श्यानता: तरल के अंदर का घर्षण
द्रव जब किसी सतह पर बहता है, तो सतह को छूती परत उससे चिपककर रुकी रहती है। अगली परत उस पर थोड़ी तेज़ फिसलती है, और इसी तरह आगे। परतें आपस में रगड़ती हैं। इस आंतरिक घर्षण को श्यानता कहते हैं।
क्षेत्रफल A की परत को चलाए रखने का बल A और दूरी के साथ चाल के बदलाव (वेग प्रवणता dv/dx) के समानुपाती है:
F = η A (dv/dx)
η (ईटा) = श्यानता गुणांक। SI मात्रक: N s m⁻² = Pa s (पॉइज़ुली, Pl)। CGS मात्रक: पॉइज़; 1 Pl = 10 पॉइज़। 20 °C पर पानी: η ≈ 10⁻³ Pa s; शहद: लगभग 10 Pa s।
ताप का असर: द्रव गरम करने पर कम श्यान होते हैं (गरम तेल आसानी से बहता है)। गैसें गरम करने पर ज़्यादा श्यान होती हैं, क्योंकि अणु तेज़ चलकर संवेग ज़्यादा मिलाते हैं।
स्टोक्स का नियम
त्रिज्या r का छोटा गोला, श्यानता η वाले तरल में धीमी चाल v से चले तो उस पर श्यान बल:
F = 6π η r v
बल चाल के साथ बढ़ता है। यह छोटे, धीमे गोलों पर धारारेखी प्रवाह में लागू है (हवा में धूल, छोटी बूँदें, ग्लिसरीन में स्टील की गोली)। विमा से जाँचो: η की विमा [ML⁻¹T⁻¹], तो η r v की [MLT⁻²] = बल।
सीमांत वेग
घनत्व ρ की गेंद घनत्व σ वाले तरल में गिरती है। तीन बल:
- भार = (4/3)πr³ρg, नीचे
- उत्प्लावन = (4/3)πr³σg, ऊपर
- श्यान बल = 6πηrv, ऊपर, v के साथ बढ़ता
पहले गेंद तेज़ होती है। श्यान बल बढ़ता है जब तक बल संतुलित न हों। फिर त्वरण शून्य और चाल स्थिर = सीमांत वेग:
6πηr vt = (4/3)πr³(ρ − σ)g ⇒ vt = 2r²(ρ − σ)g / (9η)
ध्यान दो vt ∝ r²। बड़ी बूँदें छोटी से तेज़ गिरती हैं। अगर σ > ρ (पानी में हवा का बुलबुला), तो vt ऋणात्मक: बुलबुला स्थिर चाल से ऊपर उठता है।
धारारेखी और विक्षुब्ध प्रवाह; क्रांतिक वेग
धारारेखी (स्थिर) प्रवाह में किसी बिंदु से गुज़रने वाले हर कण का वेग एक-सा होता है। रास्तों को धारारेखाएँ कहते हैं; ये एक-दूसरे को नहीं काटतीं। पास-पास धारारेखाएँ = तेज़ बहाव।
चाल बहुत ज़्यादा हो तो प्रवाह विक्षुब्ध (turbulent) हो जाता है: भँवर बनते हैं, एक बिंदु पर वेग बदलता रहता है। अगरबत्ती का धुआँ पहले सीधा, फिर घुमावदार: धारारेखी से विक्षुब्ध।
रेनॉल्ड्स संख्या तय करती है: Re = ρvd/η (d = नली का व्यास)। कोई मात्रक नहीं।
- Re < लगभग 1000: धारारेखी
- Re > लगभग 2000: विक्षुब्ध
- बीच में: अस्थिर
जिस चाल पर प्रवाह विक्षुब्ध होने लगे, वह क्रांतिक वेग है: vc = Rec η / (ρd)। गाढ़े द्रव पतली नली में ज़्यादा चाल तक धारारेखी रहते हैं।
सांतत्य समीकरण
न दबने वाले द्रव में हर सेकंड नली में जितना आयतन घुसे, उतना निकले: A₁v₁ = A₂v₂। इसलिए पतली जगह पर द्रव तेज़ चलता है। पाइप का मुँह दबाने पर पानी दूर तक इसी कारण जाता है।
बर्नूली प्रमेय
आदर्श (अश्यान, असंपीड्य) तरल के स्थिर धारारेखी प्रवाह में, एक धारारेखा पर:
P + ½ρv² + ρgh = नियत
हर पद प्रति एकांक आयतन ऊर्जा है: दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा। यह बहते तरल के लिए कार्य–ऊर्जा प्रमेय ही है।
व्युत्पत्ति का विचार: Δt समय में आयतन ΔV खंड 1 पर घुसता और खंड 2 से निकलता है। दाब का कार्य = (P₁ − P₂)ΔV। गतिज ऊर्जा में बदलाव = ½ρΔV(v₂² − v₁²)। स्थितिज ऊर्जा में बदलाव = ρgΔV(h₂ − h₁)। कार्य = ΔKE + ΔPE लिखकर ΔV से भाग दो: बर्नूली समीकरण।
एक ही ऊँचाई पर: तेज़ बहाव ⇒ कम दाब। वेंचुरीमीटर पतले गले में दाब की कमी से बहाव की चाल नापता है।
टॉरिसेली का नियम (बहिःस्राव वेग)
ऊपर से खुली टंकी में सतह से h गहराई पर छोटा छेद है। सतह और धार दोनों पर हवा का दाब P₀। चौड़ी टंकी की सतह बहुत धीरे नीचे आती है। बर्नूली से P₀ + ρgh = P₀ + ½ρv², इसलिए:
v = √(2gh)
यह h ऊँचाई से मुक्त रूप से गिरे पत्थर की चाल के बराबर है। अगर टंकी बंद हो और ऊपर गैस का दाब P हो: v = √(2(P − P₀)/ρ + 2gh)।
गतिक उत्थापक बल
गतिक उत्थापक बल (dynamic lift): तरल में चलती वस्तु पर उसके चारों ओर के बहाव के कारण लगने वाला बल।
- हवाई जहाज़ का पंख (एयरोफ़ॉयल): घुमावदार आकार और हल्के झुकाव से ऊपर हवा तेज़ बहती है। ऊपर कम दाब, नीचे ज़्यादा: ऊपर की ओर बल। उत्थापक बल ≈ ΔP × पंख का क्षेत्रफल।
- घूमती गेंद (मैग्नस प्रभाव): घूमती गेंद हवा को साथ घुमाती है। एक ओर हवा तेज़ (कम दाब), दूसरी ओर धीमी (ज़्यादा दाब)। गेंद मुड़ जाती है — क्रिकेट या फ़ुटबॉल की स्विंग।
करके देखो: कागज़ की पट्टी और दो गिलास
1) कागज़ की पट्टी निचले होंठ के नीचे पकड़ो और ऊपर से फूँको: पट्टी उठती है (तेज़ हवा, कम दाब)। 2) एक कंचा पानी के गिलास में और एक खाने के तेल के गिलास में डालो। तल तक पहुँचने के सेकंड गिनो। तेल में धीमा: ज़्यादा श्यानता, छोटा सीमांत वेग। 3D के चरण 3 में वह चाल खोजो जहाँ प्रवाह विक्षुब्ध होता है (Re ≈ 2000)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- F = η A (dv/dx); η का मात्रक: Pa s
- स्टोक्स नियम: F = 6π η r v
- सीमांत वेग: vt = 2r²(ρ − σ)g / (9η)
- रेनॉल्ड्स संख्या: Re = ρ v d / η
- सांतत्य: A₁v₁ = A₂v₂
- बर्नूली: P + ½ρv² + ρgh = नियत
- टॉरिसेली: v = √(2gh)
- उत्थापक बल ≈ ½ρ(v₁² − v₂²) × A
हल किए गए उदाहरण
1. 0.1 m² की धातु की प्लेट मेज़ पर 1 mm मोटी तेल की परत पर 0.1 m/s से खिसकती है। बल 0.2 N लगता है। η ज्ञात करो।
चरण 1: dv/dx = 0.1 / 10⁻³ = 100 s⁻¹। चरण 2: η = F/(A dv/dx) = 0.2/(0.1 × 100)। उत्तर: η = 0.02 Pa s।
2. 20 cm² क्षेत्रफल की नली में पानी 2 m/s से बहता है। नली 5 cm² की हो जाती है। वहाँ चाल?
चरण 1: A₁v₁ = A₂v₂। चरण 2: v₂ = 20 × 2/5। उत्तर: 8 m/s।
3. खुली टंकी में सतह से 5 m नीचे के छेद से पानी की चाल? (g = 10 m/s²)
चरण 1: v = √(2gh)। चरण 2: = √(2 × 10 × 5) = √100। उत्तर: 10 m/s।
4. 0.3 mm त्रिज्या की बारिश की बूँद हवा में गिरती है। η(हवा) = 1.8 × 10⁻⁵ Pa s, ρ = 1000 kg/m³, हवा का घनत्व नगण्य। सीमांत वेग? (g = 9.8)
चरण 1: vt = 2r²ρg/(9η)। चरण 2: r² = 9 × 10⁻⁸ m²। चरण 3: अंश = 2 × 9 × 10⁻⁸ × 1000 × 9.8 = 1.764 × 10⁻³। चरण 4: हर = 9 × 1.8 × 10⁻⁵ = 1.62 × 10⁻⁴। उत्तर: vt ≈ 10.9 m/s। (इतनी बड़ी असली बूँदें धीमी होती हैं, क्योंकि इतनी चाल पर स्टोक्स नियम टूटता है; पर विधि यही सीखनी है।)
5. पानी (η = 10⁻³ Pa s) 2 cm व्यास की नली में 0.1 m/s से बहता है। Re ज्ञात करो। क्या प्रवाह धारारेखी है?
चरण 1: Re = ρvd/η। चरण 2: = 1000 × 0.1 × 0.02 / 10⁻³। उत्तर: Re = 2000, सीमा पर; ज़रा तेज़ करो तो विक्षुब्ध।
6. क्षैतिज नली में पानी 2 m/s से बहता है जहाँ दाब 1.5 × 10⁵ Pa है। पतले भाग में चाल 6 m/s। वहाँ दाब?
चरण 1: एक ही ऊँचाई: P₁ + ½ρv₁² = P₂ + ½ρv₂²। चरण 2: P₂ = 1.5 × 10⁵ − ½ × 1000 × (36 − 4)। चरण 3: = 1.5 × 10⁵ − 16000। उत्तर: 1.34 × 10⁵ Pa।
7. पंख के ऊपर हवा 70 m/s, नीचे 60 m/s। पंख का क्षेत्रफल 20 m², हवा का घनत्व 1.2 kg/m³। उत्थापक बल?
चरण 1: ΔP = ½ρ(v₁² − v₂²) = 0.6 × (4900 − 3600)। चरण 2: ΔP = 780 Pa। चरण 3: बल = 780 × 20। उत्तर: 15600 N, लगभग 1.6 टन थामने लायक।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि हर तरल की श्यानता ताप के साथ घटती है। द्रवों की घटती है, गैसों की बढ़ती है।
- vt ∝ r² की जगह vt ∝ r लिखना। त्रिज्या दोगुनी तो सीमांत वेग चार गुना।
- विक्षुब्ध या बहुत श्यान बहाव पर बर्नूली लगाना। यह स्थिर, धारारेखी, अश्यान, असंपीड्य प्रवाह के लिए है।
- यह सोचना कि तेज़ बहाव = ज़्यादा दाब। एक ही ऊँचाई पर तेज़ बहाव = कम दाब।