आंतरिक ऊर्जा
हर गैस छोटे-छोटे अणुओं से बनी है जो हमेशा चलते रहते हैं। आंतरिक ऊर्जा U इन सब अणुओं की कुल ऊर्जा है (गति की ऊर्जा, और वास्तविक गैसों में आपसी खिंचाव की ऊर्जा)। इसमें पूरे बर्तन की गति शामिल नहीं है।
आदर्श गैस के लिए U केवल ताप पर निर्भर है। अधिक ताप → तेज़ अणु → अधिक U.
U एक अवस्था चर है: यह केवल अभी की अवस्था पर निर्भर है।
ऊष्मा और कार्य: U बदलने के दो रास्ते
ऊष्मा (Q) वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण निकाय और परिवेश के बीच बहती है। लौ गैस को गरम करती है।
कार्य (W) वह ऊर्जा है जो बल द्वारा दूरी तक दी जाती है, ताप के अंतर की ज़रूरत नहीं। हाथ से दबाया पिस्टन भी गैस गरम करता है।
ऊष्मा और कार्य वस्तु में "जमा" नहीं रहते, ये रास्ते में ऊर्जा हैं। वस्तु के पास आंतरिक ऊर्जा होती है, ऊष्मा या कार्य नहीं। इसलिए Q और W अवस्था चर नहीं, रास्ते पर निर्भर हैं।
जूल ने दिखाया कि तय मात्रा का कार्य हमेशा उतनी ही गर्मी देता है जितनी तय मात्रा की ऊष्मा। यानी ऊष्मा भी ऊर्जा है, जूल में मापी जाती है (1 cal = 4.186 J)।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
प्रथम नियम ऊष्मा और कार्य के लिए ऊर्जा संरक्षण का नियम है:
ΔQ = ΔU + ΔW
- ΔQ = निकाय को दी गई ऊष्मा
- ΔU = निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि
- ΔW = निकाय द्वारा परिवेश पर किया गया कार्य
चिह्न नियम (NCERT के अनुसार)
- निकाय को ऊष्मा दी: Q धनात्मक। ऊष्मा निकली: Q ऋणात्मक।
- गैस द्वारा कार्य (प्रसार): W धनात्मक। गैस पर कार्य (संपीडन): W ऋणात्मक।
- ताप बढ़ा: ΔU धनात्मक।
(रसायन की कुछ पुस्तकों में ΔU = q + w लिखते हैं, जहाँ w गैस पर किया कार्य है। नियम वही है, केवल W का चिह्न अलग।)
विशेष स्थितियाँ: चक्र में ΔU = 0, इसलिए Q = W. ऊष्मा न आए (कुचालक) तो ΔU = −W.
गैस द्वारा कार्य: W = PΔV
दाब P पर गैस, क्षेत्रफल A वाले पिस्टन को Δx दूरी धकेलती है। बल = PA, कार्य = PA × Δx. पर A × Δx ही आयतन की वृद्धि ΔV है। इसलिए
W = P ΔV (जब P स्थिर हो)
यदि P बदले, तो W = P–V वक्र के नीचे का क्षेत्रफल। प्रसार (ΔV > 0) → गैस धनात्मक कार्य करती है। संपीडन → ऋणात्मक कार्य।
गैस की विशिष्ट ऊष्माएँ और Cp − Cv = R
मोलर विशिष्ट ऊष्मा = 1 mol का ताप 1 K बढ़ाने के लिए ऊष्मा। गैस में यह गरम करने के ढंग पर निर्भर है।
- Cv (स्थिर आयतन): कार्य नहीं होता, पूरी ऊष्मा U बढ़ाती है: ΔQ = ΔU = nCvΔT.
- Cp (स्थिर दाब): गैस फैलकर कार्य भी करती है, इसलिए अधिक ऊष्मा लगती है: ΔQ = nCpΔT.
Cp − Cv = R की व्युत्पत्ति (मेयर का संबंध)
1 mol को स्थिर दाब पर ΔT गरम करो। प्रथम नियम: CpΔT = ΔU + PΔV.
ΔU वही है जो स्थिर आयतन पर (U केवल T पर निर्भर): ΔU = CvΔT.
स्थिर P पर PV = RT से: PΔV = RΔT.
तो CpΔT = CvΔT + RΔT, यानी Cp − Cv = R.
परीक्षा टिप: यह व्युत्पत्ति (2–3 अंक) और ΔQ = ΔU + ΔW के प्रश्न लगभग हर साल आते हैं।
घर पर करके देखो
हथेलियाँ 10 सेकंड तेज़ी से रगड़ो। गरम लगती हैं: आपने कार्य किया, वह आंतरिक ऊर्जा बना। साइकिल के टायर में दस बार पंप करो और पंप का निचला भाग छुओ: फिर गरम। हवा पर किया कार्य भी ऊष्मा की तरह U बढ़ाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔQ = ΔU + ΔW (प्रथम नियम)
- W = PΔV (स्थिर दाब)
- W = P–V वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
- ΔU = nCvΔT (आदर्श गैस, हर प्रक्रम)
- ΔQ = nCpΔT (स्थिर दाब)
- Cp − Cv = R
- 1 cal = 4.186 J
हल किए गए उदाहरण
1. गैस 500 J ऊष्मा लेती है और 200 J कार्य करती है। आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन?
ΔU = ΔQ − ΔW = 500 − 200 = 300 J. आंतरिक ऊर्जा 300 J बढ़ी।
2. गैस पर 800 J कार्य किया गया और उसने 300 J ऊष्मा बाहर दी। ΔU?
गैस पर कार्य: ΔW = −800 J. ऊष्मा बाहर: ΔQ = −300 J. ΔU = −300 − (−800) = +500 J.
3. 2 × 10⁵ Pa स्थिर दाब पर गैस 1 L से 4 L तक फैली। गैस द्वारा कार्य?
ΔV = 3 L = 3 × 10⁻³ m³. W = PΔV = 2 × 10⁵ × 3 × 10⁻³ = 600 J.
4. ऊपर वाली गैस को 1500 J ऊष्मा भी मिली। आंतरिक ऊर्जा कितनी बदली?
ΔU = 1500 − 600 = 900 J.
5. 2 mol आदर्श गैस को स्थिर आयतन पर 300 K से 350 K गरम किया। Cv = 20.8 J mol⁻¹ K⁻¹. दी गई ऊष्मा?
स्थिर आयतन पर W = 0, इसलिए ΔQ = ΔU = nCvΔT = 2 × 20.8 × 50 = 2080 J.
6. वही 2 mol, 300 K से 350 K, पर स्थिर दाब पर। ऊष्मा और कार्य? (R = 8.3)
Cp = Cv + R = 29.1. ΔQ = 2 × 29.1 × 50 = 2910 J. ΔU = 2080 J (पहले जैसा)। W = 2910 − 2080 = 830 J. जाँच: nRΔT = 2 × 8.3 × 50 = 830 J ✓
7. गैस पूरा चक्र पूरा कर प्रारंभिक अवस्था में लौटी। कुल 1200 J ऊष्मा ली। नेट कार्य?
चक्र में ΔU = 0. इसलिए ΔW = ΔQ = 1200 J.
आम गलतियाँ
- चिह्न मिला देना: भौतिकी (NCERT) में W गैस द्वारा किया कार्य है। गैस पर किया कार्य ऋणात्मक।
- यह सोचना कि गरम गैस में "ऊष्मा भरी" है। उसमें आंतरिक ऊर्जा है; ऊष्मा तो बहती ऊर्जा है।
- W = PΔV में लीटर को m³ में न बदलना (1 L = 10⁻³ m³)।
- ΔU = nCpΔT लिखना। आदर्श गैस में हर प्रक्रम में ΔU = nCvΔT; Cp केवल स्थिर दाब की ऊष्मा के लिए।