बल-आघूर्ण (बल का आघूर्ण) क्या है?
बल-आघूर्ण बताता है कि कोई बल पिंड को किसी अक्ष के परितः कितनी ज़ोर से घुमाता है। इसे बल का आघूर्ण (moment of force) भी कहते हैं।
τ = r × F, परिमाण τ = rF sinθ। यहाँ r अक्ष से बल लगने वाले बिंदु की दूरी है और θ, r और F के बीच का कोण।
- मात्रक: N m (जूल नहीं लिखते, क्योंकि यह ऊर्जा नहीं है)।
- विमा: [M L² T⁻²]।
- r sinθ को आघूर्ण भुजा कहते हैं: अक्ष से बल की रेखा की लंबवत दूरी।
- दिशा: दाएँ हाथ के नियम से, अक्ष के अनुदिश। वामावर्त (anticlockwise) को प्रायः धनात्मक लेते हैं।
बलयुग्म (couple): बराबर, उल्टे, समांतर बल जो एक रेखा पर नहीं हैं। यह पिंड को आगे नहीं खिसकाता, सिर्फ़ घुमाता है, जैसे नल या स्टीयरिंग घुमाना। इसका आघूर्ण = F × दोनों रेखाओं की दूरी।
कोणीय संवेग
रेखीय संवेग p = mv बताता है कि चलती चीज़ को रोकना कितना मुश्किल है। कोणीय संवेग बताता है कि घूमती चीज़ को रोकना कितना मुश्किल है।
एक कण के लिए: L = r × p, परिमाण L = r p sinθ = m v r (जब v, r पर लंबवत हो)। मात्रक: kg m²/s (या J s)।
स्थिर अक्ष पर घूमते दृढ़ पिंड के लिए: L = Iω, जहाँ I जड़त्व आघूर्ण है।
बल-आघूर्ण से संबंध: जैसे F = dp/dt, वैसे ही τ = dL/dt। एक पंक्ति में उपपत्ति: dL/dt = (dr/dt × p) + (r × dp/dt) = (v × mv) + (r × F) = 0 + τ।
कोणीय संवेग का संरक्षण
अगर निकाय पर कुल बाहरी बल-आघूर्ण शून्य है, तो dL/dt = 0, यानी L स्थिर रहता है। स्थिर अक्ष के लिए: I₁ω₁ = I₂ω₂।
- नर्तकी बाँहें अंदर करती है → I घटता है → ω बढ़ता है।
- गोताखोर शरीर सिकोड़ता है → पानी में जाने से पहले ज़्यादा चक्कर।
- ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है (केप्लर का दूसरा नियम इसी से आता है)।
ध्यान दो: घूर्णन की गतिज ऊर्जा ½Iω² यहाँ संरक्षित नहीं रहती। बाँहें अंदर खींचने में व्यक्ति कार्य करता है, इसलिए KE बढ़ती है।
दृढ़ पिंडों का संतुलन
दृढ़ पिंड यांत्रिक संतुलन में तब है जब उसमें न रेखीय त्वरण हो, न कोणीय त्वरण। दो शर्तें:
- स्थानांतरीय संतुलन: ΣF = 0 (खिसकना नहीं)।
- घूर्णी संतुलन: किसी भी बिंदु के परितः Στ = 0 (घूमना नहीं)।
आघूर्णों का सिद्धांत (उत्तोलक): भार × भार भुजा = आयास × आयास भुजा। दक्षिणावर्त आघूर्ण = वामावर्त आघूर्ण।
बलयुग्म में ΣF = 0 पर Στ ≠ 0, इसलिए पिंड संतुलन में नहीं, घूमता है। गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जिसके परितः पिंड पर गुरुत्व का कुल बल-आघूर्ण शून्य है; उस बिंदु से लटकाया पिंड किसी भी स्थिति में टिका रहता है।
प्रकार (समझने के लिए): स्थायी (कटोरे में गेंद), अस्थायी (नोक पर खड़ी पेंसिल), उदासीन (समतल फ़र्श पर गेंद)।
घर पर करके देखो
घूमने वाली कुर्सी पर पानी भरी दो बोतलें पकड़कर बाँहें फैलाकर बैठो। दोस्त से धीरे घुमवाओ, फिर बोतलें छाती से लगा लो। कुर्सी तेज़ हो जाएगी। फिर 30 cm स्केल को पेंसिल पर टिकाओ और केंद्र से 5 cm पर एक सिक्का रखो। दूसरी ओर दो सिक्के कहाँ रखोगे? पहले अंदाज़ा (2.5 cm), फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- τ = r × F, τ = rF sinθ (N m)
- आघूर्ण भुजा = r sinθ
- बलयुग्म: τ = F × d
- L = r × p, L = mvr (v ⟂ r)
- L = Iω (स्थिर अक्ष)
- τ = dL/dt
- τ_ext = 0 ⇒ L स्थिर, I₁ω₁ = I₂ω₂
- संतुलन: ΣF = 0 और Στ = 0
हल किए गए उदाहरण
1. कब्ज़े से 0.8 m पर दरवाज़े से समकोण पर 20 N बल लगा। बल-आघूर्ण?
τ = rF sin90° = 0.8 × 20 × 1 = 16 N m।
2. वही 20 N बल 0.8 m पर, पर दरवाज़े से 30° पर। τ?
τ = 0.8 × 20 × sin30° = 16 × 0.5 = 8 N m। घुमाव आधा।
3. r = (4î + 1ĵ) m पर F = (2î + 3ĵ) N लगा। मूलबिंदु के परितः τ?
τ = (x F_y − y F_x) k̂ = (4×3 − 1×2) k̂ = 10 k̂ N m।
4. 0.2 kg की गेंद 0.5 m त्रिज्या के वृत्त में 4 m/s से घूम रही है। केंद्र के परितः L?
L = m v r = 0.2 × 4 × 0.5 = 0.4 kg m²/s।
5. पहिये का कोणीय संवेग 3 s में 2 से 8 kg m²/s हो गया। औसत बल-आघूर्ण?
τ = ΔL/Δt = 6/3 = 2 N m।
6. नर्तकी I = 6 kg m² के साथ 2 चक्कर/s घूम रही है। बाँहें सिकोड़ने पर I = 2 kg m²। नई चाल?
I₁ω₁ = I₂ω₂ → 6 × 2 = 2 × ω₂ → ω₂ = 6 चक्कर/s। तीन गुना तेज़।
7. बीच से टिके सी-सॉ पर 40 kg का बच्चा धुरी से 2 m पर है। 20 kg का बच्चा कहाँ बैठे कि संतुलन हो? धुरी का बल भी बताओ (g = 10)।
Στ = 0: 400 × 2 = 200 × x → x = 4 m दूसरी ओर। ΣF = 0: N = 600 N (तख़्ते का भार छोड़कर)।
8. 2 m, 10 kg का एकसमान तख़्ता दोनों सिरों पर टिका है। बाएँ सिरे से 0.5 m पर 30 kg का बक्सा है। दोनों टेकों के बल (g = 10)?
बाएँ सिरे के परितः आघूर्ण: N_R × 2 = 100×1 + 300×0.5 = 250 → N_R = 125 N। ΣF: N_L = 400 − 125 = 275 N।
आम गलतियाँ
- तिरछे बल में पूरी दूरी r ले लेना। r sinθ (आघूर्ण भुजा) लो।
- बल-आघूर्ण को जूल में लिखना। इसका मात्रक N m है; यह कार्य या ऊर्जा नहीं।
- यह मानना कि संतुलन के लिए सिर्फ़ ΣF = 0 काफ़ी है। बलयुग्म में ΣF = 0 फिर भी घुमाव है; Στ = 0 भी चाहिए।
- नर्तकी के बाँहें सिकोड़ने पर गतिज ऊर्जा भी संरक्षित मानना। L संरक्षित है; KE बढ़ती है।