South 중학교 3학년 Science 3
अध्याय: 8
1. Chemical reactions: laws and energy
Physical vs chemical change · Chemical equations · Conservation of mass · Law of definite proportions · Gay-Lussac's law of combining volumes · Energy in reactions
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है। अभिक्रिया से पहले पदार्थों का कुल द्रव्यमान, बाद के पदार्थों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। कारण: परमाणु सिर्फ़ नए ढंग से जुड़ते हैं; वही परमाणु, उतनी ही संख्या में, पहले भी होते हैं और बाद में भी। अगर कोई गैस बाहर निकल जाए या हवा से आकर जुड़ जाए, तो तराज़ू का पाठ बदलता दिखता है, पर हर पदार्थ गिनें तो कुल द्रव्यमान वही रहता है। इससे जुड़ा नियम, स्थिर अनुपात का नियम, कहता है कि शुद्ध यौगिक में तत्व हमेशा एक ही द्रव्यमान अनुपात में होते हैं (पानी में हमेशा 1 g हाइड्रोजन : 8 g ऑक्सीजन)।
- गैस के नियम: दाब, आयतन और ताप का आपसी रिश्ता – गैस का दाब कणों के दीवार से टकराने से बनता है। गैस की तय मात्रा के लिए: बॉयल का नियम P₁V₁ = P₂V₂ (ताप स्थिर); चार्ल्स का नियम V₁/T₁ = V₂/T₂ (दाब स्थिर); दाब (गे-लुसाक) नियम P₁/T₁ = P₂/T₂ (आयतन स्थिर)। ताप हमेशा केल्विन में। संयुक्त नियम: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂। डाल्टन: मिश्रण का कुल दाब = आंशिक दाबों का योग; आंशिक दाब = मोल अंश × कुल दाब।
- रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार – ज़्यादातर अभिक्रियाएँ कुछ ढाँचों में आती हैं। संयोजन: A + B → AB। वियोजन: AB → A + B। विस्थापन: A + BC → AC + B, जहाँ ज़्यादा क्रियाशील A, B को बाहर कर देता है। द्विविस्थापन: AB + CD → AD + CB, साथी बदल जाते हैं; अघुलनशील ठोस बने तो अवक्षेपण अभिक्रिया। ऊष्मा दे तो ऊष्माक्षेपी, ऊष्मा ले तो ऊष्माशोषी।
2. Atmosphere and weather
Layers of the atmosphere and greenhouse effect · Humidity, clouds and precipitation · Air pressure and wind · Air masses, fronts, weather maps
- वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ – हवा का वज़न होता है, इसलिए वह नीचे दबाव डालती है: यही वायुदाब है (समुद्र तल पर लगभग 1013 mb)। पवन उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है; दाब प्रवणता बल इसे धकेलता है, कोरिऑलिस बल मोड़ता है (उत्तर में दाएँ, दक्षिण में बाएँ) और घर्षण ज़मीन के पास धीमा करता है। असमान गर्मी से दाब पेटियाँ बनती हैं (विषुवतीय निम्न, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न, ध्रुवीय उच्च) और तीन कोष्ठ, जिनसे भूमंडलीय पवनें चलती हैं: व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पूर्वी पवनें। ऋतु के साथ पेटियाँ खिसकती हैं और मानसून जैसी मौसमी पवनें बनती हैं; स्थानीय पवनों में स्थल-समुद्र समीर और पर्वत-घाटी समीर हैं। एक जैसी गर्मी और नमी वाली विशाल हवा वायुराशि है; दो वायुराशियों की सीमा वाताग्र है। चक्रवात निम्न दाब वाले तूफ़ान हैं: उष्णकटिबंधीय गरम समुद्र पर, शीतोष्ण वाताग्रों पर बनते हैं। तड़ितझंझा और टॉरनेडो छोटे पर बहुत तेज़ तूफ़ान हैं।
- वायुमंडलीय दाब – हवा का भी भार होता है। किसी सतह के ऊपर खड़ा हवा का पूरा स्तंभ उस पर दबाव डालता है; हर वर्ग मीटर पर यह धक्का ही वायुमंडलीय दाब है। समुद्र तल पर यह लगभग 101 kPa है — 760 mm पारे के स्तंभ या लगभग 10 m पानी के बराबर। ऊपर जाने पर आपके ऊपर हवा कम रह जाती है, इसलिए दाब घटता है। शांत हवा में किसी परत का भार नीचे से ऊपर लगने वाले दाब से संतुलित रहता है (द्रवस्थैतिक संतुलन)। हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर बहती है — यही पवन है।
3. Motion and energy
Uniform motion graphs · Free fall · Work, potential and kinetic energy
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
4. Stimulus and response
Sense organs · Neurons and the nervous system · Hormones
- ज्ञानेंद्रियाँ – ज्ञानेंद्रियाँ हमें आसपास के बदलाव (उद्दीपन) पहचानने देती हैं। आँख प्रकाश, कान ध्वनि और संतुलन, नाक गंध, जीभ स्वाद और त्वचा स्पर्श, दबाव, गरमी, ठंडक व दर्द पहचानती है। हर इंद्रिय में ग्राही कोशिकाएँ उद्दीपन को तंत्रिका संकेत में बदलती हैं। संकेत संवेदी तंत्रिका से मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक जाता है, जो मांसपेशी को आदेश भेजता है: यही अनुक्रिया है।
- तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया और मानव मस्तिष्क – तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) संदेश को विद्युत आवेग के रूप में ले जाती हैं और सिनैप्स नाम के छोटे अंतर को रसायनों से पार करती हैं। झटपट बचाव वाली क्रियाएँ (प्रतिवर्ती क्रिया) मेरुरज्जु सँभालता है; सोचना और नियंत्रण मस्तिष्क करता है, जिसे खोपड़ी और तरल की गद्दी बचाती है।
- जंतुओं में हॉर्मोन: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और पुनर्भरण – अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन नाम के रासायनिक संदेशवाहक सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त उन्हें पूरे शरीर में ले जाता है, पर वे केवल लक्ष्य कोशिकाओं पर असर करते हैं। हॉर्मोन वृद्धि, उपापचय, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्त शर्करा और यौवनारंभ नियंत्रित करते हैं, और उनकी मात्रा पुनर्भरण (फ़ीडबैक) से ठीक रहती है।
5. Reproduction and heredity
Cell division and growth · Chromosomes, mitosis, meiosis · Development from a fertilised egg · Mendel's laws · Human inheritance and pedigrees
- कोशिका विभाजन: एक कोशिका से दो (या चार) कैसे बनती हैं – हर जीव इसलिए बढ़ता है क्योंकि उसकी कोशिकाएँ बँटती हैं। हर कोशिका किसी दूसरी कोशिका से ही बनती है (कोशिका सिद्धांत)। बँटने से पहले कोशिका अपने गुणसूत्रों की कॉपी बनाती है। समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) से 2 एक जैसी कोशिकाएँ बनती हैं, गुणसूत्र उतने ही रहते हैं; यह वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस) दो बार बँटकर 4 कोशिकाएँ बनाता है, हर एक में आधे गुणसूत्र; इससे युग्मक बनते हैं।
- विकास: एक कोशिका से पूरा शरीर – विकास (व्यक्तिवृत्त, ontogenesis) एक जीव की जीवन कहानी है। युग्मनज विदलन से बँटकर कोशिकाओं की गेंद (कोरकपुटी) बनाता है। कंदुकन में कोशिकाएँ अंदर जाती हैं और तीन जनन स्तर बनते हैं: बाह्यत्वचा, मध्यजनस्तर, अंतर्जनस्तर। फिर कोशिकाएँ विभेदित होती हैं: सबमें एक जैसे जीन, पर हर प्रकार अलग जीन चालू करता है। कोशिकाओं के संकेत (प्रेरण) और Hox जैसे मुख्य जीन तय करते हैं कि कौन-सा अंग कहाँ बने। जन्म के बाद जीव बढ़ता है, सीधे या कायांतरण से विकसित होता है, बूढ़ा होता है और कभी-कभी अंग दोबारा उगा सकता है।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
6. Energy conversion and conservation
Mechanical energy conservation · Electromagnetic induction · Electrical energy at home
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
7. Stars and universe
Stellar distance and temperature · Our galaxy · Expanding universe · Space exploration
- तारे: रंग, चमक, दूरी और H-R आरेख – तारा गर्म गैस का विशाल गोला है जो नाभिकीय संलयन से चमकता है। उसका रंग सतह का ताप बताता है: लाल तारे ठंडे, नीले तारे गर्म (वीन का नियम: λmax × T = 2.9 × 10⁻³ m K)। तारों को वर्णक्रमीय वर्गों O B A F G K M में बाँटा जाता है, सबसे गर्म से सबसे ठंडे तक। तारा कितना चमकीला दिखता है (आभासी कांतिमान), यह उसकी असली शक्ति (ज्योति) और दूरी पर निर्भर है, क्योंकि रोशनी 1/d² से घटती है। पास के तारों की दूरी लंबन से: d (पारसेक) = 1/p (आर्कसेकंड)। ज्योति आकार और ताप पर निर्भर है (L = 4πR²σT⁴)। H-R आरेख ज्योति को ताप के सामने दिखाता है: मुख्य अनुक्रम, दानव तारे और श्वेत वामन।
- तारे और आकाशगंगाएँ: तारे की रोशनी से बिग बैंग तक – तारों के बारे में हम जो भी जानते हैं, वह उनकी रोशनी से आता है। तारे के प्रकाश को स्पेक्ट्रम में तोड़ने पर काली रेखाएँ दिखती हैं, जो बताती हैं कि तारे में कौन-से तत्व हैं। रंग से ताप पता चलता है (नीला = गर्म, लाल = ठंडा), और तारों को O B A F G K M वर्गों में बाँटा जाता है। H-R आरेख में असली चमक को ताप के सामने दिखाते हैं: सूर्य समेत ज़्यादातर तारे मुख्य अनुक्रम पर हैं, दानव तारे ऊपर दाएँ और श्वेत वामन नीचे बाएँ। तारा नीहारिका में जन्म लेता है और द्रव्यमान उसका जीवन तय करता है: सूर्य जैसा तारा लाल दानव, फिर श्वेत वामन बनता है; लगभग 8 सूर्य से भारी तारा महादानव बनकर सुपरनोवा में फटता है और न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल छोड़ता है। तारे आकाशगंगाओं में रहते हैं, जो सर्पिल, दीर्घवृत्ताकार या अनियमित होती हैं। दूरियाँ बहुत बड़ी हैं, इसलिए खगोलीय इकाई, प्रकाश वर्ष और पारसेक काम आते हैं। आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, दूर वाली और तेज़ (हबल नियम)। यह और कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) मिलकर बताते हैं कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले बिग बैंग हुआ।
- ब्रह्मांड विज्ञान: फैलता ब्रह्मांड और बिग बैंग – ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पूरे ब्रह्मांड की बनावट, इतिहास और भविष्य का अध्ययन है। आकाशगंगाएँ समूहों, गुच्छों और तंतुओं में विशाल रिक्तियों के चारों ओर जुटती हैं। दूर की आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, और जितनी दूर उतनी तेज़ (हबल का नियम, v = H₀d), क्योंकि अंतरिक्ष ख़ुद फैल रहा है। इस फैलाव को उल्टा चलाने पर लगभग 13.8 अरब साल पहले की गर्म, घनी शुरुआत मिलती है: बिग बैंग। इसके मुख्य प्रमाण हैं रेडशिफ़्ट, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड और हाइड्रोजन-हीलियम की मात्रा। ब्रह्मांड का ज़्यादातर हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है।
- अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) – अंतरिक्ष अन्वेषण यानी रॉकेट, उपग्रह, यान और इंसानों को पृथ्वी के वायुमंडल से आगे भेजना। रॉकेट गैस को नीचे धकेलकर ऊपर उठता है (क्रिया–प्रतिक्रिया)। लगभग 7.9 km/s की बग़ल वाली चाल पर यान पृथ्वी के चारों ओर गिरता रहता है यानी कक्षा में रहता है; 11.2 km/s पर पृथ्वी से बाहर निकल जाता है। 1957 से अंतरिक्ष होड़ और सहयोग दोनों की जगह रहा है, और इससे मौसम पूर्वानुमान, दिशा-निर्देशन, संचार और नया विज्ञान मिलता है।
8. Science and civilisation
Science and human civilisation · Designing with science
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज: खोजें हमारा जीवन कैसे बदलती हैं – विज्ञान पता लगाता है कि प्रकृति कैसे काम करती है; प्रौद्योगिकी (तकनीक) उस ज्ञान से औज़ार बनाती और समस्याएँ सुलझाती है। समाज भी विज्ञान को दिशा देता है: सवाल पूछकर, शोध के लिए पैसा देकर और नियम बनाकर। छापाख़ाना, भाप इंजन, बिजली, टीके और इंटरनेट ने काम करने, जीने और सोचने का तरीक़ा बदल दिया। हर तकनीक के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं। सही फ़ैसले के लिए हम प्रमाण देखते हैं, लाभ और जोखिम तौलते हैं, पूछते हैं किसे फ़ायदा और किसे नुक़सान, नैतिकता और भविष्य सोचते हैं, और सुरक्षा नियम अपनाते हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।