ला-शातेलिए सिद्धांत: नियम
साम्य पर किसी निकाय में सांद्रता, दाब या ताप बदलो, तो वह उस दिशा में खिसकता है जिससे उस बदलाव का असर कम हो, और नया साम्य बनता है।
आसान तरीका: बदलाव के बाद Q निकालो। Q < K तो आगे, Q > K तो पीछे। ताप बदले तो K भी बदलता है, तब Q की तुलना नए K से करो।
सांद्रता का प्रभाव
अभिकारक डालो या उत्पाद निकालो → Q, K से छोटा → आगे खिसकता है।
उत्पाद डालो या अभिकारक निकालो → Q, K से बड़ा → पीछे खिसकता है।
उदाहरण: Fe³⁺ + SCN⁻ ⇌ [Fe(SCN)]²⁺ (गहरा लाल)। SCN⁻ डालने पर रंग गहरा होता है। ऑक्सैलिक अम्ल Fe³⁺ को हटाता है, तो रंग फीका होता है।
करके देखो: चरण 2 में “N₂ डालो” दबाओ और तीर आगे की ओर देखो।
दाब का प्रभाव (आयतन बदलना)
गैस मिश्रण दबाने पर दाब बढ़ता है। निकाय कम गैस मोल वाली ओर जाकर दाब घटाता है।
- N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃: 4 → 2 मोल, ऊँचा दाब NH₃ के पक्ष में।
- H₂ + I₂ ⇌ 2HI: 2 → 2 मोल, दाब का कोई असर नहीं।
- PCl₅ ⇌ PCl₃ + Cl₂: 1 → 2 मोल, ऊँचा दाब PCl₅ के पक्ष में।
ठोस और द्रव पर दाब का असर लगभग नहीं; सिर्फ़ गैस मोल गिनो।
ताप का प्रभाव
सिर्फ़ ताप ही K का मान बदलता है।
- ऊष्माक्षेपी अग्र अभिक्रिया (ΔH < 0): गरम करने पर पीछे, K घटता है। ठंडा करने से उत्पाद बढ़ते हैं।
- ऊष्माशोषी अग्र अभिक्रिया (ΔH > 0): गरम करने पर आगे, K बढ़ता है।
रंग से जाँच: 2NO₂ (भूरा) ⇌ N₂O₄ (रंगहीन) ऊष्माक्षेपी है। बर्फ़ में गैस हल्की, गरम पानी में गहरी भूरी हो जाती है।
उत्प्रेरक और अक्रिय गैस का प्रभाव
उत्प्रेरक अग्र और पश्च दोनों अभिक्रियाओं की सक्रियण ऊर्जा बराबर घटाता है। इसलिए साम्य जल्दी आता है, पर उसकी जगह और K नहीं बदलते।
अक्रिय गैस (जैसे आर्गन), जो अभिक्रिया नहीं करती:
- स्थिर आयतन पर: कुल दाब बढ़ता है, पर अभिकारी गैसों की सांद्रता वही → कोई बदलाव नहीं।
- स्थिर दाब पर: आयतन बढ़ता है, गैसें पतली होती हैं → ज़्यादा गैस मोल वाली ओर।
हेबर प्रक्रम: उद्योग में ला-शातेलिए
N₂(g) + 3H₂(g) ⇌ 2NH₃(g), ΔH = −92 kJ/mol।
- ऊँचा दाब (लगभग 200 atm): दाईं ओर कम मोल → ज़्यादा NH₃।
- कम ताप NH₃ के लिए अच्छा, पर वेग बहुत धीमा। इसलिए लगभग 700 K: एक समझौता।
- लोहे का उत्प्रेरक: साम्य जल्दी।
- NH₃ को द्रव बनाकर निकालो: उत्पाद हटाने से अभिक्रिया आगे चलती रहती है।
घर पर करके देखो: छोटे गिलास पानी में चीनी घोलते जाओ जब तक कुछ नीचे न बचे। गिलास गरम करो: और घुलती है। ठंडा करो: दाने फिर दिखते हैं। घुलने में ऊष्मा लगती है, इसलिए गर्मी आगे धकेलती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अभिकारक डालो / उत्पाद निकालो → आगे (Q < K)
- उत्पाद डालो / अभिकारक निकालो → पीछे (Q > K)
- ज़्यादा दाब → कम गैस मोल वाली ओर; Δn(गैस) = 0 → कोई असर नहीं
- गरम: ऊष्माक्षेपी → पीछे, K घटे; ऊष्माशोषी → आगे, K बढ़े
- उत्प्रेरक → कोई खिसकाव नहीं; अक्रिय गैस स्थिर V पर → कुछ नहीं; स्थिर P पर → ज़्यादा गैस मोल की ओर
हल किए गए उदाहरण
1. 2SO₂(g) + O₂(g) ⇌ 2SO₃(g), ΔH < 0। और O₂ डालने पर क्या होगा?
अभिकारक डालने से Q < K, इसलिए साम्य आगे खिसकेगा और SO₃ ज़्यादा बनेगा।
2. PCl₅(g) ⇌ PCl₃(g) + Cl₂(g) में दाब बढ़ाने का असर?
बाएँ 1 मोल गैस, दाएँ 2। ऊँचा दाब कम मोल की ओर ले जाता है, यानी पीछे; PCl₅ बढ़ेगा।
3. C(s) + H₂O(g) ⇌ CO(g) + H₂(g), ΔH = +131 kJ। ज़्यादा H₂ पाने के दो तरीके बताओ।
ऊष्माशोषी है, तो ताप बढ़ाओ। गैस मोल 1 से 2 होते हैं, तो दाब घटाओ। H₂ निकालना या भाप डालना भी मदद करता है।
4. H₂ + I₂ ⇌ 2HI (Kc = 64) में साम्य पर [H₂] = [I₂] = 0.1 M, [HI] = 0.8 M। आयतन आधा किया। Q निकालो और दिशा बताओ।
सब सांद्रता दोगुनी: 0.2, 0.2, 1.6। Q = 2.56/0.04 = 64 = K। कोई खिसकाव नहीं: Δn = 0।
5. N₂O₄ ⇌ 2NO₂, Kc = 0.36, साम्य पर [N₂O₄] = 0.74 M, [NO₂] = 0.52 M। आयतन दोगुना किया। Q और दिशा?
नई सांद्रता: 0.37 और 0.26। Q = 0.0676/0.37 = 0.183। Q < K, इसलिए आगे (ज़्यादा गैस मोल की ओर), जैसा दाब घटने पर होना चाहिए।
6. A ⇌ B (Kc = 4) साम्य पर [A] = 0.2 M, [B] = 0.8 M। 0.5 M A और डाला। नया साम्य निकालो।
शुरू: A = 0.7, B = 0.8। x आगे: (0.8 + x)/(0.7 − x) = 4 → 5x = 2.0 → x = 0.4। नया [A] = 0.3 M, [B] = 1.2 M। जाँच: 1.2/0.3 = 4 ✓। डाला गया A कुछ खर्च हो गया।
आम गलतियाँ
- कहना कि उत्प्रेरक उपज बढ़ाता है। वह सिर्फ़ जल्दी साम्य लाता है; मात्राएँ वही रहती हैं।
- सोचना कि दाब से K बदलता है। दाब सिर्फ़ जगह बदलता है; K सिर्फ़ ताप से बदलता है।
- भूल जाना कि दोनों ओर गैस मोल बराबर हों तो दाब का असर नहीं।
- कहना कि अक्रिय गैस हमेशा साम्य खिसकाती है। स्थिर आयतन पर उसका कोई असर नहीं।