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गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा और गुरुत्वीय विभव

पृथ्वी के केंद्र से r दूरी पर द्रव्यमान m की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा U = −GMm/r है, जब अनंत पर U = 0 मानते हैं। यह ऋणात्मक है क्योंकि गुरुत्व खींचता है: वस्तु को अनंत तक ले जाने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है। ज़मीन के पास थोड़ी ऊँचाई h पर U में बदलाव mgh है। सतह से h ऊँचाई तक उठाने का कार्य GMm(1/R − 1/(R + h)) है। गुरुत्वीय विभव V प्रति किलोग्राम स्थितिज ऊर्जा है: V = −GM/r, मात्रक J/kg। विभव अदिश है, इसलिए कई द्रव्यमानों के विभव सीधे जुड़ते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ज़मीन के पास। लाल गेंद थोड़ी ऊपर उठी। बैंगनी वक्र लगभग नारंगी सीधी रेखा की तरह चढ़ा: यही U = mgh है।
  2. अब दूर तक देखो। पूरा वक्र U = −GMm/r है। बहुत दूर, अनंत पर, U = 0 हो जाता है। यही हमारी शून्य रेखा है।
  3. पूरा वक्र शून्य के नीचे है, जैसे एक कुआँ। पृथ्वी के पास गेंद कुएँ में गहरी है, उठाने पर ऊपर चढ़ती है।
  4. गेंद को सतह R से 2R तक उठाओ। हरी पट्टी U में बढ़त है। यही बढ़त वह कार्य है जो तुम्हें करना पड़ता है।
  5. U को m से भाग दो तो विभव V = −GM/r मिलता है, यानी प्रति किलोग्राम ऊर्जा। हल किए उदाहरण के लिए बटन दबाओ।
  6. अब तुम्हारी बारी। गेंद को पास-दूर करो। देखो U शून्य की ओर चढ़ता है, पर उसके ऊपर कभी नहीं जाता।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कक्षा 9 में स्थितिज ऊर्जा mgh और धनात्मक थी। अब ऋणात्मक क्यों?

mgh किसी चुनी हुई सतह (जैसे ज़मीन) से मापता है। −GMm/r अनंत से मापता है। मायने सिर्फ़ बदलाव के हैं, और छोटी ऊँचाई पर दोनों से बदलाव mgh ही आता है।

'अनंत पर शून्य' का असली मतलब क्या है?

बहुत दूर गुरुत्व इतना कमज़ोर है कि वस्तु आज़ाद है। उस ऊर्जा को शून्य कहते हैं। उससे पास सब कुछ शून्य से नीचे है।

स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक है, तो क्या वस्तु के पास 'शून्य से भी कम' ऊर्जा है?

ऋणात्मक का मतलब सिर्फ़ चुने हुए शून्य से नीचे। यह बताता है कि वस्तु पृथ्वी के कुएँ में फँसी है और निकलने को ऊर्जा चाहिए।

2R तक उठाने का कार्य mg × R क्यों नहीं?

ऊपर जाते-जाते g कमज़ोर होता है, इसलिए हर अगला मीटर पिछले से सस्ता पड़ता है। असली कार्य mgR/2 है। चरण 4 में हरी पट्टी देखो।

विभव और स्थितिज ऊर्जा में क्या अंतर है?

विभव V प्रति किलोग्राम ऊर्जा है और सिर्फ़ पृथ्वी और बिंदु पर निर्भर करता है। स्थितिज ऊर्जा = m × V, जो रखी गई वस्तु के द्रव्यमान पर भी निर्भर है।

गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा क्या है?

स्थितिज ऊर्जा स्थिति के कारण जमा ऊर्जा है। गुरुत्व एक संरक्षी बल है: उसका किया कार्य सिर्फ़ शुरू और आखिरी जगह पर निर्भर करता है, रास्ते पर नहीं। इसलिए हर स्थिति को एक स्थितिज ऊर्जा U दी जा सकती है।

किसी बिंदु पर वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = उसे अनंत से उस बिंदु तक धीरे-धीरे (गतिज ऊर्जा बदले बिना) लाने में बाहरी कारक द्वारा किया गया कार्य।

U = −GMm/r की व्युत्पत्ति

  1. पृथ्वी के केंद्र से x दूरी पर m पर गुरुत्व बल GMm/x² है, अंदर की ओर।
  2. m को धीरे-धीरे अंदर लाने के लिए हम उतना ही बल बाहर की ओर लगाते हैं। हमारा बल बाहर, पर वस्तु अंदर चल रही है, इसलिए हमारा कार्य ऋणात्मक है।
  3. dx लंबाई के हर छोटे कदम में कार्य −(GMm/x²) dx। r से ∞ तक सब जोड़ो: ∫ dx/x² (r से ∞) = 1/r। इसलिए W = −GMm/r।
  4. तो U(r) = −GMm/r, और U(∞) = 0।

ऋणात्मक क्यों?

गुरुत्व वस्तु को खुद अंदर खींचता है, इसलिए लाते समय बाहरी कारक का कार्य ऋणात्मक है। आसान भाषा में: वस्तु एक कुएँ में फँसी है, उसे अनंत पर आज़ाद करने के लिए GMm/r ऊर्जा देनी पड़ती है। इसलिए उसकी ऊर्जा शून्य से नीचे शुरू होती है।

कई द्रव्यमानों का निकाय

r दूरी पर m₁ और m₂ के लिए U = −Gm₁m₂/r। कई द्रव्यमान हों तो हर जोड़ी का U जोड़ो।

mgh से संबंध

m को सतह (r = R) से h ऊँचाई (r = R + h) तक उठाओ। U में बढ़त

ΔU = −GMm/(R + h) + GMm/R = GMm h / [R(R + h)]

अगर h ≪ R, तो R(R + h) ≈ R² और GM/R² = g, इसलिए ΔU ≈ mgh।

यानी mgh ज़मीन के पास वाला रूप है, जो किसी चुनी हुई सतह से बदलाव मापता है। पूरा सूत्र −GMm/r अनंत से मापता है। बड़ी ऊँचाई पर हमेशा पूरा सूत्र लगाओ; mgh ज़्यादा उत्तर देता है।

साफ़ रूप: ΔU = mgh / (1 + h/R)।

गुरुत्वीय विभव V

किसी बिंदु पर गुरुत्वीय विभव = प्रति एकांक द्रव्यमान स्थितिज ऊर्जा = 1 kg को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य।

V = U/m = −GM/r। मात्रक J/kg, विमा [L² T⁻²]। यह अदिश है।

खोखले कोश के अंदर V हर जगह बराबर (−GM/R) है, इसलिए वहाँ क्षेत्र शून्य है।

करके देखो: कीप वाला कुआँ

चार्ट पेपर से शंकु बनाओ (या रसोई की कीप लो) और उसके अंदर कंचा घुमाओ। नीचे पतले हिस्से के पास वह तेज़ घूमता है, ऊपर चौड़े हिस्से में धीमा, बिल्कुल पृथ्वी के ऊर्जा-कुएँ में उपग्रह जैसा। ज़्यादा धक्का दो तो ऊपर चढ़ता है। 3D में गेंद को 6 R तक ले जाओ: U शून्य के और पास आता है, पर कभी धनात्मक नहीं होता।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पृथ्वी की सतह पर 100 kg उपग्रह की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा? (GM = 4 × 10¹⁴ m³/s², R = 6.4 × 10⁶ m)

U = −GMm/R = −4 × 10¹⁴ × 100 / 6.4 × 10⁶ = −6.25 × 10⁹ J।

2. पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय विभव? (g = 9.8, R = 6.4 × 10⁶ m)

V = −gR = −9.8 × 6.4 × 10⁶ ≈ −6.27 × 10⁷ J/kg।

3. 10 kg वस्तु को सतह से h = R ऊँचाई तक उठाने में कितना कार्य?

W = mgh/(1 + h/R) = mgR/2 = 10 × 9.8 × 6.4 × 10⁶ / 2 = 3.14 × 10⁸ J।

4. 2 kg वस्तु ज़मीन के पास 5 m उठाई। ΔU? यहाँ mgh क्यों ठीक है?

ΔU = 2 × 9.8 × 5 = 98 J। 5 m, 6400 km के सामने बहुत छोटा है, यानी h ≪ R।

5. पृथ्वी-चंद्रमा जोड़ी की स्थितिज ऊर्जा? (M = 6 × 10²⁴ kg, m = 7.4 × 10²² kg, r = 3.84 × 10⁸ m)

U = −6.67 × 10⁻¹¹ × 4.44 × 10⁴⁷ / 3.84 × 10⁸ ≈ −7.7 × 10²⁸ J।

6. 2 m दूर रखे 10 kg के दो द्रव्यमानों के बीचों-बीच विभव निकालो।

दोनों 1 m दूर। V = −G(10/1) − G(10/1) = −20G = −1.33 × 10⁻⁹ J/kg।

7. a भुजा वाले समबाहु त्रिभुज के कोनों पर तीन बराबर द्रव्यमान m हैं। निकाय की स्थितिज ऊर्जा?

3 जोड़ियाँ, हर एक −Gm²/a। U = −3Gm²/a।

8. किसी बिंदु पर विभव −5 × 10⁷ J/kg है। वहाँ से 20 kg को अनंत तक ले जाने में कार्य?

W = m(0 − V) = 20 × 5 × 10⁷ = 1 × 10⁹ J।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पृथ्वी के केंद्र से r दूरी पर m की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा:
2. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा शून्य कहाँ मानी जाती है?
3. गुरुत्वीय विभव का SI मात्रक:
4. वस्तु पृथ्वी से दूर जाए तो उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा:
5. गुरुत्वीय विभव है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 11 में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?

U = −GMm/r, अनंत पर शून्य। ज़मीन के पास थोड़ी ऊँचाई h पर बदलाव mgh।

गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक क्यों होती है?

क्योंकि गुरुत्व आकर्षी है और शून्य अनंत पर चुना गया है; वस्तु बँधी है और आज़ाद होने को ऊर्जा चाहिए।

पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय विभव कितना है?

V = −GM/R = −gR ≈ −6.3 × 10⁷ J/kg।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

स्पेन2º BachilleratoGravitational field
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11गुरुत्वाकर्षण

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