ऊष्मागतिक प्रक्रम क्या है?
प्रक्रम वह बदलाव है जो निकाय को एक साम्य अवस्था (P₁, V₁, T₁) से दूसरी (P₂, V₂, T₂) में ले जाए। P–V ग्राफ पर हर अवस्था एक बिंदु है और प्रक्रम उन्हें जोड़ने वाला रास्ता।
स्थैतिककल्प (quasi-static) प्रक्रम इतना धीमा होता है कि गैस हर पल लगभग साम्य में रहे। तभी P और T का एक साफ़ मान होता है और रास्ता खींच सकते हैं।
गैस द्वारा कार्य = P–V ग्राफ पर रास्ते के नीचे का क्षेत्रफल।
समतापी प्रक्रम
समतापी का अर्थ है ताप स्थिर। गैस एक बड़े ऊष्मा भंडार (जैसे बड़ा पानी का टब) के संपर्क में रहती है और धीरे बदलती है।
- T स्थिर, इसलिए PV = नियत (बॉयल का नियम)। ग्राफ एक वक्र है जिसे समतापी वक्र कहते हैं।
- आदर्श गैस की U केवल T पर निर्भर, इसलिए ΔU = 0. प्रथम नियम से Q = W: ली गई सारी ऊष्मा कार्य बनती है।
- कार्य: W = nRT ln(V₂/V₁) = 2.303 nRT log₁₀(V₂/V₁).
समतापी कार्य की व्युत्पत्ति
छोटे कदम में dW = P dV और P = nRT/V. तो W = ∫ nRT dV/V (V₁ से V₂) = nRT ln(V₂/V₁)। प्रसार (V₂ > V₁) में W धनात्मक।
रुद्धोष्म प्रक्रम
रुद्धोष्म का अर्थ है ऊष्मा न अंदर आए न बाहर जाए: Q = 0. गैस कुचालक से घिरी हो या बदलाव इतना तेज़ हो कि ऊष्मा को बहने का समय न मिले।
- प्रथम नियम: 0 = ΔU + W, यानी W = −ΔU. फैलती गैस अपनी आंतरिक ऊर्जा से कार्य करती है, इसलिए ठंडी होती है। दबाई गई गैस गरम होती है।
- नियम: PV^γ = नियत, जहाँ γ = Cp/Cv (एकपरमाणुक के लिए 1.67, हवा जैसी द्विपरमाणुक के लिए 1.4)। साथ ही TV^(γ−1) = नियत।
- कार्य: W = (P₁V₁ − P₂V₂)/(γ − 1) = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1).
γ > 1 होने से, एक ही बिंदु से रुद्धोष्म वक्र समतापी से अधिक खड़ा होता है (ढाल γ गुना)।
समदाबी और समआयतनिक प्रक्रम
समदाबी (स्थिर दाब): रास्ता क्षैतिज रेखा। W = PΔV = nRΔT. ऊष्मा Q = nCpΔT; कुछ U बढ़ाती है, कुछ कार्य करती है। उदाहरण: खुले बर्तन में उबलता पानी।
समआयतनिक (स्थिर आयतन): रास्ता ऊर्ध्वाधर रेखा। आयतन नहीं बदला, इसलिए W = 0 और Q = ΔU = nCvΔT. सारी ऊष्मा ताप बढ़ाती है। उदाहरण: बंद स्टील सिलिंडर में गैस गरम करना।
| प्रक्रम | स्थिर | नियम | कार्य W |
|---|---|---|---|
| समतापी | T | PV = नियत | nRT ln(V₂/V₁) |
| रुद्धोष्म | Q = 0 | PV^γ = नियत | nR(T₁ − T₂)/(γ − 1) |
| समदाबी | P | V/T = नियत | PΔV |
| समआयतनिक | V | P/T = नियत | 0 |
उत्क्रमणीय और अनुत्क्रमणीय प्रक्रम
उत्क्रमणीय प्रक्रम को उल्टा चलाया जा सकता है ताकि निकाय और परिवेश दोनों ठीक पहली अवस्था में लौट आएँ, कहीं कोई बदलाव न बचे। इसके लिए प्रक्रम स्थैतिककल्प (बहुत धीमा) हो और घर्षण, रिसाव जैसी हानियाँ न हों।
अनुत्क्रमणीय प्रक्रम पूरी तरह उल्टा नहीं किया जा सकता। वास्तविक प्रक्रम अनुत्क्रमणीय होते हैं क्योंकि:
- वे तेज़ होते हैं, बीच में गैस साम्य में नहीं होती (अचानक प्रसार, विस्फोट);
- घर्षण, श्यानता, और सीमित ताप-अंतर से ऊष्मा बहाव जैसी हानियाँ होती हैं।
उदाहरण: निर्वात में गैस का भागना (मुक्त प्रसार), गरम कप से ठंडे कमरे में ऊष्मा, उछलती गेंद का रुक जाना। उत्क्रमणीय प्रक्रम एक आदर्श सीमा है जिसके वास्तविक प्रक्रम केवल पास पहुँचते हैं।
चक्रीय प्रक्रम
चक्रीय प्रक्रम में निकाय कई बदलावों के बाद अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौटता है। P–V ग्राफ पर रास्ता बंद लूप है।
- U अवस्था चर है, इसलिए पूरे चक्र के बाद ΔU = 0.
- प्रथम नियम: नेट ऊष्मा = नेट कार्य, Q = W.
- नेट कार्य = लूप से घिरा क्षेत्रफल. दक्षिणावर्त लूप → गैस द्वारा नेट कार्य (इंजन)। वामावर्त → गैस पर नेट कार्य (प्रशीतक)।
परीक्षा टिप: समतापी बनाम रुद्धोष्म (तुलना तालिका, कार्य की व्युत्पत्ति, ग्राफ ढाल) पर 3–5 अंक का प्रश्न और लूप क्षेत्रफल वाले प्रश्न अपेक्षित हैं।
करके देखो
साइकिल पंप की नली अंगूठे से बंद करो और हैंडल दस बार तेज़ी से दबाओ। पंप का निचला भाग छुओ: गरम (रुद्धोष्म संपीडन)। अब डियोडरेंट दो सेकंड दबाओ और कैन छुओ: ठंडा (तेज़ प्रसार)। 3D में एक ही बिंदु से "रुद्धोष्म" और "समतापी" चुनो और देखो कौन-सा वक्र तेज़ी से गिरता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समतापी: PV = नियत, ΔU = 0, Q = W = nRT ln(V₂/V₁)
- रुद्धोष्म: Q = 0, PV^γ = नियत, TV^(γ−1) = नियत
- रुद्धोष्म कार्य: W = (P₁V₁ − P₂V₂)/(γ − 1) = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1)
- समदाबी: W = PΔV = nRΔT, Q = nCpΔT
- समआयतनिक: W = 0, Q = ΔU = nCvΔT
- चक्रीय: ΔU = 0, Q = W = लूप का क्षेत्रफल
- γ = Cp/Cv; ढाल(रुद्धोष्म) = γ × ढाल(समतापी)
हल किए गए उदाहरण
1. 1 × 10⁵ Pa और 6 L की गैस को समतापी रूप से 2 L तक दबाया। अंतिम दाब?
P₁V₁ = P₂V₂. P₂ = 1 × 10⁵ × 6/2 = 3 × 10⁵ Pa.
2. 300 K पर 1 mol आदर्श गैस समतापी रूप से 10 L से 20 L फैली। कार्य? (R = 8.31, ln 2 = 0.693)
W = 1 × 8.31 × 300 × 0.693 = 1728 J ≈ 1.73 kJ. ΔU = 0, इसलिए गैस ने 1728 J ऊष्मा भी ली।
3. 2 × 10⁵ Pa स्थिर दाब पर 0.5 mol गैस 300 K से 400 K गरम। कार्य? (R = 8.3)
W = nRΔT = 0.5 × 8.3 × 100 = 415 J.
4. हवा (γ = 1.4) 1 × 10⁵ Pa पर रुद्धोष्म रूप से आयतन के 1/8 तक दबाई गई। अंतिम दाब? (8^1.4 ≈ 18.4)
P₂ = P₁ (V₁/V₂)^γ = 1 × 10⁵ × 18.4 ≈ 1.84 × 10⁶ Pa, लगभग 18 गुना। (समतापी में केवल 8 गुना होता।)
5. 2 mol एकपरमाणुक गैस (γ = 5/3) रुद्धोष्म रूप से फैलकर 400 K से 300 K तक ठंडी हुई। कार्य? (R = 8.3)
W = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1) = 2 × 8.3 × 100/(2/3) = 2490 J. गैस ने 2490 J कार्य किया और उसकी U 2490 J घटी।
6. 27 °C (300 K) की हवा रुद्धोष्म रूप से 1/4 आयतन तक दबाई (γ = 1.4, 4^0.4 ≈ 1.74)। अंतिम ताप?
T₂ = T₁ (V₁/V₂)^(γ−1) = 300 × 1.74 = 522 K (लगभग 249 °C)। इसी कारण डीज़ल इंजन को स्पार्क नहीं चाहिए।
7. गैस P–V ग्राफ पर आयत में दक्षिणावर्त घूमती है: P, 1 × 10⁵ से 3 × 10⁵ Pa; V, 1 L से 4 L. एक चक्र में नेट कार्य और नेट ऊष्मा?
क्षेत्रफल = 2 × 10⁵ × 3 × 10⁻³ = 600 J. दक्षिणावर्त, इसलिए गैस 600 J नेट कार्य करती है। ΔU = 0, नेट ऊष्मा = 600 J.
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि "समतापी" में ऊष्मा नहीं बहती। बहती है; ऊष्मा का न बहना रुद्धोष्म में होता है।
- यह सोचना कि "रुद्धोष्म" में ताप स्थिर है। रुद्धोष्म में T बदलता है; केवल Q शून्य है।
- log तालिका से हल करते समय 2.303 भूलना: W = 2.303 nRT log₁₀(V₂/V₁).
- लूप की दिशा भूलना: P–V पर दक्षिणावर्त = गैस द्वारा नेट कार्य; वामावर्त = गैस पर नेट कार्य।