Romania Clasa a X-a Physics
अध्याय: 3
1. Elements of thermodynamics
Basic thermodynamic ideas · Calorimetry · First law of thermodynamics · Changes of state · Heat engines · Second law of thermodynamics
- ऊष्मागतिक प्रक्रम: समतापी, रुद्धोष्म और अन्य – ऊष्मागतिक प्रक्रम गैस को एक अवस्था से दूसरी में ले जाता है; P–V ग्राफ पर यह एक रास्ता है। समतापी: T स्थिर, PV = नियत, W = nRT ln(V₂/V₁), ΔU = 0. रुद्धोष्म: ऊष्मा का लेन-देन नहीं, PV^γ = नियत, W = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1), फैलने पर गैस ठंडी होती है। समदाबी: P स्थिर, W = PΔV. समआयतनिक: V स्थिर, W = 0. उत्क्रमणीय प्रक्रम धीरे-धीरे साम्य अवस्थाओं से गुज़रते हैं; वास्तविक, तेज़ प्रक्रम अनुत्क्रमणीय हैं। चक्रीय प्रक्रम में गैस शुरुआत पर लौटती है, ΔU = 0 और नेट कार्य = लूप का क्षेत्रफल।
- तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, कैलोरीमिति और गुप्त ऊष्मा – ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम है; ऊष्मा वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण बहती है। ज़्यादातर चीज़ें गरम होकर फैलती हैं: ΔL = αLΔT, ΔA = βAΔT, ΔV = γVΔT, जहाँ β = 2α और γ = 3α। पानी 0 °C से 4 °C के बीच अपवाद है: गरम करने पर सिकुड़ता है, इसलिए 4 °C पर सबसे घना। किसी वस्तु को गरम करने की ऊष्मा Q = mcΔT, जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा है; गैसों की दो होती हैं, Cp > Cv, और प्रति मोल Cp − Cv = R। कैलोरीमिति में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। पिघलते या उबलते समय ताप स्थिर रहता है और ऊष्मा Q = mL अवस्था बदलने में लगती है।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
- अवस्था परिवर्तन: गुप्त ऊष्मा, वाष्प दाब और प्रावस्था आरेख – अवस्था परिवर्तन में पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के बीच बदलता है। बदलते समय तापमान वही रहता है; लगी ऊष्मा गुप्त ऊष्मा है (Q = m × L)। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए कम दाब पर क्वथनांक घटता है। प्रावस्था आरेख हर तापमान और दाब पर अवस्था दिखाता है; इसकी रेखाएँ त्रिक बिंदु पर मिलती हैं और द्रव-गैस रेखा क्रांतिक बिंदु पर ख़त्म होती है।
- ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम, ऊष्मा इंजन और प्रशीतक – प्रथम नियम कहता है ऊर्जा संरक्षित है; द्वितीय नियम बताता है ऊष्मा और ऊर्जा किस दिशा में जा सकती है। ऊष्मा अपने-आप केवल गरम से ठंडे की ओर बहती है (क्लॉसियस)। कोई इंजन ली गई सारी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता; कुछ ठंडी वस्तु में फेंकनी पड़ती है (केल्विन–प्लांक)। ऊष्मा इंजन गरम स्रोत से Q₁ लेता है, कार्य W करता है, Q₂ छोड़ता है: दक्षता η = W/Q₁ = 1 − Q₂/Q₁. प्रशीतक कार्य W से ठंडे से गरम में Q₂ ले जाता है: COP α = Q₂/W. सबसे अच्छे, कार्नो इंजन के लिए η = 1 − T₂/T₁.
2. Producing and using direct current
Electric current · Ohm's law · Kirchhoff's laws · Combining resistors and sources · Electric energy and power · Effects of current and applications
- धातु में धारा: अपवाह वेग और गतिशीलता – धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन बहुत तेज़ी से पर बेतरतीब (random) दिशाओं में भागते हैं, इसलिए औसतन कहीं नहीं जाते। विद्युत क्षेत्र लगाने पर उन्हें क्षेत्र के उल्टी दिशा में एक छोटा, स्थिर खिसकाव मिलता है: अपवाह वेग vd = eEτ/m. धारा I = n e A vd और धारा घनत्व j = n e vd. गतिशीलता μ = vd/E बताती है कि आवेश कितनी आसानी से खिसकता है। अपवाह वेग लगभग 1 mm/s ही है, फिर भी बल्ब तुरंत जलता है क्योंकि क्षेत्र पूरे तार में लगभग तुरंत बन जाता है।
- ओम का नियम, प्रतिरोधकता और ताप का प्रभाव – अपवाह वेग से V = IR मिलता है, जहाँ R = ml/(ne²τA) = ρl/A. प्रतिरोधकता ρ = m/(ne²τ) सिर्फ़ पदार्थ और ताप पर निर्भर है; चालकता σ = 1/ρ. सदिश रूप: j = σE. धातु के तार और प्रतिरोधक सीधी V–I रेखा देते हैं (ओमीय); बल्ब, डायोड और GaAs जैसे युक्तियाँ मुड़ा या एकदिशीय ग्राफ़ देती हैं (अनओमीय)। धातुओं में ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है: ρT = ρ0[1 + α(T − T0)]; नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं में बहुत कम बदलता है; अर्धचालकों में ρ घटता है।
- किरचॉफ के नियम और व्हीटस्टोन सेतु – संधि नियम: किसी भी संधि पर आने वाली धाराओं का योग = जाने वाली धाराओं का योग (ΣI = 0), क्योंकि आवेश संरक्षित है। लूप नियम: किसी भी बंद लूप में विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य (ΣΔV = 0), क्योंकि ऊर्जा संरक्षित है। चिह्न: धारा की दिशा में प्रतिरोधक पार करने पर −IR; सेल को − से + पार करने पर +ε. चार प्रतिरोधकों P, Q, R, S वाला व्हीटस्टोन सेतु तब संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में धारा नहीं) जब P/Q = R/S; इससे अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात होता है, जैसे मीटर सेतु में।
- प्रतिरोधकों का श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन – श्रेणीक्रम में प्रतिरोधक एक ही रास्ता बनाते हैं: हर एक में धारा समान, विभवांतर जुड़ते हैं और R_s = R₁ + R₂ + R₃। पार्श्वक्रम में हर प्रतिरोधक की अपनी शाखा होती है: हर एक पर विभवांतर समान, धाराएँ जुड़ती हैं और 1/R_p = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃, इसलिए R_p सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव – प्रतिरोधक में धारा बहने पर विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदलती है। जूल का नियम: H = I²Rt, यानी ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुक्रमानुपाती है। हीटर, इस्त्री, टोस्टर, बल्ब और फ्यूज़ सब इसी प्रभाव पर काम करते हैं।
3. Producing and using alternating current
Alternating current · Circuit elements in AC · Energy and power in AC · Transformer · Electric motors and appliances
- प्रत्यावर्ती धारा – प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- AC जनित्र और ट्रांसफ़ॉर्मर – AC जनित्र चुंबकीय क्षेत्र में एक कुंडली घुमाता है। उससे गुजरता फ्लक्स लगातार बदलता है, इसलिए emf e = NBAω sin ωt बनता है, शिखर NBAω। ट्रांसफ़ॉर्मर एक लोहे के क्रोड पर लिपटी दो कुंडलियों के अन्योन्य प्रेरण से चलता है: Vs/Vp = Ns/Np। उच्चायी (स्टेप-अप) वोल्टता बढ़ाता, धारा घटाता है; अपचायी (स्टेप-डाउन) उल्टा। शक्ति लगभग वही रहती है (Vp Ip ≈ Vs Is)।