France Terminale Physics-Chemistry (specialty)
अध्याय: 4
1. Matter and its changes
Acids/bases and chemical analysis · Kinetics and radioactive decay · Equilibrium, acid strength, cells and electrolysis · Organic synthesis strategies
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- रासायनिक अभिक्रिया का वेग – अभिक्रिया वेग बताता है कि प्रति इकाई समय में अभिकारक कितना ख़र्च होता है या उत्पाद कितना बनता है। वेग = −Δ[R]/Δt = +Δ[P]/Δt (इकाई mol L⁻¹ s⁻¹)। वेग नियम, वेग = k[A]^x[B]^y, प्रयोग से मिलता है; x + y कोटि है। आण्विकता = एक प्राथमिक चरण में टकराने वाले कणों की संख्या।
- रासायनिक साम्य: Kc, Kp, Q और गिब्स ऊर्जा – बंद बर्तन में उत्क्रमणीय अभिक्रिया दोनों ओर चलती है। कुछ देर बाद अग्र और पश्च अभिक्रिया का वेग बराबर हो जाता है। मात्राएँ बदलना बंद हो जाती हैं, पर अभिक्रिया रुकती नहीं। इसे गतिक साम्य कहते हैं। साम्य पर उत्पादों और अभिकारकों का अनुपात (हर एक अपने गुणांक की घात में) एक निश्चित संख्या होता है, जिसे साम्य स्थिरांक K कहते हैं। Kc सांद्रता से, Kp आंशिक दाब से, और Kp = Kc(RT)^Δn। शुद्ध ठोस और द्रव K में नहीं लिखे जाते। Q < K हो तो अभिक्रिया आगे, Q > K हो तो पीछे जाती है। ΔG° = −RT ln K।
- कार्बन और उसके यौगिक: आबंधन, हाइड्रोकार्बन और नामकरण – कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन लेने-देने के बजाय साझा करता है (सहसंयोजक आबंध)। वह अपने जैसे कार्बन से जुड़ता है (श्रृंखलन) और हमेशा 4 आबंध बनाता है (चतुःसंयोजकता), इसलिए लाखों यौगिक बनते हैं: सीधी श्रृंखला, शाखा और वलय, संतृप्त या असंतृप्त। एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक समजातीय श्रेणी बनाते हैं, जिनमें हर सदस्य –CH₂– से अलग होता है।
2. Motion and interactions
Describing motion · Newton’s laws, motion in fields, Kepler · Fluid flow
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- द्रव प्रवाह: प्रवाह दर, सांतत्य, बरनौली और वेंचुरी – बहते द्रव से भरी पाइप में हर जगह प्रवाह दर Q = A × v बराबर रहती है, इसलिए जहाँ पाइप पतली होती है वहाँ द्रव तेज़ हो जाता है (A₁v₁ = A₂v₂)। बरनौली का समीकरण p + ½ρv² + ρgh = नियत बताता है कि चाल बढ़ने पर दाब घटता है। वेंचुरीमीटर इसी दाब-अंतर से चाल नापता है।
3. Energy
Thermodynamic systems and ideal gas · First law and heat transfer
- आदर्श गैस समीकरण PV = nRT और गैस को दबाने में कार्य – गैस अनगिनत छोटे-छोटे अणुओं से बनी है जो हर तरफ़ भागते रहते हैं। दीवारों पर उनकी टक्कर से दाब बनता है। कम घनत्व वाली गैस के लिए तीन आसान नियम हैं: ताप स्थिर हो तो P × V स्थिर (बॉयल); दाब स्थिर हो तो V केल्विन ताप के साथ बढ़ता है (चार्ल्स); एक जैसे P और T पर बराबर आयतन में बराबर अणु (आवोगाद्रो)। तीनों मिलकर बनते हैं PV = nRT = N k T। एक मोल में 6.022 × 10²³ कण होते हैं, यही आवोगाद्रो संख्या है। पिस्टन को अंदर धकेलने में गैस पर कार्य होता है; यह कार्य P–V ग्राफ़ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर है, और स्थिर ताप पर W = nRT ln(V₁/V₂)।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
4. Waves and signals
Wave phenomena: diffraction, interference, Doppler · Telescope images, photons, photoelectric effect · Capacitors and RC circuits
- व्यतिकरण (यंग का द्वि-झिरी प्रयोग) और एकल झिरी विवर्तन – दो कला-संबद्ध स्रोत (समान आवृत्ति, स्थिर कलांतर) दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों का स्थिर पैटर्न बनाते हैं। पर्दे के किसी बिंदु पर पथांतर Δ = yd/D: Δ = nλ पर दीप्त, Δ = (n + ½)λ पर अदीप्त। सभी फ्रिंज समान चौड़ाई β = λD/d के होते हैं। a चौड़ाई की एकल झिरी विवर्तन देती है: 2λD/a चौड़ा चमकीला केंद्रीय उच्चिष्ठ, पहला निम्निष्ठ a sin θ = λ पर, और हल्के पार्श्व उच्चिष्ठ।
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।