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प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण

जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह हमारा उपकरण है: हवा रहित (निर्वात) काँच की नली में एक धातु की प्लेट और एक संग्राहक प्लेट। अभी प्रकाश बंद है, कुछ नहीं हो रहा।
  2. बहुत तेज़ लाल प्रकाश डालो। फोटॉन धातु से टकराते हैं, पर एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता। चमक काफ़ी नहीं, हर लाल फोटॉन कमज़ोर है।
  3. अब हल्का बैंगनी या पराबैंगनी प्रकाश डालो। इलेक्ट्रॉन तुरंत निकल आते हैं, कोई इंतज़ार नहीं। एक फोटॉन एक इलेक्ट्रॉन से टकराकर उसे अपनी पूरी ऊर्जा देता है।
  4. बैंगनी प्रकाश की तीव्रता बढ़ाओ। हर सेकंड ज़्यादा फोटॉन आते हैं, तो ज़्यादा इलेक्ट्रॉन निकलते हैं और धारा बढ़ती है। पर हर इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गति नहीं बदलती।
  5. ऊर्जा की पट्टियाँ देखो। फोटॉन की ऊर्जा hν से पहले बाहर निकलने का शुल्क φ (कार्य फलन) चुकता होता है; जो बचे, वह गतिज ऊर्जा है: hν = φ + KEmax।
  6. संग्राहक को ऋणात्मक करो। वह इलेक्ट्रॉनों को पीछे धकेलता है। निरोधी विभव V₀ पर सबसे तेज़ इलेक्ट्रॉन भी रुक जाते हैं, इसलिए eV₀ = KEmax। अब स्लाइडर से खुद प्रयोग करो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर लाल प्रकाश बहुत तेज़ है, तो वह इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं निकालता?

तेज़ चमक का मतलब केवल ज़्यादा फोटॉन। हर लाल फोटॉन की ऊर्जा φ से कम ही रहती है, और इलेक्ट्रॉन एक बार में एक ही फोटॉन से ऊर्जा लेता है। चरण 2 देखो: बहुत से लाल फोटॉन, शून्य इलेक्ट्रॉन।

मंद प्रकाश में भी देरी क्यों नहीं होती?

ऊर्जा फैली हुई नहीं, पैकेटों में आती है। जो पहला फोटॉन इलेक्ट्रॉन से टकराता है, वही उसे तुरंत आज़ाद कर सकता है। चरण 3 में पहले फोटॉन पहुँचते ही इलेक्ट्रॉन दिखते हैं।

क्या तेज़ प्रकाश से इलेक्ट्रॉन तेज़ चलते हैं?

नहीं। तेज़ प्रकाश से ज़्यादा इलेक्ट्रॉन, यानी ज़्यादा धारा। हर इलेक्ट्रॉन को एक ही फोटॉन से hν मिलता है, इसलिए अधिकतम गति वही। चरण 4 देखो।

फोटॉन की ऊर्जा कहाँ जाती है?

इसका एक भाग (φ) धातु से बाहर निकलने में लगता है; बाकी गतिज ऊर्जा बनता है। चरण 5 की पट्टियाँ जुड़कर बराबर होती हैं: hν = φ + KEmax।

ऋणात्मक संग्राहक धारा को क्यों रोकता है?

ऋणात्मक प्लेट इलेक्ट्रॉनों को प्रतिकर्षित करके धीमा करती है। जब eV सबसे बड़ी गतिज ऊर्जा के बराबर हो, तो सबसे तेज़ इलेक्ट्रॉन भी लौट जाता है। चरण 6 में इलेक्ट्रॉनों को मुड़ते देखो।

क्या निरोधी विभव धातु पर निर्भर करता है?

हाँ। V₀ = (hν − φ)/e, तो बड़े φ वाली धातु से उसी प्रकाश में V₀ छोटा मिलता है। पर ढाल h/e हर धातु के लिए समान है।

प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है?

धातुओं में बहुत से मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। उन्हें एक छोटी ऊर्जा की 'दीवार' धातु के अंदर रोके रखती है। जब सही तरह का प्रकाश साफ़ धातु की सतह पर पड़ता है, तो कुछ इलेक्ट्रॉन इतनी ऊर्जा पा लेते हैं कि दीवार पार करके बाहर निकल जाते हैं। इसे प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं। निकलने वाले इलेक्ट्रॉन प्रकाश इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं और उनका बहाव प्रकाश विद्युत धारा बनाता है।

कार्य फलन (φ): धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए ज़रूरी न्यूनतम ऊर्जा। हर धातु का मान अलग होता है, जैसे सोडियम का लगभग 2.3 eV और ताँबे का लगभग 4.7 eV। 1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J।

हर्ट्ज़ और लेनार्ड के प्रेक्षण

1887 में हेनरिक हर्ट्ज़ दो धातु की गेंदों के बीच चिंगारी पैदा कर रहे थे। उन्होंने देखा कि जब गेंदों पर पराबैंगनी (UV) प्रकाश पड़ता है, तो चिंगारी आसानी से कूदती है। यानी प्रकाश आवेश को धातु से निकलने में मदद कर रहा था।

लगभग 1902 में फिलिप लेनार्ड ने निर्वात नली में इसे ध्यान से जाँचा। उन्होंने पाया:

हालवाक्स ने भी देखा कि ऋणावेशित जस्ते की प्लेट पर UV डालने से उसका आवेश खत्म हो जाता है।

प्रकाश विद्युत प्रभाव का प्रायोगिक अध्ययन

उपकरण: निर्वातित काँच की नली जिसमें क्वार्ट्ज़ की खिड़की है (क्वार्ट्ज़ UV को जाने देता है)। अंदर उत्सर्जक प्लेट C (प्रकाश-सुग्राही धातु) और संग्राहक प्लेट A। बैटरी और विभव विभाजक से A का वोल्टेज बदलते हैं, दिक्परिवर्तक से A को धनात्मक या ऋणात्मक करते हैं। माइक्रोऐमीटर धारा नापता है।

1. तीव्रता का प्रभाव

आवृत्ति और वोल्टेज स्थिर रखो। प्रकाश विद्युत धारा तीव्रता के अनुक्रमानुपाती है। चमक दोगुनी → धारा दोगुनी। कारण: हर सेकंड ज़्यादा फोटॉन, ज़्यादा इलेक्ट्रॉन।

2. वोल्टेज का प्रभाव (I–V ग्राफ)

A को धीरे-धीरे अधिक धनात्मक करो: धारा बढ़ती है, फिर स्थिर हो जाती है। यह संतृप्त धारा है: निकला हर इलेक्ट्रॉन पकड़ा जा रहा है। अब A को ऋणात्मक करो: धारा घटती है और एक वोल्टेज −V₀ पर शून्य हो जाती है। V₀ को निरोधी विभव (अंतक विभव) कहते हैं। यहाँ eV₀ = KEmax।

एक ही आवृत्ति पर अलग तीव्रता के वक्रों की संतृप्त धारा अलग होती है, पर निरोधी विभव एक ही रहता है। यानी KEmax तीव्रता पर निर्भर नहीं।

3. आवृत्ति का प्रभाव

एक ही तीव्रता पर आवृत्ति बढ़ाओ तो निरोधी विभव बढ़ता है; संतृप्त धारा वही रहती है। यानी KEmax आवृत्ति के साथ बढ़ती है।

4. देहली आवृत्ति

V₀ और ν का ग्राफ एक सीधी रेखा है। यह ν-अक्ष को ν₀ पर काटती है, जिसे देहली आवृत्ति कहते हैं। ν₀ से कम आवृत्ति पर कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता, चाहे प्रकाश कितना भी तेज़ हो। रेखा का ढाल h/e है, जो हर धातु के लिए समान है।

5. कोई समय-पश्चता नहीं

प्रकाश डालते ही लगभग 10⁻⁹ s में इलेक्ट्रॉन निकलने लगते हैं, मंद प्रकाश में भी।

प्रकाश का तरंग सिद्धांत क्यों असफल हुआ

अगर प्रकाश केवल फैली हुई तरंग होता, तो:

इसलिए तरंग मॉडल इस प्रयोग को नहीं समझा पाता।

आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण

1905 में आइंस्टीन ने कहा: प्रकाश की ऊर्जा छोटे पैकेटों में आती है, जिन्हें क्वांटा या फोटॉन कहते हैं। आवृत्ति ν के फोटॉन की ऊर्जा E = hν, जहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s (प्लांक नियतांक)।

एक फोटॉन को एक इलेक्ट्रॉन पूरा का पूरा, एक बार में सोख लेता है। इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने में φ खर्च करता है। बाकी उसकी गतिज ऊर्जा है:

KEmax = hν − φ, या hν = φ + ½mv²max

क्योंकि KEmax = eV₀: eV₀ = hν − φ, यानी V₀ = (h/e)ν − φ/e। यही V₀–ν ग्राफ की सीधी रेखा है।

KEmax = 0 रखो: φ = hν₀। तो ν₀ = φ/h और देहली तरंगदैर्ध्य λ₀ = hc/φ।

यह समीकरण सब समझा देता है: देहली (फोटॉन की ऊर्जा φ से ज़्यादा होनी चाहिए), KEmax केवल ν पर निर्भर (एक फोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन), धारा तीव्रता पर निर्भर (फोटॉनों की संख्या), और कोई देरी नहीं (एक ही टक्कर)।

छोटा तरीका: E (eV में) = 1240 / λ (nm में)।

प्रकाश की कण प्रकृति: फोटॉन

फोटॉन प्रकाश ऊर्जा का एक छोटा पैकेट है। इसके गुण:

प्रकाश तरंग की तरह फैलता और व्यतिकरण करता है, पर ऊर्जा कण की तरह लेता-देता है। यही विकिरण की द्वैत प्रकृति है।

करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच

  1. 3D में आवृत्ति 5 × 10¹⁴ Hz रखो। अनुमान लगाओ: क्या तेज़ प्रकाश (तीव्रता 10) से धारा बहेगी? फिर जाँचो।
  2. आवृत्ति 9 × 10¹⁴ Hz, वोल्टेज +1 V रखो। तीव्रता 2 से 8 करो। धारा का क्या हुआ? KEmax का?
  3. वोल्टेज धीरे-धीरे ऋणात्मक करो। जिस वोल्टेज पर ग्राफ का हरा बिंदु शून्य पर पहुँचे, उसे लिखो और eV में KEmax से मिलाओ।
  4. घर पर: सोलर गार्डन लाइट या कैलकुलेटर का सोलर सेल धूप और तेज़ सफ़ेद LED में चलता है, पर मंद लाल बल्ब में ठीक से नहीं। करके देखो और फोटॉन ऊर्जा के बारे में सोचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 500 nm तरंगदैर्ध्य के फोटॉन की ऊर्जा जूल और eV में निकालो।

चरण 1: E = hc/λ = (6.63 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) / (500 × 10⁻⁹)। चरण 2: E = 1.989 × 10⁻²⁵ / 5 × 10⁻⁷ = 3.98 × 10⁻¹⁹ J। चरण 3: eV में: 3.98 × 10⁻¹⁹ / 1.6 × 10⁻¹⁹ ≈ 2.49 eV। छोटे तरीके से जाँच: 1240/500 = 2.48 eV।

2. किसी धातु का कार्य फलन 2.0 eV है। उसकी देहली आवृत्ति और देहली तरंगदैर्ध्य ज्ञात करो।

चरण 1: φ = 2.0 × 1.6 × 10⁻¹⁹ = 3.2 × 10⁻¹⁹ J। चरण 2: ν₀ = φ/h = 3.2 × 10⁻¹⁹ / 6.63 × 10⁻³⁴ ≈ 4.83 × 10¹⁴ Hz। चरण 3: λ₀ = c/ν₀ = 3 × 10⁸ / 4.83 × 10¹⁴ ≈ 620 nm (नारंगी-लाल प्रकाश)।

3. 4.0 eV ऊर्जा वाले फोटॉन φ = 2.5 eV वाली धातु पर पड़ते हैं। KEmax और निरोधी विभव निकालो।

चरण 1: KEmax = hν − φ = 4.0 − 2.5 = 1.5 eV। चरण 2: eV₀ = KEmax, इसलिए V₀ = 1.5 V। चरण 3: जूल में KEmax = 1.5 × 1.6 × 10⁻¹⁹ = 2.4 × 10⁻¹⁹ J।

4. 310 nm का प्रकाश φ = 2.2 eV वाली धातु पर पड़ता है। प्रकाश इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम चाल निकालो (m = 9.1 × 10⁻³¹ kg)।

चरण 1: फोटॉन ऊर्जा = 1240/310 = 4.0 eV। चरण 2: KEmax = 4.0 − 2.2 = 1.8 eV = 2.88 × 10⁻¹⁹ J। चरण 3: ½mv² = KEmax → v² = 2 × 2.88 × 10⁻¹⁹ / 9.1 × 10⁻³¹ = 6.33 × 10¹¹। चरण 4: v ≈ 7.96 × 10⁵ m/s।

5. 10 W का लैंप 600 nm का प्रकाश देता है। वह हर सेकंड कितने फोटॉन भेजता है?

चरण 1: एक फोटॉन की ऊर्जा E = hc/λ = 1.989 × 10⁻²⁵ / 6 × 10⁻⁷ = 3.315 × 10⁻¹⁹ J। चरण 2: n = P/E = 10 / 3.315 × 10⁻¹⁹। चरण 3: n ≈ 3.0 × 10¹⁹ फोटॉन प्रति सेकंड।

6. किसी धातु के लिए 8 × 10¹⁴ Hz पर निरोधी विभव 1.2 V और 12.8 × 10¹⁴ Hz पर 3.2 V है। प्लांक नियतांक और कार्य फलन निकालो।

चरण 1: दोनों के लिए eV₀ = hν − φ। घटाने पर: e(3.2 − 1.2) = h(12.8 − 8) × 10¹⁴। चरण 2: h = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 2 / 4.8 × 10¹⁴ ≈ 6.67 × 10⁻³⁴ J s। चरण 3: φ = hν − eV₀ = 5.34 × 10⁻¹⁹ − 1.92 × 10⁻¹⁹ = 3.42 × 10⁻¹⁹ J ≈ 2.13 eV।

7. किसी धातु की देहली तरंगदैर्ध्य 540 nm है। उस पर 360 nm का प्रकाश पड़ता है। निरोधी विभव निकालो।

चरण 1: φ = 1240/540 ≈ 2.30 eV। चरण 2: hν = 1240/360 ≈ 3.44 eV। चरण 3: KEmax = 3.44 − 2.30 = 1.14 eV। चरण 4: V₀ = 1.14 V।

8. फोटो सेल पर प्रकाश की तीव्रता 4 गुना कर दी, आवृत्ति वही रखी। (a) संतृप्त धारा, (b) निरोधी विभव पर क्या असर होगा?

चरण 1: तीव्रता = हर सेकंड फोटॉनों की संख्या। 4 गुना तीव्रता → 4 गुना फोटॉन → 4 गुना इलेक्ट्रॉन। (a) संतृप्त धारा 4 गुना। चरण 2: हर फोटॉन की ऊर्जा hν वही है, तो KEmax = hν − φ वही। (b) निरोधी विभव नहीं बदलेगा।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. प्रकाश विद्युत उत्सर्जन तभी होता है जब प्रकाश की आवृत्ति:
2. आवृत्ति स्थिर रखकर तीव्रता बढ़ाने से बढ़ती है:
3. आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण है:
4. V₀–ν ग्राफ का ढाल बराबर है:
5. 620 nm के फोटॉन की ऊर्जा लगभग है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश विद्युत प्रभाव आसान शब्दों में क्या है?

धातु पर पड़ा प्रकाश उसमें से इलेक्ट्रॉन बाहर निकाल देता है। ऐसा तभी होता है जब हर फोटॉन की ऊर्जा धातु के कार्य फलन से ज़्यादा हो।

प्रकाश विद्युत प्रभाव से प्रकाश की कण प्रकृति कैसे सिद्ध होती है?

देहली आवृत्ति, KEmax का चमक पर निर्भर न होना और तुरंत उत्सर्जन, ये तीनों तभी समझ आते हैं जब प्रकाश hν ऊर्जा के पैकेटों में आए और हर पैकेट एक इलेक्ट्रॉन से टकराए।

निरोधी विभव क्या है?

संग्राहक पर वह ऋणात्मक वोल्टेज जो सबसे तेज़ प्रकाश इलेक्ट्रॉनों को भी रोक दे और धारा शून्य कर दे। eV₀ = KEmax।

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