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स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. विभव को + आवेश से बनी पहाड़ी समझो। जितना पास, उतनी ऊँची। 1 C को किसी बिंदु तक ऊपर ले जाने का कार्य = वहाँ का विभव V। V = kq/r।
  2. पहाड़ी पर एक ही ऊँचाई पर गोल घूमो: ये समविभव सतहें हैं। इन पर चलने में कोई कार्य नहीं लगता, और क्षेत्र हमेशा इन्हें सीधा काटता हुआ नीचे की ओर होता है।
  3. क्षेत्र में पहले धातु, फिर परावैद्युत रखो। धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन दौड़कर अंदर का क्षेत्र शून्य कर देते हैं। परावैद्युत में बंधे आवेश बस थोड़ा घूमते हैं (ध्रुवण) और क्षेत्र K गुना कमज़ोर करते हैं।
  4. बीच में खाली जगह वाली दो धातु प्लेटें = संधारित्र। प्लेटों पर +Q और −Q। C = ε₀A/d। परावैद्युत पट्टी डालो तो C, K गुना बढ़ जाती है।
  5. तीन संधारित्र पहले श्रेणी में, फिर पार्श्व में जोड़ो। श्रेणी में आवेश एक समान और 1/C जुड़ते हैं। पार्श्व में वोल्टता एक समान और C सीधे जुड़ते हैं।
  6. अब खुद खेलो: क्षेत्रफल, दूरी, K और वोल्टता बदलो। C, आवेश Q और ऊर्जा U = ½CV² बदलते देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्षेत्र सदिश है तो विभव अदिश क्यों?

विभव प्रति आवेश कार्य है और कार्य की कोई दिशा नहीं। 3D की पहाड़ी में हर बिंदु की बस ऊँचाई है, तीर नहीं।

क्या V शून्य और E शून्य नहीं हो सकता?

हाँ। q ऋणात्मक करके देखो, ऊँचाई का चिह्न बदलता है; + और − दोनों हों तो बीच में ऊँचाई 0 पर ढलान (E) तेज़ रहती है।

E समविभव सतह के लंबवत क्यों होता है?

घेरे पर चलते हुए ऊँचाई नहीं बदलती, इसलिए घेरे के साथ कोई धक्का नहीं। सबसे तेज़ ढलान घेरों को सीधा काटती है।

धातु में क्षेत्र शून्य पर परावैद्युत में केवल कम क्यों?

धातु के इलेक्ट्रॉन मुक्त हैं और E₀ पूरा काटने तक चलते हैं। परावैद्युत के आवेश बंधे हैं, थोड़ा ही घूमते हैं। चरण 3 में पदार्थ बदलकर देखो।

C, A और d पर निर्भर है पर V पर क्यों नहीं?

V दोगुना करो तो Q भी दोगुना, Q/V वही। खुले खेल में V बदलो: C नहीं बदलती, केवल Q और U बदलते हैं।

श्रेणी में धारिता सबसे छोटे संधारित्र से भी कम क्यों?

श्रेणी में दूरियाँ जुड़ जाती हैं, मानो एक ही संधारित्र का d बढ़ गया। चरण 5 में श्रेणीक्रम चुनकर C_eq पढ़ो।

विद्युत विभव और विभवांतर

विद्युत बल संरक्षी है: A से B तक आवेश ले जाने का कार्य रास्ते पर निर्भर नहीं करता। इसलिए हर बिंदु को एक 'ऊँचाई' दी जा सकती है — विभव।

किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक धीरे-धीरे (बिना त्वरण) लाने में बाहरी कार्य। V = W/q। मात्रक वोल्ट (1 V = 1 J/C)। यह अदिश है।

विभवांतर V_B − V_A = W_AB/q।

क्षेत्र से संबंध: E = −dV/dr। क्षेत्र ऊँचे विभव से नीचे विभव की ओर, सबसे तेज़ ढलान पर। एकसमान क्षेत्र में V = Ed।

बिंदु आवेश, द्विध्रुव और आवेशों के निकाय का विभव

बिंदु आवेश

इकाई आवेश को ∞ से r तक लाने का कार्य → V = kq/r। +q के पास धनात्मक, −q के पास ऋणात्मक, अनंत पर शून्य।

द्विध्रुव

दूर के बिंदु पर (दूरी r, अक्ष से कोण θ): V = kp cosθ / r²।

आवेशों का निकाय

विभव अदिश है, इसलिए चिह्न सहित सीधा जोड़ो: V = k(q₁/r₁ + q₂/r₂ + …)। न तीर, न कोण।

आवेशित गोलीय कोश

बाहर V = kq/r; अंदर और सतह पर V = kq/R, हर जगह बराबर (क्योंकि अंदर E = 0)।

समविभव पृष्ठ

समविभव पृष्ठ वह सतह है जिसके हर बिंदु पर विभव बराबर हो।

आकृतियाँ: बिंदु आवेश → संकेंद्री गोले; एकसमान क्षेत्र → E के लंबवत समांतर तल; द्विध्रुव → वक्र सतहें, बीच का तल V = 0। संतुलन में चालक की सतह समविभव होती है।

दो आवेशों तथा क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा

दो आवेश

q₂ को ∞ से q₁ से r दूरी तक लाने का कार्य जमा होता है: U = kq₁q₂/r। समान आवेश: U > 0; असमान: U < 0 (बंधा निकाय)। तीन आवेशों में हर जोड़ी की ऊर्जा जोड़ो।

बाहरी क्षेत्र में आवेश

U = qV(r)।

एकसमान क्षेत्र में द्विध्रुव

θ₁ से θ₂ तक घुमाने का कार्य W = pE(cosθ₁ − cosθ₂)। θ = 90° पर U = 0 मानकर: U = −pE cosθ = −p·E।

चालक और कुचालक (विद्युतरोधी)

चालकों (धातुओं) में बहुत से मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं; कुचालक अपने इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़े रहते हैं।

चालकों की स्थिरवैद्युतिकी

  1. चालक के अंदर E = 0।
  2. सतह के ठीक बाहर E सतह के लंबवत।
  3. कुल आवेश केवल बाहरी सतह पर।
  4. पूरा चालक एक ही विभव पर।
  5. सतह पर E = σ/ε₀; नुकीले सिरों पर आवेश घना।
  6. खोखले चालक के अंदर E = 0 — स्थिरवैद्युत परिरक्षण। इसी से कार या धातु का पिंजरा बिजली से बचाता है।

मुक्त और बंधे (बद्ध) आवेश

मुक्त आवेश पूरे पदार्थ में घूम सकते हैं — धातु के बाहरी इलेक्ट्रॉन। ये धारा ले जाते हैं और तब तक खिसकते हैं जब तक अंदर E शून्य न हो जाए।

बंधे आवेश अपने परमाणु/अणु से बँधे रहते हैं। क्षेत्र में ये बस थोड़ा खिसकते या घूमते हैं, बहते नहीं; फिर भी परावैद्युत की सतहों पर आवेश बना देते हैं।

परावैद्युत और ध्रुवण

परावैद्युत वह कुचालक है जो क्षेत्र में ध्रुवित हो जाता है (काँच, अभ्रक, कागज़, पानी)।

ध्रुवण P = प्रति इकाई आयतन द्विध्रुव आघूर्ण। पंक्तिबद्ध द्विध्रुव एक सतह पर − और दूसरी पर + आवेश छोड़ते हैं, जो E₀ के उल्टा क्षेत्र बनाते हैं। इसलिए अंदर E = E₀/K। K (परावैद्युतांक) = ε/ε₀ > 1 (पानी के लिए ≈ 80)।

संधारित्र और धारिता

संधारित्र = कुचालक से अलग किए गए दो चालक। +Q और −Q देने पर विभवांतर V बनता है और Q ∝ V। C = Q/V धारिता है। मात्रक फ़ैरड (1 F = 1 C/V), बहुत बड़ा — असल में µF, nF, pF। C केवल आकार, दूरी और बीच के पदार्थ पर निर्भर है, Q या V पर नहीं।

परावैद्युत सहित और रहित समांतर प्लेट संधारित्र

क्षेत्रफल A, दूरी d की दो प्लेटें। बीच में एकसमान क्षेत्र E = σ/ε₀ = Q/(ε₀A); V = Ed = Qd/(ε₀A)। इसलिए

C₀ = ε₀A/d (निर्वात/हवा)।

पूरा परावैद्युत भरा हो

क्षेत्र E₀/K, उसी Q के लिए V भी K गुना कम: C = Kε₀A/d = KC₀।

t मोटाई की पट्टी (t < d)

C = ε₀A / (d − t + t/K)। धातु की पट्टी (K → ∞) के लिए C = ε₀A/(d − t)।

बैटरी जुड़ी है या नहीं?

संधारित्रों का संयोजन: श्रेणी और पार्श्व क्रम

श्रेणी क्रम

हर संधारित्र पर एक ही आवेश Q। वोल्टता जुड़ती है: V = Q/C₁ + Q/C₂ + …। इसलिए 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃ + …। C_eq सबसे छोटे से भी छोटी। दो के लिए C = C₁C₂/(C₁ + C₂)।

पार्श्व (समांतर) क्रम

हर संधारित्र पर एक ही V। आवेश जुड़ते हैं। इसलिए C = C₁ + C₂ + C₃ + …।

ध्यान दो: यह प्रतिरोधों का उल्टा है।

संधारित्र में संचित ऊर्जा

संधारित्र भरते समय बढ़ती वोल्टता के विरुद्ध आवेश धकेलना पड़ता है। यह कार्य प्लेटों के बीच क्षेत्र में ऊर्जा बनकर जमा होता है:

U = ½CV² = Q²/(2C) = ½QV।

ऊर्जा घनत्व u = ½ε₀E²। पाठ्यक्रम में केवल सूत्र माँगा गया है।

घर पर करके देखो

फ़ोन को रसोई की एल्युमिनियम फ़ॉयल की दो परतों में पूरी तरह लपेटो (कोई छेद नहीं) और उस पर कॉल करो। अक्सर कॉल नहीं लगती: फ़ॉयल चालक कोश है और अंदर को परिरक्षित करती है। खोलो तो कॉल आ जाती है।

3D में d = 2 mm से 4 mm करो: C आधी। फिर K = 5 करो: C पाँच गुना।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. +4 nC आवेश से 9 cm पर विभव?

V = 9 × 10⁹ × 4 × 10⁻⁹ / 0.09 = 400 V।

2. 2 µC आवेश को 10 V वाले बिंदु से 60 V वाले बिंदु तक ले जाने का कार्य?

W = q(V_B − V_A) = 2 × 10⁻⁶ × 50 = 1 × 10⁻⁴ J।

3. 6 cm रेखा के सिरों पर +3 nC और −3 nC। मध्य बिंदु पर V और क्या वहाँ E शून्य है?

V = k(3 × 10⁻⁹)/0.03 − k(3 × 10⁻⁹)/0.03 = 0। पर E शून्य नहीं: दोनों क्षेत्र −3 nC की ओर, इसलिए जुड़ते हैं।

4. 20 cm दूर +2 µC और −4 µC की स्थितिज ऊर्जा?

U = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × (−4 × 10⁻⁶)/0.2 = −0.36 J (ऋणात्मक: आकर्षण, बंधा निकाय)।

5. p = 2 × 10⁻⁸ C m का द्विध्रुव 5 × 10⁴ N/C क्षेत्र के समांतर है। 180° घुमाने का कार्य?

W = 2pE = 2 × 2 × 10⁻⁸ × 5 × 10⁴ = 2 × 10⁻³ J।

6. 0.02 m² प्लेटें, हवा में दूरी 1 mm। C? अभ्रक (K = 6) भरने पर?

C₀ = 8.85 × 10⁻¹² × 0.02 / 10⁻³ = 177 pF। अभ्रक से 6 × 177 = 1062 pF ≈ 1.06 nF।

7. 2 µF, 3 µF, 6 µF श्रेणी में 12 V से जुड़े। C_eq, Q और हर एक पर V?

1/C = 1/2 + 1/3 + 1/6 = 1 → C = 1 µF। Q = 12 µC (सब पर)। V₁ = 6 V, V₂ = 4 V, V₃ = 2 V।

8. वही तीनों पार्श्व में 12 V से। C_eq, आवेश और ऊर्जा?

C = 11 µF। Q₁ = 24, Q₂ = 36, Q₃ = 72 µC। U = ½ × 11 × 10⁻⁶ × 144 = 7.92 × 10⁻⁴ J।

9. 10 µF संधारित्र 100 V तक भरकर बैटरी हटा दी। अब K = 5 की पट्टी पूरी भर दी। नई C, V और ऊर्जा?

Q = 1 mC स्थिर। C = 50 µF, V = 20 V। U पहले 0.05 J, बाद में 0.01 J (K गुना कम)।

10. A क्षेत्रफल, d दूरी वाले संधारित्र में K = 4, मोटाई d/2 की पट्टी। नई C की C₀ से तुलना?

C = ε₀A/(d − d/2 + d/8) = ε₀A/(5d/8) = 1.6 C₀।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. द्विध्रुव की निरक्ष रेखा पर विभव:
2. समविभव पृष्ठ पर आवेश चलाने में कार्य:
3. K = 3 का परावैद्युत भरने पर धारिता:
4. 4 µF के दो संधारित्र श्रेणी में:
5. संधारित्र में संचित ऊर्जा:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विभव और स्थितिज ऊर्जा में क्या अंतर है?

विभव V प्रति इकाई आवेश कार्य है (वोल्ट) और किसी बिंदु का गुण है। स्थितिज ऊर्जा U = qV उस बिंदु पर रखे किसी खास आवेश की ऊर्जा है (जूल)।

परावैद्युत धारिता क्यों बढ़ाता है?

उसके बंधे आवेश ध्रुवित होकर उल्टा क्षेत्र बनाते हैं। उसी आवेश पर क्षेत्र और वोल्टता K गुना घटती है, इसलिए C = Q/V, K गुना बढ़ती है।

CBSE कक्षा 12 में इस अध्याय के कितने अंक हैं?

इकाई I और II मिलकर लगभग 16 अंक। द्विध्रुव का विभव, समांतर प्लेट C, श्रेणी/पार्श्व संयोजन की व्युत्पत्ति और संधारित्र-ऊर्जा के आंकिक प्रश्न आम हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIIElectrostatics
स्पेन2º BachilleratoElectromagnetic field
यूक्रेन10 класElectric field
यूक्रेन10 класElectric field
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12स्थिरवैद्युतिकी
इंग्लैंडYear 133.7 Fields and their consequences
अमेरिकाGrade 12Electric Force, Field, and Potential
अमेरिकाGrade 12Electric Circuits
अमेरिकाGrade 12Electric Potential
अमेरिकाGrade 12Conductors and Capacitors
अमेरिकाGrade 12Electric Circuits
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Electricity and magnetism
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Electromagnetic fields
फ्रांसTerminaleWaves and signals
रूस10 классElectrostatics
रूस10 классElectrodynamics: electrostatics
चीन高一Compulsory 3 Ch.10 Energy in electrostatic fields

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