कार्बनिक रसायन क्या है?
कार्बनिक रसायन कार्बन के यौगिकों का अध्ययन है (CO₂, कार्बोनेट, सायनाइड जैसे सरल यौगिकों को छोड़कर)। पहले लोग मानते थे कि ये यौगिक केवल जीवों से बनते हैं, इसलिए नाम कार्बनिक पड़ा। 1828 में वोलर ने प्रयोगशाला में अजैव लवण से यूरिया बना दिया, और यह धारणा टूट गई।
कार्बन दो कारणों से खास है। यह 4 आबंध बनाता है, और दूसरे कार्बन परमाणुओं से बार-बार जुड़कर लंबी शृंखलाएँ व वलय बनाता है। इस गुण को शृंखलन (catenation) कहते हैं।
कार्बन की चतुःसंयोजकता
कार्बन (परमाणु क्रमांक 6) का विन्यास 1s² 2s² 2p² है। इसके 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन (बाहरी इलेक्ट्रॉन) हैं। यह चारों को साझा करके 8 पूरे करता है। इसलिए कार्बन चतुःसंयोजी है: हमेशा 4 आबंध।
4 आबंध ऐसे हो सकते हैं: चार एकल; दो एकल + एक द्वि; एक एकल + एक त्रि; या दो द्विआबंध।
संकरण और कार्बनिक यौगिकों की आकृतियाँ
संकरण यानी कक्षकों का मिलकर नए, बराबर कक्षक बनाना। कार्बन पर π (पाई) आबंधों की संख्या से संकरण पता चलता है।
| C पर आबंध | संकरण | आकृति | कोण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 4 एकल | sp³ | चतुष्फलकीय | 109.5° | CH₄, एथेन |
| 1 द्वि | sp² | त्रिकोणीय समतल | 120° | एथीन, HCHO |
| 1 त्रि या 2 द्वि | sp | रेखीय | 180° | एथाइन, CO₂ |
संकरण से आबंध लंबाई और प्रबलता
जितना ज़्यादा s-लक्षण, उतना इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास। sp में 50% s, sp² में 33%, sp³ में 25%। इसलिए sp कार्बन इलेक्ट्रॉनों को सबसे कसकर पकड़ता है (सबसे अधिक विद्युतऋणी) और उसके आबंध सबसे छोटे होते हैं। C–H लंबाई: sp³ 109 pm, sp² 108 pm, sp 106 pm।
π आबंध और अभिक्रियाशीलता
π आबंध p कक्षकों के बगल से अतिव्यापन से बनता है, आबंध रेखा के ऊपर और नीचे। इसके इलेक्ट्रॉन खुले रहते हैं, इसलिए द्वि और त्रि आबंध पर अभिक्रियाएँ होती हैं। p कक्षक समांतर रहने चाहिए, इसलिए द्विआबंध के चारों ओर मुक्त घूर्णन नहीं होता।
संरचना सूत्र: अणु लिखने के तरीके
पूर्ण (विस्तृत) सूत्र
हर परमाणु और हर आबंध रेखा से दिखाया जाता है। एकल = एक डैश, द्वि = दो, त्रि = तीन।
संघनित सूत्र
आबंध छिपा देते हैं और समान समूह एक साथ लिखते हैं: प्रोपेन-1-ऑल = CH₃CH₂CH₂OH; हेक्सेन = CH₃(CH₂)₄CH₃।
आबंध-रेखा (कंकाल) सूत्र
केवल कार्बन ढाँचा टेढ़ी-मेढ़ी रेखा से। नियम: हर कोना और हर सिरा = कार्बन; कार्बन पर लगे H नहीं दिखाते (इतने H मानो कि हर C के 4 आबंध हों); O, N, Cl आदि लिखे जाते हैं। वलय बहुभुज से: साइक्लोहेक्सेन = षट्भुज।
त्रिविमीय (वेज-डैश) सूत्र
भरा वेज (▲) = आबंध कागज़ से बाहर तुम्हारी ओर। डैश वेज = कागज़ के पीछे। सामान्य रेखा = कागज़ के तल में। गेंद-छड़ मॉडल और स्थान-पूरक मॉडल भी 3D मॉडल हैं।
कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण
संरचना के आधार पर
- अचक्रीय / खुली शृंखला (ऐलिफैटिक): सीधी या शाखित शृंखला। जैसे एथेन, आइसोब्यूटेन, ऐसीटैल्डिहाइड।
- चक्रीय (बंद शृंखला):
- एलिसाइक्लिक: कार्बन की वलय जो ऐलिफैटिक जैसा व्यवहार करे (साइक्लोप्रोपेन, साइक्लोहेक्सेन)।
- ऐरोमैटिक: बेंज़ीन और उसके जैसी वलय। बेंज़ेनॉइड (बेंज़ीन, नैफ्थलीन) और अबेंज़ेनॉइड (ट्रोपोलोन)।
- विषमचक्रीय: वलय में O, N या S जैसा दूसरा परमाणु (फ्यूरान, पिरिडीन, थायोफीन)।
- समचक्रीय वलय में केवल कार्बन होते हैं।
क्रियात्मक समूह के आधार पर
क्रियात्मक समूह वह परमाणु या समूह है जो रासायनिक गुण तय करता है: –OH (ऐल्कोहॉल), –CHO (ऐल्डिहाइड), >C=O (कीटोन), –COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल), –NH₂ (ऐमीन), –X (हैलोऐल्केन), C=C (ऐल्कीन), C≡C (ऐल्काइन)।
सजातीय श्रेणी
एक ही क्रियात्मक समूह वाला परिवार जिसमें लगातार सदस्य –CH₂– (14 u) से अलग हों। सबका एक सामान्य सूत्र होता है (ऐल्केन CₙH₂ₙ₊₂, ऐल्कीन CₙH₂ₙ, ऐल्कोहॉल CₙH₂ₙ₊₁OH), रासायनिक गुण मिलते-जुलते होते हैं और भौतिक गुण धीरे-धीरे बदलते हैं।
करके देखो
मिट्टी की गोली और टूथपिक से मॉडल: 4 तीलियाँ = मेथेन (चतुष्फलकीय), फिर दो तीलियाँ जोड़कर द्विआबंध बनाओ (समतल)। 3D के छठे चरण में CH₂ जोड़ो और स्क्रीन से पहले खुद हर सदस्य का सूत्र लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कार्बन: 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन → 4 आबंध (चतुःसंयोजी)
- 0 π → sp³, 109.5°; 1 π → sp², 120°; 2 π → sp, 180°
- % s-लक्षण: sp 50%, sp² 33.3%, sp³ 25%
- ऐल्केन CₙH₂ₙ₊₂, ऐल्कीन CₙH₂ₙ, ऐल्काइन CₙH₂ₙ₋₂, ऐल्कोहॉल CₙH₂ₙ₊₁OH
- लगातार सजातीय सदस्यों में अंतर CH₂ = 14 u
हल किए गए उदाहरण
1. CH₂=CH–C≡N में हर कार्बन का संकरण बताओ।
पंक्ति 1: C1 (CH₂=) पर एक द्विआबंध → 1 π → sp²। पंक्ति 2: C2 (=CH–) पर एक द्विआबंध → sp²। पंक्ति 3: C3 (–C≡N) पर त्रिआबंध → 2 π → sp। उत्तर: sp², sp², sp।
2. ब्यूटेन-2-ऑल का संघनित और आबंध-रेखा सूत्र लिखो।
पंक्ति 1: 4 कार्बन की शृंखला, –OH दूसरे कार्बन पर। पंक्ति 2: संघनित: CH₃CH(OH)CH₂CH₃। पंक्ति 3: आबंध-रेखा: 3 रेखाओं की टेढ़ी-मेढ़ी शृंखला (4 सिरे/कोने = 4 C), दूसरे कार्बन पर OH लिखा।
3. आबंध-रेखा चित्र में 4 रेखाओं की शृंखला है और पहले-दूसरे कार्बन के बीच द्विआबंध है। अणुसूत्र बताओ।
पंक्ति 1: 4 रेखाएँ → 5 कार्बन। पंक्ति 2: एक C=C, यानी ऐल्कीन: CₙH₂ₙ। पंक्ति 3: n = 5 → C₅H₁₀ (पेंट-1-ईन)।
4. वर्गीकृत करो: (a) साइक्लोहेक्सेन (b) पिरिडीन (c) बेंज़ीन (d) आइसोब्यूटेन।
(a) केवल कार्बन वलय, अऐरोमैटिक → एलिसाइक्लिक। (b) वलय में N → विषमचक्रीय (ऐरोमैटिक)। (c) बेंज़ेनॉइड ऐरोमैटिक। (d) शाखित खुली शृंखला → अचक्रीय।
5. ऐल्कोहॉल श्रेणी का तीसरा सदस्य C₃H₇OH है। पाँचवाँ सदस्य और उसका मोलर द्रव्यमान लिखो।
पंक्ति 1: हर अगला सदस्य CH₂ जोड़ता है। पंक्ति 2: पाँचवाँ: C₅H₁₁OH। पंक्ति 3: M = 5(12) + 12(1) + 16 = 88 g/mol।
6. CH₂=CH–CH=CH₂ में कितने σ और π आबंध हैं?
पंक्ति 1: C–H आबंध 6, सभी σ। पंक्ति 2: C–C जोड़ 3 (हर एक में एक σ) → 3 σ। पंक्ति 3: दो द्विआबंध → 2 π। उत्तर: 9 σ और 2 π।
आम गलतियाँ
- आबंध-रेखा सूत्र में छिपे हाइड्रोजन भूल जाना। हर कोने के कार्बन को 4 आबंध पूरे करने लायक H चाहिए।
- बेंज़ीन को 'एलिसाइक्लिक' कहना। बेंज़ीन ऐरोमैटिक है।
- CO₂ के कार्बन को sp² मानना। उस पर दो द्विआबंध (2 π) हैं, इसलिए sp और रेखीय।
- यह मानना कि सजातीय श्रेणी के सदस्यों के भौतिक गुण एक जैसे हैं। रासायनिक गुण मिलते हैं; क्वथनांक, घनत्व धीरे-धीरे बदलते हैं।