित्व अनुनाद ऊर्जा है।
- उदाहरण: O₃, CO₃²⁻ (हर C–O = 1⅓ आबंध, 129 pm), NO₃⁻, बेंज़ीन, CO₂।
संकर में आबंध कोटि = कुल आबंध ÷ स्थानों की संख्या। CO₃²⁻: 4 ÷ 3 = 1.33।
आबंध की ध्रुवता और द्विध्रुव आघूर्ण
H₂ या Cl₂ में दोनों परमाणु साझा युग्म को बराबर खींचते हैं: अध्रुवीय सहसंयोजी आबंध। HCl में Cl ज़्यादा विद्युतऋणी है, युग्म Cl के पास रहता है। Cl पर थोड़ा ऋण (δ−), H पर थोड़ा धन (δ+): ध्रुवीय सहसंयोजी आबंध।
ध्रुवता को द्विध्रुव आघूर्ण से मापते हैं: μ = q × d (आवेश × दूरी)। मात्रक डिबाई (D); 1 D = 3.336 × 10⁻³⁰ C m। यह सदिश है; रसायन में तीर + से − की ओर बनाते हैं।
आकृति कुल मान तय करती है
- CO₂ (रैखिक): दो बराबर C=O द्विध्रुव उलटी दिशा में → μ = 0।
- BF₃, CCl₄, CH₄: द्विध्रुव कट जाते हैं → μ = 0।
- H₂O (मुड़ा): द्विध्रुव जुड़ते हैं → μ = 1.85 D।
- NH₃ (1.47 D) बनाम NF₃ (0.23 D): NH₃ में एकाकी युग्म का द्विध्रुव आबंध द्विध्रुवों से जुड़ता है, NF₃ में उलटा काम करता है।
आयनिक आबंध में सहसंयोजी लक्षण (फ़ायान्स नियम)
छोटा और ज़्यादा आवेश वाला धनायन बड़े ऋणायन के इलेक्ट्रॉन-बादल को अपनी ओर खींच लेता है (ध्रुवण)। इससे आयनिक आबंध में कुछ सहसंयोजी लक्षण आ जाता है। इसलिए LiI, NaCl से ज़्यादा सहसंयोजी है, और AlCl₃ भी।
प्रतिशत आयनिक लक्षण = (प्रेक्षित μ ÷ पूर्ण आयनिक μ) × 100।
करके देखो: कंघी और पानी
सूखे बालों में कंघी फेरो। नल खोलकर बहुत पतली धार बहाओ। कंघी पास लाओ, छुओ मत। धार मुड़ जाती है! पानी के अणु ध्रुवीय हैं और अपने आवेशित सिरे कंघी की ओर घुमा लेते हैं। पहले अनुमान लगाओ: क्या अध्रुवीय द्रव की धार मुड़ेगी? फिर खेल वाले कदम में H₂O और CO₂ की तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आबंध कोटि (लुईस) = दो परमाणुओं के बीच साझा युग्मों की संख्या
- अनुनाद संकर की आबंध कोटि = कुल आबंध ÷ आबंधित स्थानों की संख्या
- द्विध्रुव आघूर्ण μ = q × d; 1 D = 3.336 × 10⁻³⁰ C m
- % आयनिक लक्षण = (μ प्रेक्षित ÷ μ आयनिक) × 100, μ आयनिक = e × d
- आबंध कोटि ↑ ⇒ लंबाई ↓, एन्थैल्पी ↑
हल किए गए उदाहरण
1. लुईस संरचना से N₂, O₂ और F₂ की आबंध कोटि निकालो।
कदम 1: N≡N में 3 साझा युग्म → कोटि 3। कदम 2: O=O में 2 → 2। कदम 3: F–F में 1 → 1। उत्तर: N₂ 3, O₂ 2, F₂ 1। N₂ का आबंध सबसे मज़बूत और छोटा।
2. कार्बोनेट आयन CO₃²⁻ में C–O की आबंध कोटि निकालो।
कदम 1: एक अनुनादी संरचना में एक C=O और दो C–O: कुल 4 आबंध। कदम 2: ये 3 बराबर स्थानों पर बँटे हैं। कदम 3: आबंध कोटि = 4 ÷ 3। उत्तर: 1.33।
3. NO₃⁻ और NO₂⁻ में N–O की आबंध कोटि निकालो।
कदम 1: NO₃⁻: एक N=O + दो N–O = 4 आबंध, 3 स्थान → 1.33। कदम 2: NO₂⁻: एक N=O + एक N–O = 3 आबंध, 2 स्थान → 1.5। उत्तर: 1.33 और 1.5। NO₂⁻ का N–O आबंध छोटा है।
4. एथेन, एथीन और एथाइन के C–C आबंधों को लंबाई और एन्थैल्पी के क्रम में लगाओ।
कदम 1: आबंध कोटि: एथेन 1, एथीन 2, एथाइन 3। कदम 2: ज़्यादा कोटि → छोटा: एथाइन (120 pm) < एथीन (134) < एथेन (154)। कदम 3: ज़्यादा कोटि → मज़बूत: एथेन (348) < एथीन (614) < एथाइन (839 kJ mol⁻¹)।
5. HCl की आबंध लंबाई 127 pm और द्विध्रुव आघूर्ण 1.03 D है। प्रतिशत आयनिक लक्षण निकालो। (e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C)
कदम 1: पूर्ण आयनिक हो तो μ = e × d = 1.602 × 10⁻¹⁹ × 127 × 10⁻¹² = 2.03 × 10⁻²⁹ C m। कदम 2: डिबाई में: 2.03 × 10⁻²⁹ ÷ 3.336 × 10⁻³⁰ = 6.10 D। कदम 3: % आयनिक = 1.03 ÷ 6.10 × 100 ≈ 16.9 %। उत्तर: लगभग 17 %।
6. CO₂, H₂O, BF₃, NH₃ में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण है? कारण दो।
कदम 1: CO₂ रैखिक: दो बराबर द्विध्रुव उलटी दिशा में, कट जाते हैं → μ = 0। कदम 2: BF₃ समतल त्रिभुज: 120° पर तीन बराबर द्विध्रुव कटते हैं → μ = 0। कदम 3: H₂O मुड़ा और NH₃ पिरामिडी: द्विध्रुव जुड़ते हैं। उत्तर: H₂O (1.85 D) और NH₃ (1.47 D) ध्रुवीय; CO₂, BF₃ नहीं।
7. 1 मोल CH₄ के सारे आबंध तोड़ने में 1656 kJ लगते हैं। औसत C–H आबंध एन्थैल्पी निकालो।
कदम 1: CH₄ में 4 C–H आबंध। कदम 2: औसत = 1656 ÷ 4। उत्तर: 414 kJ mol⁻¹।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि अणु अनुनादी संरचनाओं के बीच पलटता रहता है। वह हमेशा एक ही संकर है।
- यह कहना कि ध्रुवीय आबंध वाला हर अणु ध्रुवीय है। CO₂ और CCl₄ में μ = 0 है।
- यह भूलना कि ज़्यादा आबंध कोटि से आबंध छोटा होता है, लंबा नहीं।
- द्विध्रुव आघूर्ण निकालते समय pm को m में न बदलना (× 10⁻¹²)।