Spain 4º ESO Physics and Chemistry
अध्याय: 5
1. Basic scientific skills
Experimental work and projects · Science learning environments · Lab and safety rules · Scientific language and units · Interpreting scientific information · Scientific culture and scientists
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
- प्रयोगशाला सुरक्षा और सुरक्षित प्रयोग – सुरक्षा पहनावा (गॉगल्स, कोट, बंद जूते, बँधे बाल)। लेबल और ख़तरा चिह्न पढ़ें। परखनली का मुँह दूर रखकर धीरे गरम करें। अम्ल को पानी में डालें, गंध हवा करके लें, कभी न चखें। हर दुर्घटना तुरंत बताएँ। प्रयोग की योजना बनाएँ, पहले जोखिम आँकें और कचरा सही जगह डालें।
- मात्रक और मापन (कक्षा 11) – मापना यानी किसी राशि की तुलना एक तय, सबके माने हुए परिमाण से करना। उस तय परिमाण को मात्रक (unit) कहते हैं। मापा गया मान = संख्या × मात्रक। आज पूरी दुनिया SI पद्धति चलाती है, जिसमें 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल और कैन्डेला। बाकी सब मात्रक (जैसे न्यूटन, जूल) इन्हीं के गुणा-भाग से बने व्युत्पन्न मात्रक हैं। किलो (10³), मिली (10⁻³) जैसे पूर्वलग्न बड़ी-छोटी संख्याओं को आसान बनाते हैं।
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
2. Matter
Solutions and gases · Atomic models · Electron configuration · Chemical compounds and uses · The mole · Inorganic nomenclature · Introduction to organic nomenclature
- विलयन: चीज़ें कैसे घुलती हैं और कितनी घुल सकती हैं – विलयन विलायक में घुले विलेय का समांगी मिश्रण है। पानी में (जलीय विलयन) विलेय इतने छोटे कणों में टूटता है कि दिखता नहीं, नीचे नहीं बैठता और फ़िल्टर पेपर से निकल जाता है। सांद्रता बताती है कितना विलेय है (द्रव्यमान % = विलेय ÷ विलयन × 100)। विलेयता किसी ताप पर 100 g विलायक में घुल सकने वाली अधिकतम मात्रा है; उसके बाद विलयन संतृप्त है। वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन से विलयन अलग होता है।
- परमाणु की संरचना – परमाणु के बीच में एक बहुत छोटा, भारी और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन इसके चारों ओर तय कोशों K, L, M, N में घूमते हैं। प्रोटॉन की संख्या (Z) से तत्व तय होता है; प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या (A)। बाहरी इलेक्ट्रॉन संयोजकता तय करते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और s, p, d, f ब्लॉक – आवर्त सारणी असल में इलेक्ट्रॉन-भरने का नक्शा है। आवर्त संख्या = विन्यास में सबसे बड़ा n। ब्लॉक = वह उपकोश जिसमें आख़िरी इलेक्ट्रॉन गया: s-ब्लॉक (वर्ग 1–2, ns¹⁻²), p-ब्लॉक (वर्ग 13–18, ns² np¹⁻⁶), d-ब्लॉक (वर्ग 3–12, (n−1)d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻²), f-ब्लॉक (लैन्थेनॉयड, ऐक्टिनॉयड, (n−2)f¹⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻¹ ns²)। वर्ग: s-ब्लॉक = ns इलेक्ट्रॉन; p-ब्लॉक = 10 + ns + np; d-ब्लॉक = ns + (n−1)d।
- रासायनिक आबंधन: आयनिक, सहसंयोजक और धात्विक बंध – परमाणु आपस में जुड़कर (बंध बनाकर) ज़्यादा स्थिर होते हैं। इसमें सिर्फ़ बाहरी इलेक्ट्रॉन काम आते हैं। ज़्यादातर परमाणु बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होने पर सबसे स्थिर होते हैं: यही अष्टक नियम है। इसके तीन मुख्य रास्ते हैं। आयनिक बंध में धातु अधातु को इलेक्ट्रॉन दे देती है; विपरीत आवेश वाले आयन बनते हैं और एक-दूसरे को खींचते हैं। सहसंयोजक बंध में दो अधातुएँ इलेक्ट्रॉन जोड़े बाँटती हैं और अणु बनते हैं। धात्विक बंध में धातु परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन एक साझा 'सागर' में छोड़ देते हैं जो धनायनों को जोड़े रखता है। विद्युत-ऋणात्मकता का अंतर बताता है कि कौन-सा बंध बनेगा। बंध का प्रकार ही गलनांक, बिजली चलाने और पानी में घुलने जैसे गुण तय करता है।
- कॉसेल-लुईस उपागम और आयनिक आबंध – परमाणु आपस में इसलिए जुड़ते हैं ताकि हर एक के बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) हो जाएँ, बिल्कुल उत्कृष्ट गैस जैसे। कॉसेल ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर या लेकर आयन बनाते हैं (आयनिक आबंध)। लुईस ने बताया कि परमाणु इलेक्ट्रॉन-युग्म बाँट भी सकते हैं (सहसंयोजी आबंध)। लुईस संरचना इन इलेक्ट्रॉनों को बिंदु और रेखा से दिखाती है। फ़ॉर्मल आवेश (V − L − B/2) सबसे अच्छी संरचना चुनने में मदद करता है। आयन जुड़कर क्रिस्टल बनाते हैं; इसमें निकली ऊर्जा का संबंध जालक एन्थैल्पी से है।
- मोल संकल्पना, मोलर द्रव्यमान और रासायनिक सूत्र – परमाणु इतने छोटे हैं कि एक-एक गिनना नामुमकिन है, इसलिए रसायनज्ञ उन्हें तौलकर गिनते हैं। परमाणु द्रव्यमान u में होता है; 1 u = कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान का 1/12। एक मोल = 6.022 × 10²³ कण, और उसका ग्राम में द्रव्यमान u वाले सूत्र द्रव्यमान के बराबर। मोल से हम यौगिक में हर तत्व का प्रतिशत निकालते हैं, और प्रतिशत से उल्टा चलकर मूलानुपाती और आण्विक सूत्र।
- कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नामपद्धति और समावयवता – कार्बनिक यौगिक लाखों हैं, इसलिए हर एक का साफ़ और अलग नाम चाहिए। IUPAC पद्धति में नाम के तीन भाग हैं: मूल शब्द (मुख्य शृंखला में कार्बनों की संख्या), अनुलग्न (आबंध का प्रकार और मुख्य क्रियात्मक समूह) और पूर्वलग्न (शाखाएँ)। मुख्य समूह वाली सबसे लंबी शृंखला चुनो, ऐसे अंक दो कि मुख्य समूह और शाखाओं को सबसे छोटे अंक मिलें, और शाखाओं को वर्णक्रम में लिखो। समावयवी वे यौगिक हैं जिनका अणुसूत्र एक है पर बनावट अलग। संरचनात्मक समावयवियों में परमाणु अलग ढंग से जुड़े होते हैं (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता)। त्रिविम समावयवियों में जुड़ाव एक जैसा पर 3D व्यवस्था अलग होती है (ज्यामितीय सिस/ट्रांस और प्रकाशिक)।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
3. Energy
Mechanical energy and conservation · Energy transfer: work and heat · Energy in our world
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
4. Interaction
Describing motion · Force as agent of change · Forces as vectors · Everyday forces · Universal gravitation · Forces and pressure in fluids
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- बल: धक्का और खिंचाव – बल दो वस्तुओं के बीच का धक्का या खिंचाव है। इसका मात्रक न्यूटन (N) है। संपर्क बल में छूना ज़रूरी है (धक्का, घर्षण, अभिलंब बल, तनाव, उत्प्लावन); असंपर्क बल दूर से काम करते हैं (गुरुत्व, चुंबकीय, विद्युत)। बल को तीर से दिखाते हैं: शुरुआत = बल लगने का बिंदु, दिशा, लंबाई = परिमाण। बल चाल, दिशा या आकार बदल सकता है। बल संतुलित हों तो रुकी वस्तु रुकी रहती है (साम्यावस्था)। बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A, B को धकेले तो B भी A को उतना ही उल्टा धकेलता है (न्यूटन का तीसरा नियम)।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
5. Change
Chemical equations and stoichiometry · Important chemical reactions · Reaction rate factors
- रससमीकरणमिति, सीमांत अभिकर्मक और सांद्रता के पद – रससमीकरणमिति का मतलब है अभिक्रिया में पदार्थों की मात्रा मापना। संतुलित समीकरण एक नुस्खे जैसा है: उसकी संख्याएँ अभिकारकों और उत्पादों का मोल अनुपात बताती हैं। इससे किसी भी द्रव्यमान को मोल में बदलकर, अनुपात लगाकर, किसी दूसरे पदार्थ का द्रव्यमान निकाल सकते हैं। जो अभिकारक पहले खत्म हो वह सीमांत अभिकर्मक है; वही तय करता है कितना उत्पाद बनेगा। विलयन की सांद्रता द्रव्यमान %, मोल अंश, मोलरता या मोललता से बताते हैं।
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- अभिक्रिया की दर – अभिक्रिया की दर बताती है कि अभिकारक कितनी जल्दी ख़र्च होते हैं या उत्पाद कितनी जल्दी बनते हैं। दर = मात्रा में परिवर्तन ÷ समय। कण तभी अभिक्रिया करते हैं जब वे कम से कम सक्रियण ऊर्जा से टकराएँ। ज़्यादा बार और ज़्यादा ऊर्जा वाली टक्करें = तेज़ दर। सांद्रता (या गैस का दाब), ताप, पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ाने या उत्प्रेरक डालने से अभिक्रिया तेज़ होती है। उत्प्रेरक कम सक्रियण ऊर्जा वाला रास्ता देता है और ख़ुद ख़र्च नहीं होता।