अभिक्रिया का वेग क्या है?
वेग यानी कितनी तेज़ी से। R → P अभिक्रिया में, एक इकाई समय में सांद्रता का बदलाव ही वेग है। सांद्रता को कोष्ठक में लिखते हैं, जैसे [R], इकाई mol L⁻¹।
अभिकारक घटता है, इसलिए Δ[R] ऋणात्मक है। वेग हमेशा धनात्मक रहे, इसके लिए माइनस लगाते हैं:
वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt
इकाई mol L⁻¹ s⁻¹ है। गैसों के लिए atm s⁻¹ भी ले सकते हैं।
औसत वेग और तात्क्षणिक वेग
औसत वेग एक समय-अंतराल का वेग है। [R]–t ग्राफ़ पर दो बिंदु सीधी रेखा (छेदक, secant) से जोड़ो। उसके ढलान का ऋण मान औसत वेग है।
तात्क्षणिक वेग एक ख़ास पल का वेग है। उस पल पर स्पर्श रेखा (tangent) खींचो। उसके ढलान का ऋण मान: r = −d[R]/dt।
समय के साथ वक्र चपटा होता जाता है, इसलिए तात्क्षणिक वेग घटता जाता है।
एक से ज़्यादा पदार्थ हों तो वेग (रससमीकरणमिति)
संतुलित समीकरण में गुणांक 1 न हों तो हर बदलाव को उसके गुणांक से भाग दो। 2HI → H₂ + I₂ के लिए:
वेग = −½ Δ[HI]/Δt = Δ[H₂]/Δt = Δ[I₂]/Δt
HI, H₂ बनने से दोगुनी तेज़ी से ख़त्म होता है, पर अभिक्रिया का वेग एक ही है।
वेग को प्रभावित करने वाले कारक
- सांद्रता (गैस में दाब): उतनी ही जगह में ज़्यादा कण → ज़्यादा टक्करें।
- ताप: कण तेज़ चलते हैं और ज़्यादा कणों में पर्याप्त ऊर्जा होती है। अक्सर 10 °C बढ़ाने पर वेग लगभग दोगुना।
- उत्प्रेरक: आसान रास्ता देता है, वेग बढ़ता है, ख़ुद ख़र्च नहीं होता।
- अभिकारक की प्रकृति और सतह क्षेत्रफल: पानी में आयनिक अभिक्रियाएँ बहुत तेज़; चूर्ण डली से जल्दी अभिक्रिया करता है।
- प्रकाश: कुछ अभिक्रियाओं (जैसे प्रकाश-संश्लेषण) को प्रकाश चाहिए।
वेग नियम और वेग स्थिरांक
aA + bB → उत्पाद के लिए प्रयोग से वेग नियम मिलता है:
वेग = k [A]^x [B]^y
x और y प्रयोग से आते हैं; ये a, b के बराबर हों, ज़रूरी नहीं। k = वेग स्थिरांक: जब हर सांद्रता 1 mol L⁻¹ हो तब का वेग। k ताप से बदलता है, सांद्रता से नहीं।
k की इकाई = (mol L⁻¹)^(1−n) s⁻¹, n = कोटि। शून्य कोटि: mol L⁻¹ s⁻¹। प्रथम कोटि: s⁻¹। द्वितीय कोटि: L mol⁻¹ s⁻¹।
अभिक्रिया की कोटि
कोटि = वेग नियम की घातों का योग, x + y। यह 0, 1, 2, 3 या भिन्न भी हो सकती है। सिर्फ़ प्रयोग से मिलती है।
जाँच: बाकी स्थिर रखकर [A] दोगुना करो। वेग वही → A में कोटि 0; वेग ×2 → कोटि 1; वेग ×4 → कोटि 2।
छद्म प्रथम कोटि (pseudo first order): जब एक अभिकारक बहुत ज़्यादा हो (जैसे एस्टर या शक्कर के जल-अपघटन में पानी), उसकी सांद्रता लगभग नहीं बदलती। द्वितीय कोटि की अभिक्रिया प्रथम कोटि जैसी दिखती है।
आण्विकता और प्राथमिक अभिक्रिया
प्राथमिक अभिक्रिया एक ही चरण में होती है। कई अभिक्रियाएँ जटिल होती हैं: कई चरणों में (क्रियाविधि, mechanism)।
आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में एक साथ टकराने वाले कणों की संख्या: एकाणुक (1), द्विअणुक (2), त्रिअणुक (3)। यह हमेशा पूर्ण संख्या है, कभी शून्य नहीं। 3 से ज़्यादा लगभग असंभव, क्योंकि इतने कण एक साथ बहुत कम मिलते हैं।
जटिल अभिक्रिया में सबसे धीमा चरण (वेग निर्धारक चरण) पूरा वेग तय करता है।
| कोटि | आण्विकता |
|---|---|
| प्रयोग से | क्रियाविधि (सिद्धांत) से |
| 0 या भिन्न हो सकती है | पूर्ण संख्या 1, 2, 3; कभी 0 नहीं |
| पूरी अभिक्रिया के लिए | हर प्राथमिक चरण के लिए |
घर पर करके देखो
दो गिलास पानी लो, एक ठंडा और एक गुनगुना। दोनों में एक साथ आधी चमकने वाली (effervescent) गोली डालो, या एक चम्मच खाने का सोडा और नींबू का रस। बुलबुले रुकने तक सेकंड गिनो। गुनगुना गिलास जीतता है: ताप से वेग बढ़ता है। अब पिसी गोली और पूरी गोली की तुलना करो: ज़्यादा सतह, ज़्यादा वेग। 3D में पहले अनुमान लगाओ, फिर स्लाइडर से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt
- तात्क्षणिक वेग r = −d[R]/dt
- aA + bB → cC + dD के लिए: वेग = −(1/a)Δ[A]/Δt = −(1/b)Δ[B]/Δt = (1/c)Δ[C]/Δt
- वेग नियम: वेग = k[A]^x[B]^y, कोटि = x + y
- k की इकाई = (mol L⁻¹)^(1−n) s⁻¹
हल किए गए उदाहरण
1. R → P में [R] 20 s में 0.80 mol/L से 0.50 mol/L हो जाता है। औसत वेग निकालो।
Δ[R] = 0.50 − 0.80 = −0.30 mol/L। औसत वेग = −Δ[R]/Δt = 0.30/20 = 0.015 mol L⁻¹ s⁻¹।
2. 2N₂O₅ → 4NO₂ + O₂ में N₂O₅ 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹ की दर से घटता है। NO₂ और O₂ बनने की दर तथा अभिक्रिया वेग निकालो।
अभिक्रिया वेग = ½ × 0.02 = 0.01 mol L⁻¹ s⁻¹। NO₂ = 4 × 0.01 = 0.04 mol L⁻¹ s⁻¹। O₂ = 0.01 mol L⁻¹ s⁻¹।
3. वेग = k[A][B]²। A, B और कुल कोटि बताओ।
A में कोटि 1, B में 2, कुल कोटि = 1 + 2 = 3।
4. द्वितीय कोटि अभिक्रिया के k की इकाई निकालो।
इकाई = (mol L⁻¹)^(1−2) s⁻¹ = L mol⁻¹ s⁻¹।
5. वेग = k[A]²। [A] तीन गुना करने पर वेग कितना होगा?
नया वेग = k(3[A])² = 9k[A]²। वेग 9 गुना।
6. A + B → उत्पाद: [A]=0.1,[B]=0.1 → वेग 2×10⁻³; [A]=0.2,[B]=0.1 → 4×10⁻³; [A]=0.1,[B]=0.2 → 8×10⁻³ (mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम और k निकालो।
A दोगुना (पंक्ति 1→2): वेग ×2, इसलिए A में कोटि 1। B दोगुना (पंक्ति 1→3): वेग ×4, इसलिए B में कोटि 2। वेग = k[A][B]²। k = 2×10⁻³ / (0.1 × 0.01) = 2 L² mol⁻² s⁻¹।
7. 2NO + O₂ → 2NO₂ की क्रियाविधि: (1) 2NO ⇌ N₂O₂ (तेज़), (2) N₂O₂ + O₂ → 2NO₂ (धीमा)। हर चरण की आण्विकता बताओ।
चरण 1 में दो NO टकराते हैं: द्विअणुक। चरण 2 में N₂O₂ और O₂: द्विअणुक। धीमा चरण 2 वेग तय करता है।
आम गलतियाँ
- अभिकारक के लिए माइनस भूल जाना: वेग हमेशा धनात्मक है, −Δ[R]/Δt लिखो।
- संतुलित समीकरण से कोटि लिख देना। कोटि सिर्फ़ प्रयोग से मिलती है।
- कोटि और आण्विकता को एक समझना: कोटि 0 या ½ हो सकती है, आण्विकता नहीं।
- वेग लिखते समय गुणांक से भाग देना भूलना (जैसे 2HI के लिए ½)।