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धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण

चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह ताँबे की छड़ दो धातु की पटरियों पर रखी है, बड़े चुंबक के N ध्रुव (ऊपर) और S ध्रुव (नीचे) के बीच। अभी धारा नहीं बह रही, इसलिए कुछ नहीं हो रहा।
  2. अब छड़ में धारा I बहती है। क्षेत्र B नीचे की ओर है, धारा आड़ी है, और छड़ पर बगल की ओर बल F लगता है। देखो, छड़ पटरी पर लुढ़कती है। 'धारा उलटो' या 'चुंबक उलटो' दबाओ, बल की दिशा पलट जाती है।
  3. अब छड़ को धीरे-धीरे 90° से 0° तक घुमाते हैं। जैसे-जैसे छड़ क्षेत्र की सीध में आती है, हरा बल-तीर छोटा होता जाता है। 0° (समांतर) पर बल शून्य हो जाता है।
  4. विद्युत मोटर: दो ध्रुवों के बीच एक कुंडली है। एक भुजा ऊपर धकेली जाती है, दूसरी नीचे, तो कुंडली घूमती है। विभक्त वलय और ब्रुश हर आधे चक्कर पर धारा पलट देते हैं, इसलिए कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है।
  5. अब उल्टा करो: चुंबक को कुंडली में धकेलो। गैल्वेनोमीटर की सुई एक ओर घूमती है; बाहर खींचो तो दूसरी ओर। चुंबक रुका रहे तो सुई शून्य पर। यही विद्युत चुंबकीय प्रेरण है।
  6. अब खुद खेलो: धारा उलटो, चुंबक उलटो, धारा और कोण बदलो। देखने से पहले अपने बाएँ हाथ से बल की दिशा बताओ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

तार हिलता ही क्यों है? चुंबक तो बस लोहे को खींचता है।

तार की धारा अपना चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। यह क्षेत्र और चुंबक का क्षेत्र एक-दूसरे पर बल लगाते हैं, इसलिए तार धकेला जाता है। चरण 2 में छड़ को लुढ़कते देखो।

तार क्षेत्र के समांतर हो तो बल क्यों नहीं लगता?

बल इस पर निर्भर है कि तार क्षेत्र को कितना आड़ा काटता है (sin θ)। समांतर तार क्षेत्र को काटता ही नहीं। चरण 3 में तीर शून्य होते देखो।

धारा और चुंबक दोनों उलट दूँ तो क्या बल उलटेगा?

नहीं। हर उलटाव बल को एक बार पलटता है; दो उलटाव रद्द हो जाते हैं। खुद खेलो वाले चरण में दोनों बटन दबाकर देखो।

मोटर की कुंडली आधे चक्कर के बाद रुक क्यों नहीं जाती?

विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर ब्रुश बदलता है और कुंडली में धारा पलट देता है, तो बल उसे उसी दिशा में घुमाता रहता है। चरण 4 देखो।

चुंबक कुंडली के अंदर रुका हो तो गैल्वेनोमीटर शून्य क्यों दिखाता है?

धारा तभी प्रेरित होती है जब कुंडली से गुज़रता क्षेत्र बदल रहा हो। रुका चुंबक स्थिर क्षेत्र देता है, इसलिए धारा नहीं। चरण 5 देखो।

कौन-सा हाथ लगाऊँ, बायाँ या दायाँ?

धारा दी है और बल चाहिए (मोटर) तो बायाँ हाथ। गति दी है और धारा चाहिए (जनित्र) तो दायाँ हाथ।

चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल

चुंबकीय क्षेत्र में चलते आवेश पर बल लगता है। धारा यानी बहुत सारे चलते आवेश, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर भी बल लगता है।

बल कितना होगा, यह किस पर निर्भर है?

संक्षेप में F ∝ I · B · L · sin θ. (कक्षा 10 में विचार समझना काफ़ी है; सूत्र F = BIL sin θ आगे की कक्षाओं में आता है।)

बल किस ओर? फ्लेमिंग का वामहस्त नियम

बाएँ हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा आपस में समकोण पर फैलाओ। तर्जनी क्षेत्र की दिशा (N से S) में और मध्यमा धारा की दिशा में रखो। तब अँगूठा चालक पर लगने वाले बल (गति) की दिशा बताता है। धारा या क्षेत्र में से एक को उलटो तो बल उलट जाता है; दोनों उलटो तो बल वैसा ही रहता है।

विद्युत मोटर (2026-27 में केवल रचनात्मक मूल्यांकन)

ध्यान दें: CBSE 2026-27 में मोटर, विद्युत चुंबकीय प्रेरण और जनित्र केवल रचनात्मक (स्कूल स्तर के) मूल्यांकन में हैं, बोर्ड परीक्षा में नहीं। फिर भी इन्हें ज़रूर समझो, हर पंखा और बिजलीघर इन्हीं से चलता है।

विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। इसके भाग:

यह कैसे काम करती है

कुंडली की एक लंबी भुजा में धारा एक दिशा में और दूसरी में उल्टी दिशा में बहती है, तो वामहस्त नियम से एक भुजा ऊपर और दूसरी नीचे धकेली जाती है, और कुंडली घूमती है। आधे चक्कर के बाद विभक्त वलय के दोनों आधे हिस्से ब्रुश बदल लेते हैं, कुंडली में धारा उलट जाती है, और बल फिर उसी दिशा में घुमाता है। इस तरह कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती है। व्यावसायिक मोटरों में विद्युत चुंबक, बहुत सारे फेरे और नर्म लोहे का क्रोड होता है ताकि वे ज़्यादा शक्तिशाली हों।

विद्युत चुंबकीय प्रेरण और विद्युत जनित्र

माइकल फैराडे ने उल्टा प्रभाव खोजा: कुंडली से गुज़रने वाला चुंबकीय क्षेत्र बदले, तो कुंडली में धारा बनती है। इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण और इस धारा को प्रेरित धारा कहते हैं।

फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम

क्षेत्र में चलते चालक के लिए दाएँ हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा समकोण पर रखो। तर्जनी = क्षेत्र, अँगूठा = चालक की गति, मध्यमा = प्रेरित धारा की दिशा।

विद्युत जनित्र

जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। चुंबक के ध्रुवों के बीच कुंडली घुमाई जाती है; उसकी भुजाएँ क्षेत्र को काटती हैं और धारा प्रेरित होती है। सर्पी वलय लगाने पर धारा हर आधे चक्कर में उलटती है, यानी AC (प्रत्यावर्ती धारा जनित्र)। विभक्त वलय लगाने पर धारा एक ही दिशा में रहती है, यानी DC (दिष्ट धारा जनित्र)।

प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC)

दिष्ट धारा (DC) हमेशा एक ही दिशा में बहती है। सेल, बैटरी और सोलर पैनल DC देते हैं।

प्रत्यावर्ती धारा (AC) बराबर समय के बाद बार-बार अपनी दिशा बदलती है। भारत में घर की बिजली लगभग 220 V, 50 Hz की AC है: यह एक सेकंड में 100 बार दिशा बदलती है (हर चक्र में दो बार)।

ACDC
दिशा बार-बार उलटती हैकेवल एक दिशा
बिजलीघरों के AC जनित्र सेसेल, बैटरी, DC जनित्र से
कम ऊर्जा हानि के साथ दूर तक भेजी जा सकती है (ट्रांसफ़ॉर्मर से वोल्टता बदलती है)वोल्टता आसानी से घटाना-बढ़ाना कठिन; इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक तार पूर्व से पश्चिम जाता है (धारा पश्चिम की ओर) और चुंबकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर है। बल किस दिशा में होगा?

तर्जनी नीचे (क्षेत्र), मध्यमा पश्चिम (धारा)। तब बाएँ हाथ का अँगूठा दक्षिण की ओर होता है। बल दक्षिण की ओर है।

2. धारावाही तार को चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के समांतर रखा गया। उस पर कितना बल लगेगा?

तार और क्षेत्र के बीच कोण 0° है, sin 0° = 0, इसलिए बल शून्य है। तार बिल्कुल नहीं धकेला जाएगा।

3. पटरी वाले प्रयोग में छड़ बाईं ओर जाती है। (a) धारा उलटने पर, (b) धारा और क्षेत्र दोनों उलटने पर क्या होगा?

(a) एक को उलटने से बल उलटता है, छड़ दाईं ओर जाएगी। (b) दोनों उलटने पर दो बार उलटाव होता है जो एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं, छड़ फिर बाईं ओर ही जाएगी।

4. भारत में AC सप्लाई 50 Hz है। एक सेकंड में धारा कितनी बार दिशा बदलती है?

हर चक्र में दो बार दिशा बदलती है। 50 × 2 = 100 बार प्रति सेकंड।

5. मोटर में विभक्त वलय की ज़रूरत क्यों है?

इसके बिना आधे चक्कर के बाद भुजाओं पर बल कुंडली को वापस घुमा देगा और वह बस आगे-पीछे डोलेगी। विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर कुंडली में धारा पलटता है, जिससे घुमाव हमेशा एक दिशा में रहता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में अँगूठा क्या दिखाता है?
2. धारावाही तार पर सबसे अधिक बल तब लगता है जब वह क्षेत्र से कितने कोण पर हो?
3. DC मोटर की कुंडली में धारा की दिशा कौन पलटता है?
4. भारत में AC मेन सप्लाई की आवृत्ति है:
5. विद्युत जनित्र बदलता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लेमिंग का वामहस्त नियम आसान शब्दों में क्या है?

बाएँ हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा समकोण पर रखो। तर्जनी क्षेत्र की ओर, मध्यमा धारा की ओर: अँगूठा बताता है कि तार किधर धकेला जाएगा।

क्या मोटर, प्रेरण और जनित्र CBSE कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2026-27 में आएँगे?

नहीं। 2026-27 में इनका मूल्यांकन केवल रचनात्मक (स्कूल स्तर) होगा। चालक पर बल, फ्लेमिंग का वामहस्त नियम और AC-DC अंतर अध्याय में बने हुए हैं।

फ्लेमिंग के वामहस्त और दक्षिणहस्त नियम में क्या अंतर है?

वामहस्त नियम धारावाही तार पर लगने वाले बल की दिशा बताता है (मोटर)। दक्षिणहस्त नियम क्षेत्र में चलते तार में प्रेरित धारा की दिशा बताता है (जनित्र)।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

कनाडा (ओंटारियो)Grade 11F. Electricity and Magnetism
कनाडा (ओंटारियो)Grade 12C. Understanding Physical Development
कनाडा (ओंटारियो)Grade 12C. Biomechanics and Motor Development
कनाडा (ओंटारियो)Grade 12D. Electricity and Magnetism
इटलीSecondaria di secondo grado – classe 5ª (esame di Stato)Electromagnetism
इटलीSecondaria di secondo grado – classe 5ª (esame di Stato)Electromagnetism and modern physics
पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIIMagnetism
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रोमानियाClasa a X-aProducing and using alternating current
रोमानियाClasa a XI-aElectromagnetic oscillations and waves
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स्पेन2º BachilleratoElectromagnetic field
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अमेरिकाGrade 12Magnetism and Electromagnetism
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दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Matter and electromagnetic fields
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जर्मनीJahrgangsstufe 12Electromagnetic induction and oscillations
रूस8 классElectric and magnetic phenomena
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चीन九年级(初三)Ch.20 Electricity and magnetism
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