Romania Clasa a IX-a Physics (natural sciences)
अध्याय: 8
1. Introductory notions and working methods in physics
Measurement in physics · Errors and uncertainty
- मात्रक और मापन (कक्षा 11) – मापना यानी किसी राशि की तुलना एक तय, सबके माने हुए परिमाण से करना। उस तय परिमाण को मात्रक (unit) कहते हैं। मापा गया मान = संख्या × मात्रक। आज पूरी दुनिया SI पद्धति चलाती है, जिसमें 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल और कैन्डेला। बाकी सब मात्रक (जैसे न्यूटन, जूल) इन्हीं के गुणा-भाग से बने व्युत्पन्न मात्रक हैं। किलो (10³), मिली (10⁻³) जैसे पूर्वलग्न बड़ी-छोटी संख्याओं को आसान बनाते हैं।
- सार्थक अंक और मापन में त्रुटियाँ – कोई भी मापन पूरी तरह सही नहीं होता। सार्थक अंक = पक्के अंक + पहला अनिश्चित अंक। त्रुटि बताती है कि पाठ्यांक असली मान से कितना दूर हो सकता है: निरपेक्ष त्रुटि Δa, आपेक्षिक त्रुटि Δa/a और प्रतिशत त्रुटि (Δa/a) × 100. जोड़ या घटाने में निरपेक्ष त्रुटियाँ जुड़ती हैं। गुणा या भाग में प्रतिशत त्रुटियाँ जुड़ती हैं। घात n हो तो प्रतिशत त्रुटि n गुना।
2. Elements of kinematics
Describing motion · Velocity and acceleration · Types of motion
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
3. Newton's principles of mechanics and their applications
Newton's laws · Contact interactions · Dynamics of circular motion · Field interactions: gravitation
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- घर्षण: स्थैतिक, गतिज और लोटनिक घर्षण, नियम और स्नेहन – घर्षण वह बल है जो छूती सतहों के बीच आपेक्षिक गति (या उसकी शुरुआत) का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद बदलता है, पर एक अधिकतम तक: सीमांत घर्षण fs,max = μs N. फिसलना शुरू होते ही गतिज घर्षण fk = μk N लगता है, और μk < μs. घर्षण अभिलंब बल और सतहों की प्रकृति पर निर्भर है, संपर्क क्षेत्रफल पर नहीं। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम है; स्नेहक और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं।
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
4. Variation theorems and conservation laws in mechanics
Mechanical work and power · Mechanical energy · Momentum
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
- स्थितिज ऊर्जा, स्प्रिंग ऊर्जा और संरक्षी बल – स्थितिज ऊर्जा U स्थिति या आकार के कारण जमा ऊर्जा है। पृथ्वी के पास U = mgh; खिंची या दबी स्प्रिंग में U = ½kx²। जिस बल का कार्य सिर्फ़ शुरू और अंत के बिंदु पर निर्भर करे, रास्ते पर नहीं, वह संरक्षी बल है (गुरुत्व, स्प्रिंग बल)। तब F = −dU/dx और K + U नियत रहता है। घर्षण, वायु प्रतिरोध असंरक्षी हैं: ये यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा बना देते हैं।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
5. Mechanical equilibrium
Equilibrium of bodies
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
6. Integrating theme: road safety
Physics of road safety
- सड़क सुरक्षा: रुकने का विज्ञान और सुरक्षित रहना – कोई भी गाड़ी तुरंत नहीं रुकती। पहले चालक को खतरा देखकर संभलने में समय लगता है, इसे प्रतिक्रिया समय कहते हैं (लगभग 1 सेकंड)। इस बीच गाड़ी पूरी गति से चलती रहती है: यह सोचने की दूरी है = चाल × प्रतिक्रिया समय। फिर ब्रेक गाड़ी को धीमा करते हैं: यह ब्रेकिंग दूरी है = चाल² ÷ (2 × मंदन)। रुकने की दूरी = सोचने की दूरी + ब्रेकिंग दूरी। चाल दोगुनी हो तो ब्रेकिंग दूरी चार गुनी हो जाती है। गीली या बर्फ़ीली सड़क और घिसे टायर पकड़ (घर्षण) कम करते हैं। टक्कर में सीट बेल्ट, हेलमेट, एयरबैग और क्रम्पल ज़ोन रुकने का समय बढ़ाते हैं, जिससे शरीर पर बल कम होता है। पैदल यात्री, साइकिल सवार, स्कूटर चालक और यात्री, सब नियम मानकर, दिखाई देकर और चलते समय फ़ोन न चलाकर सुरक्षित रहते हैं।
7. Elements of celestial mechanics (optional)
Kepler's laws and orbits
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
8. Notions of fluid mechanics
Fluid statics · Fluid dynamics
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
- श्यानता, स्टोक्स का नियम और बर्नूली प्रमेय – बहता तरल एक-दूसरे पर फिसलती परतों जैसा है। परतों के बीच का घर्षण श्यानता (viscosity) है: F = ηA(dv/dx)। तरल में गिरती छोटी गेंद पर श्यान बल F = 6πηrv लगता है (स्टोक्स नियम); जब श्यान बल + उत्प्लावन बल भार के बराबर हो जाए, तो गेंद स्थिर सीमांत वेग से गिरती है। धीमा बहाव धारारेखी होता है; क्रांतिक वेग (रेनॉल्ड्स संख्या लगभग 2000) के ऊपर विक्षुब्ध। स्थिर धारारेखी प्रवाह में Av नियत (सांतत्य) और P + ½ρv² + ρgh नियत (बर्नूली)। यानी तेज़ बहाव पर दाब कम। इसी से टॉरिसेली का बहिःस्राव वेग √(2gh), वेंचुरीमीटर और पंखों व घूमती गेंद पर उत्थापक बल समझ आते हैं।