विलेय, विलायक और विलयन
विलयन एक समांगी मिश्रण है: हर जगह एक जैसा। इसके दो भाग हैं:
- विलेय (solute): जो घुलता है (आमतौर पर कम मात्रा), जैसे चीनी।
- विलायक (solvent): जिसमें घुलता है (आमतौर पर ज़्यादा मात्रा), जैसे पानी।
पानी विलायक हो तो जलीय विलयन कहते हैं। पानी इतनी चीज़ें घोलता है कि उसे सार्वत्रिक विलायक कहते हैं। दूसरे विलायक: ऐल्कोहॉल, ऐसीटोन।
विलेय और विलायक ठोस, द्रव या गैस हो सकते हैं: पानी में नमक (ठोस-द्रव), पानी में ऑक्सीजन (गैस-द्रव), पीतल (ठोस-ठोस), वायु (गैस-गैस)।
घुलते समय क्या होता है
पानी के कण विलेय के कणों को खींचकर अलग कर देते हैं। विलेय अणु या आयन के रूप में फैलता है, जो आँख से नहीं दिखते।
वास्तविक विलयन के गुण
- पारदर्शी (रंगीन हो सकता है, जैसे कॉपर सल्फ़ेट)।
- रखने पर कण नीचे नहीं बैठते।
- फ़िल्टर पेपर से बिना बदले निकल जाता है।
- कण का आकार लगभग 1 nm से कम।
निलंबन (पानी में रेत) के बड़े कण बैठ जाते हैं। कोलॉइड (दूध) के मध्यम कण नहीं बैठते पर प्रकाश बिखेरते हैं।
घुलना पिघलना नहीं है: चीनी पानी में घुलती है, पिघलती नहीं।
सांद्रता
सांद्रता = दी गई मात्रा के विलयन में विलेय की मात्रा। तनु विलयन में कम, सांद्र में ज़्यादा विलेय।
- द्रव्यमान प्रतिशत = विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान × 100
- विलयन का द्रव्यमान = विलेय + विलायक
- द्रव्यमान प्रति आयतन = विलेय (g) ÷ विलयन का आयतन (L), g/L में
विलायक मिलाने (तनुकरण) से सांद्रता घटती है, पर विलेय की मात्रा वही रहती है।
विलेयता, संतृप्ति और ताप
विलेयता: किसी ताप पर 100 g विलायक में घुल सकने वाले विलेय का अधिकतम द्रव्यमान।
- असंतृप्त: और विलेय घुल सकता है।
- संतृप्त: उस ताप पर और नहीं घुलता; अतिरिक्त ठोस नीचे रहता है।
- अतिसंतृप्त: सावधानी से ठंडा करने पर सामान्य से ज़्यादा घुला रहता है; एक छोटा क्रिस्टल डालते ही अतिरिक्त बाहर आता है।
विलेयता वक्र ताप के साथ विलेयता दिखाता है। ज़्यादातर ठोसों के लिए यह बढ़ता है। गैसों के लिए घटता है: गरम सोडा जल्दी फीका होता है, गरम पानी में मछलियों के लिए कम ऑक्सीजन।
हिलाने और बारीक दानों से ठोस जल्दी घुलता है, पर कितना घुलेगा यह नहीं बदलता। घुलते समय ऊर्जा बदलाव से विलयन गरम या ठंडा हो सकता है।
'समान समान को घोलता है': पानी लवण और चीनी घोलता है; तेल पानी में नहीं, पेट्रोल में घुलता है।
विलयन को अलग करना
छानने से विलयन अलग नहीं होता, क्योंकि कण बहुत छोटे हैं।
- वाष्पीकरण: गरम करो, विलायक उड़ जाता है, ठोस बचता है।
- क्रिस्टलीकरण: संतृप्त विलयन बनाकर धीरे ठंडा करो; शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं (कॉपर सल्फ़ेट, चीनी)।
- आसवन: उबालो, भाप को ठंडा करके शुद्ध विलायक इकट्ठा करो (समुद्री पानी से पीने का पानी)।
- क्रोमैटोग्राफ़ी: स्याही जैसे घुले रंगीन पदार्थ अलग करती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विलयन = विलेय + विलायक
- द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का द्रव्यमान) × 100
- विलयन का द्रव्यमान = विलेय + विलायक का द्रव्यमान
- सांद्रता (g/L) = विलेय का द्रव्यमान ÷ विलयन का आयतन (L)
- विलेयता = किसी ताप पर 100 g विलायक में अधिकतम विलेय
हल किए गए उदाहरण
1. 135 g पानी में 15 g चीनी घोली। द्रव्यमान प्रतिशत?
विलयन = 15 + 135 = 150 g। द्रव्यमान % = 15 ÷ 150 × 100 = 10 %।
2. 4 % नमक के 250 g विलयन में कितना नमक है?
नमक = 0.04 × 250 = 10 g। पानी = 240 g।
3. 12 g सोडियम हाइड्रॉक्साइड से 500 mL विलयन बना। सांद्रता g/L में?
500 mL = 0.5 L। सांद्रता = 12 ÷ 0.5 = 24 g/L।
4. 20 °C पर किसी लवण की विलेयता 36 g/100 g पानी है। 50 g पानी में कितना घुलेगा?
आधा पानी, आधा विलेय: 18 g।
5. 60 °C पर 100 g पानी में 110 g ठोस वाला संतृप्त विलयन 20 °C (विलेयता 32 g) तक ठंडा किया। कितने क्रिस्टल बनेंगे?
110 − 32 = 78 g क्रिस्टल बनकर निकलेगा।
6. नमकीन पानी को छानकर नमक वापस क्यों नहीं मिलता?
घुला नमक बहुत छोटे आयनों में है जो पानी के साथ फ़िल्टर के छेदों से निकल जाते हैं। पानी को वाष्पित करना पड़ता है।
आम गलतियाँ
- द्रव्यमान % में विलयन की जगह विलायक के द्रव्यमान से भाग देना।
- कहना कि चाय में चीनी 'पिघलती' है; वह घुलती है।
- सोचना कि हिलाने से विलेयता बढ़ती है; इससे केवल जल्दी घुलता है।
- मानना कि गैसें गरम पानी में ज़्यादा घुलती हैं; वे कम घुलती हैं।