भौतिक और रासायनिक प्रक्रमों में गतिक साम्य
साम्य यानी संतुलन। यह सिर्फ़ बंद निकाय में बनता है, जहाँ से कुछ बाहर नहीं जाता।
भौतिक प्रक्रम: बंद बोतल में पानी भाप बनता है और भाप फिर पानी बनती है। कुछ देर में दोनों की गति बराबर हो जाती है, और वाष्प दाब स्थिर हो जाता है। 0 °C पर बर्फ़ और पानी, या नीचे बची चीनी वाला संतृप्त घोल भी ऐसे ही उदाहरण हैं।
रासायनिक प्रक्रम: उत्क्रमणीय अभिक्रिया में अभिकारक उत्पाद बनाते हैं और उत्पाद वापस अभिकारक बनाते हैं। शुरू में अग्र वेग ज़्यादा होता है। उत्पाद बढ़ने पर पश्च वेग बढ़ता है। जब दोनों वेग बराबर हो जाते हैं, मात्राएँ बदलना बंद कर देती हैं।
इसे गतिक कहते हैं क्योंकि अभिक्रिया रुकती नहीं। अणु दोनों ओर बदलते रहते हैं, बस कुल बदलाव शून्य होता है। किसी भी ओर से शुरू करके वही साम्य मिलता है।
करके देखो: 3D के चरण 1 में धूसर और भूरे गिनती देखो। गिनती रुकती है, पर जोड़े और एकल अदला-बदली करते रहते हैं।
साम्य का नियम और साम्य स्थिरांक Kc
सामान्य अभिक्रिया aA + bB ⇌ cC + dD के लिए, स्थिर ताप पर:
Kc = [C]c[D]d / [A]a[B]b
कोष्ठक [ ] का मतलब है साम्य पर मोलर सांद्रता (mol/L)। इसे रासायनिक साम्य का नियम (द्रव्य-अनुपाती क्रिया का नियम) कहते हैं। ऊपर उत्पाद, नीचे अभिकारक, और हर एक अपने गुणांक की घात में।
- अभिक्रिया उलटो → नया K = 1/K।
- समीकरण को n से गुणा करो → नया K = Kⁿ। आधा करो → √K।
- दो अभिक्रियाएँ जोड़ो → उनके K गुणा करो।
- K सिर्फ़ ताप से बदलता है; शुरुआती मात्रा, दाब या उत्प्रेरक से नहीं।
करके देखो: चरण 2 में स्लाइडर हिलाओ। अंत में Q हर बार उसी Kc पर रुकता है।
Kc और Kp: संबंध Kp = Kc(RT)^Δn
गैस का आंशिक दाब उसकी सांद्रता के अनुपाती है: p = (n/V)RT = [X]RT। इसे K में रखने पर:
Kp = Kc (RT)Δn, जहाँ Δn = (गैसीय उत्पादों के मोल) − (गैसीय अभिकारकों के मोल)।
- Δn = 0 → Kp = Kc (जैसे H₂ + I₂ ⇌ 2HI)।
- Δn > 0 → Kp > Kc।
- Δn < 0 → Kp < Kc (जैसे N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃, Δn = −2)।
दाब bar में हो तो R = 0.0831 L bar K⁻¹ mol⁻¹ और T केल्विन में लो। Δn में सिर्फ़ गैसें गिनो।
समांगी और विषमांगी साम्य
समांगी साम्य: सब कुछ एक ही प्रावस्था में। जैसे N₂(g) + 3H₂(g) ⇌ 2NH₃(g)।
विषमांगी साम्य: एक से ज़्यादा प्रावस्थाएँ। जैसे CaCO₃(s) ⇌ CaO(s) + CO₂(g); H₂O(l) ⇌ H₂O(g); Ni(s) + 4CO(g) ⇌ Ni(CO)₄(g)।
शुद्ध ठोस या शुद्ध द्रव की सांद्रता स्थिर रहती है (घनत्व नहीं बदलता), इसलिए उसे 1 मानकर K में नहीं लिखते। CaCO₃ ⇌ CaO + CO₂ के लिए Kp = p(CO₂)। पर साम्य के लिए ठोस का मौजूद होना ज़रूरी है।
करके देखो: चरण 4 में CaCO₃ की मात्रा बदलो। CO₂ का पाठ्यांक नहीं हिलता।
साम्य स्थिरांक के उपयोग
1. अभिक्रिया कितनी होगी। K > 10³: ज़्यादातर उत्पाद। K < 10⁻³: ज़्यादातर अभिकारक। बीच में: दोनों अच्छी मात्रा में।
2. अभिक्रिया की दिशा। अभी की मात्राओं से Q लिखो। Q < K → आगे। Q > K → पीछे। Q = K → साम्य।
3. साम्य मात्राएँ निकालना। ICE सारणी: प्रारंभिक (I), परिवर्तन (C), साम्य (E)। साम्य मान K में रखकर x निकालो।
K यह नहीं बताता कि साम्य कितनी जल्दी आएगा। वह रासायनिक बलगतिकी का विषय है।
K, Q और गिब्स ऊर्जा
गिब्स ऊर्जा बताती है कि बदलाव अपने-आप होगा या नहीं। किसी मिश्रण के लिए:
ΔG = ΔG° + RT ln Q
साम्य पर ΔG = 0 और Q = K, इसलिए ΔG° = −RT ln K = −2.303 RT log K। साथ ही ΔG = RT ln(Q/K)।
- ΔG° ऋणात्मक → K > 1 → उत्पाद ज़्यादा।
- ΔG° धनात्मक → K < 1 → अभिकारक ज़्यादा।
- ΔG° = 0 → K = 1।
यहाँ R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹ और T केल्विन में। करके देखो: चरण 5 में Q के K पर लौटते समय ΔG शून्य की ओर जाता दिखता है।
परीक्षा के लिए
CBSE कक्षा 11 में साम्यावस्था इकाई लगभग 7 अंक की है। अक्सर पूछा जाता है: Kc/Kp का व्यंजक, Kp–Kc संबंध, ICE सारणी से K, Q से दिशा, और ΔG° = −RT ln K के आंकिक प्रश्न। K का मात्रक और ताप ज़रूर लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Kc = [C]^c[D]^d / [A]^a[B]^b
- Kp = Kc (RT)^Δn, Δn = गैसीय उत्पाद मोल − गैसीय अभिकारक मोल
- उलटी अभिक्रिया: K' = 1/K; n से गुणा: K' = Kⁿ
- Q < K → आगे; Q > K → पीछे; Q = K → साम्य
- ΔG = ΔG° + RT ln Q; ΔG° = −RT ln K = −2.303RT log K
हल किए गए उदाहरण
1. 2SO₂(g) + O₂(g) ⇌ 2SO₃(g) के लिए Kc लिखो।
ऊपर उत्पाद, नीचे अभिकारक, गुणांक की घात के साथ: Kc = [SO₃]² / ([SO₂]²[O₂])।
2. 700 K पर H₂ + I₂ ⇌ 2HI के लिए Kc = 50। 2HI ⇌ H₂ + I₂ और HI ⇌ ½H₂ + ½I₂ के लिए Kc बताओ।
उलटी: K = 1/50 = 0.02। आधी: K = √0.02 = 0.141।
3. 1 L फ्लास्क में 1.0 mol N₂O₄ है। साम्य पर 0.52 mol NO₂ है। N₂O₄ ⇌ 2NO₂ का Kc निकालो।
0.52 mol NO₂ बना, तो N₂O₄ घटा 0.26 mol। [N₂O₄] = 0.74 M, [NO₂] = 0.52 M। Kc = 0.52²/0.74 = 0.2704/0.74 ≈ 0.37 mol/L।
4. 500 K पर N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ के लिए Kc = 0.5 L² mol⁻²। Kp निकालो (R = 0.0831 L bar K⁻¹ mol⁻¹)।
Δn = 2 − 4 = −2। RT = 0.0831 × 500 = 41.55। Kp = 0.5 × (41.55)⁻² = 0.5/1726.4 ≈ 2.9 × 10⁻⁴ bar⁻²।
5. A ⇌ B के लिए K = 4। मिश्रण में [A] = 0.5 M, [B] = 1.0 M। अभिक्रिया किधर जाएगी?
Q = 1.0/0.5 = 2। Q (2) < K (4), इसलिए आगे की ओर, B और बनेगा।
6. 300 K पर K = 10 वाली अभिक्रिया का ΔG° निकालो (R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹)।
ΔG° = −2.303RT log K = −2.303 × 8.314 × 300 × 1 = −5744 J/mol ≈ −5.74 kJ/mol। ऋणात्मक, यानी उत्पाद ज़्यादा।
7. H₂ + I₂ ⇌ 2HI के लिए Kc = 64। 1 L में 1 mol H₂ और 1 mol I₂ से शुरू करो। साम्य मात्राएँ निकालो।
ICE: H₂ = 1 − x, I₂ = 1 − x, HI = 2x। (2x)²/(1 − x)² = 64। वर्गमूल: 2x/(1 − x) = 8 → 2x = 8 − 8x → x = 0.8। H₂ = I₂ = 0.2 mol, HI = 1.6 mol।
8. 298 K पर किसी अभिक्रिया का ΔG° = +11.4 kJ/mol है। K निकालो।
log K = −11400/(2.303 × 8.314 × 298) = −11400/5705.8 ≈ −2.0। K = 10⁻² = 0.01। अभिकारक ज़्यादा रहेंगे।
आम गलतियाँ
- अभिकारकों को ऊपर लिख देना। K हमेशा उत्पाद ÷ अभिकारक होता है।
- शुद्ध ठोस या द्रव (जैसे CaCO₃(s), विलायक H₂O(l)) को K में लिख देना। इन्हें छोड़ो।
- Δn में सारे मोल गिन लेना। सिर्फ़ गैसीय मोल गिनो।
- यह सोचना कि साम्य पर अभिक्रिया रुक जाती है या मात्राएँ बराबर हो जाती हैं। सिर्फ़ वेग बराबर होते हैं; मात्राएँ स्थिर होती हैं।