Spain 2º Bachillerato Chemistry
अध्याय: 3
1. Chemical bonding and structure of matter
Atomic spectra · Quantum principles of atomic structure · Periodic table and atomic properties
- बोर मॉडल की ओर: प्रकाश, फोटॉन, स्पेक्ट्रम और बोर का परमाणु – प्रकाश एक विद्युत-चुंबकीय तरंग है: c = νλ और तरंग संख्या ν̄ = 1/λ। पर कुछ बातों के लिए कण चाहिए: प्लांक ने कहा ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) में आती है, E = hν। आइंस्टीन ने फोटॉन से प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाया: इलेक्ट्रॉन तभी निकलता है जब hν, कार्य फलन W₀ = hν₀ से ज़्यादा हो; उसकी गतिज ऊर्जा hν − hν₀। परमाणु रेखा स्पेक्ट्रम देते हैं, यानी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएँ तय हैं। बोर ने इलेक्ट्रॉन को तय कक्षाओं में रखा जहाँ कोणीय संवेग nh/2π; ऊर्जा Eₙ = −2.18 × 10⁻¹⁸ Z²/n² J, त्रिज्या rₙ = 52.9 n²/Z pm। कक्षा बदलने पर फोटॉन निकलता है, 1/λ = R_H(1/n₁² − 1/n₂²) से लाइमन, बामर, पाशन, ब्रैकेट, फुंड श्रेणियाँ मिलती हैं। बोर मॉडल सिर्फ़ एक-इलेक्ट्रॉन वाले कणों पर चलता है।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और s, p, d, f ब्लॉक – आवर्त सारणी असल में इलेक्ट्रॉन-भरने का नक्शा है। आवर्त संख्या = विन्यास में सबसे बड़ा n। ब्लॉक = वह उपकोश जिसमें आख़िरी इलेक्ट्रॉन गया: s-ब्लॉक (वर्ग 1–2, ns¹⁻²), p-ब्लॉक (वर्ग 13–18, ns² np¹⁻⁶), d-ब्लॉक (वर्ग 3–12, (n−1)d¹⁻¹⁰ ns⁰⁻²), f-ब्लॉक (लैन्थेनॉयड, ऐक्टिनॉयड, (n−2)f¹⁻¹⁴ (n−1)d⁰⁻¹ ns²)। वर्ग: s-ब्लॉक = ns इलेक्ट्रॉन; p-ब्लॉक = 10 + ns + np; d-ब्लॉक = ns + (n−1)d।
- तत्वों का आवर्त वर्गीकरण – वैज्ञानिकों ने मिलते-जुलते तत्वों को एक साथ रखने की कोशिश की। डॉबेराइनर ने त्रिक बनाए, न्यूलैंड्स ने देखा कि हर 8वाँ तत्व पहले जैसा है (अष्टक), मेंडेलीफ़ ने परमाणु द्रव्यमान के क्रम में तत्व रखे और अनजान तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ी। मोसले ने बताया कि असली आधार परमाणु संख्या है। आधुनिक आवर्त नियम: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन हैं। आधुनिक सारणी में 7 आवर्त और 18 वर्ग हैं। Z > 100 वाले तत्वों के अस्थायी IUPAC नाम अंकों के मूल (nil, un, bi, tri, quad, pent, hex, sept, oct, enn) + ium से बनते हैं।
2. Chemical reactions
Chemical thermodynamics · Chemical kinetics · Chemical equilibrium · Acid-base reactions · Redox reactions
- एन्थैल्पी, कैलोरीमिति और हेस का नियम – एन्थैल्पी H = U + pV। स्थिर दाब पर ली या दी गई ऊष्मा ΔH के बराबर होती है; स्थिर आयतन पर ΔU के बराबर। ΔU को बंद बम कैलोरीमीटर में और ΔH को खुले कप कैलोरीमीटर में मापते हैं: q = CΔT या q = mcΔT। गैसों के लिए ΔH = ΔU + Δn_g RT। ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ΔrH ऋणात्मक, ऊष्माशोषी में धनात्मक; ΔrH° = ΣΔfH°(उत्पाद) − ΣΔfH°(अभिकारक)। हेस का नियम: अभिक्रिया एक चरण में हो या कई में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन एक ही रहता है, इसलिए ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणित की तरह जोड़ सकते हैं।
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- उपचयन और अपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता – ऑक्सीजन पाना (या हाइड्रोजन खोना) उपचयन है; ऑक्सीजन खोना (या हाइड्रोजन पाना) अपचयन है। दोनों साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। ऑक्सीजन देने वाला उपचायक, लेने वाला अपचायक। रोज़मर्रा में उपचयन से संक्षारण (जैसे लोहे पर जंग) और विकृतगंधिता (तेल-घी वाले खाने का बासी होना) होते हैं।
3. Organic chemistry
Isomerism · Organic reactivity · Polymers
- उपसहसंयोजन यौगिकों में समावयवता – समावयवी (isomers) का सूत्र एक होता है पर परमाणुओं की व्यवस्था अलग। संरचनात्मक समावयवियों में बंध ही अलग होते हैं: आयनन, बंधनी, उपसहसंयोजन और विलायकयोजन। त्रिविम समावयवियों में बंध वही रहते हैं, बस अंतरिक्ष में जगह बदलती है: ज्यामितीय (सिस-ट्रांस, fac-mer) और ध्रुवण (ऐसे दर्पण प्रतिबिंब जो एक-दूसरे पर नहीं बैठते)।
- कार्बनिक अभिक्रिया क्रियाविधि की मूल बातें – अभिक्रिया क्रियाविधि एक-एक चरण की कहानी है: कौन-से आबंध टूटते हैं, कौन-से बनते हैं और इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं। सहसंयोजी आबंध दो तरह से टूटता है। समांश विखंडन में हर परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है और मुक्त मूलक बनते हैं। विषमांश विखंडन में एक परमाणु दोनों इलेक्ट्रॉन ले लेता है, जिससे कार्बधनायन (C पर + आवेश) और कार्बऋणायन या ऋणायन बनते हैं। इलेक्ट्रॉन की कमी वाले, इलेक्ट्रॉन ढूँढने वाले कण इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं; इलेक्ट्रॉन देने वाले कण नाभिकस्नेही हैं। अणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों की चाल चार प्रभाव तय करते हैं: प्रेरणिक प्रभाव (σ आबंधों पर खिंचाव), अनुनाद प्रभाव (π इलेक्ट्रॉनों का फैलना), इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव (अभिकर्मक के हमले पर अस्थायी पूरा खिसकना) और अतिसंयुग्मन (C–H के σ इलेक्ट्रॉनों का पास के खाली p कक्षक या π आबंध में फैलना)।
- बहुलक (Polymers) – बहुलक एक विशाल अणु है जो कई छोटे अणुओं (एकलकों) को लंबी श्रृंखला में जोड़कर बनता है। योगात्मक बहुलकीकरण में C=C द्विबंध वाले एकलक खुलकर जुड़ते हैं और कुछ नहीं निकलता (एथीन → पॉलीएथीन)। संघनन बहुलकीकरण में दोनों सिरों पर क्रियाशील समूह वाले दो तरह के एकलक जुड़ते हैं और हर जोड़ पर पानी जैसा छोटा अणु निकलता है (नायलॉन, पॉलिएस्टर)। प्रकृति भी बहुलक बनाती है: स्टार्च, सेलुलोज़, प्रोटीन, DNA, रबर। अलग-अलग श्रृंखलाएँ थर्मोप्लास्टिक बनाती हैं जो पिघलकर पुनः चक्रित होते हैं; अनुप्रस्थ-बंधित श्रृंखलाएँ थर्मोसेट बनाती हैं जो कभी नहीं पिघलते। ज़्यादातर प्लास्टिक सड़ते नहीं, इसलिए कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और पुनः चक्रण ज़रूरी है।