Russia 10 класс Physics (basic)
अध्याय: 8
1. Physics and scientific method
Scientific method
- मात्रक और मापन (कक्षा 11) – मापना यानी किसी राशि की तुलना एक तय, सबके माने हुए परिमाण से करना। उस तय परिमाण को मात्रक (unit) कहते हैं। मापा गया मान = संख्या × मात्रक। आज पूरी दुनिया SI पद्धति चलाती है, जिसमें 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल और कैन्डेला। बाकी सब मात्रक (जैसे न्यूटन, जूल) इन्हीं के गुणा-भाग से बने व्युत्पन्न मात्रक हैं। किलो (10³), मिली (10⁻³) जैसे पूर्वलग्न बड़ी-छोटी संख्याओं को आसान बनाते हैं।
2. Mechanics: kinematics
Kinematics of a point · Uniform and accelerated motion · Circular motion
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
3. Mechanics: dynamics
Newton's laws · Gravitation · Elastic force, weight, friction · Rigid body equilibrium
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- घर्षण: स्थैतिक, गतिज और लोटनिक घर्षण, नियम और स्नेहन – घर्षण वह बल है जो छूती सतहों के बीच आपेक्षिक गति (या उसकी शुरुआत) का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद बदलता है, पर एक अधिकतम तक: सीमांत घर्षण fs,max = μs N. फिसलना शुरू होते ही गतिज घर्षण fk = μk N लगता है, और μk < μs. घर्षण अभिलंब बल और सतहों की प्रकृति पर निर्भर है, संपर्क क्षेत्रफल पर नहीं। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम है; स्नेहक और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं।
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
4. Mechanics: conservation laws
Momentum · Work, power, energy
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
5. Molecular physics
Molecular kinetic theory · Temperature · Ideal gas
- गैसों का अणुगति सिद्धांत: दाब, ताप और वर्ग-माध्य-मूल चाल – अणुगति सिद्धांत गैस को बहुत छोटे, तेज़, बेतरतीब चलते अणुओं का समूह मानता है, जो प्रत्यास्थ रूप से टकराते हैं और एक-दूसरे को खींचते नहीं। दीवार से टकराने पर अणु का वेग उलटता है और दीवार को 2mvₓ संवेग मिलता है। सब अणुओं की टक्करें जोड़ने पर दाब P = ⅓ n m v̄² = ⅓ ρ v̄² आता है। इसे PV = N k T से मिलाने पर एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा (3/2) k T मिलती है: ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। वर्ग-माध्य-मूल चाल v_rms = √(3RT/M) है, इसलिए समान ताप पर हल्की गैस तेज़ चलती है।
- तापीय साम्य और शून्यवाँ नियम – दो वस्तुएँ छूती हैं तो ऊष्मा का लेन-देन तब तक होता है जब तक उनका ताप बराबर न हो जाए। तब वे तापीय साम्य में होती हैं। शून्यवाँ नियम: यदि A और B दोनों अलग-अलग C के साथ तापीय साम्य में हैं, तो A और B भी आपस में तापीय साम्य में हैं। थर्मामीटर इसी नियम से काम करता है। साम्य में गैस को अवस्था चरों P, V, T, n से बताते हैं, जो अवस्था समीकरण से जुड़े हैं। आदर्श गैस के लिए PV = nRT.
- आदर्श गैस समीकरण PV = nRT और गैस को दबाने में कार्य – गैस अनगिनत छोटे-छोटे अणुओं से बनी है जो हर तरफ़ भागते रहते हैं। दीवारों पर उनकी टक्कर से दाब बनता है। कम घनत्व वाली गैस के लिए तीन आसान नियम हैं: ताप स्थिर हो तो P × V स्थिर (बॉयल); दाब स्थिर हो तो V केल्विन ताप के साथ बढ़ता है (चार्ल्स); एक जैसे P और T पर बराबर आयतन में बराबर अणु (आवोगाद्रो)। तीनों मिलकर बनते हैं PV = nRT = N k T। एक मोल में 6.022 × 10²³ कण होते हैं, यही आवोगाद्रो संख्या है। पिस्टन को अंदर धकेलने में गैस पर कार्य होता है; यह कार्य P–V ग्राफ़ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर है, और स्थिर ताप पर W = nRT ln(V₁/V₂)।
6. Thermodynamics
First law of thermodynamics · Second law and heat engines · Phase changes
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
- ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम, ऊष्मा इंजन और प्रशीतक – प्रथम नियम कहता है ऊर्जा संरक्षित है; द्वितीय नियम बताता है ऊष्मा और ऊर्जा किस दिशा में जा सकती है। ऊष्मा अपने-आप केवल गरम से ठंडे की ओर बहती है (क्लॉसियस)। कोई इंजन ली गई सारी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता; कुछ ठंडी वस्तु में फेंकनी पड़ती है (केल्विन–प्लांक)। ऊष्मा इंजन गरम स्रोत से Q₁ लेता है, कार्य W करता है, Q₂ छोड़ता है: दक्षता η = W/Q₁ = 1 − Q₂/Q₁. प्रशीतक कार्य W से ठंडे से गरम में Q₂ ले जाता है: COP α = Q₂/W. सबसे अच्छे, कार्नो इंजन के लिए η = 1 − T₂/T₁.
- तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, कैलोरीमिति और गुप्त ऊष्मा – ताप बताता है कि वस्तु कितनी गरम है; ऊष्मा वह ऊर्जा है जो ताप के अंतर के कारण बहती है। ज़्यादातर चीज़ें गरम होकर फैलती हैं: ΔL = αLΔT, ΔA = βAΔT, ΔV = γVΔT, जहाँ β = 2α और γ = 3α। पानी 0 °C से 4 °C के बीच अपवाद है: गरम करने पर सिकुड़ता है, इसलिए 4 °C पर सबसे घना। किसी वस्तु को गरम करने की ऊष्मा Q = mcΔT, जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा है; गैसों की दो होती हैं, Cp > Cv, और प्रति मोल Cp − Cv = R। कैलोरीमिति में गरम वस्तुओं की खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तुओं की पाई ऊष्मा। पिघलते या उबलते समय ताप स्थिर रहता है और ऊष्मा Q = mL अवस्था बदलने में लगती है।
7. Electrodynamics: electrostatics
Charge and Coulomb's law · Electric field · Potential · Capacitors
- वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र – आवेश दो तरह का होता है, संरक्षित रहता है और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C के पूरे पैकेटों में आता है। दो बिंदु आवेश F = kq₁q₂/r² बल से धकेलते या खींचते हैं (k = 9 × 10⁹ N m² C⁻²)। कई आवेशों के बल और क्षेत्र सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)। बिंदु आवेश का क्षेत्र E = kq/r² है। द्विध्रुव (±q, दूरी 2a) का आघूर्ण p = q·2a है; एकसमान क्षेत्र में उस पर कुल बल शून्य पर बल-आघूर्ण τ = pE sinθ होता है। फ्लक्स Φ = E·A, और गाउस नियम: किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स = अंदर का आवेश/ε₀। इससे तार (λ/2πε₀r), समतल चादर (σ/2ε₀) और पतले गोलीय कोश (बाहर kq/r², अंदर 0) का क्षेत्र मिलता है।
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
8. Electrodynamics: direct current
Direct current · EMF and full circuit · Current in different media
- ओम का नियम, प्रतिरोधकता और ताप का प्रभाव – अपवाह वेग से V = IR मिलता है, जहाँ R = ml/(ne²τA) = ρl/A. प्रतिरोधकता ρ = m/(ne²τ) सिर्फ़ पदार्थ और ताप पर निर्भर है; चालकता σ = 1/ρ. सदिश रूप: j = σE. धातु के तार और प्रतिरोधक सीधी V–I रेखा देते हैं (ओमीय); बल्ब, डायोड और GaAs जैसे युक्तियाँ मुड़ा या एकदिशीय ग्राफ़ देती हैं (अनओमीय)। धातुओं में ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है: ρT = ρ0[1 + α(T − T0)]; नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं में बहुत कम बदलता है; अर्धचालकों में ρ घटता है।
- विद्युत वाहक बल, आंतरिक प्रतिरोध, शक्ति और सेलों का संयोजन – सेल आवेशों पर कार्य करता है; प्रति कूलॉम कार्य उसका विद्युत वाहक बल (emf) ε है। सेल के अंदर एक छोटा आंतरिक प्रतिरोध r होता है। धारा I बहने पर टर्मिनल वोल्टता V = ε − Ir और I = ε/(R + r). विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R, ऊर्जा W = Pt. R = r होने पर R को अधिकतम शक्ति मिलती है। श्रेणी में: εeq = ε1 + ε2, req = r1 + r2. समांतर में: εeq = (ε1r2 + ε2r1)/(r1 + r2), 1/req = 1/r1 + 1/r2.
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।