प्रत्यास्थता क्या है?
हर ठोस परमाणुओं से बना है, जो आपस में स्प्रिंग जैसे बलों से जुड़े हैं। ठोस को खींचो तो परमाणु थोड़ा दूर हो जाते हैं। ये स्प्रिंग वापस खींचते हैं। इस वापस खींचने वाले बल को प्रत्यानयन बल (restoring force) कहते हैं।
प्रत्यास्थता (elasticity): बल हटाने पर वस्तु का अपने पुराने आकार और आकृति में लौट आना। स्टील और काँच बहुत प्रत्यास्थ हैं। सुघट्यता (plasticity) इसका उल्टा है: गीली मिट्टी दबाने पर वैसी ही रह जाती है। कोई भी असली पदार्थ पूरी तरह प्रत्यास्थ या पूरी तरह सुघट्य नहीं होता।
मज़ेदार बात: स्टील रबर से ज़्यादा प्रत्यास्थ है। स्टील को उतना ही खींचने के लिए बहुत बड़ा बल चाहिए। बड़े गुणांक का यही मतलब है।
प्रतिबल और विकृति
प्रतिबल (stress) = प्रत्यानयन बल ÷ क्षेत्रफल = F/A। इकाई: N/m² = पास्कल (Pa)। तीन प्रकार:
- तनन या संपीडन (अनुदैर्ध्य) प्रतिबल: बल लंबाई की दिशा में, खींचता या दबाता है।
- अपरूपण प्रतिबल (shearing): बल सतह के समांतर, परतें खिसकती हैं।
- द्रवीय प्रतिबल (hydraulic): चारों ओर से बराबर दाब, जैसे गहरे पानी में पड़ा पत्थर।
विकृति (strain) = आकार में बदलाव ÷ मूल आकार। इसकी कोई इकाई नहीं।
- अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL/L
- अपरूपण विकृति = Δx/L = tan θ ≈ θ (बगल का खिसकाव ÷ ऊँचाई)
- आयतन विकृति = ΔV/V
हुक का नियम और प्रतिबल–विकृति वक्र
हुक का नियम: छोटे बदलाव के लिए प्रतिबल ∝ विकृति। यानी प्रतिबल = k × विकृति; k को प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं।
धातु के तार का वक्र (3D का चरण 3):
- O से A (सीधी रेखा): हुक का नियम लागू। A = आनुपातिक सीमा।
- A से B: रेखा सीधी नहीं, पर तार अब भी पूरा लौटता है। B = प्रत्यास्थ सीमा या पराभव बिंदु (yield point)।
- B से D: तार में स्थायी विरूपण (permanent set) आ जाता है; भार हटाओ तो भी नहीं लौटता। D = चरम तनन सामर्थ्य।
- D से E: तार एक जगह पतला होता है और E पर टूट जाता है (विभंजन बिंदु)।
D और E दूर हों तो पदार्थ तन्य (ductile) है — जैसे ताँबा, जिसके तार खींचे जा सकते हैं। पास हों तो भंगुर (brittle) — जैसे काँच।
प्रत्यास्थ बहुलक (elastomers) जैसे रबर और हमारी महाधमनी (aorta) बहुत खिंचते हैं, पर हुक का नियम नहीं मानते।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक
तार या छड़ को खींचने/दबाने के लिए: Y = (F/A) ÷ (ΔL/L) = FL / (A ΔL)। इकाई: Pa।
कुछ मान: स्टील ≈ 2 × 10¹¹ Pa, ताँबा ≈ 1.1 × 10¹¹ Pa, ऐलुमिनियम ≈ 0.7 × 10¹¹ Pa। Y सिर्फ़ पदार्थ पर निर्भर है, तार की लंबाई या मोटाई पर नहीं। लंबा या पतला तार ज़्यादा खिंचेगा, पर Y वही रहेगा।
प्रयोग (सर्ल विधि): दो एक जैसे तार साथ लटकते हैं। एक पर निश्चित भार (संदर्भ), दूसरे पर भार बढ़ाते हैं। स्पिरिट लेवल और माइक्रोमीटर पेंच से छोटा ΔL नापते हैं। भार–खिंचाव ग्राफ़ के ढाल से Y मिलता है।
आयतन गुणांक और दृढ़ता गुणांक
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B: चारों ओर दाब p बढ़ने पर आयतन ΔV घटता है। B = −p ÷ (ΔV/V)। ΔV ऋणात्मक है, इसलिए ऋण चिह्न B को धनात्मक बनाता है। संपीड्यता k = 1/B। ठोसों का B सबसे बड़ा, द्रवों का कम, गैसों का सबसे कम — इसलिए गैस सबसे आसानी से दबती है।
दृढ़ता गुणांक (अपरूपण गुणांक) G: ऊपर की सतह (क्षेत्रफल A) पर स्पर्शरेखीय बल F लगाने से गुटका कोण θ तिरछा होता है। G = (F/A) ÷ θ। ज़्यादातर धातुओं में G लगभग Y/3 होता है। द्रव और गैस का G नहीं होता, क्योंकि वे कोई तय आकृति नहीं रख पाते; उनकी परतें बहती रहती हैं।
पॉयसन अनुपात
रबर बैंड खींचो तो वह पतला होता है। चौड़ाई में बदलाव = पार्श्विक विकृति Δd/d। लंबाई में बदलाव = अनुदैर्ध्य विकृति ΔL/L।
पॉयसन अनुपात σ = पार्श्विक विकृति ÷ अनुदैर्ध्य विकृति (चिह्न छोड़कर)। कोई इकाई नहीं। स्टील के लिए लगभग 0.28–0.30, ऐलुमिनियम के लिए लगभग 0.33। सामान्य पदार्थों में यह 0.5 से ज़्यादा नहीं होता।
खिंचे तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा
तार खींचते समय बल 0 से बढ़कर F होता है। इसलिए औसत बल = F/2। किया गया कार्य = औसत बल × खिंचाव:
U = ½ F ΔL
F = YAΔL/L रखो। तब U = ½ × Y × (ΔL/L)² × AL, और AL = आयतन। इसलिए:
प्रति एकांक आयतन ऊर्जा u = ½ × प्रतिबल × विकृति = ½ × Y × (विकृति)²
यह ऊर्जा खोती नहीं, जमा रहती है। इसी से गुलेल पत्थर फेंकती है।
पदार्थों के प्रत्यास्थ व्यवहार के उपयोग
- क्रेन की रस्सी: बहुत से पतले तार आपस में गूँथे जाते हैं (बनाना आसान, लचीली, मज़बूत)। मोटाई ऐसी रखते हैं कि प्रतिबल पराभव सामर्थ्य से काफ़ी नीचे रहे।
- इमारतों और पुलों के बीम: लंबाई l, चौड़ाई b, गहराई d वाले बीम के बीच में भार W हो तो झुकाव δ = Wl³/(4bd³Y)। गहराई d³ में है, इसलिए बीम को पतली किनारी पर खड़ा लगाते हैं। I आकार का बीम कम धातु में ज़्यादा मज़बूती देता है।
- पहाड़ों की ऊँचाई: नीचे की चट्टान ऊपर के भार से बहनी नहीं चाहिए। इससे धरती पर पहाड़ लगभग 10 km से ऊँचे नहीं हो सकते।
- स्प्रिंग, शॉक एब्ज़ॉर्बर, वाद्ययंत्र के तार और पुल हमेशा प्रत्यास्थ क्षेत्र में काम करें, ऐसे बनाए जाते हैं।
करके देखो: रबर बैंड से हुक का नियम
रबर बैंड को कील पर टाँगो, नीचे थैली बाँधो। एक-एक बराबर सिक्का डालो और पैमाने से लंबाई नापो। खिंचाव बनाम सिक्कों की संख्या लिखो। शुरू में बराबर कदम (हुक का नियम)। बहुत सिक्के डालने पर कदम बदलते हैं, क्योंकि रबर प्रत्यास्थ बहुलक है। 3D के चरण 6 में 10 kg रखो, ΔL पढ़ो; फिर 20 kg के लिए अनुमान लगाओ और स्लाइडर खिसकाकर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिबल = F / A (Pa)
- अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL / L
- यंग गुणांक Y = FL / (A ΔL)
- आयतन गुणांक B = −p / (ΔV/V); संपीड्यता = 1/B
- दृढ़ता गुणांक G = (F/A) / θ
- पॉयसन अनुपात σ = (Δd/d) / (ΔL/L)
- प्रत्यास्थ ऊर्जा U = ½ F ΔL; प्रति आयतन = ½ × प्रतिबल × विकृति
- बीम का झुकाव δ = W l³ / (4 b d³ Y)
हल किए गए उदाहरण
1. 2 × 10⁻⁶ m² काट वाले तार पर 100 N बल लगता है। प्रतिबल ज्ञात करो।
चरण 1: प्रतिबल = F/A। चरण 2: = 100 / (2 × 10⁻⁶)। उत्तर: 5 × 10⁷ Pa।
2. 2 m लंबा तार 1 mm खिंचता है। विकृति ज्ञात करो।
चरण 1: ΔL = 1 mm = 10⁻³ m। चरण 2: विकृति = ΔL/L = 10⁻³/2। उत्तर: 5 × 10⁻⁴ (कोई इकाई नहीं)।
3. स्टील का तार (Y = 2 × 10¹¹ Pa) 2 m लंबा, त्रिज्या 0.5 mm है। इस पर 10 kg भार लटका है। खिंचाव ज्ञात करो। (g = 9.8 m/s²)
चरण 1: F = 10 × 9.8 = 98 N। चरण 2: A = πr² = 3.14 × (5 × 10⁻⁴)² = 7.85 × 10⁻⁷ m²। चरण 3: ΔL = FL/(AY) = 98 × 2 / (7.85 × 10⁻⁷ × 2 × 10¹¹)। चरण 4: = 196 / 1.57 × 10⁵। उत्तर: ΔL ≈ 1.25 × 10⁻³ m = 1.25 mm।
4. एक जैसी लंबाई और मोटाई के ताँबे और स्टील के तार पर एक जैसा भार है। Y(स्टील) = 2 × 10¹¹ Pa, Y(ताँबा) = 1.1 × 10¹¹ Pa। खिंचावों का अनुपात?
चरण 1: ΔL = FL/(AY); F, L, A समान, इसलिए ΔL ∝ 1/Y। चरण 2: ΔL(ताँबा)/ΔL(स्टील) = 2/1.1। उत्तर: लगभग 1.8; ताँबा 1.8 गुना ज़्यादा खिंचता है।
5. समुद्र में 1 km गहराई पर अतिरिक्त दाब 1 × 10⁷ Pa है। पानी का B = 2.2 × 10⁹ Pa। आयतन कितने भाग घटेगा?
चरण 1: ΔV/V = −p/B। चरण 2: = −(1 × 10⁷)/(2.2 × 10⁹)। उत्तर: ≈ −4.5 × 10⁻³, यानी लगभग 0.45% कमी। पानी को दबाना बहुत कठिन है।
6. धातु के गुटके की ऊपरी सतह 0.5 m × 0.5 m है, ऊँचाई 0.5 m। 9 × 10⁴ N स्पर्शरेखीय बल से ऊपरी सतह 0.2 mm खिसकती है। दृढ़ता गुणांक ज्ञात करो।
चरण 1: अपरूपण प्रतिबल = F/A = 9 × 10⁴ / 0.25 = 3.6 × 10⁵ Pa। चरण 2: विकृति θ = Δx/L = 0.2 × 10⁻³ / 0.5 = 4 × 10⁻⁴। चरण 3: G = 3.6 × 10⁵ / 4 × 10⁻⁴। उत्तर: G = 9 × 10⁸ Pa।
7. 1 m लंबा तार, A = 10⁻⁶ m², Y = 2 × 10¹¹ Pa, 1 mm खींचा गया। जमा ऊर्जा और पार्श्विक विकृति (σ = 0.3) ज्ञात करो।
चरण 1: F = YAΔL/L = 2 × 10¹¹ × 10⁻⁶ × 10⁻³ = 200 N। चरण 2: U = ½ F ΔL = ½ × 200 × 10⁻³ = 0.1 J। चरण 3: अनुदैर्ध्य विकृति = 10⁻³। चरण 4: पार्श्विक विकृति = 0.3 × 10⁻³ = 3 × 10⁻⁴। उत्तर: U = 0.1 J, तार 0.03% पतला होता है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि रबर स्टील से ज़्यादा प्रत्यास्थ है। स्टील का Y बहुत बड़ा है, इसलिए वह विरूपण का ज़्यादा विरोध करता है।
- Y = FL/(AΔL) में मान रखने से पहले mm को m और mm² को m² में न बदलना।
- यह सोचना कि तार लंबा या पतला करने से Y बदलता है। सिर्फ़ खिंचाव बदलता है; Y पदार्थ पर निर्भर है।
- U = ½ F ΔL की जगह U = F ΔL लिखना। बल शून्य से बढ़ता है, इसलिए औसत बल F/2 लेते हैं।