China 高一 Physics
अध्याय: 13
1. Compulsory 1 Ch.1 Describing motion
Particle, reference frame, time, displacement · Velocity · Acceleration
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
2. Compulsory 1 Ch.2 Uniformly accelerated motion
v–t and x–t relations · Free fall
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
3. Compulsory 1 Ch.3 Forces
Gravity, elastic force, Hooke's law · Friction · Newton's third law · Composition and resolution of forces · Equilibrium of concurrent forces
- ठोसों के यांत्रिक गुण: प्रतिबल, विकृति और प्रत्यास्थता – किसी ठोस को खींचो, दबाओ या मरोड़ो तो उसका आकार थोड़ा बदलता है। बल हटाने पर वह वापस आ जाए तो वह प्रत्यास्थ (elastic) है। अंदर का प्रत्यानयन बल ÷ क्षेत्रफल = प्रतिबल (stress)। आकार में भिन्नात्मक बदलाव (जैसे ΔL/L) = विकृति (strain)। प्रत्यास्थ सीमा तक प्रतिबल ∝ विकृति — यही हुक का नियम है। इनका अनुपात गुणांक कहलाता है: लंबाई के लिए यंग गुणांक Y, चारों ओर से दबाने पर आयतन गुणांक B, सतह खिसकाने पर दृढ़ता गुणांक G। खिंचा तार पतला भी होता है (पॉयसन अनुपात) और उसमें ऊर्जा = ½ × प्रतिबल × विकृति × आयतन जमा रहती है।
- घर्षण: स्थैतिक, गतिज और लोटनिक घर्षण, नियम और स्नेहन – घर्षण वह बल है जो छूती सतहों के बीच आपेक्षिक गति (या उसकी शुरुआत) का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद बदलता है, पर एक अधिकतम तक: सीमांत घर्षण fs,max = μs N. फिसलना शुरू होते ही गतिज घर्षण fk = μk N लगता है, और μk < μs. घर्षण अभिलंब बल और सतहों की प्रकृति पर निर्भर है, संपर्क क्षेत्रफल पर नहीं। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम है; स्नेहक और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- समतल में गति के लिए अदिश और सदिश (कक्षा 11) – अदिश में सिर्फ परिमाण होता है; सदिश में परिमाण और दिशा दोनों। परिमाण और दिशा समान हों तो सदिश बराबर। किसी संख्या से गुणा करने पर लंबाई बदलती है (ऋणात्मक संख्या दिशा उल्टी कर देती है)। सदिश पूँछ-से-सिर जुड़ते हैं; A − B = A + (−B)। समतल का हर सदिश A = Ax î + Ay ĵ, जहाँ Ax = A cos θ, Ay = A sin θ। A·B = AB cos θ एक अदिश है; A×B का परिमाण AB sin θ और दिशा दोनों के लंबवत।
- संतुलित बल: संगामी बलों का साम्य – संगामी बल वे हैं जो एक ही बिंदु पर लगते हैं। जब बल एक-दूसरे को काट देते हैं, यानी उनका सदिश योग शून्य होता है (ΣFx = 0 और ΣFy = 0), तब बिंदु साम्यावस्था में है। वस्तु या तो स्थिर रहती है या सीधी रेखा में एक समान चाल से चलती रहती है। तीन बल संतुलन में हों तो सिरे से सिरा जोड़ने पर बंद त्रिभुज बनता है।
4. Compulsory 1 Ch.4 Force and motion
Newton's first and second laws · SI mechanical units · Overweight and weightlessness
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- मात्रक और मापन (कक्षा 11) – मापना यानी किसी राशि की तुलना एक तय, सबके माने हुए परिमाण से करना। उस तय परिमाण को मात्रक (unit) कहते हैं। मापा गया मान = संख्या × मात्रक। आज पूरी दुनिया SI पद्धति चलाती है, जिसमें 7 मूल मात्रक हैं: मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, मोल और कैन्डेला। बाकी सब मात्रक (जैसे न्यूटन, जूल) इन्हीं के गुणा-भाग से बने व्युत्पन्न मात्रक हैं। किलो (10³), मिली (10⁻³) जैसे पूर्वलग्न बड़ी-छोटी संख्याओं को आसान बनाते हैं।
- अधिभार और भारहीनता – तराज़ू वह धक्का N दिखाता है जो वह तुम्हें देता है, तुम्हारा असली भार नहीं। ऊपर की ओर त्वरण a वाली लिफ़्ट में N = m(g + a): तुम भारी लगते हो (अधिभार)। नीचे की ओर त्वरण हो तो N = m(g − a): हल्के लगते हो। मुक्त पतन में a = g, तो N = 0 और तुम भारहीन हो। गुरुत्व गया नहीं है; तुम और फ़र्श साथ-साथ गिर रहे हैं।
5. Compulsory 2 Ch.5 Projectile motion
Curvilinear motion; composition of motion · Projectile motion
- वक्रीय गति और गति का संयोजन – जब कुल बल वेग की रेखा में न हो, तब पिंड वक्र पर चलता है। वेग हमेशा रास्ते की स्पर्श-रेखा के अनुदिश होता है। एक गति को दो स्वतंत्र गतियों से बनाया जा सकता है (संयोजन) या दो भागों में तोड़ा जा सकता है (वियोजन)। नदी पार करती नाव की चाल v = √(u² + w²) होती है; पार करने का समय केवल नाव की आड़ी चाल पर निर्भर करता है।
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
6. Compulsory 2 Ch.6 Circular motion
Circular motion; centripetal force and acceleration; centrifugal effects
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
7. Compulsory 2 Ch.7 Gravitation and spaceflight
Planetary motion · Law of gravitation and its achievements · Spaceflight; cosmic velocities · Relativity and limits of Newtonian mechanics
- केप्लर के ग्रहीय गति के नियम – केप्लर ने ग्रहों की चाल के तीन नियम दिए। 1) हर ग्रह दीर्घवृत्त (ellipse) में घूमता है और सूर्य उसके एक फोकस पर होता है। 2) सूर्य से ग्रह तक की रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल घेरती है, इसलिए ग्रह सूर्य के पास तेज़ चलता है। 3) परिक्रमण काल का वर्ग (T²) अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन (a³) के समानुपाती है। दूसरा नियम असल में कोणीय संवेग का संरक्षण है, और तीसरा नियम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से निकलता है।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- पलायन वेग, कक्षीय वेग और परिक्रमा करते उपग्रह की ऊर्जा – किसी चीज़ को बगल की ओर काफ़ी तेज़ फेंको तो वह पृथ्वी की ओर गिरते हुए भी ज़मीन पर नहीं पहुँचती, चक्कर लगाती रहती है: यह कक्षीय वेग है, v₀ = √(GM/r), सतह के ठीक ऊपर लगभग 7.9 km/s। और तेज़, पलायन वेग vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) ≈ 11.2 km/s से फेंको, तो वह हमेशा के लिए पृथ्वी छोड़ देती है। vₑ = √2 × v₀। वृत्तीय कक्षा में उपग्रह की KE = GMm/2r, स्थितिज ऊर्जा = −GMm/r और कुल ऊर्जा E = −GMm/2r। कुल ऊर्जा ऋणात्मक है, यानी उपग्रह बँधा है। ऊँची कक्षा में चाल कम और समय ज़्यादा: T = 2π√(r³/GM)।
- विशेष आपेक्षिकता (Special Relativity) – विशेष आपेक्षिकता (आइंस्टीन, 1905) दो अभिधारणाओं पर टिकी है: सभी जड़त्वीय निर्देश-तंत्रों में भौतिकी के नियम एक-से हैं, और निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3.00 × 10⁸ m/s हर प्रेक्षक के लिए एक-सी है। इससे निकलता है कि चलती घड़ी धीमी चलती है (t = γt₀), चलती वस्तु गति की दिशा में छोटी दिखती है (L = L₀/γ), और द्रव्यमान ऊर्जा का रूप है (E = mc²), जहाँ γ = 1/√(1 − v²/c²)। रोज़ की चाल पर γ ≈ 1, इसलिए न्यूटन की यांत्रिकी काम करती है; c के पास वह असफल होती है।
8. Compulsory 2 Ch.8 Conservation of mechanical energy
Work and power · Gravitational PE · Kinetic energy theorem · Conservation of mechanical energy
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
- स्थितिज ऊर्जा, स्प्रिंग ऊर्जा और संरक्षी बल – स्थितिज ऊर्जा U स्थिति या आकार के कारण जमा ऊर्जा है। पृथ्वी के पास U = mgh; खिंची या दबी स्प्रिंग में U = ½kx²। जिस बल का कार्य सिर्फ़ शुरू और अंत के बिंदु पर निर्भर करे, रास्ते पर नहीं, वह संरक्षी बल है (गुरुत्व, स्प्रिंग बल)। तब F = −dU/dx और K + U नियत रहता है। घर्षण, वायु प्रतिरोध असंरक्षी हैं: ये यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा बना देते हैं।
9. Compulsory 3 Ch.9 Electrostatics
Charge; Coulomb's law · Electric field · Uses and prevention of static
- कूलॉम का नियम: दो आवेशों के बीच बल – आवेशित वस्तुएँ बिना छुए एक-दूसरे को धकेलती या खींचती हैं। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं और विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं। दो छोटे (बिंदु) आवेशों के बीच बल F = k·q₁·q₂ / r² होता है, जहाँ k ≈ 9 × 10⁹ N·m²/C²। एक आवेश दोगुना करें तो बल दोगुना; दूरी दोगुनी करें तो बल एक-चौथाई। आवेश न बनता है, न नष्ट होता है, सिर्फ़ एक जगह से दूसरी जगह जाता है।
- विद्युत क्षेत्र और उसकी तीव्रता – आवेश अपने चारों ओर के स्थान को ऐसा बदल देता है कि वहाँ रखा हर दूसरा आवेश बल महसूस करता है। यही विद्युत क्षेत्र है। किसी बिंदु पर इसकी तीव्रता = छोटे धन परीक्षण आवेश पर बल ÷ वह आवेश: E = F/q, मात्रक N/C (= V/m)। बिंदु आवेश के लिए E = kQ/r², k = 9 × 10⁹ N m²/C²। E सदिश है: + आवेश से दूर और − आवेश की ओर। क्षेत्र रेखाएँ दिशा दिखाती हैं और घनत्व से तीव्रता। कई आवेशों के क्षेत्र सदिश रूप से जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
10. Compulsory 3 Ch.10 Energy in electrostatic fields
Potential energy, potential, potential difference · Capacitance · Charged particles in fields
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
- विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण – क्षेत्र E में आवेश q पर बल F = qE लगता है, इसलिए त्वरण a = qE/m। विभवांतर U से विरामावस्था से छोड़ने पर गतिज ऊर्जा qU मिलती है, यानी v = √(2qU/m)। क्षेत्र के आर-पार भेजने पर रास्ता परवलय होता है, फेंकी गेंद की तरह, और विक्षेपण y = qUL²/(2mdv₀²)। कैथोड-किरण ऑसिलोस्कोप इसी से इलेक्ट्रॉन किरण को पर्दे पर चलाता है।
11. Compulsory 3 Ch.11 Circuits
Current; resistance; resistivity · Series and parallel · Using a multimeter
- प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक और प्रतिरोधकता – तार का प्रतिरोध लंबाई बढ़ने पर बढ़ता है और मोटा होने पर घटता है: R = ρL/A। स्थिरांक ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है, मात्रक Ω m। यह केवल पदार्थ और ताप पर निर्भर है। धातुओं की प्रतिरोधकता कम, मिश्रधातुओं की अधिक और विद्युतरोधियों की बहुत अधिक होती है।
- प्रतिरोधकों का श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन – श्रेणीक्रम में प्रतिरोधक एक ही रास्ता बनाते हैं: हर एक में धारा समान, विभवांतर जुड़ते हैं और R_s = R₁ + R₂ + R₃। पार्श्वक्रम में हर प्रतिरोधक की अपनी शाखा होती है: हर एक पर विभवांतर समान, धाराएँ जुड़ती हैं और 1/R_p = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃, इसलिए R_p सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
- मल्टीमीटर का उपयोग – मल्टीमीटर एक ऐसा मीटर है जो वोल्टेज (V), धारा (A) और प्रतिरोध (Ω) तीनों नाप सकता है। पहले डायल पर मोड चुनो। वोल्टेज पुर्ज़े के आर-पार (समानांतर) नापते हैं, धारा तार के बीच (श्रेणी) में, और प्रतिरोध बिजली बंद करके पुर्ज़ा अलग करके। सबसे बड़ी रेंज से शुरू करो और घटाते जाओ।
12. Compulsory 3 Ch.12 Electric energy
Energy in circuits; Joule heating · Closed-circuit Ohm's law; EMF and internal resistance · Energy and sustainable development
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव – प्रतिरोधक में धारा बहने पर विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदलती है। जूल का नियम: H = I²Rt, यानी ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुक्रमानुपाती है। हीटर, इस्त्री, टोस्टर, बल्ब और फ्यूज़ सब इसी प्रभाव पर काम करते हैं।
- विद्युत वाहक बल, आंतरिक प्रतिरोध, शक्ति और सेलों का संयोजन – सेल आवेशों पर कार्य करता है; प्रति कूलॉम कार्य उसका विद्युत वाहक बल (emf) ε है। सेल के अंदर एक छोटा आंतरिक प्रतिरोध r होता है। धारा I बहने पर टर्मिनल वोल्टता V = ε − Ir और I = ε/(R + r). विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R, ऊर्जा W = Pt. R = r होने पर R को अधिकतम शक्ति मिलती है। श्रेणी में: εeq = ε1 + ε2, req = r1 + r2. समांतर में: εeq = (ε1r2 + ε2r1)/(r1 + r2), 1/req = 1/r1 + 1/r2.
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
13. Compulsory 3 Ch.13 Electromagnetic induction and waves (intro)
Magnetic field; flux · Electromagnetic induction · Electromagnetic waves · Energy quantisation
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम – विद्युतचुंबकीय (EM) तरंगें बदलते विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की अनुप्रस्थ तरंगें हैं। इन्हें माध्यम नहीं चाहिए और निर्वात में सब 3 × 10⁸ m/s से चलती हैं। घटती तरंगदैर्ध्य (बढ़ती आवृत्ति और ऊर्जा) के क्रम में: रेडियो, माइक्रोवेव, अवरक्त, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, एक्स-किरण और गामा किरण। चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्ध्य (c = fλ)। हर प्रकार के उपयोग हैं; ज़्यादा ऊर्जा वाली (पराबैंगनी, एक्स, गामा) आयनकारी हैं और जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- क्वांटम विचार: ऊर्जा पैकेट में आती है – गरम वस्तु चमकती है, और पुरानी भौतिकी उसके रंगों को समझा नहीं पाई। 1900 में मैक्स प्लांक ने अनुमान लगाया कि ऊर्जा का लेन-देन सिर्फ़ छोटे-छोटे पैकेटों में होता है। f आवृत्ति के प्रकाश के एक पैकेट की ऊर्जा E = hf होती है, जहाँ h = 6.63 × 10⁻³⁴ J s। प्रकाश के इस पैकेट को फ़ोटॉन कहते हैं। इसी अनुमान से पहेली सुलझी और क्वांटम भौतिकी शुरू हुई।