परमाणु बंध क्यों बनाते हैं?
परमाणु के बीच में नाभिक होता है और चारों ओर कोशों में इलेक्ट्रॉन। सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन (valence electrons) कहलाते हैं। बंध में सिर्फ़ यही भाग लेते हैं।
नियॉन और आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसों के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं और वे लगभग कभी अभिक्रिया नहीं करतीं। इसलिए कहते हैं: परमाणु उत्कृष्ट गैस जैसे 8 बाहरी इलेक्ट्रॉन पाने के लिए बंध बनाते हैं। यह अष्टक नियम (octet rule) है। हाइड्रोजन छोटा है, उसे 2 ही चाहिए (द्विक)।
संयोजकता इलेक्ट्रॉन आवर्त सारणी के समूह से पता चलते हैं: समूह 1 में 1, समूह 2 में 2, समूह 16 में 6, समूह 17 में 7।
लुइस बिंदु प्रतीक
लुइस प्रतीक में तत्व के प्रतीक के चारों ओर संयोजकता इलेक्ट्रॉन बिंदुओं से दिखाते हैं। Na पर एक बिंदु, Cl पर सात। इससे दिखता है कौन देता, लेता या बाँटता है।
आयनिक बंध: देना और लेना
धातुओं के पास कम बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं और वे उन्हें आसानी से खोती हैं। अधातुओं के पास ज़्यादा होते हैं और वे आसानी से लेती हैं। मिलने पर धातु अपने इलेक्ट्रॉन अधातु को स्थानांतरित कर देती है।
- इलेक्ट्रॉन खोने वाला परमाणु धनायन (cation) बनता है: Na → Na+ + e−।
- इलेक्ट्रॉन लेने वाला परमाणु ऋणायन (anion) बनता है: Cl + e− → Cl−।
विपरीत आयनों के बीच का तेज़ आकर्षण आयनिक बंध है। आयन एक विशाल 3D जालक (lattice) में सजते हैं। सूत्र वह सबसे छोटा अनुपात है जिसमें कुल आवेश शून्य हो: Mg2+ और Cl− से MgCl2; Ca2+ और O2− से CaO। SO42−, NH4+ जैसे बहुपरमाणुक आयन एक इकाई की तरह चलते हैं: Na2SO4।
आयनिक यौगिकों के गुण
- कठोर, भंगुर क्रिस्टल।
- ऊँचा गलनांक और क्वथनांक।
- कई पानी में घुलते हैं।
- पिघलने या घुलने पर ही बिजली चलाते हैं, क्योंकि तभी आयन चल पाते हैं।
सहसंयोजक बंध: जोड़े बाँटना
दो अधातुएँ दोनों इलेक्ट्रॉन चाहती हैं, कोई देती नहीं। तो वे इलेक्ट्रॉन का एक जोड़ा साझा करती हैं। एक साझा जोड़ा = एकल बंध (H–H), दो जोड़े = द्विबंध (O=O), तीन जोड़े = त्रिबंध (N≡N)।
ऐसे जुड़े परमाणु अणु बनाते हैं: H2O, CO2, CH4। बंध में न लगे जोड़े एकाकी युग्म (lone pair) कहलाते हैं। बॉल-एंड-स्टिक मॉडल अणु को 3D में दिखाते हैं।
ध्रुवी और अध्रुवी बंध
विद्युत-ऋणात्मकता (electronegativity) यानी परमाणु साझा इलेक्ट्रॉनों को कितनी ताक़त से खींचता है (पॉलिंग पैमाना: F = 4.0, O = 3.4, Cl = 3.2, H = 2.2, Na = 0.9)। दोनों बराबर खींचें (H–H) तो बंध अध्रुवी। एक ज़्यादा खींचे (H–Cl) तो इलेक्ट्रॉन उसके पास: ध्रुवी बंध, छोटे आवेश δ+ और δ− के साथ।
मोटा नियम (ΔEN): लगभग 0.4 से कम अध्रुवी; 0.4 से 1.8 ध्रुवी; 1.8 से ज़्यादा मुख्यतः आयनिक। यह एक पैमाना है, तीन अलग डिब्बे नहीं।
आण्विक (सहसंयोजक) यौगिकों के गुण
- अक्सर गैस, द्रव या नरम ठोस, कम गलनांक: अणुओं के बीच के बल कमज़ोर।
- बिजली नहीं चलाते (न मुक्त आयन, न मुक्त इलेक्ट्रॉन)।
- अपवाद: हीरा और क्वार्ट्ज़ जैसी विशाल सहसंयोजक संरचनाएँ बहुत कठोर और ऊँचे गलनांक वाली।
धात्विक बंध और पदार्थ का चुनाव
धातु में हर परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन एक साझा विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉन सागर में छोड़ देता है। धनायन पंक्तियों में रहते हैं। आयनों और इलेक्ट्रॉन सागर के बीच का आकर्षण धात्विक बंध है।
- बिजली और ऊष्मा के सुचालक: मुक्त इलेक्ट्रॉन चलते हैं।
- आघातवर्धनीय और तन्य: आयनों की परतें खिसक सकती हैं, बंध नहीं टूटता।
- चमकीली, और अक्सर ऊँचा गलनांक।
रोज़मर्रा में बंध का महत्व
बंध का प्रकार तय करता है कि पदार्थ कैसे काम आएगा और कितना सुरक्षित है। नमक खाने में सुरक्षित है, पर ज़्यादा नमक रक्तचाप बढ़ाता है। पेंट और नेल-पॉलिश के सहसंयोजक विलायक जल्दी भाप बनते हैं, तो उनकी भाप साँस में जा सकती है; खुली हवा में इस्तेमाल करें। पारा कमरे के ताप पर द्रव धातु है और उसकी भाप ज़हरीली है, इसीलिए पुराने पारे वाले थर्मामीटर बदले जा रहे हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अष्टक नियम: परमाणु 8 बाहरी इलेक्ट्रॉन पाने के लिए इलेक्ट्रॉन लेते, देते या बाँटते हैं (H: 2)
- आयनिक सूत्र: कुल धन आवेश = कुल ऋण आवेश (जैसे Al³⁺ + O²⁻ → Al₂O₃)
- ΔEN = |EN(A) − EN(B)|: < 0.4 अध्रुवी, 0.4–1.8 ध्रुवी, > 1.8 मुख्यतः आयनिक (मोटा नियम)
- एकल बंध = 1 साझा जोड़ा, द्विबंध = 2, त्रिबंध = 3
- आयनिक = धातु + अधातु; सहसंयोजक = अधातुएँ; धात्विक = धातु परमाणु
हल किए गए उदाहरण
1. मैग्नीशियम (2 बाहरी इलेक्ट्रॉन) और क्लोरीन (7) से मैग्नीशियम क्लोराइड कैसे बनता है? सूत्र लिखिए।
Mg दो Cl परमाणुओं को 1-1 इलेक्ट्रॉन देता है: Mg → Mg²⁺ + 2e⁻; हर Cl + e⁻ → Cl⁻। आवेश: +2 और 2 × (−1) = 0। सूत्र MgCl₂।
2. ऐलुमिनियम (Al³⁺) और ऑक्सीजन (O²⁻) के यौगिक का सूत्र लिखिए।
3 और 2 का लघुत्तम समापवर्त्य 6। दो Al³⁺ = +6, तीन O²⁻ = −6। सूत्र Al₂O₃।
3. बंध का प्रकार बताइए: (a) H–H, (b) H–O, (c) K–F। EN: H 2.2, O 3.4, K 0.8, F 4.0।
(a) ΔEN = 0 → अध्रुवी सहसंयोजक। (b) ΔEN = 1.2 → ध्रुवी सहसंयोजक। (c) ΔEN = 3.2 → आयनिक।
4. N₂ में कितने साझा जोड़े हैं? क्यों?
N के 5 बाहरी इलेक्ट्रॉन हैं, उसे 3 और चाहिए। हर N 3 इलेक्ट्रॉन बाँटता है, तो 3 साझा जोड़े: त्रिबंध N≡N। हर N पर 1 एकाकी युग्म भी बचता है।
5. ठोस नमक बिजली नहीं चलाता, पर नमक का पानी चलाता है। क्यों?
ठोस NaCl में आयन जाली में बँधे हैं, हिल नहीं सकते। पानी में जाली टूट जाती है और आयन आज़ादी से चलते हैं, तो आवेश ले जाते हैं।
6. ताँबा मुड़कर तार बन जाता है पर नमक का क्रिस्टल टूट जाता है। क्यों?
ताँबे में आयनों की परतें खिसकती हैं और इलेक्ट्रॉन सागर फिर भी उन्हें पकड़े रहता है। नमक में खिसकने पर समान आवेश आमने-सामने आ जाते हैं, एक-दूसरे को धकेलते हैं और क्रिस्टल टूटता है।
आम गलतियाँ
- आयनिक बंध को 'बाँटे गए इलेक्ट्रॉन' कहना। आयनिक = स्थानांतरण; सहसंयोजक = साझेदारी।
- सोचना कि ठोस आयनिक यौगिक बिजली चलाता है। वह सिर्फ़ पिघलने या घुलने पर चलाता है।
- मानना कि सहसंयोजक यानी कमज़ोर। बंध ख़ुद मज़बूत है; कम गलनांक अणुओं के बीच के कमज़ोर बलों से है। हीरा सहसंयोजक है और बहुत कठोर।
- NaCl₂ या MgCl लिखना। आवेश हमेशा बराबर करें: Na⁺ + Cl⁻ = NaCl; Mg²⁺ को दो Cl⁻ चाहिए, तो MgCl₂।