विज्ञान में कार्य क्या है?
रोज़ की भाषा में पढ़ाई भी काम है। पर विज्ञान में कार्य तभी होता है जब बल किसी चीज़ को खिसकाए। दो बातें ज़रूरी हैं: बल लगे, और वस्तु बल की दिशा में खिसके।
कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन, W = F × s।
कार्य का मात्रक जूल (J) है। 1 N बल किसी वस्तु को 1 m खिसकाए, तो 1 J कार्य होता है।
कार्य कब शून्य, धनात्मक या ऋणात्मक?
- शून्य: दीवार धकेली पर वह नहीं हिली (s = 0)। या कुली सिर पर बोझ रखकर समतल ज़मीन पर चलता है: बल ऊपर है, चलना आगे है, इसलिए यह बल कोई कार्य नहीं करता।
- धनात्मक: बल और खिसकना एक ही दिशा में (ठेला आगे धकेलना)।
- ऋणात्मक: बल खिसकने के उलटी दिशा में (घर्षण लुढ़कती गेंद को रोकता है)। तब W = −F × s।
3D का पहला चरण देखो: F = 0 हो तो बक्सा नहीं खिसकता और W = 0 J।
ऊर्जा और उसके रूप
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। इसका मात्रक भी जूल है। चलता हथौड़ा कील ठोकता है: उसमें ऊर्जा थी, इसलिए उसने कार्य किया।
ऊर्जा के रूप: यांत्रिक (गतिज + स्थितिज), ऊष्मा, प्रकाश, ध्वनि, रासायनिक (भोजन, ईंधन), विद्युत और नाभिकीय। बड़ा मात्रक: 1 kJ = 1000 J।
गतिज ऊर्जा (चलने की ऊर्जा)
हर चलती चीज़ में गतिज ऊर्जा होती है। KE = ½ m v², m = द्रव्यमान (kg), v = चाल (m/s)। चाल दोगुनी करो तो KE चार गुनी हो जाती है, क्योंकि v का वर्ग है।
स्थितिज ऊर्जा (जमा ऊर्जा)
ज़मीन से ऊपर उठी वस्तु में उसकी ऊँचाई के कारण ऊर्जा जमा होती है। PE = m g h, g ≈ 9.8 m/s² (अक्सर 10 लेते हैं)। खिंचे रबर बैंड और कसी स्प्रिंग में भी आकार बदलने से स्थितिज ऊर्जा होती है।
PE केवल ऊँचाई पर निर्भर है, उठाने के रास्ते पर नहीं।
ऊर्जा संरक्षण का नियम
ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा न बनाई जा सकती है, न नष्ट की जा सकती है। वह सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। कुल ऊर्जा वही रहती है।
गेंद को ऊँचाई h से गिराओ। ऊपर उसमें सिर्फ PE (mgh) है। गिरते समय ऊँचाई घटती है और चाल बढ़ती है, यानी PE बदलकर KE बनती है। ज़मीन छूने से ठीक पहले सारी PE, KE बन चुकी होती है। बीच के हर बिंदु पर PE + KE = mgh = स्थिर (हवा का प्रतिरोध छोड़कर)।
3D का तीसरा चरण यही दिखाता है: नीली PE घटती, नारंगी KE बढ़ती, हरी कुल पट्टी बराबर रहती है।
रोज़ दिखने वाले ऊर्जा परिवर्तन
- टॉर्च: रासायनिक (सेल) → विद्युत → प्रकाश।
- जल विद्युत घर: पानी की PE → KE → विद्युत।
- ब्रेक: साइकिल की KE → ब्रेक पैड में ऊष्मा।
शक्ति: कार्य कितनी जल्दी हुआ
दो लोग एक ही सीढ़ी चढ़ते हैं। कार्य दोनों का बराबर है, पर जो दौड़कर चढ़ा वह पहले पहुँचा। उसकी शक्ति ज़्यादा है।
शक्ति = किया गया कार्य ÷ लगा समय, P = W ÷ t। मात्रक वाट (W): 1 W = 1 J/s। बड़ा मात्रक: 1 kW = 1000 W।
अगर शक्ति बदलती रहे, तो औसत शक्ति = कुल कार्य ÷ कुल समय।
ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक
बिजली के बिल में किलोवाट घंटा (kWh) लिखा होता है, जिसे एक "यूनिट" कहते हैं। 1000 W का उपकरण 1 घंटे चले तो 1 kWh ऊर्जा लेता है। 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10⁶ J।
सरल मशीनें: उत्तोलक और घिरनी
सरल मशीन कार्य आसान बनाती है: छोटे बल (प्रयास) से बड़ा भार उठवाती है, या बल की दिशा बदल देती है।
यांत्रिक लाभ (MA) = भार ÷ प्रयास। MA = 4 हो तो 50 N प्रयास से 200 N भार उठेगा।
उत्तोलक
उत्तोलक एक सख्त छड़ है जो एक स्थिर बिंदु पर घूमती है, जिसे आलंब कहते हैं। संतुलन पर भार × भार भुजा = प्रयास × प्रयास भुजा। भुजा यानी आलंब से दूरी। इसलिए MA = प्रयास भुजा ÷ भार भुजा। आलंब भार के पास हो तो प्रयास भुजा लंबी होती है और कम प्रयास लगता है।
- प्रथम वर्ग: आलंब बीच में (सी-सॉ, कैंची, सब्बल)।
- द्वितीय वर्ग: भार बीच में (बोतल ओपनर, एक पहिए की ठेली, सरौता)। MA हमेशा 1 से ज़्यादा।
- तृतीय वर्ग: प्रयास बीच में (चिमटा, हमारी बाँह, मछली पकड़ने की छड़)। MA 1 से कम, पर गति और नियंत्रण मिलता है।
घिरनी
एक स्थिर घिरनी (कुएँ वाली) का MA = 1 है। बल कम नहीं होता, पर नीचे खींचकर ऊपर उठाना आसान होता है। एक चल घिरनी भार के साथ लटकती है, इसका आदर्श MA = 2 है। कई घिरनियाँ जोड़ने से MA और बढ़ता है।
कोई मशीन मुफ़्त कार्य नहीं देती। प्रयास कम हो तो उसे ज़्यादा दूरी तक चलाना पड़ता है। घर्षण थोड़ी ऊर्जा बर्बाद करता है।
घर पर करके देखो
उत्तोलक प्रयोग: 30 cm के स्केल के नीचे पेंसिल रखो, यही आलंब है। एक सिरे पर कुछ सिक्के रखो। दूसरे सिरे को एक उँगली से दबाओ। अब पेंसिल को सिक्कों के पास खिसकाकर फिर दबाओ। पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो कि कब आसान लगा। (उत्तर: आलंब भार के पास हो तो कम प्रयास।)
शक्ति प्रयोग: सीढ़ियाँ धीरे चढ़ो और समय नापो। फिर तेज़ चढ़ो और समय नापो। कार्य = तुम्हारा भार (द्रव्यमान × 10) × सीढ़ियों की ऊँचाई। दोनों समय से भाग दो, तुम्हारी शक्ति वाट में मिल जाएगी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- W = F × s (जूल, J)
- KE = ½ m v²
- PE = m g h
- PE + KE = स्थिर (घर्षण नहीं)
- P = W ÷ t (वाट, W)
- 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J
- MA = भार ÷ प्रयास
- उत्तोलक: भार × भार भुजा = प्रयास × प्रयास भुजा
हल किए गए उदाहरण
1. 20 N का बल एक बक्से को फ़र्श पर 3 m खिसकाता है। कार्य ज्ञात करो।
W = F × s = 20 × 3 = 60 J।
2. 2 kg की गेंद 6 m/s से चल रही है। उसकी गतिज ऊर्जा ज्ञात करो।
KE = ½ m v² = ½ × 2 × 36 = 36 J।
3. 2 kg की गेंद 4 m ऊँचाई तक उठाई गई (g = 10 m/s²)। स्थितिज ऊर्जा?
PE = m g h = 2 × 10 × 4 = 80 J।
4. 2 kg की गेंद 5 m से गिराई गई। ज़मीन छूने से ठीक पहले उसकी KE और चाल ज्ञात करो (g = 10)।
ऊपर PE = 2 × 10 × 5 = 100 J। यह पूरी KE बन जाती है, KE = 100 J। ½ × 2 × v² = 100, v² = 100, v = 10 m/s।
5. 50 kg की छात्रा 6 s में 3 m ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ती है। उसकी शक्ति ज्ञात करो (g = 10)।
W = 50 × 10 × 3 = 1500 J। P = 1500 ÷ 6 = 250 W।
6. 1500 W का हीटर रोज़ 2 घंटे, 30 दिन चलता है। ऊर्जा kWh में और ₹8 प्रति यूनिट से खर्च बताओ।
रोज़ = 1.5 kW × 2 h = 3 kWh। 30 दिन में = 90 kWh। खर्च = 90 × 8 = ₹720।
7. 600 N का भार आलंब से 1.5 m दूर है, प्रयास आलंब से 4.5 m दूर है। प्रयास और MA ज्ञात करो।
600 × 1.5 = E × 4.5, E = 900 ÷ 4.5 = 200 N। MA = 600 ÷ 200 = 3।
8. कार की चाल दोगुनी हो जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा कितने गुना होगी?
KE ∝ v²। नई KE = ½ m (2v)² = 4 × ½ m v²। यानी 4 गुना।
आम गलतियाँ
- भारी थैला स्थिर पकड़े रहने को कार्य मानना। खिसका नहीं, तो W = 0।
- KE = ½mv² में चाल का वर्ग करना भूल जाना। चाल दोगुनी तो KE चार गुनी।
- वाट और वाट घंटा में गड़बड़। वाट शक्ति है (J/s), kWh ऊर्जा है।
- सोचना कि मशीन डाले गए कार्य से ज़्यादा कार्य देती है। वह सिर्फ बल घटाती है, दूरी बढ़ाकर।