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बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन

बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दरवाज़े को कब्ज़े के पास धक्का दो: मुश्किल से हिलता है। उतना ही बल दूर वाले किनारे पर लगाओ: झट से खुल जाता है। घुमाने की ताक़त दूरी पर निर्भर है। बल-आघूर्ण τ = r × F।
  2. अब तिरछा धक्का दो। बल का सिर्फ़ वह हिस्सा घुमाता है जो दरवाज़े से समकोण पर है। τ = rF sinθ। सीधे कब्ज़े की ओर धक्का दो (θ = 0), कुछ नहीं घूमता।
  3. डोरी से गेंद घुमाओ। इसमें कोणीय संवेग L = r m v है। हरा तीर अक्ष की दिशा में है, दाएँ हाथ के नियम से।
  4. घूमते स्टूल पर बैठा व्यक्ति दोनों वज़न अंदर खींचता है। स्टूल अपने आप तेज़ घूमने लगता है। I घटा, तो ω बढ़ा। L = Iω वही रहा।
  5. सी-सॉ पर दो बच्चे। हल्के बच्चे को और बाहर खिसकाओ, जब तक तख़्ता सीधा न हो जाए। कुल बल शून्य और कुल बल-आघूर्ण शून्य। यही संतुलन है।
  6. अब तुम्हारी बारी। कोई भी मोड चुनो: धक्के की दूरी, कोण, भुजा की लंबाई या बच्चे की जगह बदलो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कब्ज़े के पास धक्का देने पर दरवाज़ा इतना मुश्किल से क्यों खुलता है?

τ = r × F। कब्ज़े के पास r बहुत छोटा है, इसलिए बड़ा बल भी कम घुमाता है। धक्के का बिंदु बाहर जाने पर बैंगनी तीर बढ़ता देखो।

कब्ज़े की ओर सीधा धक्का देने से दरवाज़ा बिल्कुल क्यों नहीं घूमता?

तब θ = 0 और sin0 = 0, इसलिए τ = 0। बल अक्ष से होकर जाता है, आघूर्ण भुजा शून्य।

कोणीय संवेग का तीर गेंद की गति की दिशा में नहीं, ऊपर क्यों है?

L = r × p सदिश गुणन है, इसलिए r और v दोनों पर लंबवत होता है। दाएँ हाथ की उँगलियाँ गति की दिशा में मोड़ो; अंगूठा L बताता है, अक्ष के अनुदिश।

स्टूल को किसी ने धक्का नहीं दिया, फिर तेज़ क्यों घूमा?

बाहरी आघूर्ण नहीं, तो L = Iω स्थिर। वज़न अंदर खींचने से I घटा, तो गुणनफल बराबर रखने के लिए ω बढ़ना ही था।

क्या संतुलन के लिए ΣF = 0 काफ़ी है?

नहीं। अलग रेखाओं पर दो बराबर, उल्टे बल (बलयुग्म) में ΣF = 0 पर पिंड घूमता है। Στ = 0 भी चाहिए।

हल्का बच्चा दूर बैठे तो ही सी-सॉ संतुलित क्यों होता है?

संतुलन के लिए आघूर्ण बराबर चाहिए: 400 N × 2 m = 200 N × 4 m। आधा भार, दोगुनी दूरी।

बल-आघूर्ण (बल का आघूर्ण) क्या है?

बल-आघूर्ण बताता है कि कोई बल पिंड को किसी अक्ष के परितः कितनी ज़ोर से घुमाता है। इसे बल का आघूर्ण (moment of force) भी कहते हैं।

τ = r × F, परिमाण τ = rF sinθ। यहाँ r अक्ष से बल लगने वाले बिंदु की दूरी है और θ, r और F के बीच का कोण।

बलयुग्म (couple): बराबर, उल्टे, समांतर बल जो एक रेखा पर नहीं हैं। यह पिंड को आगे नहीं खिसकाता, सिर्फ़ घुमाता है, जैसे नल या स्टीयरिंग घुमाना। इसका आघूर्ण = F × दोनों रेखाओं की दूरी।

कोणीय संवेग

रेखीय संवेग p = mv बताता है कि चलती चीज़ को रोकना कितना मुश्किल है। कोणीय संवेग बताता है कि घूमती चीज़ को रोकना कितना मुश्किल है।

एक कण के लिए: L = r × p, परिमाण L = r p sinθ = m v r (जब v, r पर लंबवत हो)। मात्रक: kg m²/s (या J s)।

स्थिर अक्ष पर घूमते दृढ़ पिंड के लिए: L = Iω, जहाँ I जड़त्व आघूर्ण है।

बल-आघूर्ण से संबंध: जैसे F = dp/dt, वैसे ही τ = dL/dt। एक पंक्ति में उपपत्ति: dL/dt = (dr/dt × p) + (r × dp/dt) = (v × mv) + (r × F) = 0 + τ।

कोणीय संवेग का संरक्षण

अगर निकाय पर कुल बाहरी बल-आघूर्ण शून्य है, तो dL/dt = 0, यानी L स्थिर रहता है। स्थिर अक्ष के लिए: I₁ω₁ = I₂ω₂।

ध्यान दो: घूर्णन की गतिज ऊर्जा ½Iω² यहाँ संरक्षित नहीं रहती। बाँहें अंदर खींचने में व्यक्ति कार्य करता है, इसलिए KE बढ़ती है।

दृढ़ पिंडों का संतुलन

दृढ़ पिंड यांत्रिक संतुलन में तब है जब उसमें न रेखीय त्वरण हो, न कोणीय त्वरण। दो शर्तें:

  1. स्थानांतरीय संतुलन: ΣF = 0 (खिसकना नहीं)।
  2. घूर्णी संतुलन: किसी भी बिंदु के परितः Στ = 0 (घूमना नहीं)।

आघूर्णों का सिद्धांत (उत्तोलक): भार × भार भुजा = आयास × आयास भुजा। दक्षिणावर्त आघूर्ण = वामावर्त आघूर्ण।

बलयुग्म में ΣF = 0 पर Στ ≠ 0, इसलिए पिंड संतुलन में नहीं, घूमता है। गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जिसके परितः पिंड पर गुरुत्व का कुल बल-आघूर्ण शून्य है; उस बिंदु से लटकाया पिंड किसी भी स्थिति में टिका रहता है।

प्रकार (समझने के लिए): स्थायी (कटोरे में गेंद), अस्थायी (नोक पर खड़ी पेंसिल), उदासीन (समतल फ़र्श पर गेंद)।

घर पर करके देखो

घूमने वाली कुर्सी पर पानी भरी दो बोतलें पकड़कर बाँहें फैलाकर बैठो। दोस्त से धीरे घुमवाओ, फिर बोतलें छाती से लगा लो। कुर्सी तेज़ हो जाएगी। फिर 30 cm स्केल को पेंसिल पर टिकाओ और केंद्र से 5 cm पर एक सिक्का रखो। दूसरी ओर दो सिक्के कहाँ रखोगे? पहले अंदाज़ा (2.5 cm), फिर जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कब्ज़े से 0.8 m पर दरवाज़े से समकोण पर 20 N बल लगा। बल-आघूर्ण?

τ = rF sin90° = 0.8 × 20 × 1 = 16 N m।

2. वही 20 N बल 0.8 m पर, पर दरवाज़े से 30° पर। τ?

τ = 0.8 × 20 × sin30° = 16 × 0.5 = 8 N m। घुमाव आधा।

3. r = (4î + 1ĵ) m पर F = (2î + 3ĵ) N लगा। मूलबिंदु के परितः τ?

τ = (x F_y − y F_x) k̂ = (4×3 − 1×2) k̂ = 10 k̂ N m।

4. 0.2 kg की गेंद 0.5 m त्रिज्या के वृत्त में 4 m/s से घूम रही है। केंद्र के परितः L?

L = m v r = 0.2 × 4 × 0.5 = 0.4 kg m²/s।

5. पहिये का कोणीय संवेग 3 s में 2 से 8 kg m²/s हो गया। औसत बल-आघूर्ण?

τ = ΔL/Δt = 6/3 = 2 N m।

6. नर्तकी I = 6 kg m² के साथ 2 चक्कर/s घूम रही है। बाँहें सिकोड़ने पर I = 2 kg m²। नई चाल?

I₁ω₁ = I₂ω₂ → 6 × 2 = 2 × ω₂ → ω₂ = 6 चक्कर/s। तीन गुना तेज़।

7. बीच से टिके सी-सॉ पर 40 kg का बच्चा धुरी से 2 m पर है। 20 kg का बच्चा कहाँ बैठे कि संतुलन हो? धुरी का बल भी बताओ (g = 10)।

Στ = 0: 400 × 2 = 200 × x → x = 4 m दूसरी ओर। ΣF = 0: N = 600 N (तख़्ते का भार छोड़कर)।

8. 2 m, 10 kg का एकसमान तख़्ता दोनों सिरों पर टिका है। बाएँ सिरे से 0.5 m पर 30 kg का बक्सा है। दोनों टेकों के बल (g = 10)?

बाएँ सिरे के परितः आघूर्ण: N_R × 2 = 100×1 + 300×0.5 = 250 → N_R = 125 N। ΣF: N_L = 400 − 125 = 275 N।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. बल-आघूर्ण शून्य होता है जब बल:
2. कोणीय संवेग का SI मात्रक:
3. τ = dL/dt किसका घूर्णी रूप है?
4. नर्तकी बाँहें सिकोड़ती है। क्या स्थिर रहता है (बाहरी आघूर्ण नहीं)?
5. पिंड पर बलयुग्म से होता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 11 में बल-आघूर्ण का सूत्र क्या है?

τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। θ स्थिति सदिश r और बल F के बीच का कोण है।

कोणीय संवेग संरक्षण का नियम क्या है?

यदि निकाय पर कोई बाहरी बल-आघूर्ण न लगे, तो उसका कुल कोणीय संवेग स्थिर रहता है: I₁ω₁ = I₂ω₂।

दृढ़ पिंड के संतुलन की शर्तें क्या हैं?

कुल बाहरी बल शून्य (ΣF = 0) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बाहरी बल-आघूर्ण शून्य (Στ = 0)।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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