United Grade 12 AP Physics C: Electricity and Magnetism
अध्याय: 6
1. Electric Charges, Fields, and Gauss's Law
Electric Charge and Electric Force · Conservation of Electric Charge and the Process of Charging · Electric Fields · Electric Fields of Charge Distributions · Electric Flux · Gauss's Law
- वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र – आवेश दो तरह का होता है, संरक्षित रहता है और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C के पूरे पैकेटों में आता है। दो बिंदु आवेश F = kq₁q₂/r² बल से धकेलते या खींचते हैं (k = 9 × 10⁹ N m² C⁻²)। कई आवेशों के बल और क्षेत्र सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)। बिंदु आवेश का क्षेत्र E = kq/r² है। द्विध्रुव (±q, दूरी 2a) का आघूर्ण p = q·2a है; एकसमान क्षेत्र में उस पर कुल बल शून्य पर बल-आघूर्ण τ = pE sinθ होता है। फ्लक्स Φ = E·A, और गाउस नियम: किसी बंद सतह से कुल फ्लक्स = अंदर का आवेश/ε₀। इससे तार (λ/2πε₀r), समतल चादर (σ/2ε₀) और पतले गोलीय कोश (बाहर kq/r², अंदर 0) का क्षेत्र मिलता है।
2. Electric Potential
Electric Potential Energy · Electric Potential · Conservation of Electric Energy
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
3. Conductors and Capacitors
Electrostatics with Conductors · Redistribution of Charge Between Conductors · Capacitors · Dielectrics
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
- स्थिर विद्युतिकी: प्रेरण, ध्रुवण और आवेश का बँटवारा – स्थिर विद्युतिकी रुके हुए आवेशों का अध्ययन है। वस्तुएँ घर्षण (रगड़), चालन (छूकर) या प्रेरण (बिना छुए पास लाकर) से आवेशित होती हैं। चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन चलते हैं: पास का आवेश उन्हें एक तरफ़ धकेलता है (प्रेरण), और भू-संपर्क करने पर चालक पर उल्टा आवेश रह जाता है। कुचालक (परावैद्युत) में इलेक्ट्रॉन घूम नहीं सकते, पर हर अणु खिंचकर छोटा द्विध्रुव बन जाता है (ध्रुवण); इसीलिए आवेशित कंघी कागज़ खींचती है। आवेशित चालकों को तार से जोड़ने पर आवेश तब तक बहता है जब तक विभव बराबर न हो। दूर रखे गोलों के लिए V = kq/r, इसलिए q₁/q₂ = r₁/r₂, और छोटे गोले का पृष्ठ आवेश घनत्व ज़्यादा होता है। कुल आवेश हमेशा संरक्षित रहता है।
4. Electric Circuits
Electric Current · Simple Circuits · Resistance, Resistivity, and Ohm's Law · Electric Power · Compound Direct Current Circuits · Kirchhoff's Loop Rule · Kirchhoff's Junction Rule · Resistor-Capacitor (RC) Circuits
- धातु में धारा: अपवाह वेग और गतिशीलता – धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन बहुत तेज़ी से पर बेतरतीब (random) दिशाओं में भागते हैं, इसलिए औसतन कहीं नहीं जाते। विद्युत क्षेत्र लगाने पर उन्हें क्षेत्र के उल्टी दिशा में एक छोटा, स्थिर खिसकाव मिलता है: अपवाह वेग vd = eEτ/m. धारा I = n e A vd और धारा घनत्व j = n e vd. गतिशीलता μ = vd/E बताती है कि आवेश कितनी आसानी से खिसकता है। अपवाह वेग लगभग 1 mm/s ही है, फिर भी बल्ब तुरंत जलता है क्योंकि क्षेत्र पूरे तार में लगभग तुरंत बन जाता है।
- विद्युत वाहक बल, आंतरिक प्रतिरोध, शक्ति और सेलों का संयोजन – सेल आवेशों पर कार्य करता है; प्रति कूलॉम कार्य उसका विद्युत वाहक बल (emf) ε है। सेल के अंदर एक छोटा आंतरिक प्रतिरोध r होता है। धारा I बहने पर टर्मिनल वोल्टता V = ε − Ir और I = ε/(R + r). विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R, ऊर्जा W = Pt. R = r होने पर R को अधिकतम शक्ति मिलती है। श्रेणी में: εeq = ε1 + ε2, req = r1 + r2. समांतर में: εeq = (ε1r2 + ε2r1)/(r1 + r2), 1/req = 1/r1 + 1/r2.
- ओम का नियम, प्रतिरोधकता और ताप का प्रभाव – अपवाह वेग से V = IR मिलता है, जहाँ R = ml/(ne²τA) = ρl/A. प्रतिरोधकता ρ = m/(ne²τ) सिर्फ़ पदार्थ और ताप पर निर्भर है; चालकता σ = 1/ρ. सदिश रूप: j = σE. धातु के तार और प्रतिरोधक सीधी V–I रेखा देते हैं (ओमीय); बल्ब, डायोड और GaAs जैसे युक्तियाँ मुड़ा या एकदिशीय ग्राफ़ देती हैं (अनओमीय)। धातुओं में ताप बढ़ने पर ρ बढ़ता है: ρT = ρ0[1 + α(T − T0)]; नाइक्रोम जैसी मिश्रधातुओं में बहुत कम बदलता है; अर्धचालकों में ρ घटता है।
- निकाय में ऊर्जा और विद्युत शक्ति – निकाय (system) वे चीज़ें हैं जिन्हें हम अध्ययन के लिए चुनते हैं। निकाय की कुल ऊर्जा तभी बदलती है जब ऊर्जा कार्य, ऊष्मा या विकिरण बनकर उसकी सीमा पार करे: ΔE = W + Q। अंदर ऊर्जा एक भंडार से दूसरे में जाती है, जैसे गतिज, गुरुत्वीय स्थितिज, प्रत्यास्थ, तापीय, रासायनिक और विद्युत। शक्ति ऊर्जा बदलने की दर है, P = E/t, मात्रक वाट। परिपथ में P = IV, और प्रतिरोध के लिए P = I²R = V²/R। असली उपकरण कुछ ऊर्जा ऊष्मा में गँवाते हैं, इसलिए दक्षता η = उपयोगी ÷ कुल हमेशा 100% से कम होती है।
- किरचॉफ के नियम और व्हीटस्टोन सेतु – संधि नियम: किसी भी संधि पर आने वाली धाराओं का योग = जाने वाली धाराओं का योग (ΣI = 0), क्योंकि आवेश संरक्षित है। लूप नियम: किसी भी बंद लूप में विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य (ΣΔV = 0), क्योंकि ऊर्जा संरक्षित है। चिह्न: धारा की दिशा में प्रतिरोधक पार करने पर −IR; सेल को − से + पार करने पर +ε. चार प्रतिरोधकों P, Q, R, S वाला व्हीटस्टोन सेतु तब संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में धारा नहीं) जब P/Q = R/S; इससे अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात होता है, जैसे मीटर सेतु में।
- स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता – किसी बिंदु पर विभव V = इकाई धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य। बिंदु आवेश के लिए V = kq/r; कई आवेशों के विभव सीधे (अदिश) जुड़ते हैं। विभवांतर V_B − V_A = W/q। समविभव सतहों पर V बराबर होता है; E उनके लंबवत और E = −dV/dr। दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा U = kq₁q₂/r, द्विध्रुव की U = −pE cosθ। चालक में मुक्त आवेश (अंदर E = 0), परावैद्युत में बंधे आवेश ध्रुवित होकर क्षेत्र को E₀/K कर देते हैं। संधारित्र Q = CV; समांतर प्लेट C = ε₀A/d, परावैद्युत के साथ KC। श्रेणी: 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …; पार्श्व: C = C₁ + C₂ + …। संचित ऊर्जा U = ½CV² = Q²/2C।
5. Magnetic Fields and Electromagnetism
Magnetic Fields · Magnetism and Moving Charges · Magnetic Fields of Current-Carrying Wires and the Biot-Savart Law · Ampère's Law
- धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र: बायो-सावर्ट नियम और ऐम्पियर नियम – धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है (ऑर्स्टेड, 1820)। बायो-सावर्ट नियम तार के छोटे टुकड़े का क्षेत्र देता है: dB = (μ₀/4π)·I dl sinθ / r²। वृत्ताकार लूप के केंद्र पर B = μ₀NI / 2R और अक्ष पर B = μ₀NIR² / 2(R² + x²)^{3/2}। ऐम्पियर का परिपथीय नियम ∮B·dl = μ₀I लंबे सीधे तार के लिए B = μ₀I / 2πr देता है। लंबी परिनालिका के अंदर क्षेत्र प्रबल और एकसमान है: B = μ₀nI।
- लॉरेंज़ बल, धारा लूप पर बल-आघूर्ण और चल कुंडली गैल्वेनोमीटर – वेग v से चलते आवेश q पर बल F = q(E + v × B) लगता है, यही लॉरेंज़ बल है। चुंबकीय भाग qvB sinθ हमेशा v के लंबवत है, इसलिए पथ वृत्त बन जाता है (r = mv/qB) और चाल नहीं बदलती। तार पर F = IL × B। एक दिशा की समांतर धाराएँ आकर्षित करती हैं: F/L = μ₀I₁I₂/2πd। क्षेत्र में लूप पर बल-आघूर्ण τ = m × B, m = NIA, यानी लूप चुंबकीय द्विध्रुव है। गैल्वेनोमीटर में विक्षेप φ = (NAB/k)I। छोटा शंट ऐमीटर बनाता है, बड़ा श्रेणी प्रतिरोध वोल्टमीटर।
6. Electromagnetic Induction
Magnetic Flux · Electromagnetic Induction · Induced Currents and Magnetic Forces · Inductance · Circuits with Resistors and Inductors (LR Circuits) · Circuits with Capacitors and Inductors (LC Circuits)
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण – जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें emf पैदा होता है: ε = −N dΦ/dt (फैराडे)। ऋण चिह्न लेन्ज़ का नियम है: प्रेरित धारा हमेशा उस बदलाव का विरोध करती है जिससे वह बनी। चुंबकीय क्षेत्र में छड़ चलाने पर गतिक emf ε = Blv मिलता है। बदलती धारा अपनी ही कुंडली में (स्वप्रेरण, L) और पास की कुंडली में (अन्योन्य प्रेरण, M) emf बनाती है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- LR परिपथ: प्रेरक धारा को कैसे धीमा करता है – प्रेरक (inductor) एक कुंडली है जो अपनी धारा में किसी भी बदलाव का विरोध करती है। वह उल्टा विद्युत वाहक बल बनाती है: ε_L = −L dI/dt (L हेनरी में)। बैटरी ε, प्रतिरोध R और प्रेरक L श्रेणी में हों तो धारा अचानक नहीं बदल सकती। स्विच दबाने पर I = (ε/R)(1 − e^(−t/τ)), जहाँ समय नियतांक τ = L/R। t = τ पर धारा अंतिम मान ε/R का लगभग 63% होती है; करीब 5τ बाद स्थिर, तब प्रेरक सादे तार जैसा। बैटरी हटाकर लूप R से बंद करें तो धारा I = I₀ e^(−t/τ) से घटती है, τ पर 37% बचती है। इसे चलाने वाली ऊर्जा प्रेरक के चुंबकीय क्षेत्र में जमा थी: U = ½LI²। किरचॉफ़ का लूप नियम: ε − IR − L dI/dt = 0।
- प्रत्यावर्ती धारा – प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।