Romania Clasa a XII-a Physics (F1)
अध्याय: 5
1. Special relativity
Foundations · Relativistic kinematics and dynamics
- विशेष आपेक्षिकता (Special Relativity) – विशेष आपेक्षिकता (आइंस्टीन, 1905) दो अभिधारणाओं पर टिकी है: सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में भौतिकी के नियम एक-से हैं, और निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s हर प्रेक्षक के लिए एक-सी है। इससे निकलता है कि चलती घड़ी धीमी चलती है (t = γt₀), चलती वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है (L = L₀/γ), और द्रव्यमान ऊर्जा का रूप है (E = mc²), जहाँ γ = 1/√(1 − v²/c²)। रोज़ की चाल पर γ ≈ 1, इसलिए न्यूटन की यांत्रिकी काम करती है; c के पास वह असफल होती है।
2. Elements of quantum physics
External photoelectric effect · *Compton effect · De Broglie waves
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- द्रव्य तरंगें और दे ब्रॉग्ली संबंध – प्रकाश तरंग की तरह भी चलता है और कण की तरह भी। 1924 में लुई दे ब्रॉग्ली ने कहा कि द्रव्य भी ऐसा ही करता है: हर गतिमान कण के साथ एक तरंग होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य λ = h/p = h/mv। गतिज ऊर्जा K वाले कण के लिए λ = h/√(2mK); V वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए λ = 1.227/√V nm। रोज़ की चीज़ों की λ बहुत ही छोटी होती है, पर इलेक्ट्रॉन की λ परमाणु के आकार जितनी होती है।
3. Atomic physics
Atomic models and spectra · X-rays and lasers
- परमाणु: अल्फा कण प्रकीर्णन से बोर मॉडल तक – रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कण फेंके और पाया कि परमाणु ज़्यादातर खाली है, बीच में एक बहुत छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक है। फिर बोर ने कहा कि हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π हो। n वीं कक्षा में त्रिज्या 0.529 n² Å, चाल (2.19 × 10⁶)/n m/s और ऊर्जा −13.6/n² eV होती है। इलेक्ट्रॉन नीचे कूदता है तो ऊर्जा का अंतर एक खास रंग के प्रकाश के रूप में निकलता है — यही हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम है।
- लेज़र: उद्दीप्त उत्सर्जन से प्रकाश की किरण कैसे बनती है – LASER का पूरा नाम है Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation, यानी विकिरण के उद्दीप्त उत्सर्जन से प्रकाश का प्रवर्धन। पंप परमाणुओं को ऊँचे ऊर्जा स्तर पर पहुँचाता है। सही ऊर्जा का फ़ोटॉन उत्तेजित परमाणु के पास से गुज़रे तो परमाणु एक बिल्कुल एक-जैसा दूसरा फ़ोटॉन छोड़ता है। जब उत्तेजित परमाणु ज़्यादा हों (समष्टि प्रतिलोमन) और दोनों सिरों पर दर्पण हों, तो प्रकाश बढ़ते-बढ़ते पतली, एक रंग की, कला-संबद्ध किरण बन जाता है। X-किरणें भी ऊँची ऊर्जा का प्रकाश हैं, जो तेज़ इलेक्ट्रॉनों के धातु से टकराने पर बनती हैं।
4. Semiconductors and electronics
Semiconductor devices
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
5. Nuclear physics
The nucleus · Fission and fusion · *Accelerators and elementary particles
- नाभिक: आकार, नाभिकीय बल, बंधन ऊर्जा, विखंडन और संलयन – नाभिक में Z प्रोटॉन और N न्यूट्रॉन होते हैं (A = Z + N न्यूक्लिऑन)। इसकी त्रिज्या R = R₀A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग एक जैसा और बहुत ज़्यादा है। एक बहुत तेज़, कम दूरी वाला नाभिकीय बल न्यूक्लिऑनों को बाँधे रखता है। नाभिक अपने अलग-अलग कणों से थोड़ा हल्का होता है; यह द्रव्यमान क्षति Δm ही बंधन ऊर्जा है, E = Δm c² (1 u = 931.5 MeV)। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लोहे (A ≈ 56) के पास सबसे ज़्यादा है, इसलिए भारी नाभिक टूटकर (विखंडन) और हल्के नाभिक जुड़कर (संलयन) ऊर्जा देते हैं।
- कण भौतिकी: क्वार्क, लेप्टॉन और मानक मॉडल – कण भौतिकी पदार्थ के सबसे छोटे टुकड़ों को पढ़ती है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन क्वार्क से बने हैं। इलेक्ट्रॉन लेप्टॉन परिवार का है। हर कण का एक प्रतिकण होता है। कण चार बल महसूस करते हैं, और इनमें से तीन बल बोसॉन नाम के संदेशवाहक कण ले जाते हैं। यह पूरी तस्वीर मानक मॉडल (Standard Model) कहलाती है।