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ऊष्मागतिक प्रक्रम: समतापी, रुद्धोष्म और अन्य

ऊष्मागतिक प्रक्रम गैस को एक अवस्था से दूसरी में ले जाता है; P–V ग्राफ पर यह एक रास्ता है। समतापी: T स्थिर, PV = नियत, W = nRT ln(V₂/V₁), ΔU = 0. रुद्धोष्म: ऊष्मा का लेन-देन नहीं, PV^γ = नियत, W = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1), फैलने पर गैस ठंडी होती है। समदाबी: P स्थिर, W = PΔV. समआयतनिक: V स्थिर, W = 0. उत्क्रमणीय प्रक्रम धीरे-धीरे साम्य अवस्थाओं से गुज़रते हैं; वास्तविक, तेज़ प्रक्रम अनुत्क्रमणीय हैं। चक्रीय प्रक्रम में गैस शुरुआत पर लौटती है, ΔU = 0 और नेट कार्य = लूप का क्षेत्रफल।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह P–V ग्राफ है। पीला बिंदु गैस की अवस्था है: उसका दाब और आयतन। छोटा सिलिंडर वही गैस दिखाता है। अवस्था का हर बदलाव इस ग्राफ पर एक रास्ता है।
  2. समतापी: सिलिंडर बड़े पानी के टब में है, इसलिए T = 300 K ही रहता है। V बढ़ा तो P एक वक्र PV = नियत पर घटा। T स्थिर रखने के लिए ऊष्मा लगातार अंदर आती है।
  3. रुद्धोष्म: सिलिंडर पर कुचालक लपेटा है। ऊष्मा नहीं आ सकती। गैस कार्य की कीमत अपनी U से चुकाती है, इसलिए T गिरता है। वक्र PV^γ = नियत अधिक खड़ा है।
  4. समदाबी: P स्थिर, रास्ता सीधी पड़ी रेखा; कार्य = PΔV. समआयतनिक: V स्थिर, रास्ता सीधी खड़ी रेखा; कार्य = 0.
  5. चक्रीय: गैस एक लूप घूमकर शुरुआत पर लौटती है। ΔU = 0. लूप के अंदर का छायांकित क्षेत्रफल एक चक्र का नेट कार्य है।
  6. अब आप: प्रक्रम चुनो और आयतन बदलो। "अचानक" चुनो तो अनुत्क्रमणीय छलांग दिखेगी: बीच में गैस साम्य में नहीं, इसलिए साफ़ रास्ता नहीं बनता।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

एक अवस्था को एक बिंदु से क्यों दिखा सकते हैं?

साम्य में गैस का हर जगह एक ही दाब और आयतन होता है, तो दो संख्याएँ (P, V) एक बिंदु तय करती हैं। T, PV = nRT से मिलता है।

समतापी में T स्थिर है तो ऊष्मा क्यों चाहिए?

फैलते समय गैस कार्य करती है। U (और T) स्थिर रखने के लिए उतनी ही ऊर्जा टब से ऊष्मा बनकर आनी चाहिए। Q = W.

बिना ऊष्मा दिए ताप कैसे बदल सकता है?

कार्य U बदल सकता है। रुद्धोष्म प्रसार में गैस अपनी U से कार्य करती है, T गिरता है; संपीडन में उस पर कार्य होता है, T बढ़ता है।

रुद्धोष्म वक्र अधिक खड़ा क्यों?

इसमें V और T दोनों बदलते हैं, इसलिए P समतापी से तेज़ी से बदलता है। एक ही बिंदु से दोनों वक्र मिलाकर देखो।

स्थिर आयतन पर कार्य शून्य क्यों?

कार्य = PΔV, रास्ते के नीचे का क्षेत्रफल। खड़ी रेखा की चौड़ाई नहीं, तो क्षेत्रफल नहीं, कार्य नहीं।

चक्र का नेट कार्य लूप का क्षेत्रफल क्यों?

ऊपर से जाते समय गैस ज़्यादा कार्य करती है (बड़ा क्षेत्रफल), नीचे से लौटते समय उस पर कम कार्य होता है। अंतर लूप के अंदर का क्षेत्रफल है।

अचानक (अनुत्क्रमणीय) बदलाव का रास्ता क्यों नहीं खींच सकते?

अचानक बदलाव में गैस के अलग हिस्सों में दाब अलग होता है, तो प्लॉट करने को एक P नहीं। केवल शुरू और अंत के बिंदु तय होते हैं।

ऊष्मागतिक प्रक्रम क्या है?

प्रक्रम वह बदलाव है जो निकाय को एक साम्य अवस्था (P₁, V₁, T₁) से दूसरी (P₂, V₂, T₂) में ले जाए। P–V ग्राफ पर हर अवस्था एक बिंदु है और प्रक्रम उन्हें जोड़ने वाला रास्ता।

स्थैतिककल्प (quasi-static) प्रक्रम इतना धीमा होता है कि गैस हर पल लगभग साम्य में रहे। तभी P और T का एक साफ़ मान होता है और रास्ता खींच सकते हैं।

गैस द्वारा कार्य = P–V ग्राफ पर रास्ते के नीचे का क्षेत्रफल।

समतापी प्रक्रम

समतापी का अर्थ है ताप स्थिर। गैस एक बड़े ऊष्मा भंडार (जैसे बड़ा पानी का टब) के संपर्क में रहती है और धीरे बदलती है।

समतापी कार्य की व्युत्पत्ति

छोटे कदम में dW = P dV और P = nRT/V. तो W = ∫ nRT dV/V (V₁ से V₂) = nRT ln(V₂/V₁)। प्रसार (V₂ > V₁) में W धनात्मक।

रुद्धोष्म प्रक्रम

रुद्धोष्म का अर्थ है ऊष्मा न अंदर आए न बाहर जाए: Q = 0. गैस कुचालक से घिरी हो या बदलाव इतना तेज़ हो कि ऊष्मा को बहने का समय न मिले।

γ > 1 होने से, एक ही बिंदु से रुद्धोष्म वक्र समतापी से अधिक खड़ा होता है (ढाल γ गुना)।

समदाबी और समआयतनिक प्रक्रम

समदाबी (स्थिर दाब): रास्ता क्षैतिज रेखा। W = PΔV = nRΔT. ऊष्मा Q = nCpΔT; कुछ U बढ़ाती है, कुछ कार्य करती है। उदाहरण: खुले बर्तन में उबलता पानी।

समआयतनिक (स्थिर आयतन): रास्ता ऊर्ध्वाधर रेखा। आयतन नहीं बदला, इसलिए W = 0 और Q = ΔU = nCvΔT. सारी ऊष्मा ताप बढ़ाती है। उदाहरण: बंद स्टील सिलिंडर में गैस गरम करना।

प्रक्रमस्थिरनियमकार्य W
समतापीTPV = नियतnRT ln(V₂/V₁)
रुद्धोष्मQ = 0PV^γ = नियतnR(T₁ − T₂)/(γ − 1)
समदाबीPV/T = नियतPΔV
समआयतनिकVP/T = नियत0

उत्क्रमणीय और अनुत्क्रमणीय प्रक्रम

उत्क्रमणीय प्रक्रम को उल्टा चलाया जा सकता है ताकि निकाय और परिवेश दोनों ठीक पहली अवस्था में लौट आएँ, कहीं कोई बदलाव न बचे। इसके लिए प्रक्रम स्थैतिककल्प (बहुत धीमा) हो और घर्षण, रिसाव जैसी हानियाँ न हों।

अनुत्क्रमणीय प्रक्रम पूरी तरह उल्टा नहीं किया जा सकता। वास्तविक प्रक्रम अनुत्क्रमणीय होते हैं क्योंकि:

उदाहरण: निर्वात में गैस का भागना (मुक्त प्रसार), गरम कप से ठंडे कमरे में ऊष्मा, उछलती गेंद का रुक जाना। उत्क्रमणीय प्रक्रम एक आदर्श सीमा है जिसके वास्तविक प्रक्रम केवल पास पहुँचते हैं।

चक्रीय प्रक्रम

चक्रीय प्रक्रम में निकाय कई बदलावों के बाद अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौटता है। P–V ग्राफ पर रास्ता बंद लूप है।

परीक्षा टिप: समतापी बनाम रुद्धोष्म (तुलना तालिका, कार्य की व्युत्पत्ति, ग्राफ ढाल) पर 3–5 अंक का प्रश्न और लूप क्षेत्रफल वाले प्रश्न अपेक्षित हैं।

करके देखो

साइकिल पंप की नली अंगूठे से बंद करो और हैंडल दस बार तेज़ी से दबाओ। पंप का निचला भाग छुओ: गरम (रुद्धोष्म संपीडन)। अब डियोडरेंट दो सेकंड दबाओ और कैन छुओ: ठंडा (तेज़ प्रसार)। 3D में एक ही बिंदु से "रुद्धोष्म" और "समतापी" चुनो और देखो कौन-सा वक्र तेज़ी से गिरता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1 × 10⁵ Pa और 6 L की गैस को समतापी रूप से 2 L तक दबाया। अंतिम दाब?

P₁V₁ = P₂V₂. P₂ = 1 × 10⁵ × 6/2 = 3 × 10⁵ Pa.

2. 300 K पर 1 mol आदर्श गैस समतापी रूप से 10 L से 20 L फैली। कार्य? (R = 8.31, ln 2 = 0.693)

W = 1 × 8.31 × 300 × 0.693 = 1728 J ≈ 1.73 kJ. ΔU = 0, इसलिए गैस ने 1728 J ऊष्मा भी ली।

3. 2 × 10⁵ Pa स्थिर दाब पर 0.5 mol गैस 300 K से 400 K गरम। कार्य? (R = 8.3)

W = nRΔT = 0.5 × 8.3 × 100 = 415 J.

4. हवा (γ = 1.4) 1 × 10⁵ Pa पर रुद्धोष्म रूप से आयतन के 1/8 तक दबाई गई। अंतिम दाब? (8^1.4 ≈ 18.4)

P₂ = P₁ (V₁/V₂)^γ = 1 × 10⁵ × 18.4 ≈ 1.84 × 10⁶ Pa, लगभग 18 गुना। (समतापी में केवल 8 गुना होता।)

5. 2 mol एकपरमाणुक गैस (γ = 5/3) रुद्धोष्म रूप से फैलकर 400 K से 300 K तक ठंडी हुई। कार्य? (R = 8.3)

W = nR(T₁ − T₂)/(γ − 1) = 2 × 8.3 × 100/(2/3) = 2490 J. गैस ने 2490 J कार्य किया और उसकी U 2490 J घटी।

6. 27 °C (300 K) की हवा रुद्धोष्म रूप से 1/4 आयतन तक दबाई (γ = 1.4, 4^0.4 ≈ 1.74)। अंतिम ताप?

T₂ = T₁ (V₁/V₂)^(γ−1) = 300 × 1.74 = 522 K (लगभग 249 °C)। इसी कारण डीज़ल इंजन को स्पार्क नहीं चाहिए।

7. गैस P–V ग्राफ पर आयत में दक्षिणावर्त घूमती है: P, 1 × 10⁵ से 3 × 10⁵ Pa; V, 1 L से 4 L. एक चक्र में नेट कार्य और नेट ऊष्मा?

क्षेत्रफल = 2 × 10⁵ × 3 × 10⁻³ = 600 J. दक्षिणावर्त, इसलिए गैस 600 J नेट कार्य करती है। ΔU = 0, नेट ऊष्मा = 600 J.

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. आदर्श गैस के समतापी प्रक्रम में ΔU:
2. रुद्धोष्म प्रक्रम में:
3. समआयतनिक प्रक्रम में कार्य:
4. एक ही बिंदु से, समतापी की तुलना में रुद्धोष्म वक्र:
5. एक पूरे चक्र में नेट कार्य बराबर है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समतापी और रुद्धोष्म प्रक्रम में क्या अंतर है?

समतापी में T स्थिर और ऊष्मा का लेन-देन होता है। रुद्धोष्म में ऊष्मा नहीं बहती, T बदलता है। रुद्धोष्म वक्र अधिक खड़ा है (PV^γ = नियत बनाम PV = नियत)।

उत्क्रमणीय प्रक्रम किसे कहते हैं?

बहुत धीमा, हानि-रहित प्रक्रम जिसे उल्टा चलाकर निकाय और परिवेश दोनों को पहली अवस्था में लौटा सकें।

चक्रीय प्रक्रम क्या है?

ऐसा प्रक्रम जिसमें निकाय प्रारंभिक अवस्था में लौट आए। ΔU = 0 और नेट कार्य P–V ग्राफ पर घिरे क्षेत्रफल के बराबर।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

रोमानियाClasa a X-aElements of thermodynamics
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11ऊष्मागतिकी

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