कक्षीय वेग: गिरते रहो, पर ज़मीन पर मत पहुँचो
कक्षा में उपग्रह हमेशा पृथ्वी की ओर गिर रहा है। पर साथ ही वह बगल में इतनी तेज़ चल रहा है कि उसके नीचे पृथ्वी की सतह मुड़कर दूर होती जाती है। इसलिए वह कभी ज़मीन पर नहीं पहुँचता।
v₀ की व्युत्पत्ति
- r = R + h त्रिज्या की वृत्तीय कक्षा में गुरुत्व ही अभिकेंद्र बल देता है: GMm/r² = m v₀²/r।
- इसलिए v₀ = √(GM/r) = √(GM/(R + h))।
- सतह के ठीक ऊपर (h ≪ R): v₀ = √(GM/R) = √(gR) = √(9.8 × 6.4 × 10⁶) ≈ 7.9 km/s।
v₀ उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं। ऊँची कक्षा (बड़ा r) मतलब कम चाल।
परिक्रमण काल
T = 2πr/v₀ = 2π√(r³/GM)। सतह के पास T ≈ 84 मिनट। यानी T² ∝ r³, फिर से केप्लर का तीसरा नियम।
पलायन वेग: हमेशा के लिए छूटना
पलायन वेग वह न्यूनतम चाल है जिससे सतह से फेंकी गई वस्तु कभी वापस नहीं आती (अनंत पर ठीक शून्य चाल से पहुँचती है)।
ऊर्जा से vₑ की व्युत्पत्ति
- सतह पर: KE = ½ m vₑ², स्थितिज ऊर्जा = −GMm/R।
- अनंत पर, ठीक छूटते हुए: KE = 0, स्थितिज ऊर्जा = 0। कुल = 0।
- ऊर्जा संरक्षण: ½ m vₑ² − GMm/R = 0।
- vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) = √(2 × 9.8 × 6.4 × 10⁶) ≈ 11.2 km/s।
- यह वस्तु के द्रव्यमान या फेंकने की दिशा पर निर्भर नहीं (हवा न मानें तो)।
- vₑ = √2 × v₀ (दोनों सतह के पास): 11.2 ≈ 1.414 × 7.9।
- चंद्रमा: vₑ ≈ 2.4 km/s। इसीलिए चंद्रमा की हवा निकल गई।
परिक्रमा करते उपग्रह की ऊर्जा
r त्रिज्या की वृत्तीय कक्षा में m द्रव्यमान के उपग्रह के लिए:
- गतिज ऊर्जा: KE = ½ m v₀² = ½ m (GM/r) = GMm/2r (धनात्मक)
- स्थितिज ऊर्जा: U = −GMm/r (ऋणात्मक)
- कुल ऊर्जा: E = KE + U = −GMm/2r
यानी E = −KE और U = −2 KE। कुल ऊर्जा ऋणात्मक है: उपग्रह पृथ्वी से बँधा है।
बंधन ऊर्जा
उपग्रह को कक्षा से आज़ाद करने के लिए दी जाने वाली ऊर्जा = +GMm/2r। ऊँची कक्षा में जाने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है, भले ही वहाँ उपग्रह धीमा चलता है (KE घटती है, पर U उससे दोगुनी बढ़ती है)।
उपग्रहों के प्रकार और भारहीनता
- भू-स्थिर उपग्रह: T = 24 घंटे, विषुवत रेखा के ऊपर पश्चिम से पूर्व चलता है, इसलिए आसमान में स्थिर दिखता है। त्रिज्या ≈ 42,200 km, ऊँचाई ≈ 35,800 km। टीवी, संचार और मौसम के लिए।
- ध्रुवीय उपग्रह: नीची कक्षा (लगभग 500–800 km), ध्रुवों के ऊपर से गुज़रता है; नीचे पृथ्वी घूमती है, इसलिए पूरी पृथ्वी की तस्वीर ले सकता है। नक्शे और रिमोट सेंसिंग के लिए।
अंतरिक्ष यात्री क्यों तैरते हैं?
यात्री और स्टेशन एक ही त्वरण से साथ-साथ गिर रहे हैं। फ़र्श यात्री को ऊपर नहीं धकेलता, इसलिए तराज़ू शून्य दिखाता है। गुरुत्व मौजूद है, बस आभासी भार शून्य है। इसे भारहीनता कहते हैं।
करके देखो: बगल में फेंको
एक ही ऊँचाई से गेंद को बगल में धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़ फेंको। हर बार वह और दूर गिरती है। न्यूटन ने बहुत ऊँचे पहाड़ पर तोप की कल्पना की: काफ़ी तेज़ फेंको तो गोला पृथ्वी के मोड़ से 'आगे' गिरता है, यानी चक्कर लगाता है। 3D के खुद खेलो में 7.0, 7.9, 9.0, 11.2 और 12 km/s आज़माओ और छोड़ने से पहले अनुमान लगाओ: वापस गिरेगा, गोल घूमेगा, खिंचा दीर्घवृत्त या छूट जाएगा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- v₀ = √(GM/r) = √(gR²/(R + h))
- सतह के पास v₀ = √(gR) ≈ 7.9 km/s
- T = 2π√(r³/GM)
- vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) ≈ 11.2 km/s
- vₑ = √2 v₀
- KE = GMm/2r, U = −GMm/r, E = −GMm/2r
- बंधन ऊर्जा = GMm/2r
हल किए गए उदाहरण
1. पृथ्वी की सतह के ठीक ऊपर कक्षीय चाल? (g = 9.8, R = 6.4 × 10⁶ m)
v₀ = √(gR) = √(6.27 × 10⁷) ≈ 7.9 km/s।
2. पृथ्वी से पलायन वेग निकालो।
vₑ = √(2gR) = √(1.254 × 10⁸) ≈ 11.2 km/s।
3. h = R ऊँचाई पर कक्षीय चाल?
r = 2R, v₀ = √(gR/2) = 7.9/√2 ≈ 5.6 km/s।
4. किसी ग्रह का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों पृथ्वी के दोगुने हैं। पलायन वेग? (पृथ्वी: 11.2 km/s)
vₑ ∝ √(M/R) = 1, तो vₑ = 11.2 km/s।
5. सतह के पास घूमते उपग्रह का परिक्रमण काल?
T = 2π√(R/g) = 2π × 808 ≈ 5077 s ≈ 84.6 मिनट।
6. 500 kg उपग्रह r = 2R पर घूम रहा है। KE, स्थितिज ऊर्जा और कुल ऊर्जा निकालो।
GMm/r = mgR/2 = 1.57 × 10¹⁰ J। KE = 7.84 × 10⁹ J, U = −1.57 × 10¹⁰ J, E = −7.84 × 10⁹ J।
7. उसी 500 kg उपग्रह को r = 2R से r = 4R ले जाने में कितनी ऊर्जा?
E(2R) = −mgR/4, E(4R) = −mgR/8। ΔE = mgR/8 = 3.92 × 10⁹ J।
8. भू-स्थिर कक्षा की त्रिज्या निकालो (T = 86400 s, GM = 4 × 10¹⁴ m³/s²)।
r³ = GMT²/4π² ≈ 7.56 × 10²², r ≈ 4.23 × 10⁷ m ≈ 42,300 km, ऊँचाई ≈ 35,900 km।
आम गलतियाँ
- मानना कि भारी उपग्रह को ज़्यादा कक्षीय या पलायन वेग चाहिए। दोनों उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं।
- मानना कि ऊँचा उपग्रह तेज़ चलता है। वह धीमा चलता है: v₀ = √(GM/r)।
- उपग्रह की कुल ऊर्जा धनात्मक लिखना। E = −GMm/2r, ऋणात्मक, क्योंकि वह बँधा है।
- ऊँचाई पर भी vₑ = √(2gR) लगाना। केंद्र से r दूरी पर पलायन वेग √(2GM/r) है।