द्वैत प्रकृति: पहले प्रकाश, फिर द्रव्य
प्रकाश व्यतिकरण और विवर्तन दिखाता है, इसलिए वह तरंग है। प्रकाश विद्युत प्रभाव में वह ऊर्जा पैकेटों में देता है, इसलिए वह कण (फोटॉन) भी है। यह प्रकाश की द्वैत प्रकृति है।
1924 में लुई दे ब्रॉग्ली ने एक सीधा सवाल पूछा: प्रकृति संतुलन पसंद करती है; अगर तरंगें कण जैसी हो सकती हैं, तो क्या कण तरंग जैसे हो सकते हैं? उन्होंने कहा, हाँ। हर गतिमान द्रव्य के साथ एक तरंग जुड़ी होती है। इसे द्रव्य तरंग या दे ब्रॉग्ली तरंग कहते हैं।
दे ब्रॉग्ली संबंध
फोटॉन के लिए संवेग p = h/λ। दे ब्रॉग्ली ने यही नियम द्रव्य पर लगाया:
λ = h / p = h / (m v)
यहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s, m द्रव्यमान और v कण की चाल है।
- बड़ा संवेग → छोटी तरंगदैर्ध्य।
- विराम में कण (p = 0) की कोई द्रव्य तरंग नहीं (λ अनंत हो जाती)।
- द्रव्य तरंगें विद्युतचुंबकीय तरंगें नहीं हैं; ये आवेशित और अनावेशित दोनों कणों की होती हैं।
गतिज ऊर्जा और वोल्टेज के रूप में λ
गतिज ऊर्जा K = ½mv² = p²/2m, इसलिए p = √(2mK) और
λ = h / √(2mK)
आवेश q वाला कण विराम से विभवांतर V द्वारा त्वरित हो तो K = qV:
λ = h / √(2mqV)
इलेक्ट्रॉन के लिए (m = 9.11 × 10⁻³¹ kg, q = 1.6 × 10⁻¹⁹ C) यह बनता है
λ = 1.227 / √V nm (V वोल्ट में)।
V = 100 V पर λ ≈ 0.123 nm। यह क्रिस्टल में परमाणुओं के बीच की दूरी जितना है, इसीलिए क्रिस्टल इलेक्ट्रॉनों का विवर्तन कर सकते हैं।
गेंद की तरंग हमें क्यों नहीं दिखती?
36 m/s से चलती 0.16 kg की क्रिकेट गेंद का p ≈ 5.8 kg m/s, इसलिए λ ≈ 1.1 × 10⁻³⁴ m। यह नाभिक (लगभग 10⁻¹⁵ m) से भी बहुत छोटी है। इतनी छोटी कोई झिरी या क्रिस्टल नहीं होता, इसलिए इसका तरंग प्रभाव कभी नहीं दिखता। तरंग प्रभाव तभी दिखते हैं जब λ रुकावट के आकार के आसपास हो। इसलिए तरंग प्रकृति इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन जैसे छोटे कणों के लिए मायने रखती है, रोज़ की चीज़ों के लिए नहीं।
कणों और फोटॉन की तुलना
- समान गतिज ऊर्जा: λ ∝ 1/√m। समान K पर इलेक्ट्रॉन की λ प्रोटॉन से बड़ी।
- समान वोल्टेज: λ ∝ 1/√(mq)। इलेक्ट्रॉन > प्रोटॉन > ऐल्फा कण।
- समान चाल: λ ∝ 1/m।
- समान संवेग: λ समान, कण कोई भी हो।
- फोटॉन की ऊर्जा E = pc, जबकि कण की K = p²/2m। इसलिए समान λ पर फोटॉन और इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा अलग होती है।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
- 3D में इलेक्ट्रॉन चुनो और V = 100 रखो। λ लिखो। अनुमान लगाओ V = 400 पर λ कितनी होगी, फिर जाँचो (आधी होनी चाहिए)।
- V = 100 रखो। प्रोटॉन, फिर ऐल्फा कण चुनो। देखने से पहले तीनों तरंगदैर्ध्य को क्रम में लगाओ।
- क्रिकेट गेंद चुनो। स्लाइडर 1 से 60 m/s तक ले जाओ। क्या रेखा कभी लहराती है? क्यों नहीं?
- घर पर: गेंद को दरवाज़े से फेंको। वह ध्वनि की तरह फैलती नहीं। अपनी λ (द्रव्यमान लगभग 50 kg, चाल 1 m/s) की तुलना दरवाज़े की चौड़ाई से करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- λ = h/p = h/(mv)
- λ = h/√(2mK)
- λ = h/√(2mqV)
- इलेक्ट्रॉन: λ = 1.227/√V nm
- फोटॉन: p = h/λ = E/c
- समान K: λ ∝ 1/√m; समान V: λ ∝ 1/√(mq)
हल किए गए उदाहरण
1. 36 m/s से चलती 0.16 kg की गेंद की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य निकालो।
चरण 1: p = mv = 0.16 × 36 = 5.76 kg m/s। चरण 2: λ = h/p = 6.63 × 10⁻³⁴ / 5.76। चरण 3: λ ≈ 1.15 × 10⁻³⁴ m, जो देखने के लिए बहुत छोटी है।
2. एक इलेक्ट्रॉन 2 × 10⁶ m/s से चल रहा है। उसकी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य निकालो।
चरण 1: p = mv = 9.11 × 10⁻³¹ × 2 × 10⁶ = 1.822 × 10⁻²⁴ kg m/s। चरण 2: λ = 6.63 × 10⁻³⁴ / 1.822 × 10⁻²⁴। चरण 3: λ ≈ 3.64 × 10⁻¹⁰ m = 0.364 nm।
3. एक इलेक्ट्रॉन को 144 V से त्वरित किया गया। उसकी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य निकालो।
चरण 1: λ = 1.227/√V nm लगाओ। चरण 2: √144 = 12। चरण 3: λ = 1.227/12 ≈ 0.102 nm।
4. 50 eV गतिज ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य निकालो।
चरण 1: K = 50 × 1.6 × 10⁻¹⁹ = 8 × 10⁻¹⁸ J। चरण 2: p = √(2mK) = √(2 × 9.11 × 10⁻³¹ × 8 × 10⁻¹⁸) ≈ 3.82 × 10⁻²⁴ kg m/s। चरण 3: λ = h/p ≈ 1.74 × 10⁻¹⁰ m = 0.174 nm। (जाँच: 1.227/√50 = 0.174 nm।)
5. एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा समान है। अनुपात λe : λp निकालो (mp = 1836 me)।
चरण 1: λ = h/√(2mK); K समान है, तो λ ∝ 1/√m। चरण 2: λe/λp = √(mp/me) = √1836। चरण 3: λe : λp ≈ 42.8 : 1।
6. एक प्रोटॉन और एक ऐल्फा कण समान वोल्टेज से त्वरित हैं। λp : λα निकालो (mα = 4mp, qα = 2qp)।
चरण 1: λ = h/√(2mqV) → λ ∝ 1/√(mq)। चरण 2: λp/λα = √(4 × 2) = √8। चरण 3: λp : λα = 2√2 : 1 ≈ 2.83 : 1।
7. इलेक्ट्रॉन को कितने वोल्टेज से त्वरित करें कि उसकी तरंगदैर्ध्य 0.1 nm हो?
चरण 1: λ = 1.227/√V → √V = 1.227/0.1 = 12.27। चरण 2: V = 12.27² ≈ 150.6 V। चरण 3: यानी लगभग 151 V।
आम गलतियाँ
- 1.227/√V nm सूत्र को प्रोटॉन या ऐल्फा कण पर लगाना। यह केवल इलेक्ट्रॉन के लिए है।
- λ = h/√(2mK) में लगाने से पहले eV को जूल में न बदलना।
- द्रव्य तरंगों को विद्युतचुंबकीय तरंगें समझना। ऐसा नहीं है; न्यूट्रॉन जैसे अनावेशित कणों की भी ये होती हैं।
- यह कहना कि भारी कण की तरंगदैर्ध्य हमेशा छोटी होती है। समान संवेग पर तरंगदैर्ध्य समान होती है, द्रव्यमान कुछ भी हो।