China 高三 Physics
अध्याय: 9
1. Selective 3 Ch.1 Molecular kinetic theory
Basic ideas; oil-film estimate of molecule size · Speed distribution; molecular KE and PE
- गैसों का अणुगति सिद्धांत: दाब, ताप और वर्ग-माध्य-मूल चाल – अणुगति सिद्धांत गैस को बहुत छोटे, तेज़, बेतरतीब चलते अणुओं का समूह मानता है, जो प्रत्यास्थ रूप से टकराते हैं और एक-दूसरे को खींचते नहीं। दीवार से टकराने पर अणु का वेग उलटता है और दीवार को 2mvₓ संवेग मिलता है। सब अणुओं की टक्करें जोड़ने पर दाब P = ⅓ n m v̄² = ⅓ ρ v̄² आता है। इसे PV = N k T से मिलाने पर एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा (3/2) k T मिलती है: ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। वर्ग-माध्य-मूल चाल v_rms = √(3RT/M) है, इसलिए समान ताप पर हल्की गैस तेज़ चलती है।
2. Selective 3 Ch.2 Gases, solids, liquids
Temperature scales; gas laws; ideal gas · Crystals and amorphous solids; liquid crystals · Surface tension; capillarity
- आदर्श गैस समीकरण PV = nRT और गैस को दबाने में कार्य – गैस अनगिनत छोटे-छोटे अणुओं से बनी है जो हर तरफ़ भागते रहते हैं। दीवारों पर उनकी टक्कर से दाब बनता है। कम घनत्व वाली गैस के लिए तीन आसान नियम हैं: ताप स्थिर हो तो P × V स्थिर (बॉयल); दाब स्थिर हो तो V केल्विन ताप के साथ बढ़ता है (चार्ल्स); एक जैसे P और T पर बराबर आयतन में बराबर अणु (आवोगाद्रो)। तीनों मिलकर बनते हैं PV = nRT = N k T। एक मोल में 6.022 × 10²³ कण होते हैं, यही आवोगाद्रो संख्या है। पिस्टन को अंदर धकेलने में गैस पर कार्य होता है; यह कार्य P–V ग्राफ़ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर है, और स्थिर ताप पर W = nRT ln(V₁/V₂)।
- ठोस अवस्था (Solid State) – ठोस में कण पास-पास होते हैं और अपनी जगह पर सिर्फ़ कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का आकार तय रहता है। क्रिस्टलीय ठोस में कण एक नियमित पैटर्न में दोहराते हैं; अक्रिस्टलीय ठोस (जैसे काँच) में नहीं। सबसे छोटा दोहराने वाला डिब्बा एकक कोष्ठिका है। सरल घन में 1, अंतःकेंद्रित घन में 2 और फलक-केंद्रित घन में 4 कण होते हैं। बंधन के आधार पर क्रिस्टल आयनिक, सहसंयोजक जालक, आण्विक या धात्विक होते हैं।
- पृष्ठ तनाव, स्पर्श कोण और केशिका उन्नयन – द्रव की सतह के अणु पड़ोसियों द्वारा अंदर की ओर खींचे जाते हैं, इसलिए सतह तनी हुई झिल्ली जैसी बर्ताव करती है। सतह के प्रति एकांक क्षेत्रफल में जमा अतिरिक्त ऊर्जा पृष्ठ ऊर्जा है, और यह पृष्ठ तनाव S (प्रति एकांक लंबाई बल, N/m) के बराबर है। जहाँ द्रव ठोस से मिलता है, स्पर्श कोण θ बताता है कि द्रव ठोस को गीला करता है (θ < 90°, जैसे काँच पर पानी) या नहीं (θ > 90°, जैसे पारा)। घुमावदार सतह के अंदर अतिरिक्त दाब होता है: बूँद या द्रव में हवा के बुलबुले में 2S/r, साबुन के बुलबुले में 4S/r। पतली नली में द्रव h = 2S cosθ / (rρg) चढ़ता (या उतरता) है।
3. Selective 3 Ch.3 Laws of thermodynamics
First law; energy conservation · Second law
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
- ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम, ऊष्मा इंजन और प्रशीतक – प्रथम नियम कहता है ऊर्जा संरक्षित है; द्वितीय नियम बताता है ऊष्मा और ऊर्जा किस दिशा में जा सकती है। ऊष्मा अपने-आप केवल गरम से ठंडे की ओर बहती है (क्लॉसियस)। कोई इंजन ली गई सारी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता; कुछ ठंडी वस्तु में फेंकनी पड़ती है (केल्विन–प्लांक)। ऊष्मा इंजन गरम स्रोत से Q₁ लेता है, कार्य W करता है, Q₂ छोड़ता है: दक्षता η = W/Q₁ = 1 − Q₂/Q₁. प्रशीतक कार्य W से ठंडे से गरम में Q₂ ले जाता है: COP α = Q₂/W. सबसे अच्छे, कार्नो इंजन के लिए η = 1 − T₂/T₁.
4. Selective 3 Ch.4 Atomic structure and wave–particle duality
Black-body radiation · Photoelectric effect · Nuclear atom; hydrogen spectrum; Bohr model · Matter waves; quantum mechanics
- क्वांटम विचार: ऊर्जा पैकेट में आती है – गरम वस्तु चमकती है, और पुरानी भौतिकी उसके रंगों को समझा नहीं पाई। 1900 में मैक्स प्लांक ने अनुमान लगाया कि ऊर्जा का लेन-देन सिर्फ़ छोटे-छोटे पैकेटों में होता है। f आवृत्ति के प्रकाश के एक पैकेट की ऊर्जा E = hf होती है, जहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s। प्रकाश के इस पैकेट को फ़ोटॉन कहते हैं। इसी अनुमान से पहेली सुलझी और क्वांटम भौतिकी शुरू हुई।
- प्रकाश विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण – जब काफ़ी ऊँची आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर पड़ता है, तो उसमें से इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल आते हैं। प्रकाश छोटे-छोटे पैकेटों में आता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं; हर फोटॉन की ऊर्जा E = hν है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है: hν = φ + KEmax, जहाँ φ कार्य फलन है। देहली आवृत्ति ν₀ = φ/h से कम आवृत्ति पर, प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
- परमाणु: अल्फा कण प्रकीर्णन से बोर मॉडल तक – रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कण फेंके और पाया कि परमाणु ज़्यादातर खाली है, बीच में एक बहुत छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक है। फिर बोर ने कहा कि हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉन सिर्फ़ उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जहाँ कोणीय संवेग nh/2π हो। n वीं कक्षा में त्रिज्या 0.529 n² Å, चाल (2.19 × 10⁶)/n m/s और ऊर्जा −13.6/n² eV होती है। इलेक्ट्रॉन नीचे कूदता है तो ऊर्जा का अंतर एक खास रंग के प्रकाश के रूप में निकलता है — यही हाइड्रोजन का रेखा स्पेक्ट्रम है।
- द्रव्य तरंगें और दे ब्रॉग्ली संबंध – प्रकाश तरंग की तरह भी चलता है और कण की तरह भी। 1924 में लुई दे ब्रॉग्ली ने कहा कि द्रव्य भी ऐसा ही करता है: हर गतिमान कण के साथ एक तरंग होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य λ = h/p = h/mv। गतिज ऊर्जा K वाले कण के लिए λ = h/√(2mK); V वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए λ = 1.227/√V nm। रोज़ की चीज़ों की λ बहुत ही छोटी होती है, पर इलेक्ट्रॉन की λ परमाणु के आकार जितनी होती है।
5. Selective 3 Ch.5 The nucleus
Composition; decay; half-life · Nuclear force; binding energy · Fission and fusion · "Elementary" particles
- रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु – कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।
- नाभिक: आकार, नाभिकीय बल, बंधन ऊर्जा, विखंडन और संलयन – नाभिक में Z प्रोटॉन और N न्यूट्रॉन होते हैं (A = Z + N न्यूक्लिऑन)। इसकी त्रिज्या R = R₀A^(1/3), R₀ ≈ 1.2 fm, इसलिए सब नाभिकों का घनत्व लगभग एक जैसा और बहुत ज़्यादा है। एक बहुत तेज़, कम दूरी वाला नाभिकीय बल न्यूक्लिऑनों को बाँधे रखता है। नाभिक अपने अलग-अलग कणों से थोड़ा हल्का होता है; यह द्रव्यमान क्षति Δm ही बंधन ऊर्जा है, E = Δm c² (1 u = 931.5 MeV)। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा लोहे (A ≈ 56) के पास सबसे ज़्यादा है, इसलिए भारी नाभिक टूटकर (विखंडन) और हल्के नाभिक जुड़कर (संलयन) ऊर्जा देते हैं।
- कण भौतिकी: क्वार्क, लेप्टॉन और मानक मॉडल – कण भौतिकी पदार्थ के सबसे छोटे टुकड़ों को पढ़ती है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन क्वार्क से बने हैं। इलेक्ट्रॉन लेप्टॉन परिवार का है। हर कण का एक प्रतिकण होता है। कण चार बल महसूस करते हैं, और इनमें से तीन बल बोसॉन नाम के संदेशवाहक कण ले जाते हैं। यह पूरी तस्वीर मानक मॉडल (Standard Model) कहलाती है।
6. Elective 1: Physics and society
Physics and human understanding (cosmology, Galileo, relativity, quanta) · Physics and social change (steam, electromagnetism, microelectronics, IT, nuclear tech) · Physics in civic life (energy, lasers, spaceflight)
- भौतिकी और मानव समझ: ब्रह्मांड, गैलीलियो, सापेक्षता और क्वांटम – हज़ारों साल तक लोग मानते थे कि पृथ्वी आकाश के बीच में स्थिर है। ध्यान से देखने, दूरबीन और प्रयोगों ने यह सोच बदल दी। गैलीलियो ने सिखाया कि विचार को नापकर जाँचना चाहिए। बाद में आइंस्टाइन ने दिखाया कि समय और दूरी चाल पर निर्भर हैं और प्लांक ने बताया कि ऊर्जा छोटे पैकेटों (क्वांटा) में आती है। इस कहानी को कई देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया।
- भौतिकी और समाज: भाप, बिजली, चिप और परमाणु ऊर्जा – भौतिकी के नए विचारों ने लोगों का जीवन बदला। भाप इंजन ने ऊष्मा को गति में बदला। जनरेटर ने गति को बिजली में बदला। माइक्रोचिप में स्विच इतने छोटे हुए कि फ़ोन में अरबों समा गए। नाभिकीय विखंडन में थोड़े द्रव्यमान से बहुत ऊष्मा मिलती है।
- नागरिक जीवन में भौतिकी: ऊर्जा, लेज़र, फाइबर और अंतरिक्ष यात्रा – भौतिकी सार्वजनिक जीवन में हर जगह है। खर्च हुई ऊर्जा = शक्ति × समय (बिल की 1 यूनिट = 1 kWh)। काँच के फाइबर में प्रकाश टकराता हुआ इंटरनेट और कॉल ले जाता है। लेज़र किरण पतली, सीधी और एक रंग की होती है। रॉकेट गैस नीचे फेंकता है और खुद ऊपर उठता है; उपग्रह हमेशा गिरता रहता है पर इतनी तेज़ आड़ी चाल से कि पृथ्वी से टकराता नहीं।
7. Elective 2: Physics and technology
Medical technology (ultrasound, X-ray, CT, radiation) · New energy · New materials (nano, superconductors) · Information technology (smartphones, satellite positioning)
- चिकित्सा भौतिकी: अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी और विकिरण सुरक्षा – अल्ट्रासाउंड शरीर में ध्वनि के स्पंद भेजकर गूँज का समय नापता है: गहराई = चाल × समय ÷ 2। एक्स-रे शरीर से गुज़रती हैं और हड्डी उन्हें ज़्यादा रोकती है, इसलिए छाया-चित्र बनता है। सीटी सब कोणों के एक्स-रे चित्र जोड़कर कटान की तस्वीरें बनाता है। एक्स-रे आयनकारी हैं, इसलिए कम समय, ज़्यादा दूरी और ढाल से मात्रा घटाई जाती है। अल्ट्रासाउंड ध्वनि है, आयनकारी नहीं।
- ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत – अनवीकरणीय स्रोत (कोयला, तेल, गैस, यूरेनियम) प्रकृति के बनाने से तेज़ खर्च होते हैं, और जीवाश्म ईंधन CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत प्रकृति फिर से भरती है: सौर (फ़ोटोवोल्टिक सेल और सौर तापन), पवन (P ∝ v³), जलविद्युत (P = η ρ g h Q), ज्वारीय, भूतापीय और जैव भार। हाइड्रोजन ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली और पानी बनाता है। धूप और हवा बदलती रहती हैं, इसलिए भंडारण (बैटरी, पंप किया पानी) और कई स्रोतों का मिश्रण चाहिए। हर स्रोत की कुछ क़ीमत है: ज़मीन, सामग्री, लागत और प्रकृति पर असर।
- नए पदार्थ: नैनो पदार्थ, अतिचालक और क्रियाशील पदार्थ – नैनो पदार्थों के टुकड़े लगभग 1 से 100 nm के होते हैं। ठोस को बारीक टुकड़ों में बाँटने पर आयतन वही रहता है पर सतह बहुत बढ़ती है, इसलिए गुण बदलते हैं। अतिचालक क्रांतिक ताप से नीचे अपना सारा विद्युत प्रतिरोध खो देता है और चुंबकीय क्षेत्र बाहर धकेलता है, इसलिए चुंबक उसके ऊपर तैरता है। क्रियाशील पदार्थ ताप, प्रकाश, दाब या बिजली लगने पर उपयोगी तरीके से बदलते हैं।
8. Elective 3: Frontiers
Microscopic world (de Broglie, uncertainty, particles) · High-speed world (special and general relativity) · Cosmos (Big Bang, black holes, dark matter) · Unity of the world (four interactions)
- द्रव्य तरंगें और दे ब्रॉग्ली संबंध – प्रकाश तरंग की तरह भी चलता है और कण की तरह भी। 1924 में लुई दे ब्रॉग्ली ने कहा कि द्रव्य भी ऐसा ही करता है: हर गतिमान कण के साथ एक तरंग होती है, जिसकी तरंगदैर्ध्य λ = h/p = h/mv। गतिज ऊर्जा K वाले कण के लिए λ = h/√(2mK); V वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए λ = 1.227/√V nm। रोज़ की चीज़ों की λ बहुत ही छोटी होती है, पर इलेक्ट्रॉन की λ परमाणु के आकार जितनी होती है।
- विशेष आपेक्षिकता (Special Relativity) – विशेष आपेक्षिकता (आइंस्टीन, 1905) दो अभिधारणाओं पर टिकी है: सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में भौतिकी के नियम एक-से हैं, और निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s हर प्रेक्षक के लिए एक-सी है। इससे निकलता है कि चलती घड़ी धीमी चलती है (t = γt₀), चलती वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है (L = L₀/γ), और द्रव्यमान ऊर्जा का रूप है (E = mc²), जहाँ γ = 1/√(1 − v²/c²)। रोज़ की चाल पर γ ≈ 1, इसलिए न्यूटन की यांत्रिकी काम करती है; c के पास वह असफल होती है।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।
9. 高考 review
Comprehensive review
जल्द आ रहा है