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पृष्ठ तनाव, स्पर्श कोण और केशिका उन्नयन

द्रव की सतह के अणु पड़ोसियों द्वारा अंदर की ओर खींचे जाते हैं, इसलिए सतह तनी हुई झिल्ली जैसी बर्ताव करती है। सतह के प्रति एकांक क्षेत्रफल में जमा अतिरिक्त ऊर्जा पृष्ठ ऊर्जा है, और यह पृष्ठ तनाव S (प्रति एकांक लंबाई बल, N/m) के बराबर है। जहाँ द्रव ठोस से मिलता है, स्पर्श कोण θ बताता है कि द्रव ठोस को गीला करता है (θ < 90°, जैसे काँच पर पानी) या नहीं (θ > 90°, जैसे पारा)। घुमावदार सतह के अंदर अतिरिक्त दाब होता है: बूँद या द्रव में हवा के बुलबुले में 2S/r, साबुन के बुलबुले में 4S/r। पतली नली में द्रव h = 2S cosθ / (rρg) चढ़ता (या उतरता) है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अंदर का अणु (हरा) हर दिशा में बराबर खिंचता है। सतह के अणु (लाल) के ऊपर द्रव नहीं, इसलिए सारे खिंचाव मिलकर अंदर की ओर (बैंगनी) खींचते हैं। सतह तनी झिल्ली जैसी बन जाती है।
  2. तार के फ़्रेम पर साबुन की झिल्ली है, एक तार खिसक सकता है। झिल्ली तार को अंदर खींचती है। झिल्ली की दो सतहें हैं, इसलिए बल F = 2Sl, जहाँ l तार की लंबाई है।
  3. काँच पर पानी की बूँद फैल जाती है; काँच से बना कोण (स्पर्श कोण θ) छोटा, 90° से कम। पारे की बूँद गोल गोली बनी रहती है; उसका θ 90° से ज़्यादा।
  4. बूँद की झिल्ली अंदर के द्रव को दबाती है, इसलिए अंदर दाब ΔP = 2S/r ज़्यादा। छोटी बूँद का r छोटा, इसलिए उसकी बैंगनी दाब पट्टी ऊँची।
  5. काँच की पतली नलियाँ पानी में डुबोई। पानी हर नली में h = 2S cosθ / (rρg) ऊपर चढ़ता है। सबसे पतली नली में सबसे ऊँचा।
  6. अब आपकी बारी: नली की त्रिज्या और द्रव बदलो। पारे में नली के अंदर का तल बाहर से नीचे चला जाता है, क्योंकि cos θ ऋणात्मक है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सतह के अणु में अतिरिक्त ऊर्जा क्यों?

उसे खींचने वाले पड़ोसी कम हैं, इसलिए वह कम कसकर बँधा है। उसे अंदर से ऊपर लाने में कार्य हुआ, वही पृष्ठ ऊर्जा बनकर जमा है।

साबुन की झिल्ली के लिए F = 2Sl क्यों, Sl क्यों नहीं?

झिल्ली की आगे और पीछे दो सतहें हैं। हर एक Sl से खींचती है, कुल 2Sl।

पानी काँच को गीला करता है पर पारा नहीं, क्यों?

पानी के अणु आपस से ज़्यादा काँच की ओर खिंचते हैं (आसंजन > संसंजन), इसलिए पानी फैलता है। पारे के परमाणु आपस में ज़्यादा ज़ोर से खिंचते हैं, इसलिए पारा गोली बनाता है।

छोटी बूँद के अंदर दाब बड़ी से ज़्यादा क्यों?

छोटी बूँद की सतह ज़्यादा मुड़ी है। झिल्ली केंद्र की ओर ज़्यादा ज़ोर से दबाती है, इसलिए छोटे r पर ΔP = 2S/r बड़ा।

केशिका में पानी उठाने की ऊर्जा कहाँ से आती है?

द्रव जब ज़्यादा काँच को गीला करता है तो पृष्ठ ऊर्जा मुक्त होती है। उसका आधा भाग पानी उठाता है, आधा ऊष्मा बनकर खो जाता है।

केशिका में पारा नीचे क्यों जाता है?

उसका स्पर्श कोण 90° से ज़्यादा है, cos θ ऋणात्मक, इसलिए h ऋणात्मक आता है। नवचंद्रक ऊपर उभरता है और उसके नीचे दाब ज़्यादा होता है।

पृष्ठ ऊर्जा

द्रव में हर अणु अपने पड़ोसियों को खींचता है। गहराई में अणु हर ओर से बराबर खिंचता है, नेट खिंचाव शून्य। सतह के अणु के पड़ोसी सिर्फ़ नीचे और बगल में हैं, इसलिए उस पर नेट खिंचाव अंदर की ओर है।

किसी अणु को अंदर से सतह पर लाने में इस खिंचाव के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इसलिए सतह के अणुओं में अतिरिक्त ऊर्जा होती है। सतह की इस अतिरिक्त ऊर्जा को पृष्ठ ऊर्जा कहते हैं।

नई सतह बनाने में ऊर्जा लगती है, इसलिए द्रव हमेशा अपना पृष्ठ क्षेत्रफल कम से कम रखना चाहता है। इसीलिए मुक्त बूँदें गोल होती हैं: दिए आयतन के लिए गोले का पृष्ठ सबसे कम है।

पृष्ठ तनाव

पृष्ठ तनाव S: सतह पर खींची किसी रेखा के लंबवत, सतह के तल में लगने वाला प्रति एकांक लंबाई बल: S = F/l। मात्रक: N/m।

U आकार के तार के फ़्रेम पर लंबाई l का खिसकने वाला तार और साबुन की झिल्ली लो। झिल्ली की दो सतहें (आगे और पीछे), इसलिए वह तार को F = 2Sl से खींचती है। तार को d दूरी बाहर खींचने में कार्य = F d = 2Sld। नया क्षेत्रफल = 2ld (दो सतहें)। इसलिए:

प्रति एकांक क्षेत्रफल पृष्ठ ऊर्जा = कार्य / नया क्षेत्रफल = S

यानी पृष्ठ तनाव (N/m) और प्रति क्षेत्रफल पृष्ठ ऊर्जा (J/m²) एक ही राशि हैं। पानी: 20 °C पर S ≈ 0.072 N/m। ताप बढ़ने पर S घटता है, साबुन इसे बहुत घटाता है।

स्पर्श कोण

जहाँ द्रव की सतह ठोस से मिलती है, वहाँ ठोस की सतह और द्रव सतह की स्पर्श रेखा के बीच, द्रव के अंदर की ओर नापा गया कोण स्पर्श कोण θ है।

साबुन और अपमार्जक θ और S घटाते हैं ताकि पानी कपड़े की बारीक जगहों में जाए। जलरोधी पदार्थ θ बढ़ाते हैं ताकि पानी बाहर रहे।

बूँदों और बुलबुलों में आधिक्य दाब

घुमावदार सतह अपने केंद्र की ओर खींचती है, इसलिए अवतल (अंदर की) ओर दाब ज़्यादा होता है।

त्रिज्या r की द्रव बूँद: त्रिज्या Δr बढ़ाओ। अतिरिक्त पृष्ठ ऊर्जा = S × 8πrΔr। अतिरिक्त दाब का कार्य = ΔP × 4πr²Δr। दोनों बराबर रखो:

ΔP = P(अंदर) − P(बाहर) = 2S/r (द्रव के अंदर हवा के बुलबुले के लिए भी)

हवा में साबुन का बुलबुला: दो सतहें, अंदर और बाहर। इसलिए:

ΔP = 4S/r

छोटी बूँद और छोटे बुलबुले में आधिक्य दाब ज़्यादा। एक छोटे और एक बड़े साबुन के बुलबुले को नली से जोड़ो तो छोटा सिकुड़ता है और बड़ा फूलता है।

केशिका उन्नयन

काँच की पतली नली (केशिका) पानी में डुबोओ। पानी उसमें ऊपर चढ़ता है और ऊपरी सतह (नवचंद्रक, meniscus) कटोरी जैसी मुड़ती है। पारे में तल बाहर से नीचे चला जाता है और नवचंद्रक ऊपर उभरता है।

सूत्र (आधिक्य दाब से): पानी के लिए θ ≈ 0°, नवचंद्रक नली की त्रिज्या a का अर्धगोला। नवचंद्रक के ठीक नीचे दाब बाहर से 2S/a कम। पानी तब तक चढ़ता है जब तक स्तंभ का दाब यह कमी भर न दे: hρg = 2S/a। सामान्य रूप में, कोण θ के साथ:

h = 2S cos θ / (r ρ g)

करके देखो: तैरती पिन

स्टील की पिन को काँटे पर रखकर धीरे से कटोरी के पानी पर उतारो। स्टील पानी से 8 गुना घना है, फिर भी पिन सतह की झिल्ली पर तैरती है। अब किनारे पर पानी को बर्तन धोने के साबुन की एक बूँद से छुओ। पिन तुरंत डूबती है: साबुन ने S घटा दिया। 3D के चरण 6 में r को 0.5 mm से 0.25 mm करो और जाँचो कि h दोगुना होता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 4 cm लंबा तार पानी पर तैर रहा है। उसे सतह से अलग करने के लिए (भार के अलावा) कितना बल चाहिए? (S = 0.072 N/m)

चरण 1: सतह तार के दोनों ओर खींचती है, कुल लंबाई = 2 × 0.04 m। चरण 2: F = 0.072 × 0.08। उत्तर: 5.76 × 10⁻³ N।

2. 1 mm त्रिज्या की पानी की बूँद में आधिक्य दाब? (S = 0.072 N/m)

चरण 1: ΔP = 2S/r। चरण 2: = 2 × 0.072 / 10⁻³। उत्तर: 144 Pa।

3. 2 cm त्रिज्या के साबुन के बुलबुले में आधिक्य दाब? (S = 0.03 N/m)

चरण 1: दो सतहें, ΔP = 4S/r। चरण 2: = 4 × 0.03 / 0.02। उत्तर: 6 Pa।

4. 0.5 mm त्रिज्या की काँच की नली में पानी कितना चढ़ेगा? (S = 0.072 N/m, θ = 0°, ρ = 1000 kg/m³, g = 9.8)

चरण 1: h = 2S cosθ/(rρg)। चरण 2: अंश = 0.144। चरण 3: हर = 5 × 10⁻⁴ × 1000 × 9.8 = 4.9। चरण 4: h = 0.144/4.9। उत्तर: h ≈ 2.9 cm।

5. 1 mm त्रिज्या की काँच की नली में पारा कितना नीचे दबेगा? (S = 0.465 N/m, θ = 140°, cos 140° = −0.766, ρ = 13600 kg/m³, g = 9.8)

चरण 1: h = 2S cosθ/(rρg)। चरण 2: अंश = 2 × 0.465 × (−0.766) = −0.712। चरण 3: हर = 10⁻³ × 13600 × 9.8 = 133.3। चरण 4: h = −0.712/133.3। उत्तर: h ≈ −5.3 mm; पारा बाहर के तल से लगभग 5.3 mm नीचे।

6. 3 cm त्रिज्या का साबुन का बुलबुला फुलाने में कितना कार्य? (S = 0.03 N/m)

चरण 1: एक गोले का क्षेत्रफल = 4πr² = 1.13 × 10⁻² m²। चरण 2: दो सतहें, नया क्षेत्रफल = 2.26 × 10⁻² m²। चरण 3: W = 0.03 × 2.26 × 10⁻²। उत्तर: W ≈ 6.8 × 10⁻⁴ J।

7. 0.1 mm त्रिज्या की 1000 छोटी बूँदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। मुक्त ऊर्जा? (S = 0.072 N/m)

चरण 1: आयतन संरक्षित: R³ = 1000 r³, R = 10r = 1 mm। चरण 2: पहले क्षेत्रफल = 1000 × 4π × 10⁻⁸ = 1.257 × 10⁻⁴ m²। चरण 3: बाद में = 4π × 10⁻⁶ = 1.257 × 10⁻⁵ m²। चरण 4: कमी = 1.131 × 10⁻⁴ m²। चरण 5: ऊर्जा = 0.072 × 1.131 × 10⁻⁴। उत्तर: ≈ 8.1 × 10⁻⁶ J (बूँद थोड़ी गरम होती है)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पृष्ठ तनाव का SI मात्रक:
2. त्रिज्या r के साबुन के बुलबुले में आधिक्य दाब:
3. काँच को गीला करने वाले द्रव का स्पर्श कोण:
4. केशिका उन्नयन h किसके समानुपाती है?
5. साबुन धुलाई में मदद करता है क्योंकि वह:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृष्ठ तनाव क्या है?

द्रव सतह पर खींची किसी रेखा के लंबवत, सतह में लगने वाला प्रति एकांक लंबाई बल। यह प्रति एकांक क्षेत्रफल पृष्ठ ऊर्जा के बराबर है। मात्रक N/m।

केशिका उन्नयन का सूत्र क्या है?

h = 2S cos θ / (r ρ g), जहाँ S पृष्ठ तनाव, θ स्पर्श कोण, r नली की त्रिज्या और ρ द्रव का घनत्व है।

साबुन के बुलबुले में आधिक्य दाब 4S/r क्यों?

साबुन के बुलबुले की दो सतहें (झिल्ली के अंदर और बाहर) हैं; हर एक 2S/r देती है, कुल 4S/r।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11स्थूल द्रव्य के गुण
चीन高三Selective 3 Ch.2 Gases, solids, liquids

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