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पलायन वेग, कक्षीय वेग और परिक्रमा करते उपग्रह की ऊर्जा

किसी चीज़ को बगल की ओर काफ़ी तेज़ फेंको तो वह पृथ्वी की ओर गिरते हुए भी ज़मीन पर नहीं पहुँचती, चक्कर लगाती रहती है: यह कक्षीय वेग है, v₀ = √(GM/r), सतह के ठीक ऊपर लगभग 7.9 km/s। और तेज़, पलायन वेग vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) ≈ 11.2 km/s से फेंको, तो वह हमेशा के लिए पृथ्वी छोड़ देती है। vₑ = √2 × v₀। वृत्तीय कक्षा में उपग्रह की KE = GMm/2r, स्थितिज ऊर्जा = −GMm/r और कुल ऊर्जा E = −GMm/2r। कुल ऊर्जा ऋणात्मक है, यानी उपग्रह बँधा है। ऊँची कक्षा में चाल कम और समय ज़्यादा: T = 2π√(r³/GM)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. छोटा उपग्रह पृथ्वी के ठीक ऊपर से कम चाल से बगल में छोड़ा गया। उसका रास्ता नीचे मुड़ता है और वह वापस गिर जाता है। बहुत धीमा।
  2. अब लगभग 7.9 km/s से छोड़ो। वह अब भी पृथ्वी की ओर गिरता है, पर ज़मीन भी उतनी ही तेज़ी से मुड़कर दूर होती जाती है। वह गोल घूमता रहता है: यही कक्षा है।
  3. अब 11.2 km/s से छोड़ो। रास्ता खुल जाता है और उपग्रह उड़कर हमेशा के लिए चला जाता है। यही पलायन वेग है।
  4. वृत्तीय कक्षा में उपग्रह। नारंगी पट्टी = गतिज ऊर्जा (ऊपर)। बैंगनी पट्टी = स्थितिज ऊर्जा (नीचे, दोगुनी)। हरी पट्टी = कुल ऊर्जा, ऋणात्मक और KE के बराबर आकार की।
  5. दोगुनी त्रिज्या वाली ऊँची कक्षा। उपग्रह धीमा चलता है और एक चक्कर में ज़्यादा समय लेता है। हल किए उदाहरण के लिए बटन दबाओ।
  6. अब तुम्हारी बारी। चाल चुनो, छोड़ो दबाओ और देखो: वापस गिरा, कक्षा में घूमा या छूट गया।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर उपग्रह हर समय गिर रहा है, तो ज़मीन से टकराता क्यों नहीं?

वह बगल में इतनी तेज़ चलता है कि जितना गिरता है, मुड़ी हुई ज़मीन उतनी ही नीचे चली जाती है। चरण 1 (धीमा, टकराया) और चरण 2 (सही चाल, गोल घूमा) की तुलना करो।

क्या पलायन वेग के लिए दिशा मायने रखती है?

नहीं (हवा न मानें तो)। पलायन ऊर्जा पर निर्भर है और KE = ½mv² में दिशा नहीं। पूर्व की ओर छोड़ना इसलिए फ़ायदेमंद है कि पृथ्वी का घूमना चाल जोड़ देता है।

उपग्रह चल रहा है, फिर भी उसकी कुल ऊर्जा ऋणात्मक क्यों?

उसकी स्थितिज ऊर्जा (−GMm/r) उसकी KE (GMm/2r) से दोगुनी है। कुल −GMm/2r। चरण 4 में हरी पट्टी शून्य से नीचे देखो।

ऊँची कक्षा धीमी है, फिर उसके लिए ज़्यादा ऊर्जा क्यों चाहिए?

ऊपर जाने पर KE थोड़ी घटती है, पर स्थितिज ऊर्जा उससे दोगुनी बढ़ती है। कुल ऊर्जा बढ़ती है (कम ऋणात्मक), इसलिए ऊर्जा देनी पड़ती है।

7.9 km/s कक्षा के लिए काफ़ी पर पलायन के लिए क्यों नहीं?

7.9 km/s पर कुल ऊर्जा −GMm/2R है, अभी भी ऋणात्मक, इसलिए उपग्रह गोल कक्षा में बँधा रहता है। कुल ऊर्जा शून्य करने के लिए √2 गुनी चाल (11.2 km/s) चाहिए।

कक्षीय वेग: गिरते रहो, पर ज़मीन पर मत पहुँचो

कक्षा में उपग्रह हमेशा पृथ्वी की ओर गिर रहा है। पर साथ ही वह बगल में इतनी तेज़ चल रहा है कि उसके नीचे पृथ्वी की सतह मुड़कर दूर होती जाती है। इसलिए वह कभी ज़मीन पर नहीं पहुँचता।

v₀ की व्युत्पत्ति

  1. r = R + h त्रिज्या की वृत्तीय कक्षा में गुरुत्व ही अभिकेंद्र बल देता है: GMm/r² = m v₀²/r।
  2. इसलिए v₀ = √(GM/r) = √(GM/(R + h))।
  3. सतह के ठीक ऊपर (h ≪ R): v₀ = √(GM/R) = √(gR) = √(9.8 × 6.4 × 10⁶) ≈ 7.9 km/s।

v₀ उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं। ऊँची कक्षा (बड़ा r) मतलब कम चाल।

परिक्रमण काल

T = 2πr/v₀ = 2π√(r³/GM)। सतह के पास T ≈ 84 मिनट। यानी T² ∝ r³, फिर से केप्लर का तीसरा नियम।

पलायन वेग: हमेशा के लिए छूटना

पलायन वेग वह न्यूनतम चाल है जिससे सतह से फेंकी गई वस्तु कभी वापस नहीं आती (अनंत पर ठीक शून्य चाल से पहुँचती है)।

ऊर्जा से vₑ की व्युत्पत्ति

  1. सतह पर: KE = ½ m vₑ², स्थितिज ऊर्जा = −GMm/R।
  2. अनंत पर, ठीक छूटते हुए: KE = 0, स्थितिज ऊर्जा = 0। कुल = 0।
  3. ऊर्जा संरक्षण: ½ m vₑ² − GMm/R = 0।
  4. vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) = √(2 × 9.8 × 6.4 × 10⁶) ≈ 11.2 km/s।

परिक्रमा करते उपग्रह की ऊर्जा

r त्रिज्या की वृत्तीय कक्षा में m द्रव्यमान के उपग्रह के लिए:

यानी E = −KE और U = −2 KE। कुल ऊर्जा ऋणात्मक है: उपग्रह पृथ्वी से बँधा है।

बंधन ऊर्जा

उपग्रह को कक्षा से आज़ाद करने के लिए दी जाने वाली ऊर्जा = +GMm/2r। ऊँची कक्षा में जाने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है, भले ही वहाँ उपग्रह धीमा चलता है (KE घटती है, पर U उससे दोगुनी बढ़ती है)।

उपग्रहों के प्रकार और भारहीनता

अंतरिक्ष यात्री क्यों तैरते हैं?

यात्री और स्टेशन एक ही त्वरण से साथ-साथ गिर रहे हैं। फ़र्श यात्री को ऊपर नहीं धकेलता, इसलिए तराज़ू शून्य दिखाता है। गुरुत्व मौजूद है, बस आभासी भार शून्य है। इसे भारहीनता कहते हैं।

करके देखो: बगल में फेंको

एक ही ऊँचाई से गेंद को बगल में धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़ फेंको। हर बार वह और दूर गिरती है। न्यूटन ने बहुत ऊँचे पहाड़ पर तोप की कल्पना की: काफ़ी तेज़ फेंको तो गोला पृथ्वी के मोड़ से 'आगे' गिरता है, यानी चक्कर लगाता है। 3D के खुद खेलो में 7.0, 7.9, 9.0, 11.2 और 12 km/s आज़माओ और छोड़ने से पहले अनुमान लगाओ: वापस गिरेगा, गोल घूमेगा, खिंचा दीर्घवृत्त या छूट जाएगा?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. पृथ्वी की सतह के ठीक ऊपर कक्षीय चाल? (g = 9.8, R = 6.4 × 10⁶ m)

v₀ = √(gR) = √(6.27 × 10⁷) ≈ 7.9 km/s।

2. पृथ्वी से पलायन वेग निकालो।

vₑ = √(2gR) = √(1.254 × 10⁸) ≈ 11.2 km/s।

3. h = R ऊँचाई पर कक्षीय चाल?

r = 2R, v₀ = √(gR/2) = 7.9/√2 ≈ 5.6 km/s।

4. किसी ग्रह का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों पृथ्वी के दोगुने हैं। पलायन वेग? (पृथ्वी: 11.2 km/s)

vₑ ∝ √(M/R) = 1, तो vₑ = 11.2 km/s।

5. सतह के पास घूमते उपग्रह का परिक्रमण काल?

T = 2π√(R/g) = 2π × 808 ≈ 5077 s ≈ 84.6 मिनट।

6. 500 kg उपग्रह r = 2R पर घूम रहा है। KE, स्थितिज ऊर्जा और कुल ऊर्जा निकालो।

GMm/r = mgR/2 = 1.57 × 10¹⁰ J। KE = 7.84 × 10⁹ J, U = −1.57 × 10¹⁰ J, E = −7.84 × 10⁹ J।

7. उसी 500 kg उपग्रह को r = 2R से r = 4R ले जाने में कितनी ऊर्जा?

E(2R) = −mgR/4, E(4R) = −mgR/8। ΔE = mgR/8 = 3.92 × 10⁹ J।

8. भू-स्थिर कक्षा की त्रिज्या निकालो (T = 86400 s, GM = 4 × 10¹⁴ m³/s²)।

r³ = GMT²/4π² ≈ 7.56 × 10²², r ≈ 4.23 × 10⁷ m ≈ 42,300 km, ऊँचाई ≈ 35,900 km।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पृथ्वी से पलायन वेग लगभग है:
2. सतह के पास पलायन वेग और कक्षीय वेग का संबंध:
3. r त्रिज्या की कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा:
4. कक्षा की त्रिज्या बढ़ने पर कक्षीय चाल:
5. भू-स्थिर उपग्रह का परिक्रमण काल:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलायन वेग का सूत्र क्या है?

vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) ≈ 11.2 km/s (पृथ्वी के लिए)।

पलायन वेग और कक्षीय वेग में क्या संबंध है?

सतह के पास vₑ = √2 × v₀, यानी 11.2 ≈ 1.414 × 7.9 km/s।

कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा कितनी होती है?

E = −GMm/2r। यह −KE के बराबर और स्थितिज ऊर्जा की आधी है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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